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3. Dave Harris Poetry Video Goes Viral

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4. ‘The Heartbreaker Poem’ Video Goes Viral

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5. Copper Canyon Press to Publish the English Edition of a New Pablo Neruda Collection

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6. ‘To Be Black and Woman and Alive’ Poetry Video Goes Viral

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7. ‘Worst Day Ever?’ Poem Goes Viral

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8. Olivia Gatwood Poetry Video Goes Viral

Writer Olivia Gatwood has crafted a poem called “Manic Pixie Dream Girl.” The video embedded above showcases Gatwood reciting her piece at the 2015 Women of the World Poetry Slam.

Thus far, the video has drawn more than 30,000 views on YouTube. Click on these links to listen to two more of Gatwood’s works: “Directives” and “At the Owl.”

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9. Writing Odes this past month

My Poetry Sisters and I have been scribbling down Odes all through the past month. Every month this year we are working on writing different forms of poetry in a group challenge. It's been both fun and frustrating at times! But Odes are pure fun. We agreed to take a light-hearted look at things this month, and some of these are downright funny! Check out my compatriot's Odes at these links:

0 Comments on Writing Odes this past month as of 6/5/2015 4:20:00 AM
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10. Lauren Zuniga Poetry Video Goes Viral

Writer Lauren Zuniga has crafted a poem called \"Things That Happened to Me in High School…\" The video embedded above showcases Zuniga reciting her piece at the 2015 Women of the World Poetry Slam.

Thus far, the video has drawn more than 43,000 views on YouTube. Click on these links to listen to two more of Zuniga’s works: “Personhood” and “Submissive.”

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11. Nature

Nature

 plant and sun  photo

Nature

मन की बात

एक तरफ
तपता सूरज
जलती धरा
मन बेचारा
अकेला पड़ा………बेसहारा
दूसरी ओर
नन्हा पौधा
गर्मी की मार
सह ना सका
और
पनपते ही कुम्हला गया
काश
मिल जाता
किसी का सहारा
या फिर शीतल धरा
और पनप जाता
पर……
वो चुपचाप…….खामोश सा
पड़ा रहा
मन भी ऐसा ही है
खामोश, चुपचाप
एकदम अलग-अलग
काश……..
मन कुछ कर सकता
झुलसते पौधे को देखकर
सहला सकता
तभी अचानक
रूक गए मेरे पानी पीते हाथ
उड़ेल दिया पानी
उस नन्हें पर
तब तक
सूरज की लौ
पड़ चुकी थी मद्धम
ठण्ड़े झोंको से
आने लगी उसमे जान
इधर………..
मुस्कुरा उठा मेरा मन
उधर….
जलती धरा भी
शांत हो गर्इ
अब……..
नन्हें को मिल गया था एक सहारा
शीतल धरा का
एक तरफ……….
प्रकृति खिलखिलार्इ
दूसरी तरफ……….
मन मुस्कुराया

Nature

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12. Crystal Valentine Poetry Video Goes Viral

Writer Crystal Valentine has crafted a poem called “Black Privilege.” The video embedded above showcases Valentine reciting her piece at the 2015 College Unions Poetry Slam Invitational.

Thus far, the video has drawn more than 78,000 views on YouTube. Click on these links to listen to two more of Valentine’s works: “Tempest” and “A Voter’s Problem.”

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13. ‘Lost Voices’ Poetry Video Goes Viral

Darius Simpson and Scout Bostley collaborated on a poem called Lost Voices. The video embedded above features the two collaborators performing at the 2015 College Unions Poetry Slam Invitational.

Thus far, this moving piece has drawn more than 2 million views on YouTube. Click on this link to listen to another poem written by Simpson called “Questions.”

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14. कब छटेंगे बादल

ये मेरी पहली कविता थी.  मन में भाव तो हमेशा ही उमड घुमड कर आते रहते थे पर ये पहली बार थी जब इन विचारों की दिशा मिली …

 

कब छटेंगे बादल

दल में बादल, गहरे बादल, काले बादल
उथले बादल, क्षितिज में विचरते बादल,
पर्वतों के ऊपर छत्र की तरह छाए बादल।

बादल………. दलदल बादल,
आखिर………कब छटेंगे ये बादल
क्या बरसात में ही पैर बढ़ा दूँ मैं……….?
की रूक जाऊँ, ठहर जाऊँ मैं………?
ठहर जाऊँ………..??
जिंदगी वैसे ही है ठहरी,ठहरी
कौंधती बिजली………गर्जते बादल,
हलचल मचा रहे मन में,
अरे! बुलबुले बने, टूटे……..,
देख मन में आस जगी…..
काले घन में भी है बिजली चमकी……..
फिर…….. हे मन, तू क्यों है व्यथित……….
क्यों……… आंखों के आगे काले बादल बैठाए हैं…….
ज़रा अश्रू तो पोंछ, पलक साफ कर…….
देखा………..!! छट गए न बादल………
न बादल, न दल में बादल
पैर बढ़ा, चल मंजिल की ओर……….
ठहरी जिंदगी को दे नया बल……..
दल में बादल…….??
भुज बल में भी तो है आंधी…….
देखा…… छट गए ना बादल……….!!

 

नकारात्मक सोच से शुरु ये कविता आखिरकार सकारात्मकता पर खत्म हुई … आपको कैसी लगी … जरुर बताईएगा :)

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15. हद हो गर्इ

कई बार….  हमारे देश मॆं जिस तरह से भूण हत्याएं हो रही हैं मन विचलित हो जाता है और उसी विचलित मन से बन जाती हैं ऐसी कविता कि हद हो गई … बस बहुत हो गया …

अब बहुत हो गया

बस
अब बहुत हो गया
हद हो गर्इ
टी.वी. हो या समाचार पत्र
कविता प्रतियोगिता हो या राज्यस्तरीय विवाद
पर लगा नहीं पा रहे
भ्रूण हत्या पर लगाम
कह कह कर थक गए हम
पर हम अडि़ग हैं कि
कन्या नही…… कन्या नही
बस चाहिए पुत्र रत्न ही
कोर्इ बात नही

ज्यादा दूर नही है, देख लेंगेें
आज से बीस साल बाद
जब…..
लड़की नही मिलेगी कोर्इ
आपके कुल दीपक से ब्याहने को
आपका वंश चलाने को
ना होगी तब नवरात्रि में कंजको की पूजा
ना होगी पति की लम्बी उम्र के लिए उपवास पूजा
ना छम छम पायल से किसी का घर आँगन चहकेगा
नाना-नानी बनने का शौक अधूरा ही रह जाऐगा
ना रहेगा प्रेम, ना होगी करूणा
क्योंकि यह तो है नारी का गहना
बेबस मन कन्यादान से वंचित रह जाऐगा
हरा भरा घर मकान बन कर ही रह जाऐगा
मनु, इंदिदरा, कल्पना का नाम पन्नों में ही रह जाऐगा
बस……….
कुछ ही सालों की है बात
हैरान, परेशान हताश खुद ही कह उठेंगें आप
कन्या थी अनमोल रत्न
पर तब तक शायद बहुत देर हो चुकी होगी
हमें इन्तज़ार करना होगा
शायद फिर से बीस सालों का
पर तब तक सब कुछ बदल चुका होगा
खामोशी,उदासी, मायूसी का फैल चुका होगा आतंक
तो फिर………..
क्यों हो रही हैं ये भ्रूण हत्याएँ
ठान लो
बस बहुत हो गया
जानते हो
हम भारतवासी……… एक जुट हो क्या है कर सकते
मुसीबत पडने पर दे सकतें हैं जान
चीर सकतें हैं धरती की छाती
उधेड़ सकतें हैं पहाड़ों का सीना
जब ला सकतें हैं हरियाली बंजर धरा पर
फिर क्यों है रोक कलियों के प्रस्फुटन पर
चलिए लें संकल्प
आज, अभी, यहीं
भ्रूण हत्या पर लगाए
कस कर लगाम सभी
मत ड़गमगाने दें भारत का आधार
नर और नारी से ही है हमारा घर संसार
उठो, जागो, चलो
बनाए संसार में भारत की अलग पहचान
ताकि फिर से ना पड़े कहना कि…….
मोनिका, अब बहुत हो गया
हद हो गर्इ

कैसी लगी आपको ये कविता … जरुर बताईगा…

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16. कुछ देर

कुछ देर

 

मैं हँसी
तो फूल मुस्कुरा उठे
मैनें छेड़ा तराना
तो इन्द्रधनुष और खिल उठा……
जिसकी कामना की……..
वही मिलती चलती गर्इ….
मन सुख समुंद्र में
लगा गोते लगाने
चारों और खुशनुमा माहौल
लगा मन में अजब स्फूर्ति भरने
ये धरती……… ये आकाश
ये चाँद …………ये तारे
सभी लगे मस्ती में झूमने
तभी…………….
टूटी तंद्रा मेरी
बीमार काया
टूटा पलंग, सूखी रसोर्इ
यहाँ गरीबी का हो रहा था ताँड़व
अचानक
फीकी हँसी मेरे अधरों पर खिल उठी
चलो………….
कोर्इ नही कल्पना तो है मेरे साथ
जब चाहे उसे नया रूप देकर
खुद को बहला तो सकती हूँ
कुछ देर जी तो सकती हूँ………….
कुछ देर जी तो सकती हूँ……………

कई बार जिंदगी में ऐसे पल आते हैं जब मन एक दम अकेला और मायूस सा हो जाता है… अब ये अपनी ऊपर हैं कि दुखी मन को लेकर दुखी हो जाओ या फिर मनोबल बनाए रखने के लिए मन को खुश रखो … मैने मन को ही खुश रखा क्योकि उसने मेरा ही भला होना था … ज्यादा तनाव रखती तो तबियत खराब हो जाती और डाक्टरों के चक्कर , अस्पताल के चक्कर लगाने कौन से आसान है भई … इसलिए सकारात्मक सोच लिए जिओ और देखना समस्या का हल भी निकल जाएगा बस एक ही कंडीशन है कि आप अपने कार्यों के प्रति ईमानदार रहना होगा …

कैसी लगी मेरी ये कविता ” कुछ देर” … जरुर बताईगा :)

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17. माँ को भी याद आती है

 

 

अक्सर

माँ को भी याद आती है

अपनी माँ की हर बात

उसका वो

नर्म हाथो से रोटी का निवाला खिलाना

होस्टल छोडने जाते हुए वो डबडबाई आखों से निहारना

उसका पल्लू पकड़कर आगे पीछे घूमना

उसके प्यार की आचँ से तपता बुखार उतर जाना

कम अंक लाने पर उसका रुठना पर जल्दी ही मान जाना

अक्सर

माँ को भी याद आती है

अपनी माँ की हर बात

पर माँ तो माँ है

इसलिए बस चंद पल खुद ही सिसक लेती है

और फिर भुला देती है खुद को

पाकर अपने बच्चो को प्यार भरी

छावँ मे,दुलार मे ,मनुहार में

पर अक्सर

माँ को भी याद आती है

अपनी माँ की हर बात

असल मॆं, हम हरदम अपनी मां की बात करते हैं उन्हें याद करते हैं पर हमारी मां को भी अपनी मां की याद आती है … है ना … बस यही सोच कर कविता बन गई … कैसी लगी आपको जरुर बताईगा !!!

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18. Nora Cooper Poetry Video Goes Viral

How do you deal with difficult moments? Writer Nora Cooper has crafted a poem called I Won’t Write Your Obituary.

The video embedded above features Cooper’s performance at the 2015 College Unions Poetry Slam Invitational. Thus far, this emotional piece has drawn more than 63,000 views on YouTube.

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19. poems written in the style of e. e. cummings

For the past month my Poetry Sisters and I have been working on writing poems modeled after poems written by e. e. cummings. He is one of my favorite poets, so when we were throwing around names trying to chose a focus for our work I was delighted when everyone jumped on his. Something about his mix of irreverent, unconventional diction and grammar built on top of an exceptionally sharp wit and

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20. Victoria Morgan Poetry Video Goes Viral

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21. Gabriel Green Poetry Video Goes Viral

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22. The Flight of Sons; a pantoum

This month my Poetry Sisters and I are working on writing Pantoums. Pantoums are an old form of poetry with four line stanzas, where the second and fourth line of each stanza is repeated as the first and third lines of the next stanza. They can be any length, and don't have a set rhyme scheme. The last stanza reapeats the third and first lines of the first as the second and fourth lines. The

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23. ‘Dear Chief Keef’ Poetry Video Goes Viral

Do you enjoy hip hop music? Writer Kai Davis has crafted a message in the form of a poem for one rap artist; the piece is entitled “Dear Chief Keef.”

The Button Poetry YouTube channel posted a video (embedded above) featuring Davis’ performance at the 2015 College Unions Poetry Slam Invitational. Follow this link to listen to another one of Davis’ pieces.

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24. Thank You God

धन्यवाद
हे प्रभु
इतना अपनापन दिया आपने
हमने आपको
आप नही “तू” का दिया सम्बोधन
धन्यवाद हे प्रभु
तुमने जो स्रष्टि रची
फल,फूल, पौधो का दिया
नायाब उपहार
धन्यवाद हे प्रभु
तेरे उस प्रतिबिम्ब के लिए
जो तूने धरा को दिया
“नारी” के रुप मे तूने
अपनी कमी को पूरा कर दिया
धन्यवाद हे नारी !!!
कभी मां कभी बहन
कभी सच्ची दोस्त बन कर
तो कभी विदा होती बेटी बन नम कर जाती नयन
साहसी है पर भावुक क्षणो मे कमजोर भी है
पर तू ताकत है इंसा की
क्योकि
प्रतिबिम्ब है तू उस अनंत अपार का
इसलिए
धन्यवाद,हे प्रभु तेरी इस अमूल्य सरंचना का
अमूल्य उपहार का …!!!

मोनिका

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25. poems for enhancing fiction, and reflections on Seamus Heaney

Color may enhance art - a poem may enhance fiction
In earlier posts we've discussed the enhancement of writing long works of fiction with reference to artistic design principles for a good painting: value contrasts, shape arrangements, a balance in complementary spectrum of hues, and the planned arrangement of soft and hard edges, to name an important few, translatable topics for art or fiction.

In this post we'll contemplate potential multi-art enhancements for writing fiction, using brief poems and the works and writing philosophy of the Irish poet and Nobel laureate, Seamus Heaney, for a guide.  Heaney, who died in 2013, and whom we've admired for his books of poems in North, and in Station Island, and his translation of Beowulf from old English, was the subject of a recent reminiscence by Thomas Sleigh.  The article was titled A Man of Care--Seamus Heaney's Primal Reach into the Physical (The Writer's Chronicle, May-Summer, 2015).  Sleigh is a widely published author of books, has won many literary awards, and works as a journalist in Syria, Lebanon, Somalia, Kenya, Iraq, and Libya.  In other words, the hot spots of the world today.

Heaney is no stranger to hot spots of the world, himself.  His early books of poems, North, and Field Work, include the poet's agonized, interior response to the Troubles, that armed conflict between Republican and Unionist militias in Northern Ireland.  In Heaney's words:
Pure poetry is perfectly justifiable in earshot of the car bomb, and it can imply a politics, depending on the nature of the poetry.  A poetry of dramatic wit, of riddles and flips and self-mocking ironies, may appear culpably miniaturist or fastidious to the activist with his microphone at the street corner, and yet such poetry may be exercising in its inaudible way a fierce disdain of the activist's message or a distressed sympathy with it.
Thankfully, there has now been a long ceasefire in the Troubles, but the quoted passage may give some idea as to the temperament of Heaney.  We might now move on to a focus theme, regarding the short poem that could be incorporated into a longer work of fiction to good effect.  One of the more basic concepts of Heaney's approach to constructing poems, gleaned from reading some of his works and from the discussions given by Sleigh, is the attention Heaney gives to acute, subjective observations of earth's surfaces, human activities thereon, the meanings they ascribe to what they are doing, the uninterpreted words they use in telling it.

Heaney accomplishes this from his habitual practice of observation, "an activity which is averse to overwhelming phenomena by the exercise of subjectivity, content to remain an assisting presence rather than an overbearing pressure."  As he said of Pound's work, which he admired, "Pound's strictures--"the natural object is always the adequate symbol," "Go in fear of abstractions," don't use phrases like "dim lands of peace" because it mixes "an abstraction with the concrete" and "dulls the image."

For instance, Sleigh has Heaney say, about the imaginative powers conferred by sitting in the basalt throne of "the wishing chair" at the Giant's Causeway (a long line of upraised basaltic columns stretching out into the Irish Sea, toward Scotland), not only should the rock make "solid sense" against the small of your back, it should also freshen "your outlook/beyond the range you thought you'd settled for."  I'd visited the Giant's Causeway during a two-month bicycle tour of that Northern Ireland region.  I didn't occupy the wishing chair, but I can feel the physical sensation of the poetic image, occupying not only the now of time, but the vast, geological age of time, and without any need of interpretation by the poet.  It's perhaps something concrete to strive for.

Following is a working draft of a poem that I was considering using in my introduction to a YA novel, to be titled "The Young Molly Maguires," set in the coalfield labor violence of the late nineteenth century in Pennsylvania.  It has allusions and similes, but I'm thinking it has concrete, non-abstract points of reference most readers' imaginations will readily grasp.

A Lament


God lifted noble man from earth 
crowned him lord of all creation
until a stunning fall from grace
banished him to a life of toil and sweat

Impoverished men reentered earth
pillaging black coal so they might live
The miners toiled mightily to earn their bread
How so, earth’s new owners demanded more

Till the miners raised up a young prophet, Union, 
to lead a way from slavery,
but Union could not strike water from a rock,
and the miners withered in despair 

An ancient Joshua rose up to besiege the owners,
when the Molly Maguires entered the fray 
and smote the owners’ captains from ramparts and wall,
until undone by perfidy of state and church

Who struggle for justice, sing a lament for the Mollies,
though brutal men rode horseback from both  camps
it is forever the victor who writes history,
and cartloads of Mollies swung in the air 

J. O'Rourke

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