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1. A picture of violence and degradation

It is absolutely essential to take a critical view of source material when it comes to violent images and war photographs. Photos taken by perpetrators are always an expression of a relationship that is characterized by an imbalance of power between photographers and their subjects.

The post A picture of violence and degradation appeared first on OUPblog.

0 Comments on A picture of violence and degradation as of 5/30/2015 5:19:00 AM
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2. Touch Therapy

Touch Therapy  बहुत काम की चीज है कई बार टच करते ही दर्द उडन छू हो जाता है यह बात तो आपने भी महसूस की होगी जब मम्मी हमारे सिर पर हाथ रखती है तो दर्द किस तरह उडन छू हो जाता है और सारी थकावट भाग जाती है.  बच्चों को जब  देर रात तक तनाव के चलते नींद नही आती तो मम्मी पापा प्यार से हाथ रखते हैं सिर सहलाते है और नींद आ जाती है यही होता है Touch Therapy  का जादू …

The Cuddle Sutra & the Benefits of Touch Therapy.

“Do you find yourself depressed at times? Do you ever feel lonely and wish that you could just talk to someone that would genuinely listen? Do you find yourself suffering from stress, anxiety, or sleep loss? If you answered yes to any of these questions, then you are not alone. Many people lack the companionship they want in their everyday life. Read more…

कुल मिला  यही कह सकते हैं कि The sense of touch is an important part of being a healthy, happy human being. But when someone is ill, touch can make the world of a difference. This hepls us in many ways like … Relieving tension and helping with relaxation, Helping to manage stress, Alleviating aloneness and creating a sense of connectedness, helping to relieve pain or to alter the perception of pain.
 

People believe touch therapy help to speed the healing process or strengthen the immune system in some patients.

और इस बात मे कोई शक नही कि Touch Therapy मे वाकई जादू है …

The post Touch Therapy appeared first on Monica Gupta.

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3. Hoi — cute little dragon designer toy

A revision of an old 2D game character of mine, called Hoi.

The new Hoi is available as a 3D-printed designer toy.

More about the old Hoi game.

More creations: MetinSeven.com.

0 Comments on Hoi — cute little dragon designer toy as of 5/30/2015 6:56:00 AM
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4. The End of Year Poem: Crafting that “last message”

So, we are all winding down the school year these days. The end of year projects, festivities, packing up, and cleaning out plans are in full swing in my classroom at the moment...and my thoughts are beginning to turn to that last rite of the school year: the goodbye message...

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5. A Hotel in Venice Cover by Margot Justes



 I thought I'd share with you the cover for A Hotel in Venice, scheduled for release end of June, 2015.

A romantic gondola ride on the Grand Canal, a shimmer reflected in the moonlit night, and the beginning of murder and mayhem for Minola Grey and Peter Riley.





Cheers,
Margot  Justes

Blood Art
A Fire Within
A Hotel in Paris
A Hotel in Bath
Blood Art
Hot Crimes Cool Chicks
www.mjustes.com

0 Comments on A Hotel in Venice Cover by Margot Justes as of 5/30/2015 7:31:00 AM
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6. More inky beginnings! #studio #bookart #Sketch #drawing #ink...


0 Comments on More inky beginnings! #studio #bookart #Sketch #drawing #ink... as of 5/29/2015 11:17:00 PM
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7. गर्भावस्था के दौरान

मेरी पडोसन शीना गर्भवती थी. पडोस मे रहने की वजह से मेरी जिम्मेदारी बढ गई थी कि उसका ख्याल रखूं वैसे भी वो नव विवाहिता है शादी के बाद तीसरे महीने मे ही वो गर्भवती हो गई.  आज जब मैं उसके घर गई तो वो टीवी पर कोई हारर मूवी  देख रही थी. अरे !! … ये मत देखो बच्चे पर बुरा असर पड सकता है. उसने तुरंत टीवी बंद कर दिया. वाकई में, गर्भावस्था के दौरान  बहुत ध्यान देने की जरुरत होती है. बेशक टीवी चैनल ढेर सारे हैं और हमारा मंनोरंजन भी करते हैं पर इस बात का भी बहुत ध्यान रखना चाहिए कि क्या देखें और क्या नही. मुझे याद है गीता(मेरी सहेली)  ने अपने समय बहुत धार्मिक किताबें पढी थी और रोज सुबह पूजा करती थी आज उसका बेटा 10 साल का है और वो हमेशा अच्छी किताबे पढने में ही लगा रहता है. एक अन्य सहेली सविता को चाय अच्छी नही लगती थी उसने चाय पीना बिल्कुल छोड दिया और आज देखो उसका बेटा 20 साल का हो गया नौकरी भी करने लगा पर आज तक उसने चाय का स्वाद नही लिया  जबकि मेरी सहेली ने बेटे को जन्म देते ही चाय पी और उसे बहुत स्वादिष्ट लगी. अच्छा साहित्य, साफ मन( चुगली चपाटी  नही) , स्वच्छ हवा से मन प्रसन्न रहता है और बच्चे पर इसका बहुत अच्छा असर पडता है

dont forget nine rules in pregnancy

दुनिया के सभी धर्म ग्रंथों ने रिश्तों में मां का दर्जा सबसे ऊंचा माना है। संतान की पहली गुरु मां होती है। वही उसे पालती है। उसकी गोद में बच्चा जो भाषा सीखता है उसे मातृभाषा कहा जाता है। हमारी सनातन संस्कृति में गौरीशंकर, सीताराम, राधेश्याम जैसे नाम रखने की परंपरा भी यह साबित करती है कि मां का स्थान दुनिया के और दस्तूरों से बड़ा और सबसे पहले है। ऋषियों, दार्शनिकों ने ग्रंथों में ऐसी कई बातों का उल्लेख किया है जिनका ध्यान गर्भवती महिला को रखना चाहिए, क्योंकि उसका उल्लंघन न सिर्फ बच्चे के लिए, बल्कि उसके लिए भी हानिकारक हो सकता है।

जानिए  ऐसी ही कुछ बातें- 1- गर्भावस्था में मल-मूत्र, अपानवायु, छींक, प्यास, भूख, नींद, खांसी, जम्हाई जैसे आवेगों को रोकना नहीं चाहिए। साधारण अवस्था में भी इन्हें रोकने से हानि होती है, इसलिए गर्भावस्था में इन्हें कभी नहीं रोकना चाहिए।2-  क्रोध न करें, अप्रिय बातें न सुनें, न करें। वाद-विवाद में न पड़ें। भयानक दृश्य, टीवी-सिनेमा के ऐसे कार्यक्रम जो डरावने हों, न देखें। तीव्र व तीखी ध्वनि उत्पन्न करने वाले स्थानों से दूर रहें।3- रात्रि को देर तक न जागें। सुबह देर तक न सोएं। दोपहर को थोड़ा विश्राम करें लेकिन बहुत गहरी नींद न लें।4- सख्त, पथरीले, टेढे़ स्थानों पर न बैठें। पर्वत, ऊंचे घर, लंबी सीढ़ियां, रेत के टीले पर न चढ़ें।5- बहुत चुस्त और गहरे रंग के वस्त्र न पहनें। इस दौरान अधिक आभूषण पहनना भी हानिकारक होता है।6- हमेशा करवट लेकर ही सोएं। करवट को समय-समय पर बदलें। घुटने मोड़कर, सीधे या उल्टे सोने से नुकसान हो सकता है।7- दुर्गंध वाले स्थानों, खट्टे खाद्य पदार्थ वाले वृक्षों, अत्यधिक धूप और पानी के सरोवर से दूर रहें।8- अनुभवी वैद्य या चिकित्सक की सलाह के बिना कोई औषधि न लें। जोर-जोर से सांस न लें। सांस को रोकने की कोशिश न करें।9- अपने इष्ट देव का ध्यान करें लेकिन लंबे उपवास न करें। अत्यधिक वात कारक, मिर्च-मसालेदार, बासी पदार्थ तथा मादक पदार्थों का सेवन कभी नहीं करना चाहिए  Read more…

इसी के साथ साथ …

स्ट्रेच मार्क्स पर ध्यान न दें जैसे-जैसे पेट का आकार बढ़ता है, उस पर स्ट्रेच लाइंस आती ही हैं। इस बात को स्वीकार करें और इन लाइंस पर अधिक ध्यान न दें। संपूर्ण आहार और विटामिन ई युक्त मॉइस्चराइजिंग लोशन या तेल लगाकर आप इन्हें कम कर सकती हैं। प्रतिदिन स्नान के बाद इस लोशन को लगाएं, क्योंकि इस समय त्वचा तेजी से नमी सोख सकती है।

त्वचा का खास ख्याल रखें
नौ महीनों के दौरान त्वचा और बालों का विशेष ख्याल रखें। एक चम्मच दही और बादाम तेल की कुछ बूंदों को मिलाएं। इसमें थोड़ा गुलाब जल डालें। इसे त्वचा पर मलें और कुछ देर सूखने के बाद धो दें। इससे त्वचा कोमल होती है। इसके अलावा 4 चम्मच क्रीम, 1-1 चम्मच बादाम तेल, खीरे का रस, शहद, गुलाब जल और नीबू का रस मिला लें। इसे छोटे से डिब्बे में रखकर फ्रिज में रख दें। इसे हर रात लगाएं और सुबह धो दें। इससे त्वचा में चमक बढ़ेगी।

सन्स्क्रीन का प्रयोग:
गर्भावस्था के दौरान त्वचा का काला पड़ना एक आम समस्या है। आपके चेहरे की रंगत फीकी पड़ सकती है, साथ ही पेट के आसपास के हिस्से में भी कालापन बढ़ने लगता है। यह मुख्य रूप से शरीर में मेलानिन पिग्मेंट के बढ़ने के कारण होता है। इस पर नियंत्रण रखने के लिए आप सन्स्क्रीन लोशन और स्क्रब लगा सकती हैं …

खूब पानी पीना,  हरी सब्जी खाना और व्यायाम के साथ साथ तनाव नही रखना पूरा ध्यान इस बात पर रहना चाहिए कि आपका बच्चा तंदुरुस्त हो और हां सबसे जरुरी बार तो बताना ही भूल गई स्माईल रहनी चाहिए आपके चेहरे पर ताकि बच्चा भी हमेशा मुस्कुराता रहे …  बाकि समय समय पर अपनी डाक्टर से जानकारी लेते रहिए और … और … और अपना ख्याल रखिएगा होने वाली मम्मी :)

 

Thumbnail via

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8. Getting Around San Francisco

Only a few weeks remain before the ALA conference draws thousands of librarians to San Francisco. San Francisco boasts a thriving literary scene, many exciting things to eat and do, and of course numerous ALSC events at ALA for learning, growing, and connecting.   But how will you get to and fro? Silicon Valley having yet to offer us a viable jetpack–they could call it Google Blast! Engineers, are you listening?!–check out the currently available options.

Transit tips from locals

  • Hold on to your ticket/transfer! Fare inspectors on MUNI may ask for proof of payment at any time, so don’t just drop it in the bottom of your conference tote bag.
  • Keep your eyes up and your phone and other valuables out of sight. Criminals love distracted riders.
  • The Google Maps, Routesy Free, and 511 transit apps can be very helpful in trip planning.
  • Due to the Pride Parade on Sunday, 6/28/15, all transit and traffic near Market Street will be rerouted. Expect major crowds and delays throughout the regional transit systems. If you are on foot and wish to cross Market Street during the parade, try crossing under instead: find a BART/MUNI station entrance, descend on one side of the street and come up on the other.

Getting around San Francisco

MUNI

MUNI is San Francisco’s citywide system of buses, trolleys, and light rail. MUNI fare ($2.25) allows unlimited transfers between any regular MUNI vehicles for 90 minutes. While San Francisco’s signature cable cars are technically part of MUNI, they charge a higher fare and often have long lines. If you have the time, however, it will be $6 well spent: the cable cars have loads of charm and some lines offer spectacular views. Check out the SFMTA website for details on MUNI fares, routes, and schedules.

Taxicabs and ride services

Your best bet for hailing a cab is on a major street downtown or at a hotel’s taxi line. Otherwise, you can contact one of the taxi companies listed on SFMTA’s website here.   Besides licensed taxis, there are also private ride services such as Lyft and Uber where you will need to download the company’s app and create an account.   Remember that sharing a cab or ride service with a colleague is often safer, greener, and more affordable than going alone.

Bicycling

Didn’t bring your bike with you to SF? No problem: several companies offer bikes (plus helmets and locks) for avid cyclists. Try Blazing Saddles, Sports Basement, SF Bicycle Rentals, Bike and View or City Ride. A visitor favorite is to bike across the Golden Gate Bridge and then take the scenic ferry back.   For short trips within the city, Bay Area Bike Share has numerous stations downtown and near the conference center.

East Bay, North Bay, and South Bay transit

BART

BART is a commuter rail system that runs from Millbrae and the SF airport through downtown San Francisco and under the San Francisco Bay to outlying cities in the East Bay. A great option for traveling to either the SF or Oakland airports and for visiting East Bay destinations.

Caltrain

Caltrain, our other commuter rail, runs through San Mateo and Santa Clara counties in the south to San Francisco in the north. If you’d like to visit San Jose, Palo Alto, or other towns on the peninsula, Caltrain makes it easy.

AC Transit

While primarily offering bus routes throughout Alameda County (Oakland, Berkeley, Hayward, etc.), AC Transit also runs Transbay buses that connect San Francisco and the East Bay. This is your public transit choice if you have missed the last BART train across the Bay, since Transbay buses run all night.

Golden Gate Transit

Golden Gate Transit operates mostly north of San Francisco proper (Santa Rosa, Sausalito, San Rafael, etc.) and also runs bus lines across the Golden Gate Bridge. Visitors often enjoy taking the bus to one end of the bridge and walking back across it.

Ferries

Ferries are a beautiful (if windy) way to travel from San Francisco to Oakland, Alameda, and Vallejo to the east (SF Bay Ferry) and Larkspur or Sausalito to the north (Golden Gate Ferry). There are also tourist ferries to destinations like Alcatraz as well as Angel Island and Tiburon.   Ferries offer unrivaled views of the bay; bundle up and give them a try!

Just for fun

And because we are children’s librarians, I can’t resist sharing two charming SF-connected children’s books about transit: Maybelle the Cable Car, written and illustrated by Virginia Lee Burton and Last Stop on Market Street, by Matt de la Peña with Christian Robinson illustrations. Happy reading and riding!

LastStopOnMarketStMaybelletheCableCar-1

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Today’s blog post was written by Sarah Stone, a librarian in the Collection Development Office at the San Francisco Public Library, for the ALSC Local Arrangements Committee.

The post Getting Around San Francisco appeared first on ALSC Blog.

0 Comments on Getting Around San Francisco as of 5/30/2015 1:37:00 AM
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9. हमारी धरोहर

हमारी धरोहर जोकि खंडहर होती जा रही हैं. आजकल ऐतिहासिक  धारावाहिको का बहुत बोलबाला है . अच्छा भी है इसी बहाने ही सही हमें अपने इतिहास की जानकारी मिलती है कि उस समय उनका रहन सहन, खान पान, आभूषण आदि पहनावा कैसा था और सबसे ज्यादा आकर्षित करती है उस जमाने की इमारते … बडे बडे ऊंचे महल जोकि आज खंडहर हो चुके  हैं . वैसे कम से कम हम उन खंडहरों को तो देख पा रहे हैं यही हालात रहे तो पर आगे आनी वाली पीढी तो ये भी नही देख पाएगी. अफसोस ये सिर्फ धारावाहिको तक में  ही सिमट कर रह जाएगा. कुछ समय पहले  दिल्ली में हुमायूं के मकबरे को देखने का मौका मिला. उसकी ना सिर्फ मरम्मत की गई है बल्कि मूल भवन निर्माण सामग्री और तकनीकों का इस्तेमाल कर उसके सौंदर्य की पुनर्प्रतिष्ठा भी कर दी गई पर दिल्ली और देश के बाकी धरोहरों का क्या?

 

विश्व धरोहर स्थल

मानवता के लिए अत्यंत महत्व की जगह, जो आगे आने वाली पीढि़यों के लिए बचाकर रखी जानी होती हैं, उन्हें विश्व धरोहर स्थल (बाहरी वेबसाइट जो एक नई विंडों में खुलती हैं) के रूप में जाना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों के संरक्षण की पहल यूनेस्को द्वारा की गई। इस आशय की एक अंतर्राष्ट्रीय संधि जो कि विश्व सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर संरक्षण की बात करती है के 1972 में लागू की गई।

विश्व धरोहर समिति इस संधि के तहत् निम्न तीन श्रेणियों में आने वाली संपत्तियों को शामिल करती है –

प्राकृतिक धरोहर स्थल – ऐसी धरोहर भौतिक या भौगोलिक प्राकृतिक निर्माण का परिणाम या भौतिक और भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत सुंदर या वैज्ञानिक महत्व की जगह या भौतिक और भौगोलिक महत्व वाली यह जगह किसी विलुप्ति के कगार पर खड़े जीव या वनस्पति का प्राकृतिक आवास हो सकती है।
सांस्कृतिक धरोहर स्थल – इस श्रेणी की धरोहर में स्मारक, स्थापत्य की इमारतें, मूर्तिकारी, चित्रकारी, स्थापत्य की झलक वाले, शिलालेख, गुफा आवास और वैश्विक महत्व वाले स्थान; इमारतों का समूह, अकेली इमारतें या आपस में संबद्ध इमारतों का समूह; स्थापत्य में किया मानव का काम या प्रकृति और मानव के संयुक्त प्रयास का प्रतिफल, जो कि ऐतिहासिक, सौंदर्य, जातीय, मानवविज्ञान या वैश्विक दृष्टि से महत्व की हो, शामिल की जाती हैं।
मिश्रित धरोहर स्थल – इस श्रेणी के अंतर्गत् वह धरोहर स्थल आते हैं जो कि प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों ही रूपों में महत्वपूर्ण होती हैं।

भारत को विश्व धरोहर सूची में 14 नवंबर 1977 में स्थान मिला। तब से अब तक पांच भारतीय स्थलों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा फूलों की घाटी को नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के एक भाग रूप में इस सूची में शामिल कर लिया गया है।

भारतीय विश्व धरोहर स्थल –

काजीरंगा राष्ट्रीय पार्क (1985)
केवलादेव राष्ट्रीय पार्क (1985)
मानस वन्यजीव सेंक्चुरी (1985)
नंदा देवी (1988) तथा फूलों की घाटी (2005), नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के विस्तार के रूप में
सुदरबन राष्ट्रीय पार्क (1987)

http://www.dw.de/धरोहर-संभालना-कब-सीखेगा-भारत/a-17181439बदहाल इमारते

पर क्या हमने इससे कोई सबक लिया? बिलकुल नहीं. आजादी के समय हमारे देश में ऐतिहासिक महत्व की जितनी इमारतें थीं, आज उनकी तादाद काफी हद तक घट चुकी है. अनेक इमारतों पर लोगों ने अवैध कब्जे कर लिए, तोड़ कर नई इमारतें खड़ी कर लीं और उनके इर्द-गिर्द इतना निर्माण कर लिया कि उन ऐतिहासिक इमारतों की पहचान ही खत्म हो गई. दूर क्यों जाएं, राजधानी दिल्ली की ही बात करें. ऐतिहासिक निजामुद्दीन बस्ती की जिस इमारत में सुल्तान मुहम्मद बिन-तुगलक के शासनकाल में महान यायावर इब्नबतूता आकर रहे थे, उसे भी तोड़ दिया गया है और उसकी जगह नया भवन बना लिया गया है. पुलिस और नगर निगम ऐसी घटनाओं के मूक दर्शक बने रहते हैं. अव्वल तो पुरातात्विक सर्वेक्षण स्वयं इस प्रकार की घटनाओं के प्रति उदासीनता बरतता है, और जब कभी वह हरकत में आता भी है तो अतिक्रमण हटाने के काम में उसकी मदद करने के लिए आवश्यक पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन का समय पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता. See more…

कोई दो राय नही है कि खासियतें खींचती हैं दुनिया को हमारी और आने के लिए …

देश में  खान पान हो, रहन सहन या फिर तीज त्यौहार और रस्म अदावतें, सब धरोहर की तरह पीढ़ी दर पीढ़ी सदियों से समाज की ओर से आगे बढ़ रही है. लखनऊ की नफासत, बनारस की अदावत या दिल्ली की शान ओ शौकत से लबरेज तहजीब, सब का अंदाज ए बयां कुछ और ही है. ये इतिहास का अकाट्य सत्य है कि अपनी सभ्यता संस्कृति से बेइंतहा मोहब्बत करने वाले भारतीय लोगों में अतीत की विरासत से रूबरू कराती धरोहरों के लिए खास  लगाव होने के वाबजूद सरकार के ध्यान न दिए जाने पर   विरासत से जुड़ी धरोहरें खंडहर में तब्दील होती जा रही है. उए सबसे बडा दुर्भाग्य माना जा सकता है .

 

बोलते खंडहरों से संवाद

http://dainiktribuneonline.com/2015/03/बोलते-खंडहरों-से-संवाद/हालाकि बोलते पत्थरों की जुबान को आपकी अपनी भाषा, आपकी लय-ताल के साथ पेश करने का जिम्मा देश की कुछ प्रमुख संगठनों ने संभाला है और आपके लिए विरासत की सैर के बहाने इतिहास से दो-चार होने के कुछ बेहद खास पलों को संजोया है। 1857 के गदर के तार दिल्ली से कैसे जुड़े थे? जामा मस्जिद में नमाज़ अता कर निकले मुगल सम्राट औरंगज़ेेब के हिंदू फरियादी और काशी विश्वनाथ मंदिर का क्या रिश्ता है? क्या सचमुच आज से सौ साल पहले तक शाहजहांनाबाद शहर की हदबंदी से बाहर निकलने का मतलब होता था कि आप शिकार पर जा रहे हैं? इन रोचक सवालों के उतने ही रोचक जवाब आपको इतिहास की पोथियों में भले ही घंटों बिताने पर पता चलें लेकिन धरोहरों से संवाद कायम करने वाली हेरिटेज वॉक में आपको ऐसी ही ढेरों जानकारी चुटकियों में मिल जाती हैं। आपके अपने शहर के सीने में ऐसे कितने ही किस्से-कहानियां और राज़ छिपे हैं। दिल्ली उन गिने-चुने आधुनिक शहरों में से है, जिसके पिछवाड़े आज भी इतिहास की दस्तक साफ सुनी जा सकती है। यहां के खंडहरों, भग्नावशेषों और किलों से लेकर चांदनी चौक की गलियों-कूचों तक में पुराने दिनों की महक अब भी पसरी हुई है। जरूरत है तो बस थोड़ा वक्त निकालकर इतिहास की उन धड़कनों को सुनने की जो इस दौर के भागते-दौड़ते इनसान से गुफ्तगू करने के लिए हरदम तैयार हैं। इस क्रम में सबसे पहले बात करें इंटैक (इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज) की जो कई सालों से हमारी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को हेरिटेज वॉक जैसे आयोजनों के माध्यम से रोचक अंदाज़ में परोसती आयी है। इंटैक ने राजधानी के खुशनुमा मौसम के मद्देनजऱ फिर कुछ गलियों-कूचों, दयारों और महलों-किलों की बरसों पुरानी परतों में समाए इतिहास को उलट-पुलट करने का कार्यक्रम बना लिया है। इस कड़ी में संस्था हर वीकेंड पर दिल्लीवासियों को अपनी धरोहर की सैर पर ले जाती है। पिछले दिनों शाहजहांनाबाद के बाजारों से लेकर दक्षिण दिल्ली में महरौली के पुरातत्व पार्क और पुरानी दिल्ली में तुर्कमान गेट से बड शाह बुला तक की सैर करायी गई। जाने-माने इतिहासकार अपनी रोचक शैली में राजधानीवासियों को अपने शहर के बीते दौर को जानने-समझने का मौका देते हैं। इंटैक का यह सिलसिला अभी जारी रहेगा और लोधी गार्डन में खड़े दिल्ली सल्तनत युग की याद ताज़ा कराते हुए ऐतिहासिक खण्डहरों से होते हुए पुराने किले के भग्नावशेषों से रूबरू कराएगा। हेरिटेज वॉक प्राय: सवेरे 8 से 11 बजे के बीच शनिवार और रविवार को आयोजित की जाती है ताकि स्कूल-कॉलेजों के छात्रों के अलावा वे नौकरीपेशा भी इनमें शामिल हो सकें जिन्हें खण्डहरों से आती इतिहास की आवाज़ें सुनने का शौक है।  जरूरी नहीं कि इतिहास की आवाज़ सुनने के लिए आप इतिहास के छात्र हों, अगर इस शहर में खड़े फिरोज़शाह कोटला में आपकी दिलचस्पी क्रिकेट से आगे जाती है तो यकीनन इस 14वीं सदी के किले की बची-खुची दीवारें आज भी आपकी बोट जोह रही हैं। दिल्ली सरकार के संगठन दिल्ली हेरिटेज मैनेजमेंट सेक्रेटेरियेट ने भी इस शहर के इतिहास पर पड़ी वक्त की गर्द को झाड़ने-पोंछने का जिम्मा लिया है और हेरिटेज वॉक के बहाने बीते वक्त की सैर करा रहे हैं। विरासत की सैर का जिम्मा संभालने वाले इतिहासकार (वॉक लीडर) जैसे कथा-कहानियों के अद‍्भुत शिल्पी भी होते हैं। हमारे ही शहर के उन पक्षों को वो रोचक शैली में प्रस्तुत करते हैं जिनसे हम अकसर अनजान होते हैं या फिर जिनके बारे में बहुत थोड़ा जानते हैं। सप्ताहांत की शुरुआत का इससे बेहतर तरीका भला और क्या होगा कि आप अपने आपको जानने से दिन की शुरुआत करें। यकीन मानिए, हम भले ही खुद को जानने-समझने और पहचानने का कितना भी दावा क्यों न करते आए हों, लेकिन जब ऐतिहासिक धरोहरों से रूबरू होते हैं तो लगता है जैसे इतिहास इनमें परत-दर-परत दफन है और हम अपने ही आसपास खड़ी इन इमारतों से बेपरवाह रहते आए हैं। हेरिटेज वॉक कराने वाले इतिहासकार कभी दिल्ली के दरवाज़ों से गुजरते हुए उन हालातों का विश्लेषण करते हैं जिनके चलते दिल्ली शहर बहुत पहले से ही हमलावरों के निशाने पर रहा है और कई-कई बार उजड़कर बार-बार बसता आया है। कभी अजमेरी गेट का इतिहास टटोलते हैं तो फिर तुर्कमान गेट की खैर-खबर लेते हैं और कभी लाहौरी गेट या कश्मीर जाने वाले व्यापारियों के कारवां से किसी ज़माने में गुलज़ार रहने वाले कश्मीरी गेट का हाल-ए-दिल सुना-सुनाया जाता है। इसी तरह, हुमायूं के मकबरे की खोज-खबर लेने तो कभी कुतुब मीनार और उसके आसपास खड़े इतिहास के सिपहसालारों का भी हालचाल जानने हेरिटेज वॉक टोली पहुंचती है। दिल्ली सरकार के लिए हेरिटेज वॉक कराती आयीं जानी-मानी शख्सियत नवीना जाफा कहती हैं कि शुरुआत में इस तरह की वॉक अभिजात्य समझी जाती थीं। यहां तक कि एक समय था जब सिर्फ विदेशी सैलानी ही इनमें शिरकत करते थे जबकि शहरवासियों को लगता था कि इस तरह की सैर से उनका क्या वास्ता! यही वजह थी कि इनमें आम जनता की भागीदारी काफी सीमित रहा करती थी वहीं अब राजधानी का मध्य वर्ग इनसे जुड़ रहा है और वीकेन्ड हेरिटेज वॉक में शामिल लोगों की बढ़ती संख्या इस बात का पुख्ता सबूत है कि दिल्लीवासियों को अपने अतीत से बहुत प्यार है। दिल्ली कैरावान ऐसा ही हरिटेज वॉक ग्रुप है जो तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। कभी दिल्ली-6 की गलियों-कूचों में तो कभी पहाड़गंज की गलियों की खान-पान संस्कृति से रूबरू कराने के साथ-साथ यह शहर की ऐतिहासिक परंपराओं की झलक भी बखूबी पेश करता है। देसी-विदेशी सैलानी और दिल्लीवासी तेजी से उनसे जुड़ रहे हैं। धरोहरों को टटोलने के लिए फेसबुक के जरिए निमंत्रण, प्रचार और फेसबुक फैन्स का नेटवर्क काफी उपयोगी साबित हो रहा है।

इतिहास और ऐतिहासिक धरोहरों की वो समझ दी है कि आज अगर मेरे स्कूली टीचर मुझसे मिलें तो ‘स्टम्प’ हो जाएंगे। इतिहास की जानकारी न रखने वाले सामान्य लोगों को भी इस तरह की विरासत की सैर करने पर महसूस होता है कि पत्थर सचमुच बोलते हैं। खण्डहर खुद-ब-खुद अपनी दीवारों में कैद किस्से-कहानियां कहने लगते हैं और गुजरे जमाने के राजाओं-रानियों की प्रेम कहानियों से लेकर खूनी इतिहास की परतें खुलने लगती हैं। विरासत की सैर और कला के अन्य कार्यक्रमों की जानकारी देने वाली कई वेबसाइटें और फेसबुक पेज भी आजकल लोकप्रिय हो रहे हैं। तो अब आप सुबह-सवेरे उठने और अपना ट्रैक सूट पहनकर इतिहास को जानने के लिए निकलने को तैयार हो जाइये। See more…

कुछ भी हो हमें इन इमारतों को सहेजना ही होगा ताकि हम आने वाली पीढी के सामने गर्व से सिर उठा कर कह सके ये है मेरा भारत …

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10. Literary culture in ... Malaysia

       In The Malaysian Insider Ooi Kok Hin finds the local Lack of appreciation towards Malaysian literature a worrying phenomenon.
       Sadly, he reports:

Usually I'm reluctant to generalis [sic] my experience but in this case, I'm pretty sure that my ignorance of our national literature is shared by most of my peers, and perhaps Malaysians in general.

We read short stories and trimmed version of major literary works in our school. But we never really instilled a love for literature, let alone our own literature.
       And, amazingly:
For example, Tan Twan Eng's first novel was shortlisted for the Man Booker Prize and has been translated into Italian, Spanish, Greek, Romanian, Czech, Serbian and French.

One wonders why there isn't a Malay translation in spite of the fact that the story is set in Penang.
       One wonders indeed ..... Read the rest of this post

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11. Illustration Challenge #3

I'm having fun with these - how about you? This week, draw something that is purely pretty - a bunch of flowers or swirly designs. It doesn't even have to have any identifiable thing in it - just pure pretty.

0 Comments on Illustration Challenge #3 as of 5/30/2015 9:29:00 AM
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12. Monster






0 Comments on Monster as of 5/29/2015 10:53:00 PM
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13. Harris Wittels: another victim of narcotics and America’s drug policy

Harris Wittels, stand-up comedian, author, writer, and producer for Parks and Recreation -- and generally a person who could make us laugh in these seemingly grim times -- died of a drug overdose at the age of thirty. He joins the list of people who brought pleasure to our lives but died prematurely in this manner [...]

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14. The Wicked + The Divine is being adapted into a television series

wicked

Deadline announced today that Universal Television has optioned the rights to Image’s Eisner-nominated The Wicked + The Divine. The comic, by Kieron Gillen, Jamie McKelvie, and Matt Wilson, will be adapted via Matt Fraction and Kelly Sue DeConnick’s production company, Milkfed Criminal Masterminds.  This is the same deal that will bring about the TV adaptation of Sex Criminals – the two-year deal with Universal included adapting not only their own material into television shows, but also allows Fraction and DeConnick to spotlight other creators’ IP.

McKelvie took to Twitter with the announcement:

And then Chip Zdarsky, Illustrator for Sex Criminals, took it to another level:

The Wicked + The Divine focuses on members of the Pantheon, people with superhuman powers, a result of merging with the reincarnated spirit of a mythological deity. The first issue was released in June of 2014.

1 Comments on The Wicked + The Divine is being adapted into a television series, last added: 5/30/2015
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15. How well do you know Australia? [quiz]

Happy Australian Library and Information Week! We’re wrapping up Library and Information Week here in Australia. This year’s theme is “Imagine.” Help us celebrate all of the fantastic libraries and librarians doing great things over on that side of the world. Oxford University Press has put together a quiz about all things Australia and New Zealand. Once you’ve made it through the quiz, reward yourself with a dollop of Vegemite or catch a Russell Crowe flick to get your fix of the good old outback.

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16. फेसबुक टैग

 

hang

टैग  कुछ देर पहले फेसबुक चैक किया खुशी का  ठिकाना नही रहा जब देखा कि 30 मोटिफिकेशन आई हुई थी. जल्दबाजी में फेसबुक खोलना चाहा पर शायद नेट वर्क स्लो था. सोच रही थी कि ना जाने किस पोस्ट पर क्या क्या कमेंट आए होंगे… खैर कुछ देर बाद नेट चला और फेसबुक खोला तो मेरी पोस्ट पर कोई कमेंट नही था अलबत्ता जिस महाशय ने  50 लोगो के साथ मुझे भी टैग किया हुआ था  उन्ही में बात चीत चल रही थी. हे भगवान !!!

बेशक, फेसबुक दिन-दिन हमारी दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है।हम  लोग हमेशा अपने दोस्तों तथा नाते-रिश्तेदारों के सम्पर्क में रहना चाहते हैं। इसके लिए वे हमेशा कुछ न कुछ शेयर करते रहते हैं। कई खास मौकों  पर लोग फोटो भी शेयर करते हैं और  फोटो शेयर करते वक्त कई लोग दोस्तों को  फोटो के साथ टैग कर देते हैं। अरे भई हमे क्यो बकरा बनाते हो … हमे बक्शो…

यहाँ तक तो ठीक है, लेकिन कई बार लोग ऐसी फोटो अपलोड करके हमें टैग कर देते हैं जो हमें बिल्कुल पसंद नहीं होते। कई बार तो एक ही साथ पचास पचास लोगों को टैग कर देये हैं अब उन्हें अनटैग करें तो मुसीबत न करे तो उनकी सारी पोस्ट झेलनी पडती है …  उन्हे बहुत बार समझाया भी जाता है पर उनके कानों पर से जूं तक नही  रेंगती … ऐसे मे कई बार मन करता है कि टैग करने वालो को तो फांसी ही दे देनी चाहिए…

 

  SATISH CHANDRA SATYARTHI

द टैगकर्ता- ये फेसबुक पर पायी जाने वाली सबसे खतरनाक किस्म की प्रजाति है. ये फेसबुक पर पोस्ट-वोस्ट नहीं लिखते. बस हर दिन सौ-पचास फोटो अपलोड करते हैं- फूल, नदी, जानवर, सेलेब्रिटी, देवी-देवता, उपदेश इत्यादि की. गूगल इमेज सर्च को ये दुनिया के लिए वरदान मानते हैं. ये बड़े भोले किस्म के जीव होते हैं.  ये हर फोटो में सौ-पचास लोगों को टैग करते हैं. इनको लगता है कि जो महान और ख़ूबसूरत फोटो इन्होने अपलोड की है उसे सबको दिखाना इनका कर्तव्य है. अब लोग लापरवाह हैं, कहीं भूल जाएँ देखना; तो इसलिए ये उनको टैग कर देते हैं. कभी-कभी तो ये अपनी पासपोर्ट साइज़ फोटो में सौ-दो सौ लोगों को टैग कर देते हैं. See more…

 टैग के मामले में ,कुल मिलाकर यही समझ आता है कि उन्हें तो समझ आना मुश्किल ही नही नामुमकिन है इसलिए जनता की अदालत उन्हे सजाए  मौत का हुक्म देती है …

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17. Emotional Wounds Entry: Victimization via Identity Theft

When you’re writing a character, it’s important to know why she is the way she is. Knowing her backstory is important to achieving this end, and one of the most impactful pieces of a character’s backstory is her emotional wound. This negative experience from the past is so intense that a character will go to great lengths to avoid experiencing that kind of pain and negative emotion again. As a result, certain behaviors, beliefs, and character traits will emerge.

Characters, like real people, are unique, and will respond to wounding events differently. The vast array of possible emotional wounds combined with each character’s personality gives you many options in terms of how your character will turn out. With the right amount of exploration, you should be able to come up with a character whose past appropriately affects her present, resulting in a realistic character that will ring true with readers. Understanding what wounds a protagonist bears will also help you plot out her arc, creating a compelling journey of change that will satisfy readers.

VICTIMIZATION VIA IDENTITY THEFT

ANONYMOUS

Examples:

  • having to fight a charge on one’s record because a criminal identified himself as the character using false documents upon arrest
  • having one’s passport stolen or duplicated and used to bring a criminal or immigrant into the country illegally
  • having one’s bank account or investments drained by someone with false documents posing as the character
  • accruing credit card or other debts as a result of another using illegally obtained personal identity documents and numbers
  • being harassed by creditors, police or criminals because another person has assumed one’s identity
  • cyber theft of one’s online social accounts or doppelganger accounts created in one’s name to engage in cyber bullying or to ruin one’s reputation
  • having another obtain medical care using the character’s identity, racking up medical bills and affecting one’s ability to obtain insurance
  • having a friend or family member pose as oneself and then do something that leaves a lasting stain one one’s reputation
  • having one’s fingerprints or DNA obtained without consent and then used to implicate one in a crime
  • having one’s image stolen, photo-shopped into pictures and videos, and then shared online in a revenge attack to ruin one’s reputation
  • having one’s personal information (phone number, home address, email and social media links) paired with a fake account on unsavory sex, violence or predator sites to invite harassment as a means of targeted bullying or revenge
  • having another hack one’s email or other personal communication to send out harmful emails, criminal threats or to pass on damaging/illegal information with the intent of activity being traced to them as a scapegoat

Basic Needs Often Compromised By This Wound: physiological needs, safety and security, esteem and recognition

False Beliefs That May Be Embraced As a Result of This Wound:

  • I can’t trust anyone but myself
  • I was targeted because I am weak
  • Trying to make a better life is useless because someone will just take it away from me
  • Control is an illusion; what I have can be taken from me at any time
  • People don’t respect me because I am not worthy of it

Positive Attributes That May Result: aware, cautious, conservative, discreet, scrupulous, structured, watchful

Negative Traits That May Result: biased, cagey, close-mouthed, controlling, cynical, deceptive, guarded, hostile, insecure, obsessive, paranoid, unsociable, secretive

Resulting Fears:

  • fear of being used or exploited
  • fear of losing everything one has built
  • fear of financial ruin
  • fear of making a mistake and misplacing one’s trust in the wrong person

Possible Habits That May Emerge:

  • avoiding technology and information-gathering processes
  • stashing money in hiding places rather than risking it to the bank
  • obsessively changing one’s passwords, bank accounts and switching credit cards
  • refusing to share personal information
  • shutting down social media accounts
  • over-reacting when friends or co-workers ask too many personal questions
  • mistrust and paranoia, leading one to question the motivations of others
  • always paying in cash
  • avoiding close relationships (if the identity theft was personal & hate-motivated)

TIP: If you need help understanding the impact of these factors, please read our introductory post on the Emotional Wound Thesaurus.

 

Image: Pixabay: Niekervlaan

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18. The Book Bar welcomes you





Raising the bar on reading!






Welcome to The Book Bar today everyone.  Please order up your favourite drink and get ready to head into the lounge where our new guest is looking forward to meeting us.   He graciously consented to doing a guest article to share and of course give us an introduction to his newest book.  I want to introduce you to.... B. D. Bruns.  Here's a little background on him before we get started:





Adventurer B. D. Bruns has traveled to over 50 countries to gather material for his bestselling books. He’s won 19 national and international book awards, including three national Book of the Year awards. Bruns’ first fiction book, The Gothic Shift (2014) won the International Book Awards Best Short Story Collection. He also contributes to Yahoo Travel, BBC, CNN, The Daily Beast, and The Travel Channel.

Bruns’ travel adventures span from entering the Pyramids of Giza and swimming in the Panama Canal to climbing Mt. Kilimanjaro and touring Torture Museums in Estonia. He has attended ceremonies from the descendants of cannibals in the South Pacific and has been consulted by a ghost tour in Malta. After residing in Dracula’s hometown for several years, Bruns moved to Las Vegas with his Romanian wife, where they live with two cats, Julius and Caesar.
 


In his own words....



Vampire Glitter and Zombie Stickers

Once I loved vampires and zombies, but no more. Like kids at the end of Halloween night, weve eaten too much of the good stuff. Weve been so saturated with these trite baddies that content providers are desperate to find a new spin on them. True, new spins are not new. Anne Rice brought rock-n-roll to vampires decades ago. But cant we all agree that vampires are about more than teen angst? Im all for a whole new generation of teens falling in love with vampires and werewolves, but surely Dracula would rather meet Van Helsing than Edward. And zombies? In multiple recent adaptations zombies run faster than Usain Bolt. 

We’ve lost sight of what made our most iconic nasties nasty in the first place. Real fear is the discomfort of encountering something that defies our understanding of the world. 

Vampires and zombies are now so mainstream that little old ladies display car stickers of their undead grandchildren. We must not let our baddies become so accessible. Monsters are supposed to be worse than teen angst. Sure, it’s awful and stuff, but it’s just not good enough. Revving up classic horror icons with video game frenetics isnt good enough, either. It wont stand the test of time. It may entertain but it will not keep you up at night. We must return to the source!

"The oldest and strongest emotion of mankind is fear, and the oldest and strongest kind of fear is fear of the unknown.” - H.P. Lovecraft

Of course, the unknown is precisely what publishers and Hollywood say they want, but clearly don’t. The unknown is risky, and business is business. So they want familiar baddies with a proven track record of financial success. So, is originality doomed? Not at all! One can revisit a classic without destroying what made it, well, classic. May I suggest a good mash up? Keep the best of things and find new, exciting ways to combine them together. Look at American Horror Story. They give us all the stuff we want to see with a fresh spin, like their third season, Coven: witches and voodoo queens in a turf war in New Orleans. They are devilishly clever at incorporating disparate themes and, in the process, creating a fundamentally unique story. But their witches are still witches and voodoo is still voodoo. 

Im no thriller purist: its all for entertainment, after all. I fully supported Michael Jackson’s use of zombies in Thriller. Just dont dilute the monsters to the point where little old ladies think they’re cute. Monsters have dignity, too. 




My newest book...







A fishing village nestled in Italian cliffs, peopled by simple folk with religion and superstition. A b
An edge of your seat thriller set on the exotic Amalfi coast. An exorcism was the first thought but last desire of Giuseppe. His contentment working with his sister at their ancient paper mill in 1860s Italy is shattered when he witnesses Old Man Grapaldi sum- moning the Devil. Omens from the sea threaten the village and bizarre, violent happenings at their mill threaten his family. With their church rocked by inner turmoil and so many good men succumbing to dark secrets, Giuseppe himself must overcome his fears and his physical handicap to save his beloved sister.


My take...

The book just keeps you turning pages.  The characters are so believable and the suspense amazing.  The time period and the setting just add to the terror of the plot.  I am not usually a fan of this genre but I really enjoyed the book from beginning to end.  The author has a gift of painting vivid word images in your head...and in your heart.  I highly recommend this book.

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19. More inky beginnings! #studio #bookart #Sketch #drawing #ink...



More inky beginnings! #studio #bookart #Sketch #drawing #ink #illustration #poetry #bordercollie #dog (at 17th Avenue Studios)


Original post by Brian Bowes via Emergent Ideas: http://ift.tt/1G9HRYz

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20. Getting to know Scott Morales, Stock Planning & Publications Coordinator

From time to time, we try to give you a glimpse into our offices around the globe. This week, we are excited to bring you an interview with Scott Morales, a US Stock Planning & Publications Coordinator in New York. Scott has been working at the Oxford University Press since July 2008.

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21. Literary culture in ... Indonesia

       At Qantara.de Monika Griebeler reports that Indonesia -- this year's 'Guest of Honour' at the Frankfurt Book Fair -- is ... A land without readers.
       So, for example:

"Literature as it's known in the West isn't taught at schools. Children do learn when Jane Austen lived, but they don't usually read any of her books," says publisher John McGlynn, whose Lontar Foundation translates Indonesian works into English.
       I'm not really sure what to say about someone like Goenawan Mohamad, chairman of the national committee for Indonesia is guest of honour at the Frankfurt Book Fair (!), spouting stuff like:
We Indonesians are more sociable and love a good dose of noise. Aside from that, of course, we don't have long winters for sitting inside to read War and Peace for example.
       Okay .....
       No, not okay.

       Also:
Most of what comes onto the Indonesian market is straightforward bestsellers translated out of English. That's what earns the publishers money, says John McGlynn. "The books with the largest print runs -- if we can call them that -- are popular novels and those with a religious leaning: a woman finds first God and then a husband," he says with a critical note. "More and more books are being published, but many of them are terribly written."
       Stil, I see some promise in that 'more and more' .....
       (Meanwhile, it's good to see guest of honour-status helping spotlight what there is coming out of Indonesia (beyond even Pramoedya Ananta Toer !) -- New Directions and Verso are each bringing out an Eka Kurniawan novel this fall, for example, and longtime readers have repeatedly heard me extol Lontar's 'Modern Library of Indonesia' (and for all the Southeast Asian literature under review at the complete review, see this index).)

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22. All About Them Books




This darling video by a librarian in Worthington says it all!

And may I just add, how am I supposed to get any work done when THIS showed up in yesterday's mail:






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23. Harts Pass No. 251

Between finishing my next recent book and coaching at the State Track meet, I'm a little late in posting this week's comic. Lucky for me, it's guest cartoonist week here at Harts Pass :) After a recent Methow Arts residency at the local elementary school, I've put a few kids on the payroll for both this week and next. Kinda like Family Circus... except these kids are the real deal! Much thanks to Isaac Carlsen for this week's excellent unicorn strip.

0 Comments on Harts Pass No. 251 as of 5/30/2015 2:20:00 AM
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24. From Yellow Blob to Barnyard

Barnyard Light, gouache, 5 x 8 inches.
Yesterday afternoon, I painted this scene of the barnyard. I wanted to give it a strange supernatural lighting, as if a shaft of weird golden illumination arrived out of nowhere at dusk.


I started with an underpainting in casein that I did a few days ago, just an abstract shape that intrigued me.


After a basic drawing in watercolor pencils, I added thin layers of gouache with a flat brush. The casein underpainting is a closed surface, meaning it won't dissolve again once it's dry.


The barnyard was actually lit rather evenly. To carry off the selective light effect, I darkened and cooled the tones in all the surrounding areas, and kept the lit areas pale and warm.
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Good news on the upcoming tutorial video "Gouache in the Wild." I locked the edit earlier this week, and am now designing the cover. One of the six painting adventures is an example like this, where I show how to create a theatrical light effect on location. 

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25. Read Russia Prize

       One more translation prize to close out the week: they announced that Oliver Ready's translation of Before and During, by Vladimir Sharov, has won this year's Read Russia Prize (and what a relief it is that a contemporary work and new translation and not one of those Tolstoy or Dostoevsky re-translations won -- not that they aren't estimable, too ...).
       This will be Best Translated Book Award-eligible for next year's prize, and it'll be interesting to see if it makes the cut.
       I do have a copy, and should be getting to it; meanhwile, see the Dedalus publicity page or get your copy at Amazon.com or Amazon.co.uk.

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