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26. Youth and depression

Youth and depression सुनकर आपके मन में भी बहुत बातें आ रही होगीं. क्या होता जा रहा है आज के युवा को !! सोच कर ही धबराहट होने लगती है. सोनम शर्मा का बेटा पढाई में बहुत अच्छा है. हाल ही में उसका 12वी क्लास का नतीजा आया और उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया. नतीजा मेरे हिसाब से बहुत अच्छा था 89.6 % अंक आए थे पर इस शर्म के मारे की लोग क्या कहेंगें. इतने कम अंक लाया है. आगे अच्छे कालिज मे दाखिला कैसे होगा इसी चिंता में खुद को कमरे मे बंद कर लिया और मोबाईल भी स्वीच आफ कर दिया. अगले दिन जब तक उसने दरवाजा नही खोल दिया.  सोनम की जान अटकी रही उसे  डर   सिर्फ इसलिए कि उनका बेटा कुछ गलत कदम न उठा ले.

इसके बहुत कारण हो सकते हैं  जिसमे से एक है माता पिता की  बच्चों से बह्त ज्यादा उम्मीदें  वो सोचते हैं कि बच्चे पर बहुत पैसा खर्च किया है अच्छी से अच्छी कोचिंग दिलवाई है इसलिए अच्छे अंक तो आने ही चाहिए. बच्चा उस उम्मीद को पूरा नही कर पाता और निराशा में चला जाता है. एक बात यह भी हो सकती है कि   एकल परिवार का होना और माँ-बाप, दोनों का कामकाजी होना. यही बात बच्चों को एकांकी और चिड़चिड़ा बना देती  है  आखिर विचार-दर्शन उन्हें कौन करायेगा, माता पिता अपने आफिस कार्य मे व्यस्त हैं और युवावर्ग चौराहे पर खड़ा है. वे जायें तो किधर जायें । अपनी जीवन-गति का निर्माण करें, तो किस प्रकार करें  कौन बतायेगा कौन सही राह दिखाएगा.

एक बात यह भी हो सकती है कि पेरेंटस हद से ज्यादा जरुरत से ज्यादा बच्चे का ख्याल रखते हैं पर इसी के साथ साथ बच्चे की इच्छा जाने बिना वो बच्चे पर अपनी इच्छा लादने या थोपनें की कोशिश करते हैं जिससे बच्चा अपना शत प्रतिशत नही दे पाता और जिंदगी मे ईम्तेहान में लगातार फेल होता जाता है.

फिर बात आती है हमारे समाज की. परीक्षा के दौरान नकल, रिश्वत खोरी, पेपर लीक आदि का होना भी युवा मे depression ,आक्रोश भर  देता है और ईमानदारी से मेहनत करने वाला युवा सिस्टम को देख कर अपना हौंसला छोड देता है.

इन सब के साथ साथ संगत बहुत ज्यादा असर डालती है. बिगडे हुए रईसों के साथ दोस्ती करके और नशे में डूब कर अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं.  खुद को स्मार्ट और मार्डन दिखाने के चक्कर में नशा करना वो जिंदगी का अभिन्न अंग मानने लगते  हैं  और इसके साथ साथ सबसे बडा फेक्टर है धैर्य की कमी और यही आज के युवाओं की सबसे बड़ी कमजोरी है.  धैर्य की कमी के कारण आज का युवा सब चीज बस जल्द से जल्द पाना चाहता है.  आगे बढ़ने के लिए वे कड़ी मेहनत करने की बजाय शॉर्टकट्स यानि आसान रास्ता  ढूंढने में लगे रहते हैं. कम समय में सारी आधुनिक चीजों को पाने के लालच में उनमें समझदारी की कमी नजर आती है। भोगविलास के आद‍ी  युवा में लगन, मेहनत, जोश, उमंग और धैर्य की कमी हो गई  है.

Youth  depression में होता है तो पूरा परिवार  मानों  depression मे चला जाता है. बहुत जरुरी है आज के युवा के साथ समझदारी से बात करना. उसकी मन की भावनाओं को समझते हुए उसके हिसाब से बात करना.

 

Youth depression a concern for counselors

Substantial levels of “loneliness, anxiety and depression” among Cayman’s youth, identified in a series of health surveys came as no surprise to counselors in the territory.  Read more…

New Strategies to Treat Depression in Youth

http://www.empr.com/new-strategies-to-treat-depression-in-youth-using-ssris/article/413048/Two new strategies have been developed by Johns Hopkins researchers to treat depression in young patients using serotonin reuptake inhibitors (SSRIs) while mitigating the risks and potential negative effects such as increased suicidal thoughts. The strategies are published in Translational Psychiatry. See more…

 

Picvend.com

http://www.picvend.com/2015/04/blog-post_102.html

 

 

 

 

 

 

समय प्रबंधन की विशेषज्ञ एवं चर्चित किताब ‘व्हाट द मोस्ट पीपल डू बिफोर ब्रेकफास्ट’ की लेखक लौरा वंदेरकम लिखती हैं कि अगर आप किसी चीज को करना चाहते हैं तो आप उसे सबसे पहले करिए। हमारे बीच के लोग जो आज सफलता की सीढ़ियां चूम रहे हैं एवं जिंदगी की सफलता का जमकर लुत्फ उठा रहे हैं वे इसी फिलॉसफी पर चलते हैं See more…

 

Youth and depression में कुल मिला कर बात का निचोड यही है कि बजाय चिंता मे जाने मे अपने भीतर गुणों को विकसित करें. पीपल स्किल यानि नेतृत्व का गुण, अपना व्यवहार और दूसरों को प्रेरित करने की कला खुद में डालिए. खुद को एक शानदार पैकेज बना डालिए और भेड चाल और भीड से हट कर चलने का प्रयास कीजिए.  समय को महत्व देते हुए आप अपने प्रयासों मे जुटे रहिए … और वो फिल्मी डायलाग है ना कि किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे आपसे मिलवाने में जुट जाती है तो भागाईए डिप्रेशन विप्रेशन को क्या बला है ये और नए उसाह, नए जोश और नई उमंग से उठ खडे होईए

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27. कैसे करें खुद को प्रोत्साहित

भाग दौड भरी जिंदगी में अक्सर खुद को प्रोत्साहित करना बहुत जरुरी हो जाता है पर … कैसे करें खुद को प्रोत्साहित… यक्ष प्रश्न है. पर कुछ ही देर मे मुझे इसका उत्तर भी मिल गया . किसी काम से मेरी सहेली  मणि के घर जाना हुआ  तो वो किसी से बात कर रही थी ” कमाल है,तुम तो वाकई में बहुत समझदार हो. मतलब कि हर बात को कितनी सहजता से ले कर उसका समाधान निकाल लेती हो और कोई तनाव नही रखती हमेशा स्माईल ही रहती है चेहरे पर हमेशा ऐसे ही रहना शाबाश,कीप इट अप…

मैं सोच ही रही थी कि किससे बात कर रही होगी अंदर गई तो दूसरा कोई नजर नही आया. मेरे पूछ्ने पर बोली अरे तूने सुन लिया… और स्माईल करती हुई बोली कि शीशे के सामने खडी होकर खुद से बात कर रही थी. खुद को मोटिवेट करना भी बहुत जरुरी होता है इसलिए अक्सर वो यह काम करती रहती है.. मुझे यह बात बहुत पसंद आई. सही है जब तक हम खुद को शाबाशी नही देंगें उत्साहित नही करेंगें तो आगे कैसे बढेग़े…

वैसे नीचे Motivational Quotes भी दिए हैं ताकि आप भली प्रकार समझ सकें

 

14 Motivational Quotes to Keep You Powerful

I once despised motivational quotes, probably because my wrestling coach liked to say, “If you’re not puking or passing out, then you’re not trying hard enough.” Read more…

हमे हमेशा खुद प्रोत्साहित करने के साथ साथ मोटिवेशनल साहित्य भी पढते रहना चाहिए इससे हमे बहुत नई जानकारी मिलती है और साथ साथ हौंसला भी मिलता है.

 

50 Motivational Quotes

http://www.entrepreneur.com/article/245810
Here, in 50 inspiring quotes, businesswomen, role models, activists, entertainers, authors, politicians and more share their thoughts on leadership and success — and what exactly those mean to them. 50 Motivational Quotes From Disruptive, Trailblazing, Inspiring Women Leaders

 

मेरे विचार से अब तो नही सोच रहे होंगें कि कैसे करें खुद को प्रोत्साहित …. वैसे अब मुझे भी घर लौटने की जल्दी थी खुद को प्रोत्साहित  जो करना है शीशे के सामने खडे होकर … और आप ?? आप तो करते ही होंगें अगर नही करते तो आज से ही करना शुरु कर दीजिए….

फिर जरुर बताईएगा कि कैसा लग रहा है !!!

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28. Cartoon- Sabsidy

cartoon- sabsidy -monica guptaSabsidy in india … जिस तरह से देश में सब्सिडी की लहर चल रही है तो मिठाई वाला भी किसलिए पीछे रहे … इसलिए …

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29. Facts about Left handed people

समाज में बहुत  तरह के लोग रहते हैं. सभी की अपनी अपनी खासयित होती है अब अगर Facts about Left handed people की बात करें तो कई लोगो को complex  होता है इस बात का कि Left handed  यानि खब्बू होना सही नही होता.

आज एक जानकार के घर जाना हुआ . वो अपनी बेटी को होमवर्क करवा रही थी और लडकी रोती हुई गंदी लिखाई मे लिख रही थी.मेरे पूछने से पहले ही उसने बताया कि उसकी लडकी खब्बू यानि उल्टे हाथ से लिखती है इसे जान बूझ कर लिखाई करवाती हूं ताकि सीधे हाथ से लिखना सीख जाए बडी होगी तो लोग क्या कहेंगें. अरे !!! मैने कहा ऐसा नही होता .. ये तो ईश्वर का दिया वरदान होता है जिस हाथ से लिखे लिखने देना चाहिए ऐसी टोका टाकी से ना सिर्फ इसके मन मे हीन भावना आ जाएगी बल्कि लिखने से भी कतराने लगेगी. एक धंटा उसको समझाया. शुक्र है कि उसे समझ आ गया ..फिर उसकी बेटी ने भी पंद्रह मिनट मे होमवर्क खत्म कर लिया.

वैसे जब मुझे पता चला था कि लेफ्टी भाग्यशाली होते हैं मैने भी बहुत बार उल्टे हाथ से लिखने की कोशिश की थी पर … ह हा हा उल्टे हाथ का चांटा भी जबरदस्त होता है अरे… आप क्या सोचने लगे !!

Top 5 amazing facts about left-handed people that you probably did not know!

1. Just 10% of the world’s population is left-handed, but there have been many left-handed people who are will be remembered for a very long time. Famous left-handed people include Napoleon, Da Vinci, Michelangelo, Einstein, Newton, Bill Gates, Oprah, Obama and Jimi Hendrix. But at the same time, 40% of schizophrenics are left-handed- reasons unknown. Top 5 amazing facts about left-handed people that you probably did not know!

तो अब मन से वहम निकाल देना चाहिए कि Left handed होना सही नही है बल्कि जो हमारे पास अपनी विशेषताए हैं उसका सही ढंग से उपयोग करना चाहिए

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30. Which Type

कल एक जानकार ने मुझे कहा कि आपके cartoons  बहुत अच्छे लगते हैं. वो रोज देखती है. इस पर मैने कहा कि पर आपने कभी लाईक या कमेंट तो किया नही इस पर वो बोली कि क्या करुं उसे तो अपना स्टेटेस अपडेट किए भी कई कई दिन हो जाते हैं असल में,मैसेनजर में इतने मैसेज होते हैं कि सभी का जवाब देते देते समय ही निकल जाता है और इतराती हुई बोली हर रोज दस लोग तो नए आ ही जाते हैं. मेरे कहने पर कि बिना जान पहचान इतनी बातें सही नही हैं इस पर वो चिढ कर बोली कि वो नए जमाने की है कोई बहन जी टाईप नही कि किसी के मैसेज का जवाब ही न दे. मुझे याद है कि बहुत समय पहले एक सहेली ने भी इस तरह बहुतों से दोस्ती कर ली और एक से बात इतनी बढ गई कि तंग होकर उसने face book  करना ही बंद कर दिया था. मेरे विचार से समझदारी से काम लेते हुए अपनी गरिमा बना कर रखनी चाहिए और अगर ये बहन जी टाईप विचार है तो मैं बहन जी बन कर ही खुश हूं …!!!

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31. Superstition/ face book

Blind Faith … Superstition …

एक फेसबुक मित्र बहुत समय से फेसबुक पर नही दिखी तो मैने उसे मैसेज करके पूछा तो वो बोली कि पिछले दिनों उसने अपनी  एक  दो  तस्वीरे डाली थी  उसपर 200 से ज्यादा लाईक और कमेंट मिले उस दिन के बाद से उसकी तबियत खराब हो गई … मैने पूछा कि तबियत खराब और तस्वीर का आपस में क्या ताल मेल.. तो वो बोली कि नजर लग गई … फोटो बहुत सुंदर आई थी ना नजर लग गई … उसने  बताया कि उसकी सासू मां  भी यही कह रही है कि इसलिए अब वो कुछ दिन फेसबुक पर नही आएगी और आएगी भी तो अपनी फोटो नही  डालेगी.वही कुछ दिन पहले  एक फेसबुक सहेली ने बताया था  कि फेसबुक पर उसने भगवान जी की फोटो शेयर नही की इसलिए उसका दिन बहुत खराब गया. बास से लडाई हो गई और  नौकरी छोडनी पड  रही है.

एक अन्य जानकार ने अपने हजारों दोस्तों को डिलीट  कर नया एकाऊंट बनाया और अपने नाम की स्पैलिंग बदल दी. पूछ्ने पर बताया कि ये ज्यादा शुभ है और इससे ज्यादा दोस्त बनेंगें. मैने देखा कि इतने दिन हो गए और अभी तक उसकी दोस्ती का आकंडा 200 को भी पार नही कियाjail by monica gupta

Oh God ! तभी मुझे याद आया कि कल जय ललिता जी की  CM शपथ लेने के दौरान  राष्ट्रीय गान बीच में ही रुकवा दिया गया ताकि शुभ मुहुर्त न निकल जाए और फिर  शपथ ली. वैसे ये किसी चैनल पर तो नही देख पाई,  आया  होगा, पर अखबार मे जरुर पढा और पढने के बाद दुख हुआ कि आज 21 वीं सदी मॆं हम किस तरह का संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं . हमें इन पर रोक लगाने का सोचना चाहिए या वाकई में  बाते मायने रखती है.

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32. You’re Invited to the Global Family Reunion

Screenshot 2015-05-22 13.26.43

On June 6, I’ll be speaking at the Global Family Reunion about my family, my interest in genealogy, ancestry, genetics, and the things we know and stories we tell ourselves about inheritance, and how my fascination with all of this became the book I’m writing. My talk will be at 3:30 p.m.

The reunion, brainchild of AJ Jacobs, also features Jacobs, Henry Louis Gates, CeCe Moore, George Church, Daniel Radcliffe, Lisa Loeb, and many others, and is a full day of events held on the old World’s Fair grounds in Queens. Everyone’s invited.

Tickets are available at EventBrite. Proceeds benefit the Cure Alzheimer’s Fund. Free admission for kids.

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33. Thank You God

धन्यवाद
हे प्रभु
इतना अपनापन दिया आपने
हमने आपको
आप नही “तू” का दिया सम्बोधन
धन्यवाद हे प्रभु
तुमने जो स्रष्टि रची
फल,फूल, पौधो का दिया
नायाब उपहार
धन्यवाद हे प्रभु
तेरे उस प्रतिबिम्ब के लिए
जो तूने धरा को दिया
“नारी” के रुप मे तूने
अपनी कमी को पूरा कर दिया
धन्यवाद हे नारी !!!
कभी मां कभी बहन
कभी सच्ची दोस्त बन कर
तो कभी विदा होती बेटी बन नम कर जाती नयन
साहसी है पर भावुक क्षणो मे कमजोर भी है
पर तू ताकत है इंसा की
क्योकि
प्रतिबिम्ब है तू उस अनंत अपार का
इसलिए
धन्यवाद,हे प्रभु तेरी इस अमूल्य सरंचना का
अमूल्य उपहार का …!!!

मोनिका

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34. Home Sweet Home

कामना न्यूयार्क एयरपोर्ट पहुची. आज वो अपने होम स्वीट होम यानि भारत आ रही थी. कुछ खाली समय था तो टहलने लगी. जेब मे हाथ डाला तो दो चार फालतू के कागज थे. फेकने लगी तो को कोई कूडादान नही दिखाई दिया.उसने उसे वापिस जेब मे डाल लिया.समय बीता. कुछ ही देर मे उसका जहाज नई दिल्ली पहुच गया था. अपने सामान का इंतजार करते करते उसका हाथ फिर अपनी जेब मे गया. वही बेकार कागज पडे थे. उसने तुरंत उसे जमीन पर फेक दिया. इतना ही नही पर्स मे भी कुछ फालतू का छोटा मोटा सामान पडा था. वो भी उसने ऐसे ही जमीन पर फेक दिया. अब वो अपने “होम स्वीट होम” मे जो आ चुकी थी

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35. Parenting

माता पिता की भूमिका हर मायने मे महत्वपूर्ण है. अगर बच्चा पढाई या किसी अन्य क्षेत्र मे जुडा हुआ है तो इसलिए कि उसका ख्याल रखना, देखभाल करना ताकि उसे अपने क्षेत्र मे सफलता मिले और अगर नतीजा अच्छा ना आए तो वो भूमिका और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है.

कारण यह है कि आज बच्चे बहुत भावुक हो गए है. सफल ना होने पर उसे दिल से लगा लेते हैं और मायूस होकर बैठ जाते है जैसा कि इंडियन आयडल मे सिलेक्ट ना होने पर हमारी जानकार अमीषा के साथ हो रहा है. उसने कसम खा ली है कि वो कभी नही गाएगी और एक अन्य उदाहरण मे अनिकेत का आईआईटी मे नही हुआ तो उसने खुद को नालायक की पदवी दे दी कि वो आज की दुनिया के हिसाब से वो फेल है उसके जीने का कोई फायदा नही.ऐसे मे अविभावको को बहुत समझदारी से काम लेना चाहिए ताकि बच्चे के मन से ऐसे नकारात्मक विचार निकल जाए… !!! उफ!!!!

ऐसे मे पेरेंटस को भी पेशेंस चाहिए !!! तो हुई ना उनकी महत्वपूर्ण भूमिका !!!

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36. Holidays/ hobby classes

छुट्टियो का नाम लेते ही दिल मे बस एक ही बात आती है मौज,मस्ती और शरारत !!! पर आजकल छुट्टियो की भी समझो छुट्टी हो गई है. माता पिता बच्चो को हाबी क्लास ज्वाईन करवा देते है. फिर हर रोज वह आना जाना. कुछ देर पहले दीपा मिली.वो अपने बच्चो को डांस क्लास मे लेकर जा रही थी. जबकि उसके बेटे की ना तो डांस और ना गाने मे रुचि है. उसे बिजली का समान खोल कर उसे जाचना ,देखना बहुत पसंद है. घर मे अगर कोई बिजली ठीक करने वाला आ जाता है तो वो बहुत ध्यान से देखकर समझता है.

वही नेहा बहुत दुखी है उसने बताया कि दो साल पहले उसकी बेटी ने स्केटिंग क्लास ज्वाईन की थी. पिछ्ले साल शौक बदल गया और संगीत सीखा इसलिए उसे महंगे वाला कैसियो खरीद कर दिया. पर इस साल वो कहती है कि तैराकी सीखनी है. दो साल के शौक बेकार गए.

दसवी मे पढने वाले दीपक को लग ही नही रहा कि छुट्टियां है क्योकि दिन मे तीन तीन ट्यूशन मे जाता है वो भी अलग अलग जगह. बारह साल की दिव्या कही नही जाती सरा दिन घर मे रहती है पर मम्मी से सारा दिन डांट ही खाती है क्योकि ना नाश्ता समय पर न लंच समय पर और कोई भी सहेली किसी भी समय टपक पडती है और जब वो चुपचाप बैठ कर दोस्तो को मैसेज करती है या फेसबुक खोल कर बैठती है तो भी डांट

तो हो गई ना छुट्टियो की छुट्टी !!!

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37. Have Patience

एक जानकार हैं दिव्या. बहुत समय से समाचार पत्र मे लेख भेज रही हैं पर छ्पते नही थे और धन्यवाद सहित वापिस आ जाते. सहन शक्ति कम होने के कारण उसने उस अखबार की बुराई करनी शुरु कर दी कि बेकार है,सिफारिश चलती है ना ही इसमे ढंग के लेख आते हैं. सम्पादक बिका हुआ है. तभी अचानक उसकी कहानी प्रकाशित हो गई और उसकी बोलती बंद.आज वही उस समाचार पत्र की तारीफ करते नही थक रही.

वही दिल्ली के एक नौजवान हैं उन्होने डांस शो मे हिस्सा लिया और काफी आगे आ गए तो न्यूज चैनल वालो की लाईन लग गई उनके घर के आगे. पडोसी भी अपना हक समझ कर अपना इंटरव्यू देने के लिए आगे आने लगे  कि उन्हें तो  पहले ही विश्वास था कि जरुर आगे तक जाएगा. बचपने से देख रहे है पूत के लक्षण पालने में ही नजर आ जाते हैं … बहुत मेहनती है. पर वो जैसे ही आऊट हो गया तभी पडोसियो का नजरिया ही बदल गया. कहने लगे … इतना आसान थोडे ना होता है डांस. बहुत मेहनत करनी पडती है. पहले ही पता था कि वो इतनी आगे तक जा ही नही सकता.ऐसे ना जाने कितने उदाहरण भरे पडे है.” वैसे इसमे सरकार को दोष नही दे सकते. दोष हमारा ही है”.

यकीनन आप तो ऐसे नही होंगे है ना !!! अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है !!!!

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38. let the Ego go

कुछ लोगो मे इतना “इगो” भरा होता है कि बस ..!!! अरे!! क्या हो गया अगर बच्चे से या अपने से छोटे से कुछ सीखना पड रहा है! मेरी सहेली मणि को अपने नए मोबाईल के काफी फीचर इस्तेमाल करने नही आते थे तो उसने अपने बेटे से सीखने शुरु कर दिए हालाकि बहुत डांट भी पडी अपने बच्चे से कि क्या आपको एक बार मे समझ नही आता पर वो मैदान मे डटी रही और आज उसे बार बार किसी से पूछ्ने नही जाना पडता.ठाठ से इसे इस्तेमाल करती है अब.

वही एक महाशय है उन्होने बैंक की नौकरी इसलिए छोड दी कि बैंक मे कम्प्यूटर का इस्तेमाल करना जरुरी हो गया था. बहुत सीनियर पोस्ट पर थे इसलिए एक इगो थी कि कैसे सीख ले अपने से छोटो से कि क्या समझेगे वो कि उन्हे ये भी नही आता !!! बस छोड दी नौकरी. मेरे विचार से नए जमाने से कदम ताल मिलाना है तो अपने “अहम” को छोडना ही होगा… इन बातो मे कुछ नही रखा…

 

वैसे आप तो ऐसे बिल्कुल नही होंगें … अगर हैं तो …   !!!!

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39. Rakhi

बात राखी की …

कुछ् समय पहले राखी की दुकान पर एक महिला कार से उतरी और दुकान दार से बोली सबसे मंहगी राखी दिखाओ. राखी देखते हुए बोली पिछ्ली बार भी नग वाली राखी लेकर गई थी. भईया ने दस मिनट भी नही पहनी क्योकि उसके नग निकल गए थे कोई और अच्छी और महंगी राखी दिखाओ जिसके नग न निकले.  बहुत देर माथा पच्ची के बाद और ठंडा कोल्ड ड्रिक पी कर दुकान दार ने सबसे महंगी राखी देकर विदा किया.

.वही एक अन्य महिला आई और उसने खूबसूरत डोरी खरीदी. दुकानदार के पूछ्ने पर वो बोली कि पिछ्ले साल भी जो डोरी लेकर गई थी भईया ने बहुत महीने तक पहने रखी इसलिए डोरी ही ले कर जाऊगी ताकि भईया की कलाई पर ज्यादा से ज्यादा समय तक वो सजी रहे  .

सच, बात मंहगी सस्ती की नही ,प्यार की होती है. ऐसे में दिखावा न हो तो त्योहार मनाने का मजा आए

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40. Cartoon – Maggi

maggi

2 minute Maggi .. बच्चों को पसंद आने वाली मैगी पर अब रोक लग गई है… मम्मी पापा पूरे प्रयासों में है कि बच्चे मैगी की बजाय दाल रोटी ही खाए पर यादों से भुलाना आसान भी नही …

( फिर क्यूं तेरी यादों ने मुझे रुला दिया हो … )

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41. Cartoon- Summer

girlहे भगवान … अब गर्मी इतनी बढ गई है कि चाहे  लडका हो या लडकी सब कपडे से अपना मुंह छिपाए बाहर निकलते हैं .. अब ऐसे में, रिश्ते के लिए बच्चे अपनी तस्वीर इस तरह से भेज रहे है … है न हैरानी …

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42. Google- Thank You

google cartoon - monica guptaGoogle Search cartoons

Monica Gupta

While searching  my cartoons  on net . I pressed Google search… i found so many cartoons of mine … as it was not possiple to share all cartons  so i am sharing some of these cartoons

You can also type Monica Gupta cartoons on Google search and see many more  … :)

Thank You Google …

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43. Cartoon- Result

cartoon- result monica guptaजब पत्रकार Reporter  ने मौजूदा सरकार BJP  को लेकर उनके विचार जानने चाहे तो नेता जी का कुछ ये कहना था :)

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44. Cartoon- India Tour

cartoon- modi tourअब तो विदेशी दौरे भी खत्म हो गए.. अब तो वापिस आना पडेगा :)

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45. लेख- ई कचरा

घर के बाहर कबाडी वाला जा रहा था मुझे देख कर पूछने लगा कि कुछ है ???  तो मैने कहा कि अभी रद्दी अखबार नही है तो वो बोला तो कोई पुराना कम्प्यूटर, पुरानी कार, UPS, फ्रिज, वाशिंग मशीन या AC या कूलर होगा … अरे … मैने पूछा कि ये सब भी लेते हो ??? वो बोला और क्या, अब अखबार रद्दी कबाड कहां होता है पर पुराना टीवी, कम्प्यूटर, एसी, कसरत करने वाली मशीन जैसी बहुत चीजे कबाड हो गया है… और आवाज लगाते हुए निकल गया. मुझे याद आया कि बहुत समय पहले पडोसी की fiat कार का अति खस्ता हाल हो गया था. किसी ने नही ली तो कबाडी को बुलाया तो वो बोला कि इसके तो उठवाने के भी पैसे लगेंगें …

हे भगवान !!! समय वाकई बदल रहा है और हमारा कबाड भी ई कचरे मे परिवर्तित हो रहा है :)  :( 

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46. रक्तदान और महिलाएं

monica blood donors  (1) Female Blood Donors

सिरसा जिले के ऐलनाबाद ब्लाक में कुछ साल पहले एक रक्तदान शिविर लगा. चूकि शिविर गांव में लगा था इसलिए गांव की महिलाओ ने  बढ चढ कर भाग लिया. ये वो ही महिलाए थीं जिन्होनें स्वच्छता अभियान में भी बढ चढ कर हिस्सा लिया था. आई रक्तान के लिए थी पर जब हीमोग्लोबिन कम निकला और डाक्टर ने रक्तदान के लिए मना कर दिया तो ये अड गई और बोली कि हमे नही पता हमने आज दान करके ही जाना है ….  कुछ भी कहो… ये जज्बा है गांव की औरतों का … !!!

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47. Qread – New App Introduces Young Children to Words

Recently, Facebook founder, Mark Zuckerberg and his wife invested $33 million into AltSchool, a charter school in San Francisco that creates personalized learning programs for students made available through cutting edge classroom technology.

Mark Zuckerberg

Qread, a child learning app launched in April, assists children with word recognition and reading comprehension using words, pictures and animation and incorporating the latest techniques in academic education. Four levels of complexity enable students to advance as they master skills. Children who use Qread for two minutes each day show marked improvement in word recognition and development.

children

The goal of endeavors such as Qread and AltSchool is that ultimately, charter schools or even regular public schools could outsource many basic functions to software platforms, allowing educators to focus on serving students. “Our dream is to unlock the intelligence, passion, and awareness of children around the world,” says Qread and Appi Dabbi founder Precila Birungi-Kristiansen.

Qread—short for quick read—is the first app in the Appi Dabbi series, and it lays the foundation for learning in their programs. Instead of the ABC method which only triggers the left half of the child’s brain, the Qread app allows the child to use both halves of its brain and increases the level of complexity as the child masters each lesson in the program.

The app can be used by parents, nurseries, day-cares, preschools, and elementary schools. Qread also assists the language and reading skills of children and adults who suffer from dyslexia.

The Qread app is now available for $4.99 on iTunes App Store and Google Play. For more information on the Qread app, visit www.appidabbi.com.

0 Comments on Qread – New App Introduces Young Children to Words as of 5/19/2015 2:33:00 PM
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48. Deep Travel: How Far Can You Run on Empty?

DEEP TRAVEL how far can you run on emptyPeople do die.

We die of heat exhaustion on the train from Bombay to Delhi.

We die in a taxi cab short of making it to a hotel where we die of despair.

We die of a broken heart. Betrayed. By ourselves. By our stupidity!

I lay on some deluxe deathbed in some beige hotel room somewhere in that suffocating gray limbo called New Delhi and for two or three days I drank blood red orange juice. Where did I find the money for a 3-star hotel? I thought I was broke.

As empty as I was—or perhaps because I was so empty—the image of the beggar in Bombay haunted me. No arms, no legs, not much left of him at all, he was beyond defeat.

The scene won’t quit my head even now. Not sure what I’m seeing as I remember him nudging his begging bowl with his forehead through a thicket of legs, a gauntlet of feet and fumes and cattle and cart wheels and spokes and grime and dogs and shit and broken asphalt. There is no Bombay for me above the knees of that miraculous city. I am down there with him getting trampled and I can’t escape.

At some point it occurred to me—I’m not taking a trip, this trip is taking me.

I was no less curious than the fly on the wall of that hotel room about what would happen next, and how far a person could run on empty.

I’m sweating again on a Delhi street so thick with smog you would be excused for thinking the city had exploded. I’m looking for the offices of British Overseas Airways (BOAC) because I have to escape this blessed country. Where did I get the money to buy an airline ticket? I must have held a few traveler’s cheques in reserve. I can’t remember.

Who can remember everything that happened so long ago? And yet I sometimes remember things I’m not sure I ever saw. The beggar, for instance, whom I saw for only a minute, what I remember about him changed my life.

As the 707 lifted off and banked on a trajectory for Hong Kong I would have been thinking of that beggar. Even as I swore to never ever ever ever set foot in India again, I was carrying him with me. Oaths notwithstanding, I would return to India four more times over the next 20 years.

Why? Because I was looking for answers?

How far can you run on empty? And what happens when you get there?

Hong Kong. What a relief. Clean, efficient, sensible, and above all polite. They were very, very sorry. The Immigration official, he was sorry to tell me that I could not enter Hong Kong. No onward ticket, it hadn’t occurred to me. “Very sorry you come to Hong Kong with no money, so sorry.”

He sent me to the BOAC agent who looked at me as if I might have had a begging bowl protruding from my forehead. He was manufacturing a ticket before I’d finished my sob story. A ticket entirely bogus. Immigration stamped my passport, they were perfectly happy.

I applied to the Canadian High Commission for a loan to see me home. After all, two-years of volunteer work on Zambia’s rivers had left me with schistosomes cavorting in my blood stream, and what’s more my funds had been “stolen” in Bombay, so that here I was running so precariously on empty that by this time tomorrow I would be begging for my supper.

You have to admit, that’s not a bad pitch.

But the High Commissioner wasn’t buying scripts for TV movies. “You have parents,” she explained. “They’ll wire you money.”

While my SOS telegram did its nasty work, I retreated to an offshore monastery.

Zen in art of running on empty

I didn’t know much about Buddhism or Zen except that the philosophy was Stoic and the life was Spartan. You enter a monastery, you leave everything behind. Fine by me, there wasn’t much left of me. A bamboo mat on a slab in a stone alcove, fine by me. Small log for a pillow, why not?

Oh, yeah, and next to the pillow—a wooden bowl.

The universe was working overtime trying to tell me something.

It’s pretty obvious what the purpose of a monastery is. The silence and simplicity presents a challenge to the monkey-mind. Thinking soon proves pointless, in the aftermath of which things just are. Three bowls of rice a day were a miracle. If they were trying to empty me out, well, I was already losing my urgency to get anywhere.

My final destination might not be a place, after all. Maybe it’s a new way of seeing things.

After a week I returned to Hong Kong to discover that my telegram had not been delivered. “Recipient not home.” I returned to the High Commission and was told to “get a job.”

One Hong Kong dollar—I remember this detail—it was all I had to underwrite my next move. I entered a bar. Was I seeking darkness? Or to speak with someone. I can’t remember.

I found myself gabbing with a friendly face, another Canadian, a round-faced farmer from a small community not far from my home town, as it turned out. I told him of my African sojourn and of my blunder in Bombay and the gift of the beggar and the monastery and being told to get a job, and as we were laughing he ordered us another round, and he slapped some dollars on the table and kept on slapping to the tune of 600 US dollars. I didn’t know him from Adam.

“Pay me back when you can,” he said.

I never saw him again.

I’ve heard it said that the gift seeks the empty place. I suppose emptiness ensures that the gift will be used, consumed, not hoarded but spent. The giver by giving becomes empty and is now in a position to receive. And around it goes like that.

Arriving in Vancouver, I needed $35 dollars to fly over the Rockies to Alberta. A friend from university came to the rescue.

What do you make of all that?

Have you ever survived on empty? WRITE A STORY ABOUT IT! We love stories about people getting run over on the road less traveled. It seems you have to almost die to hear the heart of the world beating.

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49. Read to a Child Spark Something Meaningful Campaign!

BOSTON, May 1st – 31st, 2015 – National nonprofit literacy and mentoring organization Read to a Child will host its second annual digital fundraising campaign called Spark Something Meaningful in the month of May.

Astoundingly, 80% of 4th graders from low-income families are not proficient in reading.

Read to a Child

To combat this literacy crisis, the American Academy of Pediatrics official policy recommends doctors “prescribe” reading to children as a critical component of how parents can support children’s healthy development. In line with this recommendation, Read to a Child enlists volunteer reading mentors to read with at-risk children and give young students the time, confidence and tools to reverse the cycle of illiteracy. By raising $100,000 in one month, Read to a Child can provide 6,000 additional reading sessions to at-risk children in the 2015-16 school year.

Spark Something Meaningful aims to create an inspirational awareness movement across social media platforms. Supporters and fundraisers will help spread the message ‘Help Kids in Need Love to Read’ by sharing a personal story about ‘who sparked their love of reading’ in a social media post. The post, along with a favorite ‘book selfie’ image, is then passed along to networks of friends and family, challenging them to do the same.

By sharing people’s personal stories about the importance and joys of reading, the campaign hopes to engage and inspire online supporters and influencers to help promote the cause and fundraise $100,000 in one month.

“Together we can build a movement of people working towards the vision that one day, every child will have a caring adult reading regularly to him or her. You can give at-risk children a better chance to succeed by participating in this campaign” says Read to a Child CEO, Olivia Mathews.

“We are proud to be a sponsor of the Read to a Child digital campaign and it is exciting to come together with other agencies and partners in a collaborative effort – all in support of creating a social media literacy movement,” says Tracy Pearce, Global CSR Engagement Manger at Dentsu Aegis Network.

All proceeds from the campaign will go to Read to a Child to fund their lunchtime reading program, which pairs more than 1,100 elementary school children with volunteer mentors from businesses who spend a lunch hour each week reading with their student partners.

Sponsors

Leading sponsors of the campaign are Pitney Bowes and Arclight Capital. Other top sponsors include Baron Funds, the Tarini Family, and Freshfields Bruckhaus Deringer, along with Dentsu Aegis Network, Posterscope, Clear Channel and OUTFRONT Media, generously donating marketing and media services for the campaign.

• For more information about the ‘Spark Something Meaningful’ campaign and how to participate or donate, please visit http://readtoachild.org/spark-something-meaningful/

When: May 1 – 31, 2015

About Read to a Child

Read to a Child, http://www.readtoachild.org, is a national literacy and mentoring nonprofit organization that inspires caring adults to read aloud to children and to help create better opportunities for the future. Research proves that the simple act of reading aloud to a child regularly significantly impacts his or her literacy skills and, thus, his or her likelihood for success.

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0 Comments on Read to a Child Spark Something Meaningful Campaign! as of 5/20/2015 10:23:00 AM
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50. Just life…

Sometimes, it’s just life.  There’s nothing to report worth reporting, or it feels like that, anyway.

Sometimes, the things worth reporting are hard things.  And you don’t feel like sharing.

I’m okay, we’re okay, everything is okay. But… it feels a little hard.

I choose to believe this is what we call, “Refilling the well.”

My friend Rachel laughed at me recently, when I whined about how I’m not writing well and I’m cranking, and watching too much TV.  She said, “Laurel, this is part of your process. You do this a lot.”

I’d like to believe that’s so.

But for now, it’s about to be summer.  The boys are finishing school, and I’m about to do a few last school visits before the end of the year.  So we’re all heading north.  In our new car, which is a 97 Volvo wagon.

I will eat snowballs in Baltimore. I will stare at the harbor.  I will wander around, and take the two lanes.  And laugh and  reset my brain.

As is my process.  I guess.

Happy summer, everyone!

 

 

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