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1. भेड चाल

भेड चाल

कल मेरी सहेली का फोन आया और पूछ्ने लगी कि सतरंगी फोटो कैसे बनेगी फेसबुक पर बहुत लोग डाल रहे हैं वो भी डालेगी… मुझे पता नही था क्या है ये तस्वीर और क्यों है … इसलिए  मैने नेट चलाया तो अचानक एक खबर पर ध्यान गया

कि  अमरीका के हाई कोर्ट से समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने की खुशी में फेसबुक ने यह नया फीचर दिया है।
गौरतलब है कि शनिवार को अमरीका ने 14वें संशोधन में समलैंगिक विवाह को मौलिक आधिकार की मान्यता दे दी। इसके बाद फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने समलैंगिक विवाह का समर्थन करते हुए अपनी प्रोफाइल पिक पर “रेनबो फिल्टर” का इस्तेमाल किया।
फेसबुक पर सेलिब्रेट प्राइड सर्च करना होगा , इसके बाद आपकी प्रोफाइल पिक्चर सतरंगी दिखेगी। गौरतलब है कि फिलहाल भारत में समलैंगिक विवाह को गैरकानूनी करार दिया गया है, लेकिन अगर आप चाहें तो अपनी फेसबुक प्रोफाइल पिक पर रेनबो फिल्टर लगाकर इस जश्न का हिस्सा बन सकते हैं।

जब मैने उसे यह सारी बात बताई तो बोली … अरेरेरेरेरे … बिल्कुल नही कतई नही … बाप रे … मुझे नही चाहिए ऐसी फोटो !!! मैं तो बच गई !!! और पता नही कितने लोगों ने बिना वजह जाने सतरंगी तस्वीर लगा ली … सही ये भेड चाल नही तो क्या है…

Patrika News: Get rainbow filter to your Facebook profile pic-

नई दिल्ली। सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक पर इन दिनों कई लोगों की सतरंगी प्रोफाइल पिक आपने भी देखी होगी। दरअसल फेसबुक ने अपने यूजर्स को “सेलिब्रेट प्राइड” नाम का एक नया फीचर दिया है जिससे यूजर्स अपनी प्रोफाइल पिक को सतरंगी बना सकते हैं। शनिवार को अमरीका के हाई कोर्ट से समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने की खुशी में फेसबुक ने यह नया फीचर दिया है।

गौरतलब है कि शनिवार को अमरीका ने 14वें संशोधन में समलैंगिक विवाह को मौलिक आधिकार की मान्यता दे दी। इसके बाद फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने समलैंगिक विवाह का समर्थन करते हुए अपनी प्रोफाइल पिक पर “रेनबो फिल्टर” का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट में लिखा, “मैं अपने सभी दोस्तों और समुदाय के सभी लोगों के लिए खुश हूं, जो आखिरकार अब अपने प्यार का जश्न मना सकते हैं और कानून के तहत सामान्य जोड़ों के रूप में पहचाने जाएंगे।”

इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपको फेसबुक पर सेलिब्रेट प्राइड सर्च करना होगा , इसके बाद आपकी प्रोफाइल पिक्चर सतरंगी दिखेगी। गौरतलब है कि फिलहाल भारत में समलैंगिक विवाह को गैरकानूनी करार दिया गया है, लेकिन अगर आप चाहें तो अपनी फेसबुक प्रोफाइल पिक पर रेनबो फिल्टर लगाकर इस जश्न का हिस्सा बन सकते हैं। See more…

Patrika News: Get rainbow filter to your Facebook profile pic-

http://www.patrika.com/news/apps/get-rainbow-filter-to-your-facebook-profile-pic-1060101/नई दिल्ली। सोशल मीडिया वेबसाइट फेसबुक पर इन दिनों कई लोगों की सतरंगी प्रोफाइल पिक आपने भी देखी होगी। दरअसल फेसबुक ने अपने यूजर्स को “सेलिब्रेट प्राइड” नाम का एक नया फीचर दिया है जिससे यूजर्स अपनी प्रोफाइल पिक को सतरंगी बना सकते हैं। शनिवार को अमरीका के हाई कोर्ट से समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता मिलने की खुशी में फेसबुक ने यह नया फीचर दिया है।

गौरतलब है कि शनिवार को अमरीका ने 14वें संशोधन में समलैंगिक विवाह को मौलिक आधिकार की मान्यता दे दी। इसके बाद फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग ने समलैंगिक विवाह का समर्थन करते हुए अपनी प्रोफाइल पिक पर “रेनबो फिल्टर” का इस्तेमाल किया। इसके साथ ही उन्होंने पोस्ट में लिखा, “मैं अपने सभी दोस्तों और समुदाय के सभी लोगों के लिए खुश हूं, जो आखिरकार अब अपने प्यार का जश्न मना सकते हैं और कानून के तहत सामान्य जोड़ों के रूप में पहचाने जाएंगे।”

इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपको फेसबुक पर सेलिब्रेट प्राइड सर्च करना होगा , इसके बाद आपकी प्रोफाइल पिक्चर सतरंगी दिखेगी। गौरतलब है कि फिलहाल भारत में समलैंगिक विवाह को गैरकानूनी करार दिया गया है, लेकिन अगर आप चाहें तो अपनी फेसबुक प्रोफाइल पिक पर रेनबो फिल्टर लगाकर इस जश्न का हिस्सा बन सकते हैं। See more…

Image via patrika.com

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2. ऐसा था इनका बचपन

ऐसा था इनका बचपन

बचपन से बडे बडे लोगों की जीवनी और उनके बचपन को पढने का बहुत शौक था. मुझे लगता है कि अगर बच्चे भी इन्हें पढे तो यकीनन प्रेरणा ले सकतें हैं इसलिए  बहुत साल पहले मैने जिला लाईबरेरी जाकर अलग अलग पुस्तकों के माध्यम से इन्हे पढा और इकठ्ठा किया ये संकलन मैने फिर आकाशवाणी में बच्चों के कार्यक्रम में  भी पढा. ( ये तब की बात है जब नेट की इतनी जानकारी नही थी)  :)

ऐसा था इनका बचपन

बच्चों, समय हमेशा चलता ही रहता है, कभी नहीं रूकता। हमारे जीवन का चक्र भी ठीक वैसे ही घूमता रहता है। पहले हम छोटे-छोटे नन्हें बच्चे होते हैं फिर धीरे-धीरे बड़े होते जाते हैं। बच्चों, जीवन के इस क्रम में अनेंकों घटनाएं घटती रहती हैं लेकिन कुछ एक बातें ऐसी होती हैं जो हमारे जीवन पर विशेष प्रभाव छोड़ जाती हैं या यूँ कहिए कि उनसे हमारा जीवन ही बदल जाता है।
बच्चों, मोहन दास कर्मचंद गांधी जिन्हें सभी बापू बुलाते हैं। पंडि़त जवाहर लाल नेहरू जोकि बच्चों के प्रिय चाचा हैं या फिर गोपाल कृष्ण, मदन मोहन मालवीय, इनिदरा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, देशरत्न डा़0 राजेन्द्र प्रसाद और भी ना जाने ऐसे कितने महान लोग हुए जिन्होंने ना सिर्फ देश में बलिक विदेशों में भी अपना नाम कमाया। आज हम कुछ महान हस्तियों के बचपन में झांक कर देखते हैं कि क्या इनका बचपन भी हमारे-आपके जैसा था या कुछ हट कर था।

 

ऐसा था इनका बचपन
सबसे पहले हम बात करते हैं स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति ड़ा0 राजेन्द्र प्रसाद के बचपन की। यह उन दिनों की बात है जब स्कूल के मुख्याध्यापक परीक्षा फल सुनाने के लिए खड़े हुए। उन्होंने सभी विधार्थियों के नाम बोले लेकिन एक विधार्थी अचानक खड़ा होकर बोला कि श्रीमान मेरा नाम तो नहीं बोला गया। इस पर अध्यापक बोले तुम जरूर फेल होगें। तभी तुम्हारा नाम लिस्ट में नहीं है। असल में, परीक्षा से पूर्व वह बालक मलेरिया से पीडि़त था। लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहा कि मेरा नाम तो इसमें होना ही चाहिए। अब अध्यापक को भी गुस्सा आ गया। उन्होंने उसे बोला, तुम जितनी बार बोलोगे, उतना ही तुम्हें जुर्माना देना पड़ेगा।  लेकिन वह बच्चा बोलता ही रहा कि इसमें मेरा नाम तो होना चाहिए। जुर्माने की राशि 5 रू0 से 50 रू0 तक पहुंच गर्इ। बात जब बढ़ रही थी तभी  लिपिक दौड़ता हुआ आया और उसने मुख्याध्यापक को बताया कि उससे गलती हुर्इ है। असल में, यह बालक कक्षा में प्रथम स्थान पर है और पता है यह बालक थे राजेन्द्र प्रसाद जोकि स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने।
बच्चों, मदन मोहन मालवीय के दिल में लोगों और जानवरों के प्रति बचपन से ही दया और करूणा थी। एक बार की बात है बचपन में उन्होंने देखा कि एक कुत्ता  (जानवर) दर्द से कराह रहा है वह उसे तुरन्त जानवरों के ड़ाक्टर के पास ले गए किन्तु ड़ाक्टर ने कहा कि जो इसके कान में चोट लगी है ऐसे दर्द में तो कुत्ता पागल भी हो जाते हैं तो वह इन बातों में ना पड़े। किन्तु मालवीय ने ड़ाक्टर से दवा लेकर खुद ही उसे लगाने की सोची। दवा लगाते ही कुत्ता बैचेन हो उठा तब बालक मालवीय ने दवा का कपड़ा लकड़ी के साथ बांधा और दूर बैठे-बैठे ही वह उसे दवा लगाने लगे। दवा उसे को बैचेन तो कर गर्इ लेकिन धीरे-धीरे उसे आराम आने लगा। बड़े होने पर भी मदन मोहन मालवीय मानते थे कि प्राणिमात्र की सेवा ही भगवान की सच्ची पूजा है।

एक ऐसा ही किस्सा लौह पुरूष सरदार वल्लभ भार्इ पटेल का है। उनके बचपन में एक बार उन्हें चोट लग गर्इ। वह जगह पक गर्इ और अनेकों घरेलू उपचार करने पर भी वह चोट ठीक ही नहीं हुर्इ। अन्त में एक वैध को दिखाया गया। पता है उन्होंने कहा कि अगर हम इस फोड़े पर गर्म करके लोहे को लगाऐंगे तो यह ठीक हो जाएगा। घर के सभी सदस्य तो ड़र गए लेकिन बालक वल्लभ ने हिम्मत नहीं हारी पता है वह सीधे लुहार के पास गया और उसे कहा कि गर्म-गर्म लोहा उसे लगा दे ताकि उसका फोड़ा दब जाए। लेकिन लुहार ने यह सोच कर मना कर दिया कि बहुत दर्द होगा और यह तो अभी बच्चा है। वल्लभ ने दो-तीन जगह और पूछा लेकिन सभी ने गर्म लोहा लगाने से इंकार कर दिया। पता है तब उस बालक ने क्या किया। बड़े साहस से गर्म लोहे की सलाख उठा कर अपने फोड़े पर लगा ली। इस बालक के साहस को देख कर सभी हैरान रह गए। यही बालक आगे चलकर प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी बना। स्वतंत्रता मिलने पर यह देश के प्रथम गृह मंत्री और उपप्रधान मंत्री बने। तो बच्चों ये थे सरदार वल्लभ भार्इ पटेल।
अब मैं आपको गोपाल कृष्ण गोखले के बचपन की घटना सुनाती हूं। यह बात उन दिनों की है जब गोपाल विधालय पढ़ने जाते थे। आचार्य जी ने उन्हें गणित का गृह कार्य करने को दिया। बालक गोपाल ने एक-दो प्रश्न के इलावा सभी हल कर लिए। अब बच्चों, जो आपसे सवाल नहीं निकलते तो आप अपने दोस्तों  से पूछते हो। बस, इन्होंने भी अपने दोस्तों से पूछ कर हल कर लिए। अगले दिन विधालय में टीचर ने जब देखा कि ये तो सभी सवाल सही हैं तो उन्होंने बालक गोपाल की बहुत प्रशंसा की। इस पर गोपाल रोने लगे और पूछने पर उन्होंने सारी बात सच-सच बता दी कि यह उन्होंने स्वयं नहीं किए हैं, मित्र की सहायता से किए हैं। इस पर अध्यापक बहुत ही प्रसन्न हुए। उन्होंने सच बोलने पर बालक को शाबाशी दी। पता है, यही गोपाल कृष्ण गोखले महान देशभक्त और महात्मा गांधी के राजनैतिक गुरू भी बने।

अच्छा बच्चों यह तो बताओ कि जय हिन्द का नारा किसने दिया था। सुभाष चन्द्र बोस ने। तो आओ अब मैं इन्हीं के बचपन का किस्सा सुनाती हूं। एक बार की बात है कि यह रात को सोने जब जा रहे थे तो पलंग की बजाय जमीन पर ही लेट गए। मां हैरान, उन्होंने पूछा कि क्या हुआ जमीन पर क्यों लेट गए। इस पर बालक बोला कि हमारे गुरू ने बताया है कि हमारे पूर्वज भी जमीन पर सोते थे। मैं भी ऋषि, मुनि की तरह कठोर जीवन जीऊंगा। जब पिता ने यह बात सुनी तो उन्होंने कहा कि बेटे, सिर्फ जमीन पर सोने से ही कोर्इ महान नहीं बनता। खूब पढ़ार्इ करना और समाज की सेवा करना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। बस, यह बात बालक को इतनी जम गर्इ और बहुत मेहनत से उन्होंने आर्इ0ए0एस0 की परीक्षा पास की। और बड़ा अफसर बनने का मौका मिला तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं चाहिए अंग्रेज़ो की नौकरी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपना लक्ष्य तो बचपन में तय कर चुके थे। कठोर जीवन, उच्च शिक्षा, देश सेवा इन तीनों को कर दिखाया सुभाष चन्द्र बोस ने। बचपन में किए मजबूत संकल्प को इन्होंने खूब निभाया।
बच्चों अब मैं चन्द्रशेखर वैंकटारमन के बचपन की घटना बताती हूं। वैंकटारमन को वैज्ञानिक अनुसंधान के परिणामस्वरूप प्रकाश भौतिकी में नए अविष्कार करने के लिए नोबेल पुरस्कार भी मिला।
त्रिचनापल्ली का एक सीधा सा छात्र चन्द्रशेखर जब विधालय में दाखिला लेने पहुंचा तब उसकी भी परीक्षा ली गर्इ। विधालय के सभी अध्यापक उन्हें देखकर हैरान थे क्योंकि उन्होंने सभी जवाब सही दिए थे। सभी अध्यापक और मुख्याध्यापक ने यह सोचा कि इस बालक को तो महाविधालय में दाखिला मिलना चाहिए। इस पर चन्द्रशेखर ने कहा कि वह एक-एक सीढ़ी चढ़ कर ही उन्नति के उच्चतम छोर तक पहुंचना चाहते हैं। छलांगे नहीं लगाना चाहते। वह पग-पग यानि कदम-कदम से ही आगे बढ़ना चाहतें हैं। उनकी बात सुनकर सभी हैरान रह गए। तो देखा ऐसे थे चन्द्रशेखर वैंकटारमन।
बच्चों, बचपन से ही कोर्इ महान नहीं हो जाता। सच्चार्इ के रास्ते में कांटे ही कांटे होते हैं। हां, अगर उन्होंने कंटीले रास्ते को पार कर लिया तो उन्हें खुशियां रूपी फूल ही फूल मिलते हैं। अच्छा बच्चों यह बताओ  हे राम, भारत छोड़ो किसने कहे थे। जी……राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने। लेकिन पता है बचपन में वो भी बुरी संगति में पड़ गए थे। बीड़ी पीना, चोरी करना, झूठ बोलना और मांस खाना उनकी आदत बन चुकी थी। लेकिन कहीं ना कहीं उनके दिल में छिपी अच्छार्इयों ने उन्हें यह सब छोड़ने को मजबूर कर दिया। मां से तो उन्होंने सारी बात कर ली। लेकिन पिताजी के बीमार होने के कारण उनकी हिम्मत ही नहीं हुर्इ कि वह अपनी सारी गलितयाें की माफी मांग लें। उन्होंने पिताजी को पत्र लिख कर दिया। पत्र में उन्होंने सारी बातें लिख ड़ाली और पिताजी को पकड़ा दिया। पिताजी पत्र पढ़कर रोते रहे किन्तु उन्होंने मोहन को कुछ नहीं कहा। बाप-बेटे का सारा गिला शिकवा आंसूओं में बह गया। और गांधी जी का नाम ना सिर्फ भारत में बलिक पूरे विश्व में आदर सहित लिया जाता है और लिया जाता रहेगा।
बालक आइन्सटीन जब जर्मनी के विधालय में पढ़ते थे तब अध्यापक उन्हें पढ़ा-पढ़ा कर हार जाते थे लेकिन उन्हें समझ में नहीं आता था। उनकी अक्सर पिटार्इ भी होती थी। सभी उन्हें बु़द्धु कहते थे। एक बार तो कक्षा में उनकी इतनी पिटार्इ हुर्इ कि अध्यापक ने कहा कि भगवान ने तो इन्हें दिमाग हीं नहीं दिया है। बस, उस दिन उन्होंने स्कूल ही छोड़ दिया और घर पर रहकर खूब पढ़ार्इ की। मन को एकाग्र करके यह स्वयं पढ़ने लगे और इन्होंने गणित के नए-नए सिद्धांत खोजे। यही बालक बड़े होकर आइन्सटीन के नाम से प्रसिद्ध हुए। उन जैसा कोर्इ संसार में गणितज्ञ ही नहीं हुआ।
एक ऐसा ही किस्सा अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज वाशिंगटन का है। वह बचपन से ही बेहद परोपकारी थे। एक बार की बात है सुबह-सुबह का समय था। एक स्त्री रो रही थी उसका बच्चा नदी में गिर गया था। इतने में बालक जार्ज दौड़ता हुआ आया और छपाक से पानी में छलांग लगा दी। बहुत मेहनत के बाद वह बच्चे को निकालने में सफल हुए। और उस बच्चे को बहाव से बाहर निकालने में सफल हुए। और उस बच्चे को पीठ पर बैठाकर उसे किनारे पर ले आए। महिला ने बालक को शाबासी दी। वही बालक बड़े होकर जार्ज वाशिंगटन के नाम से मशहूर हुए।
बच्चों, अमेरिका के एक अन्य राष्ट्रपति गारफील्ड़ भी हुए हैं। उन्होंने बचपन से बेहद गरीबी देखी। वह गांव से लकड़ी काट कर शहर बेचने जाते थे लेकिन पढ़ने की धुन सवार थी। पता है, उन्हाेंने पुस्तकालय में सफार्इ कर्मचारी के रूप में भी काम किया लेकिन पढ़ने के शौक को कभी नहीं छोड़ा। स्कूली पढ़ार्इ, पुस्तकालय के अध्ययन, लग्न, परिश्रम से उन्हें दूसरी नौकरी भी मिल गर्इ। प्रगति के पथ पर बढ़ते हुए यह अमेरिका के राज्य सभा के सदस्य चुने गए और अगले चुनाव में लोगाें के प्यार ने इन्हें राष्ट्रपति बना दिया।

9 जनवरी, 1922 में जन्में ड़ा. हरगोबिंद खुराना जोकि नोबेल पुरस्कार विजेता रहे। वह अपने पांच भार्इ-बहनों में सबसे छोटे थे। पढ़ार्इ में तेज होने के कारण उन्हें तीसरी कक्षा से छात्रवृति मिलनी शुरू हो गर्इ थी। पता है, जब उनकी माता जी रोटी बनाती थी तो वह रेस लगाते थे,  देखते हैं मां, तुम्हारी रोटी तवे से पहले उतरती है या मेरा सवाल पहले हल होता है।
उड़नपरी पी.टी. उषा को कौन नहीं जानता। खेल-मैदान की रानी उषा ने बचपन से बहुत मेहनत की। जब वह केवल ग्यारह वर्ष की थी तो वह खेल-कूद प्रतियोगिता में भाग लेने की खूब मेहनत कर रही थी। प्रतियोगिता शुरू होने के तीन दिन पहले ही उनके पांव में चोट लग गर्इ। लेकिन चोट की चिंता किए बिना वह लगातार अभ्यास करती रही। अपनी कक्षा की सबसे दुबली-पतली ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया जब वह प्रथम आर्इ। उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और भारतीय खेलों में चमकता सूरज बन कर उभरी।
तो बच्चों, ऐसा था इनका बचपन। मेहनत, लग्न, जोश और परिश्रम से भरा। बस, मन में काम की लग्न हो और आंखों में सपने हो तो कोर्इ भी रास्ते में रूकावट नहीं बन सकता। बस……….अपने जीवन में एक लक्ष्य रखना चाहिए और उसी को पाने के लिए जुट जाना चाहिए। फिर देखना सफलता आपके कदमों में होगी।

ऐसा था इनका बचपन

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3. बचपन वैज्ञानिकों का

बचपन वैज्ञानिकों का

बच्चों, आचार्य जगदीश चन्द्र बसु का नाम तो आपने सुना ही होगा। जी हां, इन्होंने पता लगाया था जैसे हम गर्मी, सर्दी, दर्द का अनुभव करते हैं वैसे ही पौधे भी अनुभव करते हैं। प्रो0 बसु ने पौधो की सजीवता देखने और मापने के बेहद संवेदनशील यंत्र बनाया जिसका नाम क्रेस्कोग्राफ था। पता है, इसकी मदद से यह तक जाना जा सकता था कि पौधा हर सैंकिंड़ में कितना बढ़ता है।

30 नवम्बर, 1858 को बंगाल के मैमन सिंह जिले के फरीदपुर गांव में इनका जन्म हुआ। इस बालक के पिता फरीदपुर के डि़प्टी मैजिस्ट्रेट थे। इनकी शिक्षा गांव में ही हुर्इ। पांच वर्ष की आयु से ही यह घोड़े पर बैठ कर विधालय में पढ़ने जाते थे। यह साहसी बहुत थे। पता है, बचपन में इनका नौकर इन्हें रोमांचक, साहसी कहानियां सुनाता था। इनका नौकर पहले ड़ाकू था। किन्तु जेल से लौट कर आने के बाद यह सुधर गया और वसु को साहसी बनाने में इनके नौकर का योगदान रहा। जब यह नौ वर्ष के हुए तो यह पढ़ार्इ के लिए कलकत्ता चले गए। वहां इनके दोस्त तो कोर्इ बने नहीं इसलिए पौधाें को उखाड़-उखाड़ कर इनकी जड़ो को देखा करते। यह तरह-तरह के फल-फूल उगाने के भी बेहद शौकिन थे। बस तब से बसु पौधों की दुनिया में इतने लीन हो गए कि इनके अनुसंधानों से पूरी दुनिया हैरत में पड़ गर्इ।

मद्रास के तंजौर जिले के  इरोद नामक छोटे से गांव के स्कूल में शिक्षा पार्इ श्री निवास रामानुजम ने। इसी बालक को रायल सोसाइटी ने अपने फ़ैलो बनाया जोकि स्वयं में ही बहुत बड़ा सम्मान था और सम्पूर्ण एशिया में सम्मानित होने वाले यह प्रथम व्यकित थे। रामानुजम गणितज्ञों में शिरोमणि कहे जाते हैं। इनके बचपन की एक से सौ तक की संख्या का जोड़ निकालने को बोला और अध्यापक निशिचंत होकर बैठ गए कि सभी विधार्थी आराम करेंगे लेकिन बालक रामानुजम अध्यापक के आराम में खलल ड़ाल दिया उन्होंने असाधारण तरीके से इसका जोड़ निकाला। जिसे देखकर अध्यापक हैरान ही रह गए। बचपन से श्रीनिवास की गणित के प्रति बेहद रूचि थी। अपनी किताब की तो फटाफट पढ़ार्इ कर लेते और फिर अगली कक्षा की गणित लेकर पढ़ार्इ करते।

ड़ा0 हरगोविंद सिंह खुराना का जन्म 9 जनवरी, 1922 को पंजाब के छोटे से गांव रायपुर में हुआ। यह पांच भार्इ-बहन थे। पता है, यह बचपन से ही बहुत तेज थे। तीसरी कक्षा से ही इन्हें छात्रवृति मिलनी शुरू हो गर्इ थी। सारा दिन यह पढ़ते ही रहते थे। अपनी मां से पता है यह किस तरह रेस लगाते थे। इनकी मां तवे पर रोटी ड़ालती और दूसरी तरफ यह तरफ यह सवाल हल करना शुरू करते। दोनों में होड़ रहती थी कि पहले रोटी सिकेगी या फिर सवाल हल होगा।

विज्ञान के मटारथी गैलेलियो गैलिलार्इ (1564-1642) को कौन नहीं जानता। इन्होंने ही इस बात का खंडन किया था कि सूर्य पृथ्वी के चारों ओर नहीं घूमता बलिक पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है। सूर्य तो ब्रह्राांड़ का केन्द्र है। यह बचपन से ही खोजी प्रवृति के रहे। इनका जन्म 15 फरवरी, 1564 को टस्कनी राज्य के इटली (पीसा नगर) में हुआ। इनके पिता संगीत व गणित के विद्वान थे। बांसुरी बजाना, चित्रकारी के अतिरिक्त इन्हें पढ़ार्इ का बेहद शौक था। गैलिलयो के पिता इन्हें ड़ाक्टर बनाना चाहते थे। ड़ाक्टरी पढ़ने के लिए इन्हें पीसा विश्वविधालय में दाखिल करवाया गया लेकिन इनका मन धार्मिक कार्यों में नहीं लगता था। मजबूरन इन्हें गिरजाघर जाकर थोड़ी देर खड़ा रहना पड़ता था। पता है, यही पर एक खोज ने जन्म लिया। एक बार गिरजाघर में खड़े-खड़े तांक-झांक कर रहे थे कि इन्होंने एक लालटेन देखी वो रस्सी से लटकी इधर-उधर झूल रही थी। हवा धीमी होने पर लालटेन की झूलने की दूरी तो कम हो गर्इ इधर-उधर चक्कर काटने में उसे इतना समय लगा। गैलिलयो ने अपनी नब्ज़ की धड़कन से यह निरीक्षण किया और बस, पेंडुलम के सिद्धांत के आधार पर यही यांत्रिक घडि़यां बनीं। इन्होंने दूरबीन भी बनार्इ और उसका रूख आकाश की ओर रखा। गैलिलयो की खोजे ही आगे चलकर न्यूटन की खोजों का आधार बनी।

न्यूटन ने भी गैलिलयो के बारे में कहा कि वह एक दिग्गज थे, इन्हीं के कन्धों पर चढ़कर मैंने दुनिया देखी। सर आइजक न्यूटन (1642-1727) को कौन नहीं जानता। गिरते सेब को देखकर इन्हीं के मन में ख्याल आया कि यह सेब नीचे कैसे गिरा ऊपर क्यों नहीं गया। इसी समस्या पर विचार करके उन्होंने गुरूत्वाकर्षण के सिद्धांत की स्थापना की। प्रिसीपिया न्यूटन द्वारा रचित महान ग्रंथ है। लेकिन बचपन में इनके जीवन में दुख के सिवाय कुछ नहीं था। जब न्यूटन पैदा हुए तो इनके पिता चल बसे। मां ने दुबारा विवाह कर लिया और नानी ने इनकी देखभाल की। गांव से छ: मील दूर ग्रैथम के स्कूल में यह शिक्षा के लिए जाते थे। पढ़ार्इ में यह तब कमजोर थे। एक बार लड़ार्इ में इन्होंने एक बच्चे को हरा दिया। बस, उसी दिन से उन्होंने सोच लिया कि जब वह लड़ार्इ में हरा सकते है तो पढ़ार्इ में क्यों नहीं। देखते ही देखते पढ़ने की लगन ने इन्हें सबसे प्रतिभाशाली बालक बना दिया। न्यूटन ने अनेंको खोजे की। नम्र स्वभाव वाला न्यूटन समाज के सम्मानित  व्यक्तियाें में से एक थे।

मार्इकल फैराड़े (1797-1867) महान वैज्ञानिक थे। पता है, बचपन में वह जिल्दसाज थे। कापी, पुस्तकों में जिल्द चढ़ाते थे और पता है जिल्द चढ़ाते-चढ़ाते वह उन पुस्तकों को ध्यान से पढ़ते थे। फैराड़े का मुख्य कार्य विधुत और चुम्बक पर था। उन दिनों की बात है जब रायल इंस्टीटयूट के अध्यक्ष सर हंफ्री डेवी ने अपनी पुस्तक जिल्द के लिए दी। जब वह जिल्द वाली पुस्तक लेने पहुंचे तब उन्होंने देखा कि वह बालक पुस्तक पढ़ रहा है। वह हैरत में पड़ गए। पता है उन्होंने फैराडे़ की उस पुस्तक से परीक्षा भी ली और उन्होंने सभी उत्तर ठीक दिए। यही बालक महान वैज्ञानिक बनकर रायल इंस्टीटयूट का निदेशक बना।

उल्म के दक्षिण जर्मन में आंइस्टाइन का जन्म हुआ। वह कहते थे कि मेरा मस्तिष्क ही मेरी प्रयोगशाला है। लेकिन यह महान वैज्ञानिक बचपन में एकदम नालायक थे। इनके अध्यापक ने तो यहां तक कह दिया था कि इन जैसा नालायक उन्होंने आजतक नहीं देखा। फिर उन्होंने स्वयं ही घर पर पढ़ार्इ की और पढ़ार्इ में जबरदस्त निपुणता हासिल की। आंइस्टाइन के चाचा इंजीनियर थे। गणित में उन्होंने ही आंइस्टाइन को पढ़ार्इ करवार्इ और ज्यामिती उनका प्रिय विषय बन गर्इ। नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अलबर्ट काक इजराइल लोगों ने उन्हें राष्ट्रपति बनाना चाहा। लेकिन उन्होंने अस्वीकार कर दिया। वह जीवन भर शांति के लिए प्रयास करते रहे और वह राष्ट्रपिता गांधी से बहुत प्रभावित थे। बच्चों, प्रतिभा हम सभी में छिपी रहती है हमें जरूरत है थोड़ी सी हिम्मत, मेहनत, लग्न और आत्मविश्वास की। हो सकता है हम भी बड़े होकर महान लोगों में अपना नाम शामिल कर लें।

 

 

बचपन वैज्ञानिकों का… तो बच्चों बतानाकी आपको ये लेख कैसा लगा … अगर आप भी किसी वैज्ञानिक के बारे मे कुछ जानते हों तो भी जरुर बताना

 IBN Khabar

एपीजे अब्‍दुल कलाम : भारत के पूर्व राष्‍ट्रपति और भारत रत्‍न एपीजे अब्‍दुल कलाम भारत में मिसाइल मैन के नाम से भी जाने जाते हैं। 1962 में वे ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन’ में शामिल हुए। कलाम को प्रोजेक्ट डायरेक्टर के रूप में भारत का पहला स्वदेशी उपग्रह (एस.एल.वी. तृतीय) प्रक्षेपास्त्र बनाने का श्रेय हासिल है। 1980 में कलाम ने रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित किया था। उन्‍हीं के प्रयासों की वजह से भारत भी अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया। इसरो लॉन्च व्हीकल प्रोग्राम को परवान चढ़ाने का श्रेय भी इन्हें प्रदान किया जाता है। डॉक्टर कलाम ने स्वदेशी लक्ष्य भेदी (गाइडेड मिसाइल्स) को डिजाइन किया। खास बात यह है कि इन्‍होंने अग्नि एवं पृथ्वी जैसी मिसाइल्स को स्वदेशी तकनीक से बनाया।

जयंत विष्‍णुनार्लीकर : महाराष्‍ट्र के कोल्‍हापुर में जन्‍में प्रसिद्ध वैज्ञानिक जयंत विष्‍णुनार्लीकर भौतिकी के वैज्ञानिक हैं। उन्‍होंने ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बिग बैंग की थ्‍योरी के अलावा नये सिद्धांत स्थायी अवस्था के सिद्धान्त (Steady State Theory)पर भी काम किया है। उन्‍होंने इस सिद्धान्त के जनक फ्रेड हॉयल के साथ मिलकर काम किया और हॉयल-नार्लीकर सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। कई पुरस्‍कारों से सम्‍मानित नार्लीकर ने विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए विज्ञान साहित्‍य में भी अपना अमूल्‍य योगदान दिया।

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बचपन वैज्ञानिकों का… तो बच्चों बतानाकी आपको ये लेख कैसा लगा … अगर आप भी किसी वैज्ञानिक के बारे मे कुछ जानते हों तो भी जरुर बताना

बचपन वैज्ञानिकों का

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4. Education System


 

Education System
आज भोपाल के स्कूल की खबर दिखा रहे थे कि चैनल वाले स्कूल जाकर अंग्रेजी की कुछ स्पैलिंग पूछ रहे थे टीचर्स से और वो उसका जवाब नही दे पा रहे थे वो स्पैलिंग थी grammar की और वो ज्यादातर grammer यानि er लगा कर बोल रहे थे. यहां तक की स्कूल के मुख्य अध्यापक ने भी गलत बताया.

ऐसी ही एक खबर पिछ्ले दिनों भी दिखाई थी जब  यूपी बोर्ड के पेपर चैक हो रहे थे और जो चैक कर रहे थे उन्हे स्पैलिंग का ही ज्ञान नही था ऐसे में क्या तो वो पेपर चैक करेंगें और क्या वो बच्चो को मार्क्स देंगें. मेहनत करने के बाबवूद भी बच्चे गर्त में चले जाते हैं और  कई बच्चे तो डिप्रेशन में  भी चले जाते हैं

इस बात से मुझे अपनी उस सहेली की याद आ गई जो स्कूल में बहुत नालायक हुआ करती थी और रो पीट कर  प्रैक्टिकल में सिफारिश से पूरे अंक मिल जाते  और आज वो सिफारिश के बल पर  ही टीचर बनी घूम रही है … ऐसे मे क्या तो वो पढाएगी और क्या बच्चों का भविष्य होगा.

पहले तो मुझे शायद अब उसमे सुधार आ गया होगा और अच्छी टीचर बन कर बच्चों को पढा रही होगी पर उसी स्कूल के कुछ बच्चॉ से जब बात करके पता चला तो बेहद दुख हुआ कि इसमें बच्चों का क्या कसूर कसूरवार हमारा सिस्टम है और ऐसे सिस्टम का लाभ उठाते हैं कुछ सिफारिशी लोग… ये तो एक उदाहरण है ऐसे न जाने कितने उदाहरण होंगें जो  education System को खराब कर रहे हैं ऐसी न जाने कितनी कहानियां होगी जोकि   गति अवरोधक का काम कर रहीं हैं. बहुत जरुरी है इसे सुधारना अन्यथा … :(

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5. टेंशन दाखिले की

टेंशन दाखिले की

इंजिनियरिंग का रिजल्ट आने के बाद से बेहद गहमागहमी है कि दाखिला कहां लेंगें. कुछ को अच्छा कालिज मिलने की उम्मीद है तो कुछ मायूस है. ऐसे में एक मित्र के बेटे के ज्यादा अच्छे नम्बर नही आए हैं और उसने इस साल ड्राप करने निर्णय लिया है.

हालाकि पिछ्ले साल भी वो बाहर कोचिंग ले रहा था पर उसके इस निर्णय से उसके पेरेंटस खुश नही हैं वो चाहते है कि साल खराब नही करना चाहिए और जिस कालिज मे दाखिला मिल रहा है उसमे ले ले. मैने भी यही कहा क्योकि काम्पीटिशन इतना बढ गया है कि अगले साल का रिस्क नही लेना चाहिए और जिस संस्थान में दाखिला मिल रहा है वहां ले कर उसमे खूब मेहनत करें हो सकता है वहां स्लाईडिंग ही हो जाए पर वो सुनने को तैयार नही.

एक साल बहुत मायने रखता है बहुत बच्चे ऐसे भी देखे हैं जो बहुत अच्छा लिखाने के चक्कर में  पूरे साल बहुत तनाव में रहते हैं और टेंशन की वजह से अच्छा नही कर पाते और कुछ में काम्पलेक्स भी आ जाता है जब वो अपने से जूनियर को आगे आते देखते हैं. कई बार एक दूसरे की देखा देखी भी बच्चे ऐसा फैसला कर लेते हैं

फिर भी टेंशन इसी बात की है कि एक साल ड्राप करना या नही करना चाहिए.. कैसे समझाए उसे . बहुत टेंशन है

अगर आपके पास भी कोई सुझाव है तो उसका स्वागत  है :)

टेंशन दाखिले की

  LiveHindustan.com

देशभर के 18 आईआईटी व आईएसएम धनबाद में एडमिशन के लिए आईआईटी मुंबई की ओर से देशभर के तमाम बोर्डों का टॉप-20 परसेंटाइल का कटऑफ जारी कर दिया गया है। इसके तहत इस बार बिहार बोर्ड से12वीं में 342 या इससे अधिक अंक पाने वाले जनरल के छात्रों को ही आईआईटी में दाखिला मिल पाएगा। ओबीसी के लिए 333, एससी के लिए 325, एसटी के लिए 322 और नि:शक्तों के लिए 322 अंक कटऑफ निर्धारित किया गया है। सीबीएसई बोर्ड के छात्रों के लिए जनरल का कटऑफ 440 अंक निर्धारित किया गया है। ओबीसी का 428, एससी का 410, एसटी का 389 और नि:शक्तों का कटऑफ 389 अंक तय किया गया है। इससे कम अंक पाने वाले छात्रों का दाखिला आईआईटी में नहीं हो पाएगा, चाहे वे जेईई एडवांस में भी सफल क्यों न हों। जेईई एडवांस में सफल होने के बाद सिर्फ उन्हीं छात्रों का दाखिला आईआईटी में होगा, जो अपने 12वीं बोर्ड के रिजल्ट में टॉप-20 परसेंटाइल में शामिल होंगे या उन्हें बोर्ड में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त हुए हों। 75 प्रतिशत अंक वाले भी शामिल इस बार आईआईटी में एडमिशन के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके अनुसार इस बार अपने बोर्ड में 75 प्रतिशत या इससे अधिक अंक लाने वाले जनरल व ओबीसी के छात्रों को भी आईआईटी में दाखिला मिलेगा। एससी-एसटी और नि:शक्तों का दाखिला 70 प्रतिशत या इससे अधिक अंक पर होगा। परीक्षा विशेषज्ञ आनंद जायसवाल ने बताया कि इसका फायदा बिहार बोर्ड के छात्रों को नहीं मिल पाएगा, क्योंकि 75 प्रतिशत के कटऑफ से कम टॉप-20 परसेंटाइल का कटऑफ है। इसलिए बिहार बोर्ड के छात्र टॉप-20 परसेंटाइल के कटऑफ पर ही एडमिशन लेंगे। सीबीएसई का 75 प्रतिशत का कटऑफ 375 अंक और 70 प्रतिशत का कटऑफ 350 अंक निर्धारिक किया गया है। ऐसे में सीबीएसई के छात्रों को इसका काफी लाभ मिलेगा। क्योंकि इसका टॉप-20 परसेंटाइल का कटऑफ 440 अंक है। जिन छात्रों का 440 अंक नहीं होगा वे 75 प्रतिशत वाले कटऑफ यानि 375 अंक पर भी दाखिला ले सकते हैं। पिछले दो वर्षों से सभी बोर्ड अपना टॉप-20 परसेंटाइल का कटऑफ जारी करते थे। इसमें काफी गड़बड़ियां होती थी। 2014 में ही बिहार बोर्ड और जेईई की ओर से जारी किए गए कटऑफ में अंतर हुआ था। इसे देखते हुए इस बार तमाम बोर्ड से डाटा मंगाकर आईआईटी मुंबई ने खुद कटऑफ जारी किया है। पिछली बार से बढ़ा है कटऑफ बिहार बोर्ड का कटऑफ वर्ष 2015 श्रेणी कटऑफ सामान्य 342 ओबीसी 333 एससी 325 एसटी/नि:शक्त 322 बिहार बोर्ड का कटऑफ वर्ष 2014 श्रेणी कटऑफ सामान्य 304 ओबीसी 300 एससी 289 एसटी/नि:शक्त 292 सीबीएसई का कटऑफ 2015 श्रेणी कटऑफ सामान्य 466 ओबीसी 451 एससी 432 एसटी/नि:शक्त 427 सीबीएसई का कटऑफ 2014 श्रेणी कटऑफ सामान्य 416 ओबीसी 410 एससी 370 एसटी/नि:शक्त 366 See more…

A Village of Bihar Masters of IIT JEE Since 1992 –

बिहार के गया जिले में एक गांव है, पटवा टोली। राज्य के अन्य गांवों की तरह यह भी एक सामान्य गांव जैसा ही है। लेकिन इस गांव की एक खासियत है। पिछले 23 सालों से इस मामूली गांव के छात्र वह करिश्मा करते आ रहे हैं, जो सुविधा संपन्न शहरों के स्टूडेंट भी नहीं कर पाते हैं। जी हां, पटवा टोली के छात्र पिछले कुछ सालों में बड़े पैमाने पर आईआईटी पहुंचे हैं। 2015 में भी गांव के 18 छात्रों ने जेईई एडवांस्ड क्लीयर कर आईआईटी में दाखिला सुनिश्चित किया है। बता दें कि इसमें एक लड़की दीपा कुमारी भी शामिल हैं, जो आईआईटी में पढ़ाई करेंगी। पिछले साल 13 छात्रों ने जेईई एडवांस्ड क्लीयर किया था। अब तक करीब 300 छात्र गांव में पढ़ाई करके आईआईटी और एनआईटी जैसे इंजीनियरिंग संस्थानों में पहुंच चुके हैं। कभी नक्सल और जातीय हिंसा से प्रभावित रहे गया जिले का यह गांव पटवाओं की टोली है। यहां के पटवा बुनकरी का काम करते हैं। ये अन्य पिछड़ी जाति में शामिल हैं। 1992 से ही इस गांव के छात्रों के लिए आईआईटी क्लीयर करना सामान्य बात साबित हो रही है। हालांकि, आईआईटी जाने वालों की संख्या कभी कम या कभी ज्यादा हो जाती है। लेकिन पिछले 23 सालों में यह सिलसिला कभी नहीं टूटा। दिलचस्प यह भी है कि आईआईटी जाने वाले अधिकांश बच्चों के माता-पिता या तो कम पढ़े-लिखे हैं या फिर निरक्षर हैं। उन्हें आईआईटी का मतलब भी नहीं पता है। ग्रुप स्टडी है सफलता का राज, पहली बार जितेंद्र पहुंचे थे आईआईटी यहां के छात्रों की सफलता का राज, ग्रुप स्टडी है। गांव के छात्र मिलकर साथ में पढ़ाई करते हैं और एक-दूसरे से सब्जेक्ट्स की गुत्थियां सीखते हैं। 1992 में इस गांव से पहली बार जितेंद्र आईआईटी पहुंचे थे। फिलहाल वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका में सेटल्ड हैं। गौरतलब है कि गांव के सैकड़ों आईआईटियन देश-दुनिया में अच्छी जगहों पर सेटल्ड हैं। गांव वाले बताते हैं कि जो छात्र सेटल्ड हो चुके हैं, वे गांव के अन्य छात्रों की मदद करते हैं। सहयोग की इसी भावना के चलते बुनकरों का यह गांव आज आईआईटी हब के रूप में पहचान बना चुका है। 12 देशों में काम करते हैं गांव के इंजीनियर पटवा टोली के इंजीनियर करीब 12 देशों में कार्यरत हैं। सबसे ज्यादा 22 लोग अमेरिका में हैं। जबकि गांव के कई इंजीनियर सिंगापुर, कनाडा, स्विट्जरलैंड, जापान, दुबई आदि देशों में काम कर रहे हैं। people  talking photoRead more…

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6. सिस्टम फेल के पास बच्चें

सिस्टम फेल के पास बच्चें

कुछ साल पहले सरकारी स्कूलों में यह संदेश आया कि कोई बच्चा स्कूल जाए न जाए या स्कूल की परीक्षा में फेल होने पर भी उसे पास जरुर किया जाएगा और स्कूल में पिटाई पर रोक लगा दी गई. इसका सिर्फ एक ही मतलब था कि बच्चे ज्यादा से ज्यादा स्कूलों मे दाखिला लें. उन दिनों मैनें भी बहुत टीचरों से बात की और कुल मिला कर यही निचोड निकाला कि ये सही नही है अगर बिना स्कूल आए बच्चे पास होते रहेंगें तो एक तो पढाई मे दिलचस्पी नही रहेगी और दूसरा  आगे जाकर यानि बडी क्लासों में बहुत दिक्कत आएगी  क्योकिबचपन में  पढाई तो की नही थी और फिर वो सहारा लेंगें नकल का या फिर ऐसे लोगों को खोजेंगें जो पेपर लीक करते हो और पैसे देकर खरीदेंगें.

2009 में RTE एक्ट लागू होने के बाद शिक्षक बच्चों को फेल नही कर सकते

 

हुआ भी यही … आज हमारे सिस्टम में सबसे बडी समस्या ही नकल या पैसे देकर पेपर खरीदना तक ही सिमट कर रह गई है और बच्चों पर गुस्सा व्यक्त कर नही सकते तो बच्चे टीचर के सामने जुबान चलाने लगे हैं.

आज कुछ ऐसी ही मुसीबतो को गांव के लोगों ने तब महसूस किया जब लगातार दसवी और बारहवी के नतीजे खराब आए जा रहे थे  और मोर्चा खोल दिया कि हमारे बच्चे  जब स्कूल ही नही आते, पढते नही हैं तो पास  किसलिए करते हो…एक खबर के मुताबिक पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने भी माना  कि बच्चों को फेल न करने का प्रवाधान गलत था. इसी मजबूरी के चलते पाचंवी और आठवी क्लास के बोर्ड भी खत्म कर दिए थे.

अब केन्द्र को ये अनुरोध किया गया है कि फेल न करने के प्रावाधान पर संशोधन करें और 80% हाजिरी अनिवार्य कर दी जाए.

बेशक,  बच्चे का सुखद भविष्य देखना है तो यह करना ही पडेगा  बल्कि अगर टीचर पढाई के मामले मॆ सख्ती भी दिखाए तो गलत नही हां शारीरिक तौर पर नही पर डांट डपट कर भी बच्चे के मन में पढाई के प्रति जागरुकता लानी ही पडेगी अन्यथा  सख्ती न दिखाने की दशा में नकल और पेपर लीक जैसे धटनाए होती रहेगी और जो बच्चे वाकई में  पढने वाले हैं उन  बच्चों के जीवन से खिलवाड होता रहेगा.

सिस्टम फेल के पास बच्चे

 

Quality Education Should Not Remain a Distant Dream

Since the last decade, Annual Report on School Education has been presenting a realistic picture of government schools. But governments apparently are not worried as the system ensures inbuilt ‘unaccountability’. In Uttar Pradesh, 72,825 teacher vacancies should have been filled in 2011, but the system remained unconcerned for all these years. It’s only now, under repeated Supreme Court directions, that things have staring moving. There are over a million vacant posts of teachers in the country. Nowhere has been a single person removed or put in jail for such a shameful situation. Even the much-hyped implementation of the Right to Education Act (RTE) was ‘successful’ only on papers, nothing changed in functional terms in sarkari schools.

Over the years, even a cursory look at annual reports of education ministries of the Union and state governments would present a very encouraging scenario. More schools, rooms and teacher positions, significant improvement in enrolments, more children covered under mid-day meal scheme, more officers, more schemes, and much more. All this positivity evaporates once one visits a few government schools anywhere—cities, towns or villages. There is a rare uniformity in the school functioning across the states. Only one inference emerges: is it really impossible to mend these schools? Private schools referred to as ‘public schools’ are mushrooming, and everyone seems to love this phenomenon. To put their child in a public school is the dream of every parent in the country, including even the illiterate families. Only those short of resources or constrained by factors like location reluctantly look towards government schools. One must concede the existence of a small percentage of good government schools and committed teachers. Even this exceptional class suffers because of the overall loss of credibility. See more…

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7. हजम नही हुई …

हजम नही हुई बात …

दिल्ली का बजट पेश किया जा रहा था और मैं और मेरी सहेली  मणि बाते करते करते मिलावट तक जा पहुंचे मुझे हैरानी हुई कि वो मिलावट के बारे मे ज्यादा नही बोल रही. कारण पूछ्ने पर उसने बताया कि कुछ खास नही बस बचपन में वो पैंसिल का सिक्का बहुत खाती थी. अरे !! मैने कहा कि मुल्तानी मिट्टी और स्लेटी तक तो ठीक है पर मैने पैंसिल का सिक्का तो मैने भी कभी नही खाया.

उसने बताया कि  जब उसका बेटा  छोटा था और वाकर में बाहर खडा हो जाता था तो कई बार लगता था कि चुपचाप क्या कर रहा है आवाज भी नही आ रही  तब देखती  कि वो बडे मजे से गमले के पास खडा होकर कभी मिट्टी खाता तो कभी  दीवार से खुरच खुरच कर दीवार की पापडी बहुत शौक से खाता था.

बाद में पता चला कि ये कैल्शियम की कमी से होता है.

पिछ्ले दिनों मैगी के साथ साथ जब दूध मे भी मिलावट का सुना तो वो खुद खालिस दूध लेने  दूधिए के पास जाने लगी पर दूध इतना खालिस था कि पचा ही नही. पेट दर्द रहने लगा इसलिए  उसमे पानी मिलाकर पीना पडा.

ह हा हा !!मैने कहा कि असल में, हमारा शरीर मिलावट का इतना आदी हो चला है कि खालिस चीज हजम ही नही होती… मुझे मार्किट जाना था तो मैने उससे जाते हुए पूछा कि तेरे लिए पैंसिल लाऊ स्लेटी लाऊ या मुल्तानी मिट्टी  क्या खाएगी !!!

 

| Harit Khabar

किसी भी प्रकार की खाद्य सामग्री में मिलावट का शक होने पर प्रारंभिक जांच एफडीए (Food and Drug Administration) के अधिकारी करते हैं। ये अधिकारी दुकान या उस जगह पर जहाँ कथित मिलावटी खाद्य पदार्थ बन रहा है, से नमूने इकठ्ठा कर आगे की जाँच के लिए प्रयोगशाला में भेजते हैं। पर एफडीए के अधिकारियों का कहना है कि वह हर जगह जा-जा कर ऐसा कर नहीं सकते क्योंकि एक तो केवल शक के आधार पर वे कितनी जगहों से नमूने इकठ्ठा करें? दूसरा, एफडीए के पास साधनों की कमी है और तीसरी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग के पास अधिकारियों की भी इतनी अधिक संख्या नहीं है कि आसानी से हर संदिग्ध जगह से नमूने लिए जा सके। See more…

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8. पतंग बनी तीर कमान

पतंग बनी तीर कमान

पतंग का मौसम वैसे तो उड़न छू हो गया था पर नन्हे गोलू को पतंगों का इतना शौक था कि उसने पतंग सम्भाल कर रखी हुर्इ थी। वह सोच रहा था किसी दिन जब तेज हवा चलेगी तब वो पतंग उड़ाऐगा। एक दिन शाम को जब मौसम सुहावना हुआ। बादलों के साथ-साथ हवा भी खूब तेज चलने लगी तब गोलू अपनी पतंग लेकर छत पर जा पहुँचा। वहाँ अचानक ड़ोर उसके पाँव में उलझ गर्इ और पतंग दो जगह से फट गर्इ। गोलू उदास होकर बैठ गया कि अब क्या करे किससे खेलें।

वो चुपचाप बैठ कर पतंग को उल्ट-पुल्ट कर देखने लगा तभी उसके मन में एक विचार आया। उसने बड़ी सफार्इ से पतंग का कागज फाड़ ड़ाला। अब उसमें रह गर्इ दो सीखनुमा ड़ण्ड़ी । एक थोड़ी गोलार्इ में और एक सीधी। उसने गोलार्इ वाली ड़ण्ड़ी और लम्बी ड़ण्ड़ी को अलग करके गोलार्इ वाली ड़ण्ड़ी में एक दूसरे तरफ लम्बार्इ में धागा बाँध दिया और वो बन गया कमान के आकार का और जो दूसरी ड़ण्ड़ी थी वो अपने आप तीर बन गर्इ थी। गोलू अपनी इस उपलबिध पर बड़ा खुश हुआ कि पतंग से उसने तीर-कमान बना लिया और वो नीचे अपने मम्मी-पापा को बताने भागा। उन्होनें भी उसके विचार की बहुत तारीफ की और समझाया भी कि तीर कमान ध्यान से खेलना किसी को चोट ना पहुँचें। मम्मी की बात का समर्थन करता हुआ वो अपने दोस्त मोना और पिन्टू को दिखाने उनके घर भागा।

 

 

पतंग बनी तीर कमान … कैसी लगी … जरुर बताईएगा :)

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9. एकांत

cartoon lady sitting by monica gupta

कई बार खुद को अकेला छोड देना अच्छा होता है… भीड में तो हम हर समय ही धिरे रहते हैं शोर शराबा दिन भर  के तनाव को और बढा देता है ऐसे में एकांत बहुत जरुरी हो जाता है कई बार खुद से ही  कुछ सवाल करने होते हैं तो कई बार खुद के किए सवालों के उत्तर तलाशने होते हैं जो एकांत में ही मिलते हैं .. एकांत,  किसी समुद्र का किनारा हो सकता है या किसी पार्क में पेड के नीचे हो सकता है या फिर अपने कमरे मे भी हो सकता है. जहां पूरी शांति हो … बडे बडे नेता हो या कोई फिल्मी कलाकार सब एकांत के बहाने खोजते रहते हैं और कई बार उसे छुट्टियों का नाम भी दे देते हैं

कुल मिला कर खुद से बात करना बहुत जरुरी  है…

 

 

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एकांत व मौन ये दो ऐसे साधन है, जिनका अभ्यास हर व्यक्ति को करना चाहिए। जीवन की विकट परिस्थितियों में जब कोई भी व्यक्ति साथ नहीं देता, मदद नहीं करता, बल्कि विरोध में खड़ा हो जाता है, ऐसी परिस्थितियों में एकांत व मौन उन अस्त्रों के समान होते हैं, जो हमारी रक्षा करते हैं।

एकांत में जहां व्यक्ति, अन्य दूसरे व्यक्तियों के सम्पर्क से बचता है वहीं मौन में वह किसी से कुछ भी बोलता नहीं है। शांत रहता है, केवल देखता है। एकांत व मौन अपने जीवन में शक्ति अर्जन करने के साधन है जिसके माध्यम से हम विरोधी शक्तियों व विपरीत परिस्थितियों का मुकाबला कर सकते हैं, जब हम किसी से मिलते नहीं है, एकांत में रहते हैं, तो हम स्वयं के सबसे करीब होते हैं। इस समय हमें आत्मचिंतन करने का अधिक समय मिल पाता है।

हम स्वयं के प्रति अपनी क्षमताओं के प्रति आसानी से एकाग्र हो जाते हैं। यद्यपि बाहरी परिस्थितियों द्वारा मिलने वाला तनाव हमें एकाग्र होने से बाधा पहुंचाता है, लेकिन फिर भी एकांत होने पर हमें स्थिर व एकाग्र होने से रोक नहीं सकता। इन परिस्थितियों से निपटने के लिए हमें क्या उपाय करना चाहिए, किस तरह इनका सामना करना चाहिए। हमें क्या-क्या सहायता मिल सकती है और अपनी अतिरिक्त क्षमताओं को बढ़ाने के लिए हमें क्या करना चाहिए। मौन के माध्यम से हम अपनी वाक क्षमता को नियंत्रित करते हैं। हमारे शरीर व मन से अपार ऊर्जा का बहाव होता है, बोलने के द्वारा भी हमारी बहुत सारी ऊर्जा व्यय होती है। यदि हम मौन धारण करते हैं तो इस ऊर्जा को व्यय होने से बचा सकते हैं और इसका सदुपयोग कर सकते हैं। अनर्गल बोलना, अत्यधिक बोलना, चर्चाएं करना आदि इसलिए साधनाकाल में वर्जित है, जितना आवश्यक व उपयोगी है, उतना ही बोलना चाहिए, अन्यथा चुप रहना चाहिए। हमें सार्थक बोलना चाहिए और अधिक सुनना चाहिए। इसलिए परमात्मा ने इस मानव शरीर में दो कान और एक मुंह दिया है, ताकि हम दो कानों से सुने और उसका कम शब्दों में उचित प्रत्युत्तर दें, साथ में अपनी भावाभिव्यक्ति भी करें।

इसके अतिरिक्त यदि हमें कोई अप्रिय व असहनीय कठोर बातें सुनने को मिलती है, तो उन्हें एक कान से सुनो और दूसरे से निकाल दो। उन पर ध्यान न दें, क्योंकि उन पर ध्यान देने का मतलब है स्वयं को दुखी व परेशान करना। कई बात ऐसी बातों को सुनने से व्यक्ति के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है और वह फिर दूसरे के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाले कार्य करने लगता है। कठोर बातें, कटुक्ति व्यंग्य आदि सुनने से व्यक्ति का क्रोध व अहंकार जाग्रत होता है, जो उसे दिग्भ्रमित कर सकता है। इसलिए हमें इतना समझदार तो होना ही चाहिए कि हम किस तरह की बातों को ध्यान से सुने। किन बातों पर ध्यान न दें। कैसी वाणी बोले, कितना बोले और क्या बोले, इस संसार में सुनने योग्य वही बातें हैं, जो महापुरुषों ने जीवन के संदर्भ में व्यक्ति के लिए कही है। वहीं बातें हमारा मार्गदर्शन करती है। Read more…

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10. तुलसी जी की महिमा

तुलसी जी की महिमाtulsi by monica gupta

 

तुलसी जी की महिमा

घर पर मेरी सहेली आई हुई थी. उसने बाहर तुलसी लगी देखी और बोली बहुत खुश होकर बोली …  वाह तुम्हारे तो तुलसी जी लगी हुई है और वो भी बहुत खिली खिली. मैने हैरानी से कहा तुलसी जी.. उसने बोला कि तुलसी जी बहुत आदर मान का पौधा है.

श्री तुलसी प्रणाम
वृन्दायी तुलसी -देव्यै प्रियायाई केसवास्य च,विष्णु -भक्ति -प्रदे देवी सत्यवात्याई नमो नमः”

मैं श्री वृंदा देवी को प्रणाम करती हूँ जो तुलसी देवी हैं , जो भगवान् केशव की अति प्रिय हैं – हे देवी !आपके प्रसाद स्वरूप , प्राणी मात्र में भक्ति भाव का उदय होता है.

उसने बताया कि तुलसी जी को कई नामों से पुकारा जाता है. इनके आठ नाम मुख्य हैं – वृंदावनी, वृंदा, विश्व पूजिता, विश्व पावनी, पुष्पसारा, नन्दिनी, कृष्ण जीवनी और तुलसी.

 

विश्व में तुलसी को देवी रुप में हर घर में पूजा जाता है. इसकी नियमित पूजा से व्यक्ति को पापों से मुक्ति तथा पुण्य फल में वृद्धि मिलती है. यह बहुत पवित्र मानी जाती है और सभी पूजाओं में देवी तथा देवताओं को अर्पित की जाती है. पद्म पुराण में कहा गया है कि  नर्मदा दर्शन, गंगा स्नान और तुलसी पत्र का संस्पर्श ये तीनो समान पुण्य कारक है .

दर्शनं नार्मदयास्तु गंगास्नानं विशांवर, तुलसी दल संस्पर्श: सम्मेत त्त्रयं”

मैं बहुत हैरानी से उनकी बात सुन रही थी. गंगा स्नान, नर्मदा दर्शन के समान ही इसे भी पवित्र माना गया है सुनकर हैरानी भी हुई और खुशी भी.

उन्होनें बताया कि ऐसा भी सुनने में आता है कि  जो लोग प्रातः काल में गत्रोत्थान पूर्वक अन्य वस्तु का दर्शन ना कर सर्वप्रथम तुलसी का दर्शन करते है उनका अहोरात्रकृत पातक सघ:विनष्ट हो जाता है.

ज्यादा गूढ बातें तो मुझे समझ नही आई पर बाते करते करते हम वही बैठ गए. तभी मुझे ख्याल आया मैने एक बार तुलसी विवाह के बारे में सुना था . मैने  पूछा कि आखिर ये  तुलसी विवाह क्या होता है ?

उन्होनें बताया प्राचीन काल में जालंधर नामक राक्षस ने चारों तरफ़ बड़ा उत्पात मचा रखा था। वह बड़ा वीर तथा पराक्रमी था। उसकी वीरता का रहस्य था, उसकी पत्नी वृंदा का पतिव्रता धर्म। उसी के प्रभाव से वह सर्वजंयी बना हुआ था। जालंधर के उपद्रवों से परेशान देवगण भगवान विष्णु के पास गये तथा रक्षा की गुहार लगाई। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय किया। भगवान ने उनके पति का रुप धरा और उसके पास पहुंच गए. जब वृंदा ने देखा कि उसके पति आए हैं तो वो पूजा से उठ गई. और उनके चरण छू लिए … बस वही , उधर, उसका पति जालंधर, जो देवताओं से युद्ध कर रहा था, वृंदा का सतीत्व नष्ट होते ही मारा गया।

जब वृंदा को इस बात का पता लगा तो क्रोधित होकर उसने भगवान विष्णु को शाप दे दिया, ‘जिस प्रकार तुमने छल से मुझे पति वियोग दिया है, उसी प्रकार तुम भी अपनी स्त्री का छलपूर्वक हरण होने पर स्त्री वियोग सहने के लिए मृत्यु लोक में जन्म लोगे।’ यह कहकर वृंदा अपने पति के साथ सती हो गई।

जिस जगह वह सती हुई वहाँ तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। एक अन्य प्रसंग के अनुसार वृंदा ने विष्णु जी को यह शाप दिया था कि तुमने मेरा सतीत्व भंग किया है। अत: तुम पत्थर के बनोगे। विष्णु बोले, ‘हे वृंदा! यह तुम्हारे सतीत्व का ही फल है कि तुम तुलसी बनकर मेरे साथ ही रहोगी। जो मनुष्य तुम्हारे साथ मेरा विवाह करेगा, वह परम धाम को प्राप्त होगा।’ बिना तुलसी दल के शालिग्राम या विष्णु जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। शालिग्राम और तुलसी का विवाह भगवान विष्णु और महालक्ष्मी के विवाह का प्रतीकात्मक विवाह है।

तुलसी का पत्ता, फूल, फल, मूल, शाखा, छाल, तना और मिट्टी आदि सभी पावन हैं। तुलसी दर्शन करने पर समस्त पापों का नाश होता है, स्पर्श करने पर शरीर पवित्र होता है, प्रणाम करने पर रोगों का निवारण करती है, जल से सींचने पर यमराज को भी भय पहुंचाती है, तुलसी का पौधा लगाने से जातक भगवान के समीप आता है। तुलसी को भगवद चरणों में चढ़ाने पर मोक्ष रूपी फल प्राप्त होता है।

अपने घर में एक तुलसी का पौधा जरूर लगाएं। इसे उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्वी दिशा में लगाएं या फिर घर के सामने भी लगा सकते हैं। पारंपरिक ढंग के बने मकानों में रहने वाले ज्यादा सुखी और शांत रहते थे।

तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी तुलसी एक औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बुटि के समान माना जाता है।तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है। तुलसी का पौधा घर में रहने से उसकी सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और हवा में मौजूद बीमारी के बैक्टेरिया आदि को नष्ट कर देती है।मान्यता  यह भी है कि तुलसी का पौधा घर में होने से घर वालों को बुरी नजर प्रभावित नहीं कर पाती और अन्य बुराइयां भी घर और घर वालों से दूर ही रहती हैं। तुलसी का पौधा घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और कीटाणुओं से मुक्त रखता है। इसके साथ ही देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी उस घर पर बनी रहती है।

अरे वाह तुलसी जी तो गुणों की खान है …plannt

उनके जाने के बाद मैने भी नेट पर सर्च किया तो बहुत बाते लिखी हुई हैं तुलसी जी के बारे में …

1 तुलसी की पत्तियों का रस शहद के साथ मिलाकर चाटने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। इसे एक प्रकार का टॉनिक माना जाता है।

2 तुलसी की पत्तियों का रस और अदरक मिलाकर चाटने से खांसी में आराम मिलता है और गले की खराश भी दूर होती है।

3 चेहरे पर मुंहासे और दाग-धब्बे होने पर तुलसी की पत्तियों का रस और नींबू के रस को मिलाकर लगाने से चेहरा साफ होता है। खुजली वाले स्थान पर लगाने से खुजली से भी आराम मिलता है।

4 जुकाम होने पर तुलसी और गुड़ से बना काढ़ा पीने से राहत मिलती है।

5 विषैले कीड़े के काटने पर जहर का असर कम करने के लिए तुलसी का रस प्राथमिक उपचार के काम आता है। जिस स्थान पर तुलसी का पौधा लगा हो उसके आस-पास का वातावरण शुद्ध होता है।

6 सफेद और काली तुलसी दोनों में समान गुण होते हैं।

7 तुलसी की पत्तियों को चाय की तरह उबाल कर पीने से पेचिश में आराम मिलता है।

तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से पित्त के विकार में लाभ मिलता है। जहां तुलसी का पौधा लगा होता है वहां लक्ष्मी जी निवास करती हैं। See more…

तुलसी जी की महिमा अपरमपार है

1 मान्यता है कि तुलसी का पौधा घर में होने से घर वालों को बुरी नजर प्रभावित नहीं कर पाती और अन्य बुराइयां भी घर और घरवालों से दूर ही रहती हैं।

2 तुलसी का पौधा घर का वातावरण पूरी तरह पवित्र और कीटाणुओं से मुक्त रखता है। इसके साथ ही देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी उस घर पर बनी रहती है।

3 कार्तिक माह में विष्णु जी का पूजन तुलसी दल से करने का बडा़ ही माहात्म्य है। कार्तिक माह में यदि तुलसी विवाह किया जाए तो कन्यादान के समान पुण्य की प्राप्ति होती है।

पदम पुराण में कहा गया है की तुलसी जी के दर्शन मात्र से सम्पूर्ण पापों की राशि नष्ट हो जाती है,उनके स्पर्श से शरीर पवित्र हो जाता है,उन्हें प्रणाम करने से रोग नष्ट हो जाते है,सींचने से मृत्यु दूर भाग जाती है,तुलसी जी का वृक्ष लगाने से भगवान की सन्निधि प्राप्त होती है,और उन्हें भगवान के चरणों में चढाने से मोक्ष रूप महान फल की प्राप्ति होती है।

अंत काल के समय ,तुलसीदल या आमलकी को मस्तक या देह पर रखने से नरक का द्वार बंद हो जाता है। तुलसी का धार्मिक महत्व तो है ही लेकिन विज्ञान के दृष्टिकोण से भी तुलसी एक औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी को संजीवनी बुटि के समान माना जाता है।तुलसी में कई ऐसे गुण होते हैं जो बड़ी-बड़ी जटिल बीमारियों को दूर करने और उनकी रोकथाम करने में सहायक है।

तुलसी का पौधा घर में रहने से उसकी सुगंध वातावरण को पवित्र बनाती है और हवा में मौजूद बीमारी के बैक्टेरिया आदि को नष्ट कर देती है। तुलसी की सुंगध हमें श्वास संबंधी कई रोगों से बचाती है। साथ ही तुलसी की एक पत्ती रोजाना सेवन करने से हमें कभी बुखार नहीं आएगा और इस तरह के सभी रोग हमसे सदा दूर रहते हैं। तुलसी की पत्ती खाने से हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता काफी बढ़ जाती है।

1. तुलसी रक्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियंत्रित करने की क्षमता रखती है।

2. शरीर के वजन को नियंत्रित रखने हेतु भी तुलसी अत्यंत गुणकारी है। इसके नियमित सेवन से भारी व्यक्ति का वजन घटता है एवं पतले व्यक्ति का वजन बढ़ता है यानी तुलसी शरीर का वजन आनुपातिक रूप से नियंत्रित करती है।

3. तुलसी के रस की कुछ बूंदों में थोड़ा-सा नमक मिलाकर बेहोश व्यक्ति की नाक में डालने से उसे शीघ्र होश आ जाता है।

4. चाय बनाते समय तुलसी के कुछ पत्ते साथ में उबाल लिए जाएं तो सर्दी, बुखार एवं मांसपेशियों के दर्द में राहत मिलती है। 5. 10 ग्राम तुलसी के रस को 5 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से हिचकी एवं अस्थमा के रोगी को ठीक किया जा सकता है। 6. तुलसी के काढ़े में थोड़ा-सा सेंधा नमक एवं पीसी सौंठ मिलाकर सेवन करने से कब्ज दूर होती है।

7. दोपहर भोजन के पश्चात तुलसी की पत्तियां चबाने से पाचन शक्ति मजबूत होती है।

8. 10 ग्राम तुलसी के रस के साथ 5 ग्राम शहद एवं 5 ग्राम पिसी कालीमिर्च का सेवन करने से पाचन शक्ति की कमजोरी समाप्त हो जाती है।

9. दूषित पानी में तुलसी की कुछ ताजी पत्तियां डालने से पानी का शुद्धिकरण किया जा सकता है।

10. रोजाना सुबह पानी के साथ तुलसी की 5 पत्तियां निगलने से कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों एवं दिमाग की कमजोरी से बचा जा सकता है। इससे स्मरण शक्ति को भी मजबूत किया जा सकता है।

11. 4-5 भुने हुए लौंग के साथ तुलसी की पत्ती चूसने से सभी प्रकार की खांसी से मुक्ति पाई जा सकती है।

12. तुलसी के रस में खड़ी शक्‍कर मिलाकर पीने से सीने के दर्द एवं खांसी से मुक्ति पाई जा सकती है।

13. तुलसी के रस को शरीर के चर्मरोग प्रभावित अंगों पर मालिश करने से दाग, एक्जिमा एवं अन्य चर्मरोगों से मुक्ति पाई जा सकती है।

14. तुलसी की पत्तियों को नींबू के रस के साथ पीस कर पेस्ट बनाकर लगाने से एक्जिमा एवं खुजली के रोगों से मुक्ति पाई जा सकती है। Read more…

जय हो तुलसी जी की आप वाकई बहुमुल्य हैं. तुलसी जी की महिमा अपार है !!!

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11. फैशन और हम

फैशन और हम   फैशन फैशन फैशन … हर कोई फैशन करके रहना चाहता है फैशन की दुनिया में रहना चाहता है. इसमे बुराई नही है पर अपनी फिगर देख कर उसके हिसाब से पहनावा होगा तो देखने वाले को भी अच्छा लगेगा और ना ही हम मजाक का पात्र बनेगें. कई बार मोटी महिलाए फैशन के नाम पर टाईट कपडे पहन लेती है चलते उठते बैठते शरीर दिखता है तो वो मजाक का कारण बनती है कई बहुत उम्र की महिलाए चटक गहरे रंग पहन लेती हैं तो भी मजाक की पात्रा बनती हैं. और कई फैशन के चलते महिलाए हाई हील वाले चप्पल खरीद लेती हैं  और चल पाती नही जिससे मजाक का कारण बनती हैं. कई इतना भारी मेकअप कर लेती हैं कि सिर्फ हंसी का पात्र ही बन कर रह जाती है…

और आज तो मैने ऐसी खबर पढी कि हैरान ही रह गई … आप  भी जरुर पढिए

Woman lands in hospital after her skinny jeans cuts blood supply – ABP Live

http://www.abplive.in/movies/2015/06/23/article627451.ece/Woman-lands-in-hospital-after-her-skinny-jeans-cuts-blood-supplyAdelaide: An Australian woman whose skinny jeans cut off the blood supply to her calf muscles collapsed and was forced to crawl to seek help, media reported on Tuesday.

The 35-year-old woman from Adelaide, who doctors have labelled a “fashion victim”, suffered nerve damage severe enough to bring about numbness. She had to spend four days in hospital.

A consultant neurologist at the Royal Adelaide Hospital, Thomas Kimber said the woman’s decision to wear the restrictive leg-hugging denim had brought about the medical episode, ABC reported.

“She spent all that day really squatting down to help her relatives clean out cupboards,” he said, adding “she noticed that her legs were becoming increasingly uncomfortable as the day went on (but) didn’t really think much of it”.Kimber said the compression of two major nerves in the woman’s calf had caused her increasing weakness in her legs.

When the woman took a break with a walk in a park, she noticed her feet becoming increasingly weak before falling.

“By this time it was dark and quite late at night. She was unable to stand up again and really was there for some time before she could crawl to the side of the road, hail a cab and bring herself to the Royal Adelaide Hospital,” said Kimber.

The hospital staff had to cut the jeans due from the woman’s legs due to “massive swelling”. See more…

Image via www.abplive.in

अब आप खुद ही फैशन से होने वाले लाभ और हानि का आंकलन कीजिए और अपनी राय बनाईए

फैशन और हम

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12. गंदगी प्रेमी

गंदगी प्रेमी

मेरी एक सहेली हिल स्टेशन पर रहती है. कल ही उससे बात हो रही थी कि कैसा मौसम है. कैसी भीड है वहां तो वो मायूस सी बोली कि अब तो जल्दी से लोगों की छुट्टियां खत्म हो बस..जाए सब जल्दी से . अरे !!! ऐसा क्यो?? मेरे पूछने पर उसने बताया कि लोग धूमने आते हैं बहुत अच्छा लगता है पर गंदगी भी बहुत फैला जाते हैं खासकर सडक पर घूमते घूमते… कुछ खाएगें तो पीएगें तो… पूरी सडक मानो डस्ट बीन समझते हैं… वो ये सोचते ही नही हैं कि यहां भी लोग रहते हैं ना जाने कब समझ आएगी अब तो सच पूछो तो छुट्टियों के नाम से टेंशन ही हो जाती है.उसकी बात ने बहुत सोचने पर मजबूर कर दिया.

पता नही हम लोग सफाई का  स्वच्छता का ख्याल रखते क्यों नही है. घर से बाहर निकलो तो गंदगी पार्क में जाओ तो गंदगी. घर का कूडा बस अपने घर से बाहर  निकालना आता है कि बस अपना घर साफ रहे बाकि किसी की चिंता नही.

ऐसे ही बाजारों में दुकानों पर होता है. सुबह सवेरे सभी झाडू लगा कर अपनी  अपनी दुकान के आगे का कूडा साईड पर रख देगें और ऐसा हर दुकान दार करता है कुछ एक कूडे को आग भी लग अदेते हैं पर शाम तक वो कूडा वही पडे पडे लोगों के पावों से लगता वापिस दुकानों के सामने आ जाता है और फिर वही गंदगी … खाने पीने की स्टालस के आगे तो और भी बुरा हाल होता हैडस्ट बीन होते हुए भी उसे इस्तेमाल नही किया जाता.

वैसे आप तो ऐसे गंदगी प्रेमी  बिल्कुल नही होंगें.. है ना … और अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है.

 

cleaning Ganga campaign should not be limited to Photography

उत्तराखंड बाढ़ और भूस्खलन त्रासदी के दो साल पूरा होने पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उत्पादन व उपभोग के लिए हुए विकास का प्रकृति बदला ले रही है। उन्होंने कहा, ‘हर जगह बांधों व बिजलीघरों का निर्माण हो रहा है जो प्राकृतिक आपदाओं का कारण बन रही है। हमें इस बारे में सोचने की जरूरत है।’

प्रधानमंत्री द्वारा चलाए जा रहे गंगा सफाई अभियान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि यह राष्ट्र के धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहर को बचाने के लिए है। प्रकृति को दरकिनार करने पर न तो हम अपना जीवन बचा सकेंगे और न ही धर्म की रक्षा कर पाएंगे। See more…

गंदगी प्रेमी

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13. Short nap

Short nap

कल हाई वे जाते हुए एक कार हमारे आगे निकली और कुछ ही देर में हमारे देखते ही देखते सीधा सडक से नीचे उतरती चली गई. अचानक उसके ब्रेक की आवाज से हमारा ध्यान गया. ना कार का टायर फटा न सामने से कोई पशु आया और न ही चालक ने शराब पी रखी थी… शुक्र है कि बहुत बचाव हो गया पर हुआ क्या ??? पूछने पर उसने झेपते हुए बताया कि दो चार दिन से आफिस में बहुत काम था और दिल्ली जाना भी जरुरी था.

थकावट बहुत थी और नींद भी पूरी नही हुई थी शायद अचानक कार चलाते झपकी आ गई थी.अरे बाप रे..बेशक वाहन चलाते हुए मोबाईल पर बात करना खतरनाक है पर बिना नींद पूरी हुए वाहन चलाना भी कम खतरनाक नही …

वैसे बस पर भी लिखा होता है कि यात्री का 1 , 2 और 3 सीट पर सोना मना है वो इसलिए लिखा होता है कि  अक्सर यात्री को सोता देख कर वाहन चालक को भी नींद आ जाती है…

पलक झपकते ही कोई बहुत बडी दुर्धटना न हो जाए. इसलिए घर से तरोताजा होकर ही निकलिए …वैसे आप तो ऐसा नही करते होंगें और अगर करते हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है.. आपकी जिंदगी की यात्रा शुभ रहे

short nap बेशक फायदे बहुत है पर अगर आप किसीकार्यक्रम में मंच पर ही झपकी लेने लग जाएगें तो हंसी का पात्र बन जाएगें और ड्राईव करते झपकी लेंगें तो  जान लेवा हो जाएगी … क्योकि भी चीज जिंदगी से बढी नही इसलिए अगर जिंदगी से सच्चा प्यार है तो टेंशन, झपकी थकावट सब घर पर  छोड कर ही निकलना बेहतर है….

 

Hints From Heloise: Power up with a nap! – The Washington Post

Dear Readers: Are you fully awake? Are you TIRED? Are you functioning, but sort of on 3/4 power? You could be one of the millions and millions of folks who are sleep-deprived! We work many hours, do errands on the way home, fight traffic and worry about late buses and trains. Then we come home and there is more to do. If you can find 20-30 minutes for a power nap, it could help tremendously.

Try to find a quiet spot (or wear earplugs), keep light to a minimum (or cover your eyes with something) and find the coolest (temperature) place you can.

If you can’t nap (especially at work), try for a short break — walk around the office or outside. Even go into a bathroom stall and close your eyes, block out noise and quiet your mind — yes, I’ve done this! — Heloise See more…

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14. Not a good idea

 

Not a good idea कुछ देर पहले कुछ स्कूली बच्चे घर के सामने से बाते करते हुए जा रहे थे. एक बोला अरे यार तूने मोदी को देखा. सफेद कुर्ता पजामा पहना हुआ था. दूसरा हंसता हुआ बोला ओ बेटे तू यकीन नही करेगा मेरे पापा, भाईयों बहनों इतना अच्छा बोलतें हैं कि मोदी भी शरमा जाए..

फिर एक अरविंद केजरीवाल का मजाक बनाते हुए कहना लगा कि हमारी तो औकात ही क्या है जी आम आदमी हैं ही हम तो … और फिर अपनी क्लास टीचर का मजाक उडाते वो तो आगे बढ गए पर मैं सोच रही थी कि हम किस तरह से मजाक बनाने लगें हैं. आदर मान देकर बोलना तो लगभग समाप्त ही हो चुका है.

Not a good ideaअब तो आखों की शर्म भी नही रही. ऐसे में, अगर घर के बडे ही बच्चों को आदर मान सीखाने की बजाय दूसरो का मजाक कैसे बनाना है यह सीखाएगें तो क्या होगा आप सोच भी नही सकते … बेशक इसमे टीवी चैनल की भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका बन जाती है. हमारे घर के बच्चे आदर दे मान सम्मान से बात करेंगें तो निसन्देह बहुत अच्छा लगेगा.  अन्यथा कोई बडी बात नही कल को आप और हम भी  इसका शिकार बन गए तो तो..तो … तो …!!! :roll:

 

Not a good idea

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15. kitchen is not kitchen

kitchen is not kitchen  जरुर आप सोच रहे होंगें कि ये क्या ?? इसका मतलब क्या है ?? तो बताती हूं … बताती हूं …असल में हुआ क्या कि मेरी एक जानकर ब्यूटी पार्लर जा रही थी बोली तू भी चल बस दस मिनट लगेग़ें … मैं चल दी. वहां उसे आखॆ बंद करके कुर्सी पर बैठा दिया. तौलिया दे दिया और  चेहरे को साफ करके ब्यूटी मास्क लगा दिया. कुछ देर बाद वो भी साफ कर दिया  उसने पांच सौ रुपए थमाए और हम बाहर आ गए. मैं हैरान थी कि इतने पैसे … उसने कहा कि पता नही वो क्या लगाती हैं पर चेहरे को ताजगी मिलती है.

अब मैं उसे धक्के से अपने घर ले गई और रसोई के सामने जाकर खडा कर दिया वो  पूछती उससे पहले मैने बोला kitchen is not kitchen ये है ब्यूटी पार्लर. उसने हैरानी से बोला रसोई और ब्यूटी पार्लर?? मैने कहा बिल्कुल और वो भी तुम्हारे वाले पार्लर से भी अच्छा … मैने उसे पूछा कि क्या उसे पता है कि उसके चेहरे पर क्या क्या लगाया … उसने कहा नही !!! मैने बताया कि पहले तो गुलाब जल से चेहरा साफ कर दिया फिर आखों पर खीरा काट कर रख दिया और कच्चा आलू काट कर चेहरे पर हलके हल्के रगड दिया और फिर उसे साफ करके कच्चा दूध लगा दिया और ले लिए 500 रुपए.

अब ये मेरा भी ब्यूटी पार्लर है और मेरा क्या… हर घर का किचन ब्यूटी पार्लर होता है क्योकि जो चीजे भी हम सुंदर होने के लिए इस्तेमाल करते हैं वो सभी यहां होती हैं और फिर भी हम पार्लर जाना चाहते है.

सुंदरता के लिए बेसन, मुलतानी मिट्टी, गेहूं का चोकर, गुलाब जल, हल्दी, चने की दाल, कच्चा दूध, मलाई, देसी घी, शहद , नींबू, और संतरे के छिलके. यह सब घर मे होते हैं और मात्र पाचं से दस मिनट में हम अपने चेहरे को चमका सकते हैं तो फिर पार्लर मे जाकर समय और पैसा किसलिए बर्बाद करना. बालों की सुंदरता के साथ साथ पैडीक्योर और मैनीक्योर भी इतना अच्छा होता है  कि हाथ हमेशा मुलायम रहतें हैं  ..

कुछ पल तो वो चुप रही फिर बोली कि  जानकारी तो उसे भी इन छोटी छोटी सी बातों की सारी है पर … असल में , उसकी सोसाईटी की सभी महिलाए पार्लर जाती हैं इसलिए इसे भी अपना स्टेटस दिखाने के लिए जाना पडता है.

नही … मैं बिल्कुल असहमत हूं .. हम किसलिए दूसरों की नकल करें … शायद वो समझ गई थी वो मुझसे हंसती हुई बोली अब चले मेरे घर क्योकि  my kitchen is not kitchen… !!!

 

 

फैशियल रिजल्ट फेस जब ज्यादा मुरझा जाए तो, 4-5 दिन तक सुबह-शाम सिर्फ खीरें का टुकडा मलें और 15 मिनट तक रखने के बाद ठंडे पानी से धो लें। यह ना सिर्फ फेस का कलर साफ करता है। इससे दाग-धब्बे दूर हो कर फेस का कलर एकसार दिखायी देता है। अगर आप ऎसा रोज करती हैं, तो महंगी एंटीएजिंग क्रीम को बाय-बाय कर सकती हैं।

Natural home remedies to get beauty,

read more…Natural home remedies to get beautiful skin care tips See more…

beautiful face of lady photo

Simple Ways To Use Tamarind For Skin Whitening in Hindi | 4

स्‍वाद में खट्टी और मीठ्ठी इमली लगभग हर भारतीय रसोई में देखने को मिल जाती है। हम इसे मीठ्ठी कैंडी, जेली और चटनी के रूप में पसंद करते हैं। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि अपने स्‍वादिष्‍ट स्‍वाद के अलावा इमली स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी है, और इमली को अपने ब्‍यूटी रूटीन में भी शामिल किया जा सकता है?

यह तीखा फल एंटीऑक्‍सीडेंट, फ्लेवनॉइड और विटामिन सी और ए से भरपूर होता है, जो फ्री रेडिकल्‍स को बनने से रोकता है। इमली को त्‍वचा पर लगाने से जलन और सूजन दूर हाती है। साथ ही यह त्‍वचा की रंगत को निखारने के साथ-साथ काले धब्‍बे और पिगमेंटेशन को भी दूर करता है। इमली के गूदे से त्वचा को साफ करने से न सिर्फ मृत कोशिकाएं निकलती है बल्कि इसमें जो एन्टीऑक्सीडेंट, फाइबर, विटामिन बी और सी होता है वह त्वचा से भीतरी सौन्दर्य को निखारने में भी मदद करता है। आइए जानें आप इमली को अपने फेस मास्‍क में कैसे शामिल कर सकते हैं।

इमली के पैक को लगाने से आपके चेहरे पर तुरंत निखार आ जाता है। लेकिन ध्‍यान रहें कि आप कच्‍ची इमली को इस्‍तेमाल नहीं कर सकते क्‍योंकि यह आपकी त्‍वचा में जलन पैदा कर सकती है। इसलिए 30 ग्राम इमली को 100 मिलीलीटर पानी में उबाल लें। कुछ मिनटों के बाद इसका गूदा निकाल लें। तैयार गूदे में से एक चम्‍मच निकाल लें। इस गूदे में एक चुटकी हल्‍दी पाउडर मिलाकर अच्‍छे से मिक्‍स करके पेस्‍ट बना लें। इस पेस्‍ट को अपने चेहरे पर लगाकर 20 मिनट के लिए छोड़ दें, फिर गुनगुने पानी से चेहरे को धो लें।

घरेलू फेस मास्‍क में सभी प्रकार प्राकृतिक ब्‍लीचिंग गुण शामिल होते हैं। यह मुंहासों के निशान, काले धब्‍बे और पिगमेंटेशन को दूर करने में उपयोगी है। इमली त्‍वचा के टोन को हल्‍का करने में भी मदद करता है। इस मास्‍क को बनाने के लिए एक बाउल में तैयार गूदे की एक चम्‍मच लें। इसमें एक चम्‍मच नींबू का रस मिलाये। फिर इसमें एक चम्‍मच शहद मिलाकर अच्‍छे से मिक्‍स करके पतला पेस्‍ट बना लें। इसे पूरे चेहरे पर लगाकर 15 मिनट के लिए छोड़ दें। 15 मिनट के बाद इसे गुनगुने पानी से धो लें।

मृत कोशिकाओं से निजात पाने के लिए आप इमली का प्राकृतिक फेस स्क्रब बना सकते हैं। ऐसा करने से आपका चेहरा सुंदर होगा और इसकी रंगत लौटेगी। इमली में प्राकृतिक फ्रूट एसिड होता है, जो मृत कोशिकाओं को दूर करने में मदद करता है। इसमें मौजूद एएचए (अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड) एक्सफोलिटर के रूप में काम करता है। इमली के गूदे में एक चम्‍मच समुद्री नमक मिला लें। फिर इसमें एक चम्‍मच दही/क्रीम मिलाये। यह एक्‍सफोलिटर की तरह काम करके त्‍वचा से अतिरिक्‍त तेल को दूर करता है। ऑयली स्किन के लिए दही और नार्मल से ड्राई स्किन के लिए क्रीम इस्‍तेमाल करें। अच्‍छे से मिक्‍स करके इसका पेस्‍ट बनाकर अपने चेहरे पर लगाकर हल्‍के हाथों से सर्कुलर मोशन में स्‍क्रब करें।

हम सभी चाय के हाइड्रेटिंग गुणों से परिचित हैं। हरी और काली चाय में एंटी-एजिंग गुण होते है, जो मुक्त कणों के गठन को रोकते है। इसके अलावा यह फाइन लाइन और झुर्रियों को भी दूर करते है। इमली भी आपके चेहरे के लिए इसी तरह मददगार होती है। यह चेहरे की चमकदार और मुलायम बनाती है। इमली के तैयार गूदे की 2 चम्‍मच लें। और इसमें दो चम्‍मच चाय का पानी (पानी में उबली हुई चाय की पत्ती) मिलाये। क्‍लीजिंग के बाद कॉटन बॉल को इस टोनर में डूबाकर अपने चेहरे पर लगाये। अब त्‍वचा को प्राकृतिक रूप से टोनर को अवशोषित करने दें। तो अगली बार जब भी आप इमली की कैंडी या चटनी खाये, तो इस खट्टे फल को अपने ब्‍यूटी रूटीन में शामिल करना न भूले।

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तो अब आप समझ ही गए होंगें … है ना …my kitchen is not kitchen… !!!

 

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16. Charlie Chaplin Lines

charlienamespic 1pic2cartoon Chaplin by monica gupta

Charlie Chaplin Lines

हर दिल अजीज चार्ली चेप्लिन के जन्म के 125 वे वर्ष पर उनके फ़िल्मी जीवन में व्यंग्य की कथा के साथ-साथ उनकी स्क्रीन पर उपस्थिति का 100 वां वर्ष मनाने के लिए ये साल यानि 2015 चार्ली चैपलिन वर्ष के रूप में मना रहा है. हास्य रेखाओं के रचनाकारों ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए कार्टून और हास्य चित्र बनाए हैं।इनमें से लगभग 200 कार्टून एक विशेष पुस्तक में शामिल किए गए हैं.चार्ली चैपलिन लाइन्स’ के रूप में सबसे पहले भारत में चार्ली चैपलिन वर्ष समारोह 25-27 जून , NCPA मुंबई में कार्टून/करिकेचर प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है।

खुशी की बात ये भी हैं कि इसमे मेरे बनाए चार्ली चैपलिन भी शामिल हैं …. Charlie Chaplin Lines  :)

 

vintage everyday: Rarely Seen Candid Photos of Charlie Chaplin While Filming on Venice Beach, California, ca. 1914

These rarely seen photographs may be from on-site at the shooting of 1914 silent film Kid Auto Races at Venice (also known as The Pest) on Venice Beach, California.

This is an Essanay Studios film starring Charlie Chaplin in which his “Little Tramp” character makes his first appearance in a film exhibited before the public. See more…

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17. सम्मान का दुरुपयोग

सम्मान का दुरुपयोग   कुछ देर पहले नेट पर एक खबर पढी कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पूर्व क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद सचिन तेंदुलकर के ख़िलाफ एक जनहित याचिका स्वीकार की है. उन पर भारत रत्न के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है.

याचिका के अनुसार सचिन भारत रत्न सम्मान का ग़लत इस्तेमाल कर ‘व्यावसायिक उत्पादों के प्रचार के ज़रिए पैसा कमा रहे हैं’.

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर के मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और जस्टिस के के त्रिवेदी की खंडपीठ ने इसे मंज़ूर करते हुए असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल से पूछा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के मामलों में कोई दिशा-निर्देश दिए हैं.उन्हें इसके लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है. मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी.’पैसा कमा रहे हैं’ यह याचिका भोपाल के रहने वाले वीके नासवाह ने दायर की है. नासवाह ने कहा, “सचिन ने देश के लिए खेलते हुए बहुत नाम कमाया है. लेकिन अब वो देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान भारत रत्न की ‘प्रतिष्ठा’ का इस्तेमाल कर विभिन्न उत्पादों का प्रचार कर पैसा कमा रहे हैं. ये उस सम्मान की मर्यादा और सिद्धांतों से मेल नहीं खाता है.”

नासवाह ने अपनी याचिका में अनुरोध किया है कि सचिन के व्यावसायिक उत्पादों के प्रचार पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए या नैतिकता के नाते उन्हें इस पुरस्कार को लौटा देना चाहिए. ‘अगर वह ऐसा नही करते है तो केंद्र सरकार को उनसे सम्मान वापस ले लेना चाहिए.’सचिन अभी 12 उत्पादों का प्रचार कर रहे है.

सम्मान का दुरुपयोग

case against sachin tendulkar, demand to take back bharat ratan

Case Against Sachin Tendulkar, Demand To Take Back Bharat Ratan See more…

बात ज्यादा पुरानी नही है जब सचिन तेंदुलकए के भारत रत्न सम्मान देने का मुद्दा बहुत गरमाया था और जब सम्मान मिला तो न जाने कितनी करोड आखॆ इस सम्मान को देख कर नम हुई थी. इस विषय पर जब मैने बहुत लोगों से बात की … लगभग सभी  लोगों की राय यही थी कि उन्हें अब विज्ञापनों में काम नही करना चाहिए और सार्थक और सामाजिक मुद्दे उठाने चाहिए ताकि लोग उनसे सीख ले सकें. मेरा भी यही विचार है. भारत रत्न सम्मान की गरिमा बनाई रखी रहनी चाहिए और बेवजद विवादों ने पड कर सामाजिक कार्यों से जुडे मुद्दों पर ध्यान दे…

सम्मान का दुरुपयोग

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18. फादर्स डे

beer bar  photo

21 june फादर्स डे के लिए सोचा कुछ बच्चों से बात की जाए और उनके पापा के बारे मे विचार लिए जाए कल कुछ बच्चों से बात भी की. लेख लिख ही रही थी कि तभी डोर बेल हुई.

बाहर देखा तो तपती धूप मे पसीने से भीगे दो छोटे बच्चे खडे थे. वो पैन बेच रहे थे. मेरे मना करने पर वो बोले कि ले लो आज सुबह से बोनी नही हुई. बहन ने भी कुछ नही खाया. मैने कहा कि तुम्हारे ममी पापा ?? वो बोले पापा शराब पीते हैं उन्ही की वजह से हमे काम करना पड रहा है. मां मजदूरी करती है. उनकी उदासी देख कर बीस रुपए के पैन तो मैने खरीद लिए. पर अचानक मेरी सोच का रुख बदल गया और ऐसे पापाओ पर गुस्सा आने लगा जो शराब के लिए पागल हुए जाते हैं.

बात सिर्फ गरीब लोगों की नही बल्कि हम जैसे मिडल क्लास और हाई प्रोफाईल परिवारों की भी है. कुछ समय पहले एक क्लब मे मीटिंग और डिनर था. रात के 12 बज चुके थे. बच्चे बार बार मम्मियों को घर चलने के लिए कह रहे थे और पापा लोग जुटे थे शराब पीने में…बस अभी चलते है ..कह कह कर एक बजा दिया और लडखडाते हुए खडे हुए. उन बच्चों के चेहरे से गुस्सा साफ झलक रहा था. क्या इज्जत और प्यार रह जाएग बच्चों के मन में अपने पिता के लिए …. कैसे खुश होंगें वो फादर्स डे पर…  अगर आप भी अच्छे पिता बनना और कहलाना पसंद करना चहते हैं तो बच्चों की भावनाओं का ख्याल रखिए … शराब ने कोई भला नही करना आपका बल्कि आपको नुकसान ही पहुंचा रही है.

फादर्स डे की शुभकामनाएं अभी नही … जिस दिन आप इस बुरी गंदी आदत से छुटाकार पा लेंगें उस दिन होगा आपका फादर्स डे ..”

यकीन मानिए …  फादर्स डे टापिक पर लिखने का मन की नही किया और मैं शराब की रोकथाम पर कौन क्या क्या आवाज उठा रहा हैं यही सब सर्च करने लगी.

फादर्स”जरा नही “बहुत” सोचने की दरकार है !!!

खुशी है कि महिलाए, खासकर  गावों की, इस मामले में बहुत पहल कर रही है ..

 

Bender beaten his wife,

वडोदरा, जेतपुर। एक शराबी का पत्नी के साथ मारपीट करना शराब का गोरखधंधा करने वालों पर भारी पड़ गया। साथ ही गुजरात में मद्य निषेध व्यवस्था की जमीनी हकीकत की पोल भी खुल गई।

शिथोल गांव में एक शराबी के पत्नी को पीटने की बात पता चलने पर शुक्रवार को महिलाएं इकठ्ठी हुईं। लाठी-डंडे लेकर शराब के ठेकों पर हमला बोल दिया। आक्रोशित-एकजुट महिलाओं को देख कर कई बुटलेगर घरों में ताला लगाकर फरार हो गए। Read more…

 

Rajasthan Patrika:wine contracts resist, women are the main route jammed

बहरोड़ शराब ठेके के विरोध में गुरुवार को कस्बे की भृर्तहरि कॉलोनी की महिलाओं ने बहरोड़ कस्बे के मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। जाम से मुख्य मार्ग के दोनों ओर वाहनों की लम्बी कतार लग गई। ऐसे में गर्मी में परेशान वाहन चालक प्रदर्शन कर रही महिलाओं से जाम खोलने की गुजारिश करते रहे, लेकिन महिलाओं ने उनकी एक नहीं सुनी। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस भी महिलाओं से जाम खुलवाने का प्रयास कर रही है।

महिलाओं ने बताया कि जिस जगह पर शराब का ठेका खुला हुआ है उसके नजदीक मंदिर, स्कूल व पार्क है। ऐसे में शराब का ठेका होने से उन्हेें तथा बच्चों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि उक्त ठेका अन्य कहीं स्थानांतरित करने की मांग वे पूर्व में कर चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई गौर नहीं किया जा रहा है। यह प्रदर्शन तीसरी बार किया जा रहा है। शराब ठेकेदार ठेका खोलने पर आमदा है, जबकि कॉलोनीवासी ठेका नहीं खुलने देंगे।

उल्लेखनीय है कि महिलाएं जब भी विरोध में सड़क पर उतरती हैं पुलिस प्रशासन व ठेकेदार कुछ दिन के ठेका बंद करवा देते हैं। कुछ दिन बाद फिर से यह ठेका खुल जाता है। लोगों की मांग है कि आबादी क्षेत्र में व भृर्तहरि मंदिर के समीप ठेका नहीं खोला जाए। See more…

……. और जो पिता शराब नही पीते या छोडने का फैसला कर चुके हैं उन्हें हैप्पी फादर्स डे … !!!!

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19. टूथपेस्ट में चाट मसाला

 

टूथपेस्ट में चाट मसाला

ऐसा भी होता है … एक समय था जब लोग सुबह सैर करते हुए नीम के पेड से शाख तोडते और उसको दातुन बना लेते. धूमते धूमते देसी  मंजन हो जाता … फिर समय आया .. लाल दंत मंजन और काला दंत मंजन का …फिर यह जगह फिल्मी हीरोईनों ने ले ली और वो विज्ञापन में आने लगी कि ( कही पढी और बेहद अच्छी लगी)

2008-
क्या आपके toothpaste में लौंग है ??

2010-
क्या आपके toothpaste में नमक है ??

2013-
क्या आपके toothpaste में
नमक और नीम्बू है ??
,
2015-
क्या आपके toothpaste में
नमक, नीम्बू और नीम है ??
,
2016-
क्या आपके toothpaste में
नमक, निम्बू, चाट मसाला है ?? इतना ही नही जो ब्रुश नही करता था उसे देख कर बता दिया जाता  कि फलां ने रात को भिंडी खाई या पालक पनीर … क्योंकि भोजन के कुछ अंश दांतों में लगे रह जाते और साफ नही होते थे. अब आगे का
.
.
.
2018-
Colgate dal fry special,
Colgate butter masala,
Colgate lemon tea flavor,
Colgate mix veg,
Colgate Spicy….
.
 samjh nahi aata
toothpaste hai ya dish
.
.
.
.                                     कोई शक नही अगर आपको यह सुनने को मिले
2021-
क्या आपके मुँह में दांत हैं ??

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20. Figure Conscious

 

कुछ देर पहले एक खबर पढी कि   Figure conscious Barbie switches from heels to flats…खबर पूरी पढी. वैसे कोई शक नही कि आज के समय में  हम सभी  Figure Conscious हो गए हैं.  बडे तो है ही पर बच्चे भी बहुत Conscious हो गए हैं . पहले ऐसा नही हुआ करता था.  कुछ समय पहले एक परिवार से मिलना हुआ. उनका बच्चा बहुत गोलू मोलू चीकू मूच्चू सा था. उसके गाल पकडने में बहुत मजा आ रहा था और बच्चा  भी खूब मुस्कुरा रहा था. मैने 5 महीने के बच्चें को  दस मिनट गोद मॆ लिया और मेरा हाथ ही थक गया ( आप अंदाजा लगा सकते हैं).  सभी माता पिता का यही सपना होता है कि उनका बच्चा जब पैदा हो तो खूब मोटू हो ताकि जो भी देखे वाह वाह कर उठे और कई बार जब बच्चे पतले दुबले (पर एक्टिव) पैदा होते हैं तो माता पिता, दादा दादी नाना नानी सब अपने अपने अनुभव बताने लग जाते हैं कि बच्चा गोलू मोलू कैसे बनें. उसके लिए टोनिक या कुछ भी लगातार बच्चे को दिया जाता है … फिर बच्चा बडा होता है.

फिर शुरु होता है आज के समय का  दूसरा फेज … ह हा हा पहले हंसी कंट्रोल कर लू… रुक ही नही रही… वो क्या हुआ कि मैं अपने जानकार के घर गई हुई. उस दिन उनकों स्कूल जाना था. बच्चे की पेरेंटस टीचर मीटिंग थी. पर वो नही गए क्योकि बच्चा लिखवा कर ले गया कि वो दोनों शहर से बाहर गए हुए हैं. जब मैने झूठ बोलने का कारण जानना चाहा तो उन्होनें बताया कि असल में, उनके बच्चे के सभी दोस्तों के मम्मी पापा पतले पतले से हैं और वो दोनों मोटे है अगर वो स्कूल आएगें तो बच्चे को शर्म आएगी क्योकि दूसरे बच्चे देख कर हसेंगें. माता पिता ये बात गम्भीरता से बता रहे थे और मेरी हंसी ही नही रुक रही थी..

वही एक तो और भी मजेदार बात सुनी कि एक बच्चा जो अब कालिज में  है . वो अपने मम्मी पापा से नाराज चल रहा है कारण कि बचपन में उसे इतने टानिक पिलाए गए.. इतने टानिक पिलाए गए  कि अब उसकी चर्बी कम ही नही हो रही. जिम भी ज्वाईन कर लिया और उसका ट्रैनर हर रोज उसे गुस्सा करता है कि बचपन से अपना ख्याल क्यों नही रखा और वो सारा गुस्सा घर आकर निकालता है.

कोई शक नही आज के बच्चे बहुत figure conscious गए हैं इसलिए बस कोशिश करिए कि जब वो पैदा हों तो तंदुरुस्त हो मोटे नही अगर  मोटे हुए तो आपकी खैर नही … ह हा हा !!! वैसे हाई हील देखने में जरुर अच्छी लगती है पर कई बार पावं और  एडी को नुकसान दे जाती है इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि heels को कम ही पहनें… बाकि आप खुद ही समझदार है .. जी क्या कहा … बहुत समझदार हैं … ह हा हा !! जी मैं सहमत हूं आपसे और आपकी समझदारी से :)

Figure Conscious Barbie Switches From Heels To Flats

Times have certainly changed, as now Barbie will be stepping out in flats for the first time in 56 years.According to Cosmopolitan, Mattel is giving the iconic doll a makeover with their Barbie Fashionista line, by changing the shape of their feet and ankles, which were previously designed to fit only heels.

Kim Culmone, vice president of design for Barbie said in an interview that Barbie was never designed to be realistic, and was always meant to be easy for girls to dress and undress them. See more…

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21. अब मुश्किल नही कुछ भी

ab mushkil nahi kuch bhi by monica guptaअब मुश्किल नही कुछ भी

बच्चे हैं तो पढार्इ है, पढार्इ है तो किताबे हैं, और अगर किताबे प्रेरक, मनोरंजक और ज्ञानवर्धक हैं तो कहना ही क्या।
वाकर्इ में, ऐसी किताबो से हमें बहुत कुछ सीखने और जानने का मौका मिलता है। असल में,  देखा जाए तो हम सभी मे कोर्इ ना कोर्इ हुनर छिपा होता है पर कर्इ बार अपने माहौल, रहन सहन या परवरिश से हम खुद को कम आकंने लगते हैं और हमारे अंदर छिपी प्रतिभा वही दम तोड़ देती है जबकि इसी छिपी प्रतिभा के माध्यम से हम अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब हो सकते हैं.
आज भी समाज में हमें अपने आस पास ऐसे बहुत से उदाहरण देखने को मिल जाएगें जिनके जीवन से प्रेरित हो कर हम बहुत कुछ सीख सकते है। उनको आदर्श मान कर उनका अनुकरण कर सकते है पर उसके लिए जरुरी है कि हम उनके बचपन और जीवन के बारे मे जाने कि ऐसा क्या है उनमे जो आज वो अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
इन्ही सब बातों को ध्यान मे रख कर मैं कुछ चुनिंदा प्रतिभाओ से रुबरु हुर्इ। उनके बारे में विस्तार से जाना और यह जान कर बहुत हैरानी हुर्इ कि उन सभी ने हमारी तरह ही साधारण परिवारो में जन्म लिया। साधारण जीवन जीया पर अपने जीवन के मूल्यो को असाधारण बनाए रखा और आज उसी वजह से वो एक अलग मुकाम हासिल किए हुए हैं।
बेशक, यह किताब मैने बच्चो को प्रेरणा और सीख देने के लिए लिखी है पर मैने भी इन सभी शखिसयतो से मिलकर बहुत कुछ सीखा है। लिम्का बुक आफ रिकार्डस की सम्पादिका श्रीमति विजया घोष, काटूर्निस्ट संकेत गोस्वामी, माऊंट ऐवेरेस्ट फतह करने वाली सुश्री ममता सोढा, भारतोलन मे अर्जुन एर्वाड विजेता श्रीमति भारती सिंह, जिला उपायुक्त और रक्त दान के क्षेत्र मे अलग पहचान बनाने वाले डा0 युद्धवीर सिंह ख्यालिया , निर्माता, निर्देशक सिनेमेटोग्राफर और गायक श्री मनमोहन सिंह, मैनेजेमैंट फंडा के गुरू और लेखन के प्रति समर्पित श्री नटराजन रघुरामन, सुप्रसिद्ध कवि, लेखक प्रोफेसर अशोक चक्रधर, मशहर टेलीविजन अदाकारा सुश्री नेहा शरद जोशी, एक पैर से मैराथान मे हिस्सा ले रहे जाने माने पहले भारतीय ब्लेड रनर  और जाबांज  मेजर देवेन्द्र पाल सिहं।

अब मुश्किल नही कुछ भी   प्रेरणादायक बाल साहित्य है.सन 2008 में प्रकाशित पुस्तिका को हरियाणा साहित्य अकादमी की तरफ से  अनुदान मिला.

ISBN -978-93-82197-47-5

 

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22. वो तीस दिन

वो तीस दिन woh tees din b y monica gupta

वो तीस दिन ” मेरा पहला बाल उपन्यास और अब तक की सातवीं प्रकाशित किताब है. नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया की ओर से प्रकाशित बाल उपन्यास सन 2014 में प्रकाशित हुआ.

बाल उपन्यास की मुख्य पात्रा है कक्षा दस ने पढने वाली मणि. जोकि किसी भी बच्चे की तरह बेहद शरारती चुलबुली है पर कक्षा दस की परीक्षा खत्म होने के बाद नतीजा आने से पहले तीस दिनों में ऐसा क्या होता है कि मणि के एक जबरदस्त बदलाव आ जाता है…

कहानी बेहद रोचक, मनोरंजक और शिक्षाप्रद है.

इसकी एक छोटी सी झलक ….

वो तीस दिन
मै हूँ मणि। आज मेरी दसवीं क्लास की बोर्ड़ परीक्षा का आखिरी दिन है। हे भगवान! कितनी टेन्शन थी ना………। आज पता है मैं घर जाकर सबसे पहले क्या करूंगी। शर्त लगा लो आप लोग बता ही नहीं सकते। मैं सबसे पहले टेलिविज़न चलाऊंगी और दो महीने से जो पिक्चरें मैंने नहीं देखी वो देखूंगी और अपने मोबार्इल पर आए मैसेज पढूंगी। पता है पिछले दो महीनों से मम्मी-पापा ने मुझे कुछ भी नहीं करने दिया बस…………..पढ़ार्इ………..पढ़ार्इ………पढ़ार्इ……… इस करके………. आज मैं ढे़र सारी मनमानी करने वाली हूं।
उफ……….शुक्र है………. आज आखिरी पेपर उम्मीद के अनुसार ठीक ही हो गया अब तो जल्दी थी घर पहुंचने की। मैं रास्ते में जा रही थी कि मेरे सामने वाली सड़क पर एक स्मार्ट सी युवती, छोटे-छोटे बालों वाली, आंखों में धूप का चश्मा लगाए, बैग कन्धे पर लटकाए सड़क पार कर रही थी कि शायद उसका पांव फिसल गया या पता नहीं………..क्या हुआ………पर वो बहुत बुरी तरह से गिर गर्इ। पता नहीं उसे देखकर मेरी बहुत बुरी तरह हंसी निकल गर्इ और मैं ठहाका लगाती ताली बजाकर हंसती हुर्इ आगे बढ़ी। उधर वो तुरन्त उठी मेरी तरफ देखा फिर अपने कपड़ों को झाड़ा और ऐसे चल दी मानो कुछ हुआ ही ना हो। मैं हंसती हुर्इ आगे बढ़ी। सामने से पुनीता आ रही थी उसने बताया कि वो आज से ही ब्यूटीशियन का कोर्स ज्वाइन कर रही है और उसकी बहन कुकिंग का। मैंने मुंह बिचका लिया और बोली भर्इ मैं तो आराम करूंगी और टेलिविज़न ही देखूंगी। उसको बाय बोलकर मैं घर की ओर बढ़ गर्इ। दूसरी तरफ से गीता मैड़म आ रहे थे………मैंने उन्हें देख कर भी अनदेखा कर दिया क्योंकि देखती तो उन्हें नमस्ते करनी पड़ती………….कौन करे नमस्ते…………..यही सोचती हुर्इ मुंह दूसरी तरफ करके मैं आगे बढ़ गर्इ।

घर पहुंची तो मम्मी छोले-भठूरे बना रहीं थीं। मैं बिना हाथ धोए और बिना कपड़े बदले रसोर्इ में घुसी और प्लेट लगाने लगी। मम्मी ने हमेशा की तरह टोका और और ड़ांटा और मैंने भी हमेशा की तरह उनकी बात अनसुनी कर दी और गर्मागर्म भठूरे का पहला निवाला आदत के अनुसार मम्मी को खिलाया और फिर खुद खाया। मम्मी गरमा-गर्म भठूरे उतारती रही मेरी प्लेट में ड़ालती रही और मेरे पेपर के बारे में पूछती रही कि कितने नम्बर आ जाएंगे। मेरा पूरा ध्यान टेलिविज़न पर आ रहे धारावाहिक पर केंद्रित हो चुका था इसलिए मैंने मम्मी को साफ तौर पर कह दिया कि आज का पेपर ठीक हो गया और आज पढ़ार्इ के बारे में कोर्इ बात मत करना। आज मैं सिर्फ टी.वी. देखूंगी और मोबार्इल पर आए मैसेज़ पढूंगी और आगे भेजूंगी। इतने में लार्इट चली गर्इ। मुझे गुस्सा तो बहुत आया पर सोचा चलो समय का फायदा उठाती हूं और मैसेज पढ़ती हूं। बाप रे………बीस मैसेज़ थे।

woh tees din by monica gupta

ये किताब आप नेशनल बुक ट्रस्ट की साईट से ओनलाईन भी खरीद सकते हैं ..

ISBN 978-81-237-7087-1

आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार है …

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23. समय ही नही मिलता

समय ही नही मिलता samay hi nahi milta by moica gupta

 

समय ही नही मिलता… नाटक संग्रह है. इसमे लगभग सभी नाटक वो हैं जिनका आकाशवाणी जयपुर और आकाशवाणी रोहतक से झलकी रुप मे प्रसारण हो चुका है. उन्ही नाटक़ों को समय ही नही मिलता नामक किताब में पिरों दिया है. किताब का प्रकाशन सन 2009 में जयपुर के श्याम प्रकाशन द्वारा किया गया. इसमे कुल 91 पेज हैं और 14 नाटक है. नाटक संग़्रह को हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा अनुदान मिला.

नाटको मे पति पत्नी की नोंक झोंक है… मम्मी बेटे का वार्तालाप है कही हाय तौबा है यो कही प्यार का एक्सीटेंट …

आईए एक छोटी सी झलक पढें … नाटक ( झमेला नाम का)

ट्रिन ट्रिन
श्री मलिक- हैलो…. यस…. आर्इ.एम. मलिक….. स्पीकिंग
अरे….. आप रोर्इये मत….. हाँ…..हाँ……हाँ….. मैं अख़बार देखता हूँ….. (पन्ने पलटने की आवाज़) हाँ सेठ जी, पेज तीन पर दूसरा कालम…….हाँ…..हाँ……. ये तो आपका ही साक्षात्कार छपा है……..लेकिन……. हाँ…….. आप रोर्इये मत……. मैं आपको पढ़ कर सुनाता हूँ……… सेठ दीन दयाल की फैक्टरी ने लाखों का मुनाफ़ा कमाया। इस अवसर पर उन्होंने पार्टी आयोजित की…… सेठ जी……. यह तो सारा ठीक…… हाँ……. हाँ…….. पढ़ रहा हूँ………. हाँ……. उन्होंने पार्टी आयोजित की और डुगडुगी के एडिटर को बताया कि हर सफल आदमी के पीछे किसी और औरत का हाथ होता है……………………….
मलिक- हे भगवान …… ये क्या कर दिया एडिटर ने……….. और शब्द ग़लती से छप गया। सेठ जी…. आप रोर्इये मत……… मैं ………..मैं माफ़ी माँगता हूँ…….. क्या…….. सेठानी जी से …… हाँ…….. हाँ……. मैं उनसे भी माफ़ी माँग लूँगा…….. कल……… कल…….. मुझे खेद है कालम में मैं आपकी खबर दुबारा दूँगा कि हर सफल आदमी के पीछे किसी औरत का हाथ होता है और सेठ जी की सफलता के पीछे उनकी पत्नी का विशेष योगदान है। सेठ जी प्लीज रोर्इये मत…..
(फ़ोन रखता है) (खुद से) ये सम्पादक का बच्चा तो डुगडुगी की डुगडुगी बजवा कर ही रहेगा……!!
(दरवाज़े की घंटी बजती है)
श्री मलिक- ओह…. अब कौन आया !! मालिक…… ज़रा देखना……..!
मालिक- साहब……..! मैं आटा गूंथ रहा हूँ………. आप ही देख लो
(दूर से आवाज़ आती है)
श्री मलिक- गुस्से में…….. हूँ……. मैं रसोर्इ में जाकर देखता हूँ……… ये हमेशा आटा ही गूंथता रहता है…… जब भी देखो…… आटा गूंथ रहा हूँ…….. अरे……. तू यहाँ बैठा चाय पी रहा है…….. और मुझे कह रहा ……. मैं आटा गूंथ रहा हूँ……..
मालिक- अब साहब…… आप भी तो कितनी बार खाना खा रहे होते हैं और फ़ोन आने पर कहते हैं कि कह दे, साहब बाथरूम में हैं…… तो मैंने भी…..
श्री मलिक- चल….. बस….. अब चुप कर……. मैं ही खोल देता हूँ दरवाज़ा…..
श्री मलिक- अरे…….. चाची आप……..!!
चाची- हाय-हाय…….. ग़जब हो गया……… तेरा भार्इ यानि मेरा बेटा…… ये देख….. टेलिग्राम आया है……… पढ़ तो इसे…….
श्री मलिक- ऐ मेरे वीर, मेरे प्रिय, सीमा तुम्हे बुला रही है। दोनों बाँहे फैलाएं तुम्हारा स्वागत करती है तुम कब आओगे…. लेकिन चाची अपूर्व तो छुट्टियों में यहीं आया हुआ है ना……
चाची- हाँ…..हाँ….. अब इसके लछन तो देख…… हम यहां इस जवान के लिए लड़की देख रहे हैं और ये किसी सीमा से (ज़ोर से रोती है) अ ह ह ह…
इतने में बेटा आता है………।
माँ……माँ…….. पिताजी ने बताया कि फ्रंट से पत्र आया है……. जरा दिखाओ तो….. और…… तुम…… रो क्यों रही हो !
चाची- अपूर्व…… ये सीमा कौन है……!
श्रीमती मलिक- चाची………पूछो…….पूछो…….. इसके साथ अपने लाड़ले मलिक बेटे से ये भी पूछो कि यह रचना कौन है जिसे लेकर पूरे दिन दफ़्तर में बैठे रहते हैं (जोर से रोती है)
नौकर- मालकिन, हम धनिया को लेने जा रहा हूँ।
श्रीमती मलिक – ठीक है, जल्दी आ जाना।
श्री मलिक- अरे…….आर.यू……..ये तुम्हे क्या हो गया। कम-से-कम मुझसे तो पूछ लेती……•
(इतने में पी.के. की पत्नी भी आ जाएगी)
चाची- अपूर्व…. तुमसे तो मैं बाद में बात करती हूँ। आर्इ.एम. ये……..ये…….. मैं क्या सुन रही हूँ…….. कौन है ये रचना।
श्रीमती मलिक- चाची पता है……… पता है…….. पी.के. बहके साहब का भी कोर्इ चक्कर है किसी कल्पना के साथ (फिर ज़ोर से रोएगी)
श्री मलिक- गुस्से से……… चुप……… चुप……… बिल्कुल चुप……..।
यहां बैठो…….. आर.यू…. मैं क्या काम करता हूँ।
श्रीमती मलिक- आप सम्पादक हैं………. (नाक से सांस लेकर)
संपादक का काम होता है लेख यानि आर्टिकल, रचना को पढ़ कर उसे प्रकाशित करना……. ये कोर्इ वैसी रचना नहीं है जो तुम समझ रहे हो….
चाची का बेटा- और माँ……..मैं आपको भी बता दूँ कि यह सीमा हमारे देश की सीमा है, जिसके लिए हम जान लुटा देते हैं………. ना कि कोर्इ मेरी गर्लफ्रैंड़…. सीमा….
श्रीमती मलिक- ठीक है……… पर पी.के. बहके साहब की वो लड़की……..
श्री मलिक- कौन लड़की…….. ओ…….. कल्पना…….. अरे बुद्धु, कल्पना……. यानि सोच, इमेजीनेशन……… समझी।
क्या ? ? हाँ……
श्रीमती मलिक- मुझे क्षमा करें अब मैं शक नहीं करूंगी और प्रेम के साथ रहूँगी।
श्री मलिक- क्या ? ? ”प्रेम अब तुम मुझे छोड़ कर किसी प्रेम के साथ रहोगी……..।
श्रीमती मलिक- ये वो वाला प्रेम नहीं बलिक प्यार वाला प्रेम है।
(सब हँसतें हैं)
(दरवाज़े की घंटी बजती है)
श्रीमती मलिक- ये लड़की कौन है…….
मालिक- जी……… ए ही है हमार धनिया……..
श्रीमती मलिक- क्या ? ? ……..
(दोबारा घंटी)
श्रीमती मलिक- मालिक…….. ज़रा देखना……. कौन आया है……..
मालिक- मालकिन…….. हम ज़रा धनिया को काम समझा रहा हूँ….. आप ही देख लो ना।

ऐसे की कुछ मजेदार नाटकों का संग्रह है … समय ही नही मिलता

ISBN 978-93-80018-11-9

 

 

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24. Dreaming

Dreaming
सैर सपनों की दुनिया की …. आईए !! आज आपको सपनो की दुनिया की सैर करवाते हैं. सपनों की दुनिया का यह शहर किसी अजूबे से कम नही है. यहाँ आकर कभी हम बच्चे बन जाते हैं तो कभी बूढे. कभी नेता बन जाते हैं तो कभी हीरो बन कर जनता को ओटोग्राफ दे रहे होते है. कुल मिलाकर इस दुनिया मे आने पर हम कोई भी रुप धारण कर सकते हैं या कुछ भी अनहोनी होते देख सकते हैं.
सपनो की इस लाजवाब दुनिया के सफर मे सबसे पहले हमे अनु मिली. 40 साल की अनु सर्विस करती हैं और दिन भर बहुत व्यस्त रहती है. जाहिर है कि घर पहुंच कर बिस्तर पर जाते ही नींद की आगोश मे चली जाती होगी. अनु ने भी मुस्कुराते हुए बताया कि यकीनन उन्हें लेटते ही नींद आ जाती है और फिर Dreaming…

वैसे तो ज्यादातर सपने उठने के साथ ही भूल जाते हैं पर एक सपना है जो उसे अभी भी अक्सर दिखाई देता है. सपना है कि वो स्कूल की परीक्षा देने जा रही है और देर हो गई है. पेपर शुरु हो चुका है और वो घबराहट के मारे रोने लगती है तो उन्हे परीक्षा मे बैठने की इजाजत मिल जाती है पर समय कम होने की वजह से घबराहट मे उनकी स्याही की दवात गिर जाती है और सारी उत्तर पुस्तिका खराब हो जाती है. जब उनकी नींद खुलती है तो पसीने पसीने होती है. खुद को संयत करने मे उन्हे थोडा समय लग जाता है पर फिर खुद पर हंसी आती आती है कि इस उम्र मे ऐसे सपने कैसे आ जाते है.
सपनो की ही दुनिया मे एक और पति पत्नी कुसुम और विनोद का जोडा मिला. जोकि दस साल से विवाहित हैं. सपने की बात सुन कर दोनो मुस्कुराने लगे. कुसुम ने बताया कि पिछ्ले दो चार बार से उनकी आखं खुलती है रात को पति के चिल्लाने की वजह से. वो सोते सोते हाय, हाय बचाओ, बोल रहे होते हैं. कई बार तो उन्होने ध्यान ही नही दिया क्योकि वो खुद भी नींद मे होती थी सुबह उठ कर जब इस बारे मे बात करते तब विनोद को याद भी नही रहता कि वो किस वजह से चिल्लाए थे. खैर, एक रात विनोद के चिल्लाते समय कुसुम की आखं खुल गई. उन्होने तुरंत अपने पति को उठाया पहले तो वो गहरी नींद मे थे पर कुछ पल बाद उन्होने नींद मे ही बताया कि वो एक सूनसान रास्ते मे जा रहे थे और अचानक कोई बुढिया आकर उनका बैग खिंचने लगी. इसलिए वो डर के मारे चिल्ला रहे हैं. बताते बताते वो फिर से सो गए. बात बता कर कुसुम हंसने लगी तो पति महोदय ने कहा कि अपनी बात भी तो बताओ जब एक बार तुम भी चीखी थी. इस पर कुसुम ने तुनक के कहा कि शायद वही बुढिया उनके सपने मे भी आ गई थी.
इससे पहले की उनकी नोक झोंक और आगे बढती. हमने ही आगे बढने मे अपनी भलाई समझी. सपनो की दुनिया मे आगे हमे मिली 10 साल की मणि. मणि ने बताया कि बहुत सपने आते है. सपने मे कभी वो स्टेज पर गाना गा रही होती है तो कभी क्लास मे फर्स्ट आती है तो कभी दोस्तो के साथ जंगल मे खेल रही होती है. पर एक सपना भुलाए नही भूलता वो है कि एक रात वो सो रही है. कमरे मे घना अंधेरा है. अचानक दो तीन चोर आ गए. उसकी आंख खुल गई और वो डर के मारे पलंग के नीचे छिप गई. चोर वही घूम रहे हैं. वो चिल्लाना चाह रही है पर उसकी आवाज ही नही निकल रही. वो पूरे जोर के साथ मम्मी, पापा…!! चोर आए हैं चिल्लाए जा रही है पर मानो वो गूंगी हो चुकी है. उफ!! और जब आखं खुली तो इतनी राहत मिली कि बस!! बहुत डरावना सपना था वो. यह सपना शायद जिंदगी भर नही भूलेगा.
सपनो की दुनिया मे और आगे बढे तो 20 वर्ष की नाव्या मिली. उनसे पूछा तो एकदम से खुश होकर बोली कि सपने मे वो मिस इंडिया चुनी गई और अमिताभ बच्चन जी ने उन्हे क्राउन पहनाया. इतना ही नही रणबीर कपूर के साथ उन्होने फिल्म भी साईन की. शूटिंग भी शुरु हो गई थी. सब कुछ इतना अच्छा चल रहा था सब लोग उसके काम की उसकी खूबसूरती की इतनी तारीफ कर रहे थे कि उसी समय अलार्म बजा और वो गहरी नींद से जाग गई. बताते बताते वो उदास हो गई.
उनको शुभकामनाए देते हुए हम आगे बढे तो सामने से 30 वर्ष की दर्शना चली आ रही थी. उन्होने बताया कि बचपन मे एक सपना बहुत आता था. उनके घर के ड्राईंग रुम मे शो केस मे बहुत बडी गुडिया थी. कई बार उन्हे रात को सपना आता अब पता नही कि वो सपना था या सच्चाई थी कि वो गुडिया शो केस से बाहर निकलती और पूरे घर का चक्कर लगाकर वापिस शो केस मे चली जाती. सुबह उठ कर जब वो उस शो केस वाली गुडिया को देखती तो उन्हे लगता कि वो उन्हे देखकर मुस्कुरा रही है. यह सब देख कर उन्हे बहुत डर लगता पर उन्होने अपनी मम्मी को यह बात कभी नही बताई कि कभी उनका मजाक की ना बन जाए. अरे बाप रे! उनका सपना या हकीकत जो भी थी सुनकर तो हम भी डर गए और वहां से खिसकने मे ही भलाई समझी.
Dreaming ….  45 वर्ष की सुनीता मिली. सुनीता ने जो बताया वो भी काफी हैरान कर देने वाला था. उन्होने बताया कि करीब 4-5 साल पहले की बाता है. रात को जब वो सो रही थे तो सपने मे उनके स्वर्गवासी पिता नजर आए. वो गेट के बाहर हाथ मे कोई तोहफा लिए खडे थे.सुनीता ने बताया कि उन्हे देख कर वो बाहर आई उनसे वो तोफहा लिया और गले मिल कर बहुत रोई. फिर अचानक आखं खुल गई. अगले दिन उन्हे खबर मिली कि जो जायदाद का जो काम इतने सालो से अटक रहा था. वो फैसला उनके हक मे रहा और वो जीत गए. बताते बताते सुनीता भावुक हो गई.

Dreaming
सपने की दुनिया मे ऐसे और भी बहुत लोगो से मिले और उन्होने बहुत बाते शेयर की.कोई कहता सुबह का सपना सच होता है तो कोई कहता कि किसी मरे हुए इंसान को देख लो तो उसकी उम्र बढती है.किसी ने बताया कि सपने मे मोटी गाय को देखो तो फायदा और पतली गाय को देखो तो नुकसान होता है. सपने मे कोई बडी इमारत देख लो तो भाग्य उदय होता है इत्यादि इत्यादि!!सच, सपनो की दुनिया ही निराली है.
वैसे इस बात मे भी कोई दो राय नही कि सपने में सपने जैसा कुछ लगता ही नही. बिलकुल ऐसा महसूस होता है जैसे यह सचमुच में घटित हो रहा है. कोई हमेशा हमेशा के लिए इसी दुनिया मे रहना चाह्ता है तो कोई इससे तुरंत बाहर निकलना चाह्ता है. दुनिया भर के अनेकों मनोवैज्ञानिको ने भी सपने की इस दुनिया में झाँकने की कोशिश की, लेकिन इस रहस्यमयी दुनिया को जितना भी समझने की कोशिश की उतनी ही यह उलझाती रही.
इसी बारे मे जब हमने जाने माने मनोचिकित्सक से बात की तो उन्होने बताया कि सपने आना एक सहज प्रक्रिया है. अब सपने किस तरह के आते हैं ये हमारे मन पर निर्भर करता है. असल मे, कोई ना कोई बात हमारे दिलो दिमाग मे कही दब कर बैठी होती है जिसका हमे पता भी नही चलता और देर सवेर कभी ना कभी हमे सपने के रुप मे दिखाई दे जाती है.
जाने माने मनोविश्लेषक सिग्मंड फ्रायड के अनुसार हम अपनी अतृप्त एवं अधूरी इच्छाओं की पूर्ति सपनो के माध्यम से करते है. कोई जो भी कहे पर सपनों का संसार वाकई मे अनूठा, अदभुत और आश्चर्यजनक है … :)

Dreaming

dreaming photo 5 Astro tips to overcome bad, horrible dreams-5

अक्सर हमें नींद में सपने आते हैं। कई बार ये सपने इतने डरावने होते हैं कि आंखें खुल जाती हैं और हम डर से पसीने-पसीने हो जाते हैं। इन सपनों में कई बार हम परेशान बच्चे, भटकती आत्माएं, जंगली जानवर, अंधेरे रास्ते या किसी खतरनाक संकट को देखते हैं जिससे हमें भयंकर डर लगने लगता है। ज्योतिष के कुछ साधारण से उपाय करके आप इन डरावने सपनों से बच सकते हैं।

प्रतिदिन रात को सोते समय हनुमान चालीसा का एक बार पाठ करके सोएं, आपको बुरे सपने आना बंद हो जाएंगे।

यदि रात में किसी भी तरह का डर लगता हो तो अपने सिरहाने के नीचे एक पीपल की जड़ तथा उसकी टहनी का छोटा सा टुकड़ा रखें। ये दोनों ही सूर्यास्त से पहले तोड़े, सूर्यास्त होने की स्थिति में अगले दिन ही पेड़ की जड़ और टहनी तोड़े।

कभी भी उत्तर तथा पश्चिम दिशा में सिर करके नहीं सोना चाहिए। ऎसा करने से शरीर के मैग्नेटिक करंट में बाधा पहुंचती है और दिमाग बैचेन हो जाता है। अक्सर इन दिशाओं में सिर करके सोने वाले चौंक कर उठ जाते हैं। पूर्व को सोने के लिए सबसे अच्छी दिशा माना जाता है। इस दिशा में सिर तथा पश्चिम में पैर करके सोने से अच्छी नींद आती है और बुरे सपनों से भी निजात मिलती है।

सपने में यदि बार-बार नदी, झरना या पानी दिखाई दे तो यह पितृ दोष की वजह से हो सकता है। इसके लिए अमावस्या के दिन सफेद चावल, शक्कर और घी मिला कर पीपल के पेड़ पर सूर्यास्त के बाद चढ़ाने से आराम मिलता है। See more…

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25. Online Shopping

Off तो नही कर रही  Online Shopping ???  कल कुछ लोगों से बात हो रही थी. बात शापिंग तक जा पहुंची और फिर ओन लाईन शापिंग पर जा कर ठहर गई और फिर एक धंटा इसी पर चर्चा होती रही. दो गुट बन गए. एक को इसमे अच्छा अनुभव नही रहा और दूसरा बहुत खुश है कि आन लाईन शापिंग किसी वरदान से कम नही.एक ने बताया कि टीशर्ट ही दूसरी भेज दी और टाप्स मगवाए तो उसके नग ही निकले हुए थे. वापिस तो हो गए पर तनाव भी तो हुआ.उसकी भरपाई कौन करेगा वही दूसरे ने बताया कि ओन लाईन से खुद जाने का खर्चा बचता है.आफर मे कई बात चीजे फ्री भी मिल जाती है.वो बहस किसी न्यूज चैंनल की बहस से कम नही थी. एक दूसरे की बात काट रहे थे. कोई अरनब बन रहा था तो कोई सम्बित पात्रा और अंत में बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे बहस खत्म हो गई. वैसे आपको Off तो नही करती Online Shopping ?

इनंटरनेट के जमाने में जहां बेशुमार सोशल नेटवर्किंग साईटस हैं वही साईटस के साथ साथ चलते हैं लुभावने विज्ञापन… कम दाम में हमें वो घर बैठे बैठाए शापिंग करवा देते हैं तो बुराई क्या है. Online Shopping men   on line shopping women, on line shopping clothing,on line shopping teens,on line shopping cart, on line shopping sites  ढेरो हैं बेशुमार हैं

Online Shopping से पहले अगर हम जरा सी सतर्कता बरते तो यकीनन लाभ ही होगा. इस पर मैने नेट पर बहुत सर्च किया बहुत लोगों से बात की तब कुछ बाते सामने आई जिसका अगर हम ख्याल रखें तो बचाव हो सकता है.

मोबाइल से शॉपिंग में बेहतर रहेगा कि संबंधित साइट का App डाउनलोड कर उसके माध्यम से खरीदारी करें। आमतौर पर फर्जी शॉपिंग साइटों का मोबाइल app नहीं होता. पहली बार जिस साइट का नाम सुना हो उससे दूर ही रहें तो अच्छा होगा Web site कब  बनी होने की तारीख भी जरुर  देख लें. नई बनी  site से परहेज करना चाहिए.

एक जरुरी बात ये भी  कि किसी प्रोडक्ट की स्पेलिंग आदि में गलती दिखे तो  सावधान हो जाएं कई बार मिलता जुलता नाम हमें चक्कर में डाल देता है. ऑनलाइन पेमेंट करने की जगह कैश ऑन डिलीवरी का ऑप्शन चुनें  तो ज्यादा सही रहेगा.
अकसर विज्ञापनों के माध्यम से कई बार कोई ब्रांडेड सामान बेहद ही सस्ता दिखता है तो हम लेने के लिए बैचेन हो जाते हैं पर ऐसे में सतर्कता दिखानी ज्यादा जरुरी है. सावधानी ज्यादा जरुरी है. जिस साईट का अपना  नाम हो कोई अहचान हो  वो साइट डिस्काउंट  दे तो ज्यादा सोच नही होनी चाहिए.
शॉपिंग के logo … lable  पर क्लिक करें अगर पेज refresh हो तो सही अगर ऐसा न हो तो सतर्क हो जाएं

Shopping करते वक्त अपनी खरीदारी से संबंधित रिकार्ड का प्रिंट निकाल लें, कई बार धोखाधड़ी होने पर ये काम आता है.
किसी साइट पर जरूरत से ज्यादा जानकारी बिल्कुल न दें और डेबिट कार्ड की जगह कम लिमिट वाले क्रेडिट कार्ड से करें
web sites पर शापिंग करने से पहले अच्छा  है कि उसका  रिव्यू पढ़ लें
इंटरनेट पर मौजूद किसी भी साइट के URL में यदि http की जगह https लिखा हो तो वह विश्वसनीय है
यूआरएल से पहले पेडलॉक भी उसके सेफ होने की निशानी है

आजकल Online Shopping करने का ट्रेड बढता जा रहा है। लोग बिना सोचे समझे Online Shopping करते है जिसके कारण कभी कभी उन्हें नुकसान भी उठाना पडता है। वहीं Online Shopping  करने से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पडता है।

लोग घंटों ऑनलाइन शॉपिंग करते रहते है। जब हद से ज्यादा on line shopping की आदत हो जाती है तो ये लत बन जाती है। हम इस लत के चलते ऐसी चीजें भी खरीद लेते है जिसकी जरूरत हमें कभी नहीं पडती वहीं पैसे की बर्बादी भी होती है और बार हम मानसिक तनाव से भी घिर जाते हैं.

मास्टरकार्ड Online Shopping सर्वे 2014 के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में कम से कम एक बार ऑनलाइन शॉपिंग करने वालों की संख्या 2012 में 70.9 फीसदी थी, जो 2014 में बढ़कर 94 फीसदी हो गई।

off तो नही कर रही Online Shopping ???

 

 Online shopping fraud can spoil your shopping

ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स के आने के साथ ही इंटरनेट पर प्रोडक्ट्स, सर्विसेस, फ्री ऑफर्स, डिस्काउंट कूपंस आदि की भरमार आ गई है। एक समय था जब ऑनलाइन शॉपिंग से लोग डरते थे, लेकिन आज यह जरूरत बन गई है, क्योंकि यह आपको सहूलियत देती है। जब आप ऑनलाइन खरीदारी करते हैं और अपने घर बैठे-बैठे पेमेंट करते हैं और फिर अपने प्रोडक्ट या सर्विस के आप तक पहुंचने का इं तजार करते हैं। अगर विश्वसनीय ई-टेलर से खरीदारी की है तो आप अपने प्रोडक्ट का लुत्फ उठाते हैं और अगर किसी फर्जी वेबसाइट के हत्थे चढ़ गए हैं तो आपका समय और पैसा दोनों बर्बाद जाता है। इस तरह के फ्रॉड के किस्से इन दिनों बढ़ रहे हैं। आईए जानते हैं किस तरह ऑनलाइन शॉपिंग में होता है फ्रॉड और कैसे इससे बच सकते हैं। Read more…

Online shopping photo

Webdunia Hindi

वेबदुनिया डेस्क अब यह किसी साइंस फंतासी या अरेबियन नाइट्स की कहानी नहीं रही, अब सच में जमाना आ गया है जब सिर्फ छूने (स्क्रीन) या बटन दबाने भर से आपको अपनी पसंददीदा वस्तुएं दरवाजे पर मिल जाती हैं। भारत सहित दुनियाभर में शुरू हुई इंटरनेट क्रांति अपने चरम पर पहुंच चुकी है।

पॉकेट इंटरनेट (या मोबाइल इंटरनेट) के इस युग में अब आपका मोबाइल फोन जादुई चिराग का काम करने लगा है और ऑनलाइन शॉपिंग, बैंकिंग, ट्रेवल आदि साइट्स जिन्न की भूमिका निभा रहे हैं। हां, इसके लिए पैसा जरूर देना होता है लेकिन प्रतिस्पर्धा के चलते अब ग्राहकों को फायदे वाली योजनाओं का लाभ मिलने के अवसर भी बढ़ गए हैं। अब सवाल उठता है कि क्या ऑनलाइन सेल और शॉपिंग की अप्रत्याशित सफलता सही मायनों में भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता को प्रतिबिम्बित करती है? या यह 90 के दशक के इंटरनेट बूम जैसा एक छलावा सिद्ध होगी? जो भी हो अब यह निश्चित है कि इसका दूरगामी प्रभाव होगा। यह कितना लाभदायक या नुकसानदेह है इसका पता तो आनेवाले समय में चलेगा। 6 अक्टूबर को एक ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट ने ‘बिग बिलियन डे’ के नाम से एक ऐसी स्कीम दी जिसमें 90 प्रतिशत की छूट दी गई। इसका तात्कालिक परिणाम यह रहा कि भारतीय खुदरा बाजार में हड़कंप मच गया और छोटे-बड़े व्यापारियों ने सरकार से मदद मांगी। व्यापारियों की गुहार के बाद भारत सरकार ई-कॉमर्स कारोबार को लेकर कोई ठोस नीति बनाने पर विचार कर रही है। गौरतलब है कि इससे पहले, व्यापारियों की एक संस्था कॉन्फेडेरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआइटी) ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से ऑनलाइन कारोबार की जांच की मांग भी की थी। लेकिन देखा जाए तो पता चलता है कि अब आने वाले दिनों में भारतीय बाजार बेहद मुश्किल और परिवर्तन के दौर से गुजरने वाला है। पहले से ही बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा वाले भारतीय बाजार में अब फ्लिपकार्ट, स्नैप-डील और अमेज़न जैसी कई कंपनियां तेजी से ग्राहकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। गौरतलब है कि फ्लिपकार्ट ने दावा किया है कि 6 अक्टूबर को उसने 600 करोड़ रुपए का कारोबार किया जो कंपनी के पिछले साल के कुल एक अरब डॉलर के कारोबार के मुकाबले असाधारण है। अगले पन्ने पर, ऐसे मुनाफा होता है ई-कॉमर्स साइट्‍स को… See more…

Online Shopping … अगर आपके भी इस बारे में कोई सुझाव हो तो सादर आमंत्रित हैं हो सकता है आपके दिए सुझाव से किसी का भला हो जाए या तनाव कम हो जाए :)

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