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1. Oh God

घर के सामने से पिछ्ले चार पांच दिन से एक सहेली का बेटा जाता दिखता था. वो शायद अभी नौंवी क्लास में आया है.  कभी उसके हाथ में सब्जी लिए टोकरी तो कभी प्रैस के कपडे… मैने देख कर सोचती अरे वाह !!! कितना अच्छा बच्चा है घर के काम करता है आजकल तो बच्चों से घर का काम तो करवा ही नही सकते … कुछ भी कहो और उनका इंकार सुनने के लिए तैयार रहो … वही एक तरफ ये बच्चा है  तो घर के काम  बिना शिकन या थकावट लाए खुशी खुशी कर रहा है

By chance शाम को मेरी सहेली भी मिल गई. मैने उसे कहा कि उसका बेटा तो बहुत समझदार है घर के सारे काम करता है. आजके बच्चे तो सुनते ही नही किसी की . इस पर वो हैरान हुई और बोली … घर का काम … मतलब ही नही …. किसी दूसरे बच्चो को देखा होगा …

दो दिन बाद पता चला कि उनका बेटा  ट्यूशन जाता था और टयूशन वाले सर अपने घर का कम करवाते थे और हैरानी की बात ये भी है उनका काम वो खुशी खुशी करता जबकि घर पर अगर मार्किट से प्याज लाने को भी कह दो तो बच्चे बिदक जाते हैं पर टयूशन के सर को खुश करने के चक्कर में बच्चे उनका काम खुशी खुशी करते है … हे भगवान …

 

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2. मैनेंजमैंट फंडा

article- monica guptaदैनिक भास्कर अखबार

Funda February 1 2013   BY  N Raghuraman

Resilience is a law of nature

Recently I went for a condolence. The family had suddenly shrunk from four members to three. But that one member who is no more today was enough to create a situation of a “band baaza bharat” everyday. All three members would be talking about the fourth member all the time. The conversations include where is she, hope she is not doing any masti, why she is so silent, what has been cooked for her, had she gone to her toilet or not, who will take her for a walk etc. Every human being will be talking about this member who is more than a human being and an apple of everyone’s eye.

The casual and sick leaves of the three were consumed only when this member was falling sick. In fact she was such stress buster at home no one else fell sick other than herself. All three members never grumbled to take leave to take care of this fourth member when the later used to fall ill.

That member who died was their 12-year-old female member of the family and a loyal companion was a watchman also. Nobody dared entered their house in their absence. It was a tiny brown and gold colour Pomeranian who used to run around the house all the time carrying something from somewhere to the main hall to attract to the attention of her masters.

Masters either used to pet and pat her for the job well done or would say that she should not carry that particular item hence forth. She understood every instruction and every word of her multiple masters.

Since last three months, she was very quiet, not eating food, not greeting people, no sniffing any new comer and his belongings. The house had become dead by and large. First they thought it is her general sickness. As the situation did not improve they tried different doctors, then they took her to the best of the doctors, every part of her body was scanned, nothing came out of those scanning.

Then they took her to the best of the animal hospital India can offer—Tata’s animal hospital at Parel in Mumbai found the reason for her inability to eat food. Her pancreas was strangulated by an organ growth which is not allowing the food to go. She was operated upon and found the growth is huge like a tumour but only thing is that the doctors at that time were not aware that it was cancerous or not.

She used to silently cry. The corners of the brown dog’s eyes were slowly getting black with flowing water. Doctors told the family that she is going through a terrible pain. They could not see her in pain and they requested the doctors not to treat her and allowed her to die.

I came back from the condolence and logged on to my computer. Cartoonist Monica Gupta from Sirsa, Haryana, had posted on her facebook page a picture of dry Tulsi plant, that she forgotten to water due to heavy winter. It became dry and there was not a single leaf. She decided to bring new sapling that evening to change. But the bad weather did not give her the courage to touch the mud. So she left the pot as it is.

Three days later when the weather subsided, she suddenly saw little green leaves spurting from the dried stems at different places. She was happy that the plant had come back to life. She immediately went to water the plant and feed with some manures. And she was happy she did not kill the plant three days before thinking that it died.

I don’t know why the dog came to my mind. Had they not stopped the treatment the chances of it coming back to life was there or not, I have no clue. Only doctors are the best advisors. But it certainly occurred to my mind. I clicked ‘like’ on Monica Gupta’s post, the first of that kind of an activity in my social networking life.

Funda is that life is resilient. Give it a chance and it will make every effort to repair itself and bounce back. Every creature or life inherently possesses the power of resilience. 

रधु रमन जी ने अपने  इस लेख में  Face book https://www.facebook.com/linkmonicagupta पर छ्पे एक लेख का जिक्र किया … मेरे लिए बहुत खुशी और आश्चर्य का विषय था …

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3. एक था तोता

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भरी दोपहर बिल्ली से बचता बचाता एक नन्हा मिठठू मियां अचानक घर के भीतर आ गया. हमनें भी उनकी आवभगत शुरु कर दी पर जैसे ही थोडा ठीक महसूस किया होगा वो  कमरे की खिडकी पर बैठ कर टुकुर टुकुर बाहर ही ताकने लगे …

वो बाहर जाना चाह रहा था और  हम बिल्ली के डर के मारे उसे बाहर जाने  नही देना चाह रहे थे. पर उसका उदास चेहरा देख कर मन मे हमें ही दुख हो रहा था कि हम ही गलती कर रहे हैं बस  शाम होते ही हमने अनमने मन से  उसे आजाद कर दिया …

बस एक ही कामना है कि दुबारा से बिल्ली उनका सामना न हो !

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4. Article- Real heroine

Real Heroine …. Salute

आज मणि के घर जाना हुआ. उसके घर रिश्तेदार आए हुए थे. उनके साथ एक प्यारी सी 3 महीने की गुडिया भी थी. गोल मटोल गुडिया के चेहरे पर स्माईल इतनी प्यारी थी कि मन करा कि उसे गोदी मे ही लिए रहूं. पर उनको वापिस जाना था इसलिए वो अपने मम्मी पापा के साथ चली गई. उनके जाने के बाद मणि ने बताया कि इस प्यारी सी गुडिया की मम्मी को यानि पप्पी को कैंसर था. उसे लगभग 8-9 महीने पहले पता चला और वो मुम्बई चले गए वही रह कर इलाज करवाया. इसी बीच अनेकों बार उसकी कीमोथैरेपी भी हुई. जहां एक तरफ उसका खाने का मन नही करता था वही दूसरी तरफ अपने भीतर पल रही नन्ही जान के लिए खाना और अच्छी डाईट लेनी भी जरुरी थी. मैं हैरान और हक्की बक्की होकर सारी बाते सुने जा रही थी. एक तो कैंसर का नाम ही डरावना है उस पर कीमो, आप्रेशन या रेडिएशन ना जाने कितनी तरह की प्रक्रिया से गुजरना पडता है ऐसे मे मन हार जाता है पर पप्पी ने ना सिर्फ उसे सहन किया बल्कि अपने जज्बे को जिंदा रखते हुए अपनी बेटी को जन्म भी दिया हालाकि वो आप्रेशन से ही हुई पर उसके बाद भी वो कैंसर का ईलाज करवाती रही.

अब वो ठीक होकर वापिस अपने शहर लौट रही थी इसलिए यहां पर थोडी देर के लिए रुकी. काश मुझे पहले पता होता तो मै जरुर उसकी हौंसला अफजाई करती और उसकी पीठ थपथपाती. मैं अपने घर जाने के लिए खडी ही हुई थी कि पप्पी सामने खडी थी. वो अपना पर्स ले जाना भूल गई थी इसलिए दुबारा आई थी. अचानक उसे सामने खडा देख कर मेरी आखे छ्लछ्ला आई और मैने उसे गले से लगा लिया और उसकी बहुत बहुत तारीफ की जिसकी वाकई मे वो सच्ची हकदार थी. प्यारी से मुस्कान लिए वो वहां से चले गए और मैं अपने घर लौटती हुई यही सोचती रही कि बेशक पप्पी कोई नामी गिरामी खिलाडी, अभिनेत्री या कोई जानी मानी हस्ती नही है पर जिस विश्वास के साथ उसने अपने cancer को सहा और एक बच्ची को जन्म दिया वो मेरे लिए किसी रियल हीरोईन से कम नही है.

ईश्वर करे अब वो हमेशा स्वस्थ रहे और सेहतमंद रहे.

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5. Article – Inner Peace

एक व्यक्ति अपने घर मे अपनी घडी रख कर कही भूल गया. बहुत जगह खोजा. नही मिली. उसने अपने घर मे पत्नी, नौकर और बच्चो सभी से कहा. सभी ने खोजी पर नही मिली. उन्होने ईनाम भी रख दिया कि सौ रुपए इनाम मिलेगा जो घडी खोज कर लाएगा. इसी बीच उसके बेटे ने कहा कि यह काम वो अकेले ही करना चाहता है. पहले वो एक कमरे में फिर दूसरे कमरे मे गया और बाहर आया तो उसके हाथ मे घडी थी. सब हैरान !!! पिता ने पूछा कि आखिर तुम्हे यह मिली कैसे?? इस पर बेटा बोला कि मैंने कुछ नहीं किया बस मैं कमरे में गया और चुप-चाप बैठ गया, और घड़ी की आवाज़ पर ध्यान केन्द्रित करने लगा , कमरे में शांति होने के कारण मुझे घड़ी की टिक-टिक सुनाई दे गयी , जिससे मैंने उसकी दिशा का अंदाजा लगा लिया और आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली.”
यानि
जिस तरह कमरे की शांति घड़ी ढूढने में मददगार साबित हुई उसी प्रकार मन की शांति हमें जिंदगी की ज़रूरी चीजें समझने मे मददगार होती है . हर दिन हमें अपने लिए
थोडा वक़्त निकालना चाहिए , जिसमे हम बिलकुल अकेले हों जिसमे हम शांति से बैठकर खुद से बात कर सकें और अपने भीतर की आवाज़ को सुन सकें , सही गलत का आंकलन कर सकें. बेशक तभी हम life को और अच्छे ढंग से जी पायेंगे…!!!

तो आप भी निकाल रहे हैं न अपने लिए समय … अपने आप से बात करने के लिए …. अपने को समझने के लिए :)

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6. लेख -वास्तु

मेरी एक जानकार ने नया घर बनाया है उसी के घर गई तो उसके कोई परिचित बैठे थे और पूरे घर का मुआयना करने के बाद वो सहेली को गुस्सा हो रहे थे कि वास्तु के हिसाब से ये नही किया वो नही किया. इस पर सहेली ने बोला कि जितना आर्किटेक्ट को पता था उस हिसाब से किया है बाकि अपना खर्चा भी देखा है इस पर वो बोले कि उन्होनें अपने नए घर में हर कमरे मे बाथरुम में, छ्त पर हर जगह वास्तु के हिसाब से किया है .वास्तु के हिसाब से चलते हैं तो कभी कोई परेशानी या दिक्कत नही आती.

जब सहेली ने पूछा कि उनकी वाईफ नही आई वो कैसी है तो वो बोले कि परसों गिर गई थी दो महीने का बैड रेस्ट है और बेटा भी परीक्षा मे फेल हो गया तो वो भी डिप्रेशन मे हैं कह कर वो चलते बने… मैं चुप थी, हैरान थी और मेरे सहेली भी !!!

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7. रक्तदान और महिलाएं

monica blood donors  (1) Female Blood Donors

सिरसा जिले के ऐलनाबाद ब्लाक में कुछ साल पहले एक रक्तदान शिविर लगा. चूकि शिविर गांव में लगा था इसलिए गांव की महिलाओ ने  बढ चढ कर भाग लिया. ये वो ही महिलाए थीं जिन्होनें स्वच्छता अभियान में भी बढ चढ कर हिस्सा लिया था. आई रक्तान के लिए थी पर जब हीमोग्लोबिन कम निकला और डाक्टर ने रक्तदान के लिए मना कर दिया तो ये अड गई और बोली कि हमे नही पता हमने आज दान करके ही जाना है ….  कुछ भी कहो… ये जज्बा है गांव की औरतों का … !!!

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8. लेख- ई कचरा

घर के बाहर कबाडी वाला जा रहा था मुझे देख कर पूछने लगा कि कुछ है ???  तो मैने कहा कि अभी रद्दी अखबार नही है तो वो बोला तो कोई पुराना कम्प्यूटर, पुरानी कार, UPS, फ्रिज, वाशिंग मशीन या AC या कूलर होगा … अरे … मैने पूछा कि ये सब भी लेते हो ??? वो बोला और क्या, अब अखबार रद्दी कबाड कहां होता है पर पुराना टीवी, कम्प्यूटर, एसी, कसरत करने वाली मशीन जैसी बहुत चीजे कबाड हो गया है… और आवाज लगाते हुए निकल गया. मुझे याद आया कि बहुत समय पहले पडोसी की fiat कार का अति खस्ता हाल हो गया था. किसी ने नही ली तो कबाडी को बुलाया तो वो बोला कि इसके तो उठवाने के भी पैसे लगेंगें …

हे भगवान !!! समय वाकई बदल रहा है और हमारा कबाड भी ई कचरे मे परिवर्तित हो रहा है :)  :( 

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9. Article- Fail

घर के बाहर अक्सर साईकिल चलाता रवि मिल जाता था. आज वो बहुत दिनों के बाद दिखा. स्कूल बैग लेकर सिर झुकाए जा रहा था. मेरे आवाज देने पर वो रुका .उसने बताया कि पिछली क्लास मे उसके नम्बर बहुत कम आए थे इसलिए उसका बाहर धूमना और खेलना बंद कर दिया है. अब वो सिर्फ स्कूल और टयूशन जाता है. मेरे दुबारा पूछने पर और वो जो ड्राईग बनाता था वो … उसने जवाब दिया कि वो भी बंद है और अब तो पापा ने टीवी देखने पर भी रोक लगा दी है अब बस सिर्फ पढाई पढाई ही है. और चुपचाप चला गया. हमेशा हंसता खेलता रवि आज गुमसुम और चुप हो गया है. आखों के नीचे काले गड्डे इस बात को दिखा रहे हैं कि कितना तनाव मे है वो. पर इस तरह से सब कुछ बंद करने पर क्या उसके अच्छे नम्बर आ जाएगें ..???? मैं उसे बहुत समय से जानती हूं अभी सातंवी क्लास मे ही आया है …

क्या एक बार नम्बर कम आने पर सभी चीजों से भी कट जाना चाहिए .. ये बात माता पिता को जरुर सोचनी चाहिए.

और मैने उसके पेरेंटस से मिलने का मन बना लिया

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10. Woh Tees Din

Monica gupta woh Tees Dinमेरे  लिखा बाल उपन्यास ” वो तीस दिन ‘ जोकि नेशनल बुक ट्र्स्ट से छपा है ,  की प्रोमोशन “कथा” नामक पत्रिका में :)

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11. Red Carpet

Red Carpet… वाकई रेड कारपेट पर चलना बेहद सुखद होता होगा. बडे बडे कलाकार इस पर चलते है और हाथ हिला कर अभिवादन करते हैं कितना आनंद मिलता होगा इसमें उन्हे.  अभी कुछ दिन पहले एक समारोह में जाना हुआ शाय्द मैं जल्दी पहुंच गई और वहां तैयारिया चल रही थी. मुख्य द्वार से भीतर तक लाल कालीन बिछाया जा रहा था. जो लोग इसे बिछा रहे थे वो बस बिछा रहे थे यानि वो जिस जमीन पर उसे बिछा रहे थे उसका लेवल सही नही था यानि एक दो जगह तो गड्डे थे और एक जगह तो जमीन बिल्कुल उबड खाबड थी. जो उस पर चलेगा यकीनन उसका संतुलन तो बिगडेगा ही बिगडेगा पर जल्दी काम निबटाने के चक्कर में वो जल्दबाजी कर रहे थे.

थोडे समय बाद डेकोरेशन पूरी हो गई और मेहमान आने शुरु हो गए. कुछ लोग उस पर बाते करते हुए चल रहे थे कुछ लोगों का जब संतुलन बिग़डा तो वो सचेत हुए वही फिर वो दूसरों को आराम से चलने की नसीहत देते नजर आए …

मेरे सामने रेड कारपेट बिछा हुआ था पर मैं उस पर चलने का हौंसला नही जुटा पाई.

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12. National Book Trust, India

Monica gupta woh Tees Dinनेशनल बुक ट्र्स्ट भारत से छपा मेरा बाल उपन्यास”वो तीस दिन”  पर नेशनल बुक ट्रस्ट की और से विचार …

यह बाल उपन्यास है और इस उपन्यास को हर बच्चा और बडा भी पसंद करेगा :)

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13. Article- Crossing

 

cartoon- mobile -monicaआज दोपहर एक क्रासिंग पर मोटर साईकिल वाला ट्रैफिक पुलिस से उलझ रहा था. वहां देख रहे सभी लोगो का कहना था कि गलती मोटरसाईकिल सवार की थी वो जल्दी निकलने के चक्कर मे लाल लाईट क्रास कर गया. अचानक मुझे दिल्ली वाली धटना की याद आई जिसमे महिला ने ईंट उठा ली थी इस पर हेड कॉन्स्टेबल ने भी ईंट उठा कर महिला को मारी. सारे धटना क्रम में शुरुआत महिला ने की पत्थर उसने पहले उठाया और अब सुनने मे आ रहा है कि वो बार बार बयान भी बदल रही है जो चैनल वाले इस महिला को नायिका के रुप मे दिखा रहे थे आज वो उसी की गलती बता रहे हैं.

बात कुछ भी निकले पर समझने वाली बात यह है कि हम सभी को ट्रैफिक नियमों का पालन गम्भीरता से करना ही चाहिए. अब आप सीट बेल्ट या वाहन चलाते फोन पर बात करने को ही लें तो कितने चालक ऐसे मिल जाएगें जोकि आराम से वाहन चलाते हुए फोन करतें  है. जोकि किसी भी कीमत पर सही नही है …

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14. Keeping a Green Tree in your Heart: A Selection of Tree Poetry Books

Tree-Themed Multicultural Children's Poetry Books

To give the Chinese proverb in its entirety, ‘Keep a green tree in your heart and perhaps a singing bird will come’ – and to extend the metaphor (or revert it … Continue reading ...

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15. Parenting

कल शाम मणि के घर कोई आए हुए थे वो अपने बच्चे के बारे मे डिस्कस करने आए हुए थे और उसे कह रहे थे कि वो उनके बेटे से बात करे और समझाए कि मेडिकल न लेकर आर्टस ही ले. मुझसे मेरी राय जाननी चाही तो मैने बिल्कुल स्पष्ट कहा कि वो गलत कर रहे हैं अपने बच्चे को हमसे बेहतर कौन समझ सकता है अब उसकी उम्र ऐसी है कि आप दोस्ताना व्यवहार रख कर खुल कर सारी बात करे. आप इधर उधर बात करेंगें, बच्चा कुछ और कहेगा,आप तक कोई और बात पहुचेगी, इस तरह दूरियां भी बढती हैं इसलिए सोच समझ कर ठंडे दिमाग से खुद ही बात करे और इसका हल निकाले.उस समय तो वो उठ कर चले गए शायद उन्हें मेरी बात अच्छी नही लगी पर अभी कुछ देर पहले मेरे पास उन्ही का थैक्स के लिए फोन आया.

उन्होने बताया कि कल रात बेटे से खुल कर बात हो गई है जो उनके मन में कंफ्यूजन था वो दूर हो गया है और वो मेडिकल ही लेगा और उसके निणर्य से वो भी सहमत है. :)  आज बच्चे बेहद संवेदनशील हैं इसलिए बजाय उधर उधर बात करके राय लेने से मित्रवत व्यवहार करते हुए, पेरेंटस को बच्चे से स्वयं ही खुल कर बात करनी चाहिए .

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16. कौन कीमती

कौन कीमती ?
एक बहुत छोटी सी बच्ची ने अपनी मम्मी से पूछा, “क्या वो कभी अपना रुपयों से भरा पर्स maid के पास छोड सकती हैं”. मम्मी ने लिपस्टिक लगाते हुए बोला पर्स और maid के पास !!! बिल्कुल नही! मतलब ही नही! सवाल ही नही! फिर बच्ची ने बहुत मासूमियत से पूछा, ” फिर “मुझे” maid के पास कैसे छोड सकती हो!!

 

कही पढी पर बहुत उमदा लगी … जरा नही  बहुत सोचने की दरकार है !!!

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17. FAST FOOD !!!

FAST FOOD !!!

cartoon fast

अहोई अष्टमी मां का व्रत था . वैसे एक दिन पहले भी  बहुत
महिलाओ ने रखा और आज भी बहुत महिलाए रख रही है. मेरी सहेली मणि ने बताया कि व्रत रखना
और अपनो के लिए दुआ मांगना बहुत अच्छा लगता है पर डर भी बहुत लगता है.अयं
इसमे कैसा डर. मेरे पूछने पर उसने कहा कि असल मे, खाना बनाते समय हम महिलाओ
की खाना चखने की बहुत आदत होती है कि नमक वगैरहा ठीक है या नही.
अब व्रत मे भी खाना तो बनाना होता ही है. बस इसलिए अक्सर यही डर बना रहता है कि कही टेस्ट
करने के चक्कर मे ….!!!ह ह हा !!! वैसे बात तो मणि ठीक ही कह रही है !!! ऐसी भूलचूक अक्सर होने वाली होती है !!! पर अक्सर बचाव हो ही जाता है !!!
वैसे शायद इसलिए ही हम महिलाओ को चटोरी की उपाधि मिली हुई है…!!! है ना !! उफ ये फास्ट एंड फास्ट का फूड !!!
है ना !!

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18. late shree P.K.S. Kutty

 

cartoonist monica gupta

29 अक्टूबर 2012 को Government Of Kerala की ओर से राष्ट्रपति भवन के आडिटोरीयम में केरल कार्टून आकादमी ने late shree P.K.S. Kutty की याद में श्रद्धांजलि समारोह मे एक पुस्तिका का विमोचन किया। केन्द्रीय प्रवासी भारतीय कार्य मंत्री श्री व्‍यालार रवि, केरल के मुख्‍यमंत्री श्री ओमान चांडी ने शिरकत की. राष्ट्रपति भवन के आडिटोरियम में ठीक 12 बजे राष्ट्रीयगान से कार्यक्रम आरम्भ हुआ. कार्यक्रम करीब 2 घटे तक चला.

श्री प्रणब मुखर्जी ने प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट स्वर्गीय पी.के.एस. कुट्टी को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्‍ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में अपने भी अनुभव बताए. राष्ट्रपति महोदय ने कहा कि वे अपने लम्‍बे सार्वजनिक जीवन में श्री कुट्टी के बनाए कार्टून के निशाने पर रहे, खासतौर पर बांग्‍ला समाचार पत्रों ‘आनंद बाजार पत्रिका’ और ‘आजकल’ में श्री कुट्टी के कार्य के दौरान। राष्‍ट्रपति ने कहा कि कुट्टी जैसे कार्टून कलाकार की तेज-तर्रार प्रतिक्रिया में नए तरह का हास्य‍ बोध होता था। श्री कुट्टी और उनके गुरू शंकर ने इसी संस्‍कृति को आगे आने वाली पीढि़यों में बढ़ाया.
उन्होने कहा कि कार्टून हमारे पास ब्रिटिश परम्परा के तौर पर आया। 1980 के उत्‍तरार्द्ध तक किसी नेता की पहचान उसके फोटो से ज्यादा उसके कैरिकेचर से होती थी। यहां तक कि पुराने नेता अपने बारे में बनाए गए इन हास्य चित्रों का संग्रह कर उन्‍हें अपने कार्यस्‍थल पर प्रदर्शित करते थे। उन्हे‍ लगता था कि एक लोकप्रिय कार्टून जनता के साथ उनके संपर्क को दर्शाता है।

आहत किए बिना निंदा करना, चेहरे के मूल भाव का बिगाड़े बिना हास्‍य चित्र बनाने की योग्‍यता और लम्बे चौड़े सम्पादकीय में जो बात नहीं कही जा सकती उसे ब्रश के माध्यम से व्यक्त करना कार्टूनिस्ट् की अद्भुत कला है। कार्टूनिस्ट हमारे सार्वजनिक जीवन का दर्पण हमारे सामने रख देता है और एक राष्ट्र के तौर पर हमें खुद को देखने की क्षमता प्रदान करता है।

देश भर से आए जाने माने कार्टूनिस्ट ने इसमे भाग लिया। कार्यक्रम के अंत मे कार्टून व व्यंग्य चित्रो की शानदार प्रदर्शनी भी लगाई गयी। जिसे दादा ने बहुत सराहा.
सच में, सभी जाने माने कार्टूनिस्ट से मिलना,रूबरू होना सुखद अनुभव रहा ……!!!

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19. समाज/ महिलाएं

पता नही आज समाज मे क्या हो रहा है…. !!! जहां महिलाओ पर शर्मनाक धटनाए रुकने का नाम नही ले रही वही कुछ लोग अजीबो गरीब बयान देकर पता नही खुद को क्या साबित करना चाहते हैं. मुझे दुख इस बात का भी है कि धटनाओ की वजह से लडकियो और महिलाओ का मनोबल टूट रहा है.
आज एक महिला से तो मेरी सहेली मणि की बहस ही हो गई. वो अपनी लडकी की पढाई छुडवा रही है और एक उसी की सहेली जोकि शहर से बाहर नौकरी करती थी वो भी नौकरी छोड कर वापिस आ गई है. कारण है माता पिता की चिंता. पुलिस पर से उनका विश्वास हट गया है और दिन तीन दिन पहले राष्ट्रपति की लडकी भी जब एक टीवी पर साक्षात्कार के दौरान यह बोले कि उसे भी दिल्ली मे डर लगता है तो वो तो आम आदमी ही है.
जब मणि ने उसे समझाने की कोशिश की तो वो बोली कि ठीक है आप मेरी दोनो लडकियो की जिम्मेवारी ले लो. मणि के पास अब कुछ कहने को नही था. उसने जब आकर मुझे सारी बात बताई तो मन मे यही बात आ रही थी कि जल्द ही बहुत जल्द ही सरकार को कदम उठाने होंगे. फालतू के बयान बाजी की कौन क्या कह रहा है कौन नही .. इससे हट कर महिलाओ की सुरक्षा और पुलिस की जिम्मेवारी पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा अन्यथा बहुत लडकियो को अपना मन मार कर घर पर ही बैठना पडेगा.

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20. 26 January

क्या बात है !!! 26 जनवरी के रंग में रंगे अखबार :)
आज सभी चैनल और अखबार तिरंगे के रंग मे सरोबार हैं और कुछ अखबार के विज्ञापन तो अपनी ओर हमारा ध्यान आकर्षित कर रहे हैं जैसा कि एक भारतीय जीवन बीमा निगम का विज्ञापन है …

RepubLIC of india यानि इसमे भी उन्होने LIC खोज लिया. वही एक ने लिखा है on RE_PUBLIC demand 50% offer. ह हा हा !!!
एक ने लिखा है आज और कल दो दिन मात्र 26 रुपए down payment करे और ले जाए सैमसंग का कोई उत्पाद
एक ने 26 को बना दिया कि 2 गुणा वृद्दि तेल और गैस के उत्पाद मे और 6 गुणा वृदि ओवरसीज उत्पाद मे… !!!
एक दुकान के बाहर लिखा था 26 चीजे खरीदो और एक शानदार उपहार पाओ. Surprised
एक चैनल पर 64 गणतंत्र पर 26 ज्वलंत प्रश्न जनता के सामने रख रहा है.
वही एक लेख आया हुआ 26 का सफर बनाम suffer.ह हा !! है ना लोगो की + कुछ मेरी सोच का कमाल !!!
गंणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !!!

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21. Blood donation and ladies

रक्तदान और महिलाए

कुछ समय पहले आईएसबीटीआई की ओर से स्वैच्छिक रक्तदान पर एक दिवसीय सम्मेलन था.बहुत दर्शक और बहुत वक्ता थे. रक्तदान के बारे मे बहुत पुरुषो ने बोला कि उन्होने जब रक्तदान किया तब घर पर अपनी पत्नी को नही बताया या अपनी मां को नही बताया क्योकि वो नाराज हो जाती कि रक्त किसलिए दे कर आए हो. एक ने तो बताया कि उन्होने 5 साल तक अपने घर मे किसी को खबर नही लगने दी कि वो रक्तदान कर रहे हैं.अगर पता चल जाता तो वो उसे रक्तदान नही करने दिया जाता.
वही उसी कार्यक्रम मे एक सज्जन ने बताया कि महिलाओ की कुछ परेशानियां ऐसी होती है कि वो खून नही दे सकती जैसा कि स्तनपान, महावारी और एनीमिया इसलिए पुरुषो को आगे आना चाहिए और ज्यादा से ज्यादा रक्तदान करना चाहिए.एक सज्जन ने यह भी बताया कि भले ही रक्तदान के लिए महिलाओ मे बहुत उत्साह देखने को मिलता है और वो बढ चढ कर र्क्तदान के लिए कैम्पो मे आती भी हैं पर जब उन्हे पता चलता है कि उनमे खून की कमी यानि एनीमिया है वो रक्तदान नही कर सकती तब उन्हे मजबूरन पीछे हटना पडता है.
तब मेरे दिमाग मे बस एक ही बात आई कि भले ही हम महिलाओ को हर महीने किसी न किसी रुप मे परेशानी से दो चार होना पडता है पर अगर कम से कम हमें रक्तदान के बारे मे विस्तार से जानकारी होगी तो अपने घर परिवार के लोगो को तो बजाय रक्तदान पर नाराज होने के होने प्रेरित तो कर सकती हैं.और इसके साथ साथ भले ही रक्तदान ना करे पर इतना तो करें कि खुद मे तो रक्त हो यानि ब्लड डोनर से पहले रक्त ओनर तो बनें.
अगर महिलाए एनीमिया से कम ग्रसित होगी तो रक्त की भी कम जरुरत पडेगी. इसके साथ साथ यह भी जानकारी भी होनी जरुरी है कि रक्तदान से कोई नुकसान नही होता.चाहे स्वयं रक्तदान करे या अपने घर परिवार मे किसी का, तो भी बहुत जागरुकता आ सकती है. असल मे, रक्तदान के बारे मे जब भी महिलाओ से बात की तो यही जवाब मिला कि हमे तो किसी ने कहा ही नही या हमे तो पता ही नही था.
महिला दिवस पर यही संकल्प लें कि रक्तदान के बारे मे सारी जानकारी लेगी और अगर होमोग्लोबिन 12.5 है तो रक्तदान करके खुद महसूस करेगी कि क्या अनुभव रहा और अगर किसी वजह से खुद ना कर पाई तो कम से कम अपने परिवार के सदस्यो को नाराजगी दिखाने के बजाय रक्तदान के लिए जरुर प्रेरित करेगी. जैसे किसी को जन्म देना एक खूबसूरत अहसास है ठीक वैसे ही किसी को नई जिंदगी देना भी एक खूबसूरत अहसास से कम नही है.

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22. Bitter Truth

कडवी सच्चाई

कुछ समय पहले महिलाओं का पर्व करवा चौथ मनाया गया और लोगों ने बढ चढ कर मैसेज या फेसबुक पर महिलाओ पर एक से एक बढ कर मजाक या व्यंग्य चित्र पोस्ट किया. मजाक मजाक में कई बाते इतनी कडवी भी कही गई कि … !! पर उन बातों को बहुत हल्के मे लिया गया और बात आई गई हो गई. यकीन मानिए बात आई गई नही हुई. यही छोटी छोटी बाते या आदते एक दिन बहुत गलत बातें बन जाती है. उस बात को आज सिर्फ इसलिए कहना पड रहा है कि जब सीबीआई के डायरेक़्टर ने महिलाओ के सम्बंध में कुछ ऐसी बात कही कि बवाल पैदा हो गया कि ऐसी बात कहने की हिम्मत कैसे हुई. हिम्मत उन्ही लोगों मे आती है जिन्हें नियमित रुप से महिलाओं पर मजाक बनाने का बहुत शौक होता है. और जब आदत बन जाती है तो मुंह से ऐसी हलकी बात निकल ही जाती है कि एक भारी और बडी बहस को जन्म दे देती है. हालाकि उन्होनें तो बाद में माफी भी मांग ली थी. पर माफी मांगना ही इसका अंत नही है. इस बात को गम्भीरता से विचार करना होगा. आय दिन ऐसे बहुत उदाहरण हमारे सामने आते हैं कुछ को मीडिया दिखा देता है और कुछ दब जाते हैं और कुछ दबा दिए जाते हैं.
किसी भी हल्के फुल्के मजाक के पक्ष में तो मैं स्वय़ं भी हूं पर जहां सीमा लांधी जाए वहां इस बात का विरोध करना भी बनता है और क्षमा कीजिएगा जो लोगो ऐसी सीमा लांधती बातों को इंजाय करते है उन्हे बुरा भी नही मानना चाहिए और ऐसे अपशब्दों के लिए भी तैयार रहना चाहिए. बाकि आप स्वयं समझदार है.
क्षमा कीजिएगा अगर आपको बुरा लगा तो यकीनन मुझे अच्छा लगा और अगर आप खुद को सुधारेगें तो मुझे बेहद खुशी होगी !!

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23. Keep it up

शाबाश, वाह, बहुत खूब, क्या बात है, लगे रहो, शुभकामनाएं …. !!! बहुत अच्छा लगता है सुनना !!! पर अगर कोई काम अच्छा करे और यह शब्द उसे सुनने को न मिले तो यकीनन मन उदास हो जाता है और काम करने का उत्साह लगभग खत्म हो जाता है. मेरी सोच भी कुछ ऐसी ही है पर 17 नवम्बर को जब सचिन का स्टेडियम से भाषण सुना तब से मन बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो रहा है.

सचिन ने भाषण के दौरान अपने कोच श्री रमाकांत आचरेकर के बारे मे बताया कि उन्होनें बहुत मेहनत करवाई स्कूटर पर एक मैदान से दूसरे मैदान ले जाते पर पिछले 29 साल में उन्होंने एक बार भी कभी “वेल प्लेड” नहीं कहा। उन्हें डर था कि मैं ज्यादा ही खुश न हो जाऊं और मेहनत करना न छोड़ दूं।’… वाकई में, सचिन की यह बात बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर रही है. बेशक आगे बढने के लिए अपनो का साथ तो चाहिए ही होता पर इसके साथ साथ प्रोत्साहन भी बहुत जरुरी होता है पर सचिन ने इस बात को दिल से नही लगाया और मेहनत मे जुटे रहे. मेरी भी विचार धारा बदल रही है और अगर आप लोगों को भी किसी खास की शाबाशी नही मिल रही है. जिससे आपको बहुत उम्मीद है तो भी कोई बात नही. यकीन मानिए वो बेशक लफ्जों ना बोलें पर दिल से आपका बहुत भला चाह्ते हैं.!!!

स्माईल कीजिए और जुटे रहिए !!!

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24. My Mother My God

प्यारी मम्मी :)

जिंदगी के सफर मे,हमारी अखिरी सासं तक, बहुत तरह के रिश्ते बनते है.कुछ कम समय के लिए तो कुछ लम्बे समय तक निभाए जाते हैं पर किसी भी सूरत मे “माँ के साथ हमारा रिश्ता 9 महीने ज्यादा का होता है”. … है ना

 

अपने अहसास को कुछ इस तरह से बया करती है मां
आसुँओ को खुशी के मोतियो मे पिरो लेती है मां
यू तो बेवजह, बात बात पर भावुक होने का हुनर कोई उससे सीखे
पर , खुदा कसम,
रोने वाले लम्हों में मुस्कुरा कर रह जाती है मां
खुद को खुदा नही समझती पर मेरी नजर मे खुदा से कम नही मेरी मां…. 

My mother My God !!!

 

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25. Beyond Limits 2012

beyound limits

मुश्किलो से भाग जाना आसान होता है, क्योकि हर पल जिंदगी मे इम्तेहान होता है, डरने वालो को कुछ नही मिलता, लडने वालो के कदमो मे सारा जहान होता है….
यह यह पक्तियां अनायास सी मन मे नही आई बल्कि कुछ ऐसे लोगो से मिल कर महसूस हुई जिनके हौसलों के आगे मैं नत मस्तक हूं.
आज दिल्ली मे एक प्रदर्शिनी मे जाना हुआ. श्री राजेंद्र जौहर जोकि 100% विकलांग है. उनकी देखरेख मे इस प्रदर्शिनी का आयोजन किया जा रहा हैं. सन 1992 मे उन्होने Family of Disabled नामक संस्था की शुरुआत की और सन 2001 से प्रदर्शिनी लगानी शुरु की. उनकी सुपुत्री श्रीमति प्रीति जौहर ने सारी जानकारी देते हुए बताया कि उनके पापा की जिंदगी मे एक गम्भीर हादसा हुआ. एक बार तो सारा परिवार हिल गया पर पापा ने हिम्मत दिखाई और इसे चैलेंज की तरह लिया और मानसिक और शारीरिक रुप से विकलांगो की एक संस्था बनाई. संस्था चलाने के लिए फंड बिल्कुल नही थे पर मदर टेरेसा का आशीर्वाद जरुर मिला और यकीनन वो बहुत आत्मबल दे गया.
आरम्भ मे संस्था की शुरुआत घर से ही की. सन 2001 मे ग्रीटिंग कार्ड बनाने से काम शुरु किया. तब सिर्फ एक ही कलाकार साथ थे. देखते ही देखते कला के क्षेत्र मे रुचि रखने वाले विशेष लोग मिलते ही गए. फिर मन मे यह सोच हुई कि इन मानसिक तथा शारीरिक रुप से विकलांग यानि इन विशेष कलाकारो की कलाकारी को दिखाने के लिए कोई मंच होना आवश्यक है पर बात फिर वही सामने आई कि इन सब मे खर्चा बहुत आएगा और फंड बिल्कुल भी नही थे. इसी बीच ईश्वर की असीम कृपा हुई और अर्पना कौर जी से मुलाकात हुई. उन्होने भावनाओ को समझा और उनकी गैलरी मे प्रदर्शिनी लगनी शुरु हो गई. पिछ्ली 11 बार से अर्पना आर्ट गैलरी मे दिसम्बर के महीने मे इन विशेष लोगो दवारा बनाई कलाकृतियो की नुमाईश की जाती है.
आज Beyond Limits – 2012, नामक प्रदर्शिनी मे 49 विशेष कलाकार हिस्सा ले रहे हैं.जिसमे जम्मू, तमिलनाडू,बिहार,पटना, कोलकता,गुजरात, लखनऊ, राजस्थान आदि राज्यो से हैं. इस प्रदर्शिनी मे विभिन्न प्रकार की कला का मिश्रण है. जिसमे विभिन्न प्रकार की चित्रकारी है, sculptures है जोकि bronze और stone मे हैं, ऐसी कलाकारी देख कर खुद ब खुद दांतो तले ऊंगली दब जाती है कि क्या अदभुत कलाकारी है.
ऐसी ही एक कलाकार शीला शर्मा से बात हुई उनके दोनो हाथ नही है और पैरो से चित्रकारी करती हैं.उनके अदभुत साहस ने चकित कर दिया. श्रीमति प्रीति जौहर ने बताया कि आमिर खान के कार्यक्रम सत्यमेव जयते मे भी उनकी संस्था के बारे मे बताया गया उससे भी बहुत आत्मबल मिला.
उनका कहना है कि यह 12वी प्रदर्शिनि है. वो चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग आए और इसे देखे सराहें और कलाकारो का आत्मबल बढाए. यह प्रदर्शिनी Arpana Art Gallery, Academy of Fine Arts & Literature, 4/6, Siri Fort Institutional Area, Khel Gaon Marg, दिल्ली मे, 2 दिसम्बर से 8 दिसम्बर तक लगी हुई है. इसका समय है दिन के 11 बजे से शाम के 7 बजे तक.
जाते जाते एक बात फिर जहन मे आ रही है कि….
उम्मीदो की कश्ती को डुबोया नही करते/ साहिल अगर दूर हो तो रोया नही करते/ रखते है जो दिल मे उम्मीद कुछ पाने की / वो लोग जिंदगी मे कुछ खोया नही करते !!!

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