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1. Listen Please

cartoon -monica-car

 

Listen Please

आज “मन की बात” में सडक दुर्घटना का मुद्दा भी था. मोदी जी ने बताया कि कि किस तरह से एक व्यक्ति सडक पर घायल पडा रहा पर कोई मदद के लिए नही आया. इसके लिए रोड सेफ्टी बिल लाएंगे और पहले 50 घंटे में घायलों के कैशलेस ट्रीटमेंट की कोशिश करेंगे’.. बेशक, जो सही लगे वो कदम जरुर उठाए जाने चाहिए पर एक जरुरी कदम ये भी होना चाहिए अगर कोई सडक पर किसी घायल को देखे और वो उसे अस्तपाल ले कर जाए तो ज्यादा पूछ्ताछ न हो … क्योकि हम लोग मदद करने में पीछे नही हटते पर पीछे हटते हैं तो वो सिर्फ एक ही वजह से.. वो है पुलिस पूछ्ताछ करेगी सौ सवाल करेगी. समय वेस्ट होगा कौन इस पचडे मे पडे.

Media मे जब इस दुर्घटना की खबर दिखा रहे थे तो यही बोल रहे थे लोग सवेंदनहीन हो गए है… निर्भया के मामले मे भी यही बोला गया कि वो सडक पर पडी रही और कोई आगे नही आया मदद के लिए

सोचने वाली बात ये है कि कोई आगे क्यों नही आया.? क्या वाकई लोग संवेदनहीन हो गए हैं? शायद नही हमारे देश के लोगों मे अभी मानवता मरी नही  है पर हमारे देश के कानून ने हमे मार रखा है…

मुझे याद है हमारे सिरसा में कुछ साल पहले एसपी ने यह घोषणा की थी कि जो व्यक्ति सडक पर पडे घायल को अस्पताल लेकर जाएगा उससे ज्यादा पूछ्ताछ नही होगी और उसे ईनाम मिलेगा और इस वजह से घायल को तुरंत मदद मिलने लगी और तनाव खत्म ही हो गया था ( हैरानी की बात ये भी हुई कि तब मेरी कोशिशों के बाद भी इस सकारात्मक खबर को न्यूज चैनल ने नही लिया स्टोरी को होल्ड पर रख दिया ). खैर फिर एसपी का तबादला हो गया और नियम फिर बदल गए. सबसे पहले जिला स्तर पर अगर प्रशासन सकारात्मक कदम उठाए तो बहुत अच्छा उदाहरण पेश किया जा सकता है. 

आज प्रधान मंत्री जी की मन की बात सुन कर बीती बात याद आ गई. अगर छोटे छोटे स्तर पर प्रशासन और पुलिस सचेत हो जाए तो बहुत बदलाव लाया जा सकता है…

 

http://www.khabarmantra.com/news/own-thing-in-the-pm-narendra-modi-said-government-will-bring-the-bill-on-road-safety-26072015.html

 

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2. अपनी सोच

अपनी सोच

मेरी सहेली मणि  की थोडी तबियत खराब थी. मैं उससे मिलने गई तो बजाय आराम करने के वो  कुछ काम कर रही थी. मैने कहा कि जब से सुना है कि तुझे चोट लगी है दर्द मुझे हो रहा है और तू है कि काम कर रही है… आखिर इतना दर्द कैसे सहन कर लेती है. वो बोली इसके पीछे एक सीक्रेट है… मैने भी धीरे से कहा कि अच्छा … मुझे भी बता दो वो सीक्रेट…

उसने मुस्कुराते हुए बताया जब भी मुझे चोट लगती है मैं सोच लेती हूं कोई बला मेरे परिवार, मेरे बच्चों पर आनी थी जो मुझ पर आ गई है .. बस फिर दर्द की खुद ब खुद सहने की शक्ति आ जाती है… ये सोच कर अपने परिवार का दर्द हम उठा ही रहें हैं तो खुशी खुशी क्यों न उठाए …

मैं सोच रही थी कि कितनी आसानी से वो ये बात कह गई… शायद इसीलिए महिला को दयालुता और सहनशीलता की मूरत कहा जाता है … शायद मैं भी ऐसा कभी सोच पाऊंगी :)

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3. Oh My God

 

Oh My God

आज मुझे शायद पहली बार किसी को गिरता देख कर दुख नही हुआ …. अरे !!! हैरान होने की जरुरत नही… मैं निष्ठुर या निर्दयी हूं ये आप पूरी पोस्ट पढने के बाद फैसला लें…

कुछ देर पहले मैं मार्किट से पैदल आ रही थी. मेरे सामने एक लडकी जोकि करीबन बीस बाईस साल की होगी, आ रही थी. हाव भाव से लग रहा था कि मोबाईल पर शायद कोई मैसेज टाईप करे जा रही है और अचानक सडक पर कोई पडा पत्थर शायद वो देख नही पाई और बुरी तरह लडखडा कर गिरी.

वैसे तो वो गिरते ही उठ गई और मोबाईल पर लगी मिट्टी को पोछने लगी पर मुझे उससे कोई हमदर्दी नही हुई. बल्कि मैं मन ही मन कह रही थी और देख मोबाईल और खा ठोकर … शायद अक्ल ठिकाने आ जाए और मैसेज एक जगह खडी होकर करना सीख जाए ना कि चलते चलते…!!! पता नही लोग कब सुधरेंगें

Oh My God !!! पता नही हम ठोकर खाकर भी सुधरेंगें या नही

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4. ब्रांड एम्बेस्डर

ब्रांड एम्बेस्डर

पिछ्ले दिनों अमिताभ बच्चन जी सुर्खियों में थे कि उन्होने किसान चैनल के लिए 6.31 करोड रुपए लिए हैं जिसका बाद में खंंडन हुआ और फिर ये सुनने मे आया कि वो रुपए लौटा रहे हैं. मामला अभी गर्म ही था कि हरियाणा में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान की बैंड एम्बेसडर बनी परिणिती चोपडा का पता नही कितने पैसे लिए है?

कुछ समय पहले हमने भी एक छोटी सी संस्था बनाने की सोची थी और सोचा था कि जानी मानी हस्ती से बात करके उन्हे अपने साथ जोडेग़ें तो यकीनन बहुत लोग साथ जुड जाएगें. किसी के माध्यम से एक जानी मानी हस्ती से  बात भी पर मामला तब खटाई में पड गया जब वहां से पूछा गया कि आपका बजट कितना है. हम हैरान ?? हमने कहा जी, समाज सेवा का काम है ये और  आप तो वैसे भी समाज सेवा के काम करते दिखाई देते रहते हैं और साथ ही साथ आपके पास तो वैसे ही इतना नेम ऎंड फेम है…  अगर एक छोटा सा संदेश दे देंगें तो आपको क्या फर्क पडने वाला है ??? तब बिचोलिए ने बताया कि ये सैलीब्रेटी यकीनन समाज सेवा करती हैं पर बिना पैसे के एक कदम भी नही चलती. पहले पैसा बाद में कोई और बात… अब हमारा बजट तो था नही इसलिए हमें उनको वही नमस्कार करना पडा पर मन जरुर खटटा हो गया कि नाम बडा और दर्शन छोटे ….

आज अगर सैलिब्रेटी को लेकर पैसे का मुद्दा उठ रहा है तो यकीनन अच्छी बात है, किसी चीज का ब्रांड एम्बेसडर बनने में खुद की भी तो ब्रांडिंग होती है ऐसे में सरकारी पैसा किसलिए लुटाया जाए …ह हा हा !! हंसी इसलिए आ रही है कि ऐसा होगा नही क्योकि ये  बिना पैसे के कोई काम नही करेंगें इस बात में कोई किंतु परंतु या दो राय नही. हां वो अलग बात है कि पैसा किस तरह से लिया जाएगा कि समाज सेवा भी हो जाए और नाम भी खराब नही होगा…

 

BBC

डीडी किसान चैनल से पैसे लेने की बात से हालांकि अमिताभ बच्चन ने इंकार किया है लेकिन उनके प्रचार का कामकाज देख रही कंपनी – लिंटास, और किसान चैनल का कहना है कि बिग बी को मेहनताना दिया गया.

हालांकि अब कंपनी पैसा लौटाने की प्रक्रिया में है.

एक अंग्रेजी अख़बार में ख़बर छपी थी कि अमिताभ बच्चन ने किसानों के लिए शुरू किए गए सरकारी चैनल से साढ़े छह करोड़ रुपये से ज़्यादा का मेहनताना लिया है.

इसके बाद सोशल मीडिया और दूसरी जगहों पर ये सवाल पूछे जाने लगे कि क्या अमिताभ बच्चन को चैनल से पैसे लेने चाहिए थे, ऐसा करना जायज़ था?

बच्चन ने ट्वीट करके कहा कि उन्होंने डीडी किसान से किसी क़िस्म का मेहनताना नहीं लिया है.

फ़िल्मों में अभिनय के अलावा बच्चन ढेर सारी कंपनियों और उत्पादों के लिए विज्ञापन भी करते हैं. इनमें सरकारी विज्ञापन भी शामिल हैं.

ज़ाहिर है इन विज्ञापनों के लिए उन्हें मोटी रकम मिलती है.

किसान चैनल से पैसे लेने के विवाद पर किसान चैनल के प्रमुख नरेश सिरोही ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “हमने लिंटास कंपनी को अमिताभ बच्चन से विज्ञापन कराने के लिए पैसे दिए थे.”

सिरोही का यह भी कहना था कि अब अचानक कंपनी ने यह कहकर पैसे लौटाने का फ़ैसला किया है कि अमिताभ ने पैसे लेने से मना कर दिया है.

लिंटास कंपनी ने भी इस संबंध में स्पष्टीकरण दिया और अपने बयान में पहले पैसे लेने और फिर लौटाने की बात कही है.

“डीडी किसान ने 31 मार्च, 2015 को औपचारिक रूप से हमें अमिताभ बच्चन के कार्यालय से बातचीत के लिए अधिकृत किया था. 12 मई को अमिताभ बच्चन के कार्यालय से हमें इसकी स्वीकृति मिल गई. उसके बाद हमने डीडी किसान चैनल के साथ काग़ज़ी कार्रवाई शुरू की और फिर डीडी किसान ने पैसे जारी किए.”

“श्री बच्चन ने सैद्धांतिक रूप से ये फ़ैसला लिया है कि राष्ट्र हित में इस विज्ञापन के लिए वह किसी तरह का शुल्क नहीं लेंगे इसलिए अब हमारी कंपनी डीडी किसान को पैसे वापस करने की प्रक्रिया शुरू कर रही है.” See more…

television  photo

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5. हम और हमारे अंधविश्वास

हम और हमारे अंधविश्वास

दो दिन पहले काम वाली बाई बोल कर गई कि वो कल काम पर नही आएगी क्योकि लडकी वाले उसके घर रिश्ते के लिए उसका लडका  देखने आ रहे हैं फिर अचानक ही कल वो काम पर आ गई. मेरे हैराने से पूछने पर उसने बताया कि शायद चामचुकाई नजर हो गई. उसने अपने पडोस में भी एक दो लोगों को बता दिया था शायद नजर लग गई कि हाय लडकी  वाले आ रहे हैं. उसकी बात सुन कर मैं सोचने लगी कि हम इन छोटी छोटी बातों में अभी भी हैं और शायद रहेंगें भी.

आज ही मैने नेट पर भी पढा कि घर पर महाभारत का कोई पोस्टर या ताजमहल या फिर डूबता जहाज की तस्वीर नही होनी चाहिए. फव्वारा भी नही लगाना चाहिए. इतना ही नही इसी बात को सर्च करते करते मैं भूत वाली खबर पर पहुंच गई. खबर दिल्ली की है. दिल्ली के सिविल लाइंस इलाक़े का एक विशाल बंगला 10 साल से इसलिए खाली पड़ा है क्योंकि उसे वहाँ रहने वाले के लिए अशुभ या भूतिया माना जाता था. सुनने में आया कि वहां रहने वाले कई मंत्रियों के करियर बर्बाद हुए और कुछ की समय से पहले मौत भी हो गई. लेकिन अब दिल्ली डायलॉग कमीशन ने इसे अपना दफ़्तर बनाया है. कमीशन के वाइस-चेयरमैन आशीष खेतान इसके मनहूस होने की बात को बकवास बताते हैं. खेतान के अनुसार कमीशन के दफ़्तर के लिए इस बंगले को ख़ुद उन्होंने चुना है. सुनने में अच्छा भी है पर डरावना भी.ऐसी बातो पर विश्वास करें या न करें मैं सोच ही रही थी तभी दरवाजे पर धंटी हुई. कोई काम वाली बाई के घर से आया था उसे बुलाने क्योकि लडकी वालों का अचानक कार्यक्रम बन गया और वो आ गए हैं उसके घर. मैने उसे all the best  कहा और वो स्माईल देती अपने घर भागी …

आज वो मिठाई लाई है क्योकि रिश्ता पक्का हो गया… मैं मिठाई खा ही रही थी तभी मणि का फोन आया. बोली, आज सिर दर्द कर रहा है  वो कल एक शादी में गई थी . सुंदर बहुत लग रही थी शायद किसी की नजर लग गई होगी इसलिए …

ह हा हा !! हे भगवान !! इन बातों को माने या न माने :)

फिलहाल तो आप ये खबर जरुर पढें….

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  BBC

दिल्ली के सिविल लाइंस इलाक़े का एक विशाल बंगला 10 साल से इसलिए खाली पड़ा था क्योंकि उसे वहाँ रहने वाले के लिए अशुभ माना जाता था. लेकिन दिल्ली डायलॉग कमीशन ने इसे अपना दफ़्तर बनाया है.

तो क्या है इस ‘मनहूस’ बंगले की कहानी और क्या उसमें अब काम कर रहे लोग भी अफ़वाहों से डरे हुए हैं?

शामनाथ मार्ग का बंगला नंबर 33 पहली नज़र में ही आलीशान नज़र आता है. 5500 वर्गमीटर में फैले दो मंज़िला बंगले में तीन बेडरूम, ड्राइंग रूम, डाइनिंग हॉल और कांफ्रेंस रूम हैं.

बंगले में गॉर्ड के लिए अलग कमरा है और नौकरों-चाकरों के लिए अलग से 10 क्वार्टर हैं. बंगले के चारों तरफ़ एक बड़ा सा लॉन है. बग़ीचे में पानी का फव्वारा है.

राजधानी दिल्ली के पॉश इलाक़े के इस बंगले की क़ीमत करोड़ों में होगी. लेकिन ये सरकारी बंगला मनहूस माना जाता है और पिछले 10 साल से इसमें रहने वाला कोई नहीं था.

लोग तब यहाँ रहने से कतराने लगे जब ये माना जाने लगा कि इस बंगले में रहने की वजह से कइयों के करियर बर्बाद हुए और कुछ लोगों की असमय मौत हो भी हुई.

सिविल लाइंस को ब्रितानी शासकों ने अपने आला अफ़सरों के लिए बनाया था. यहाँ के पुराने बाशिंदे बताते हैं कि ये बंगला 1920 के दशक में तैयार हुआ था.

आज़ादी के बाद इसे दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास के लिए सबसे बेहतरीन माना गया. दिल्ली विधान सभा यहां से महज़ 100 गज़ दूर है.

सूबे के पहले मुख्यमंत्री चौधरी ब्रह्म प्रकाश ने 1952 में इसे अपना निवास बनाया. 1990 के दशक में दिल्ली के एक अन्य मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना भी यहीं रहे.

दोनों मुख्यमंत्रियों को कार्यकाल ख़त्म होने से पहले ही पद छोड़ना पड़ा. और फिर तो बंगले के साथ ‘मनहूस’ शब्द जुड़ गया.

महदूदिया कहते हैं, “खुराना की गद्दी जाने के बाद किसी ने इस बंगले को अपना घर नहीं बनाया. अफ़वाह फैल गई कि ये बंगला मनहूस है. मुख्यमंत्री बनने के बाद साहब सिंह वर्मा और शीला दीक्षित ने इसमें रहने से मना कर दिया.”

साल 2003 में दिल्ली की तत्कालीन सरकार में मंत्री दीपचंद बंधू ने सहयोगियों की सलाह को नज़रअंदाज़ करते हुए इसे अपना निवास बनाया.

महदूदिया कहते हैं, “उन्होंने कहा कि वो अंधविश्वासी नहीं हैं और बंगले में शिफ़्ट हो गए. लेकिन कुछ ही दिनों बाद वो बीमार पड़ गए. उन्हें मेनिनजाइटिस हो गया. जिससे उनकी अस्पताल में मौत हो गई.”

इसके बाद इस अफ़वाह ने और ज़ोर पकड़ लिया कि ये बंगला मनहूस है. इसके बाद अगले 10 सालों तक किसी नेता या अफ़सर ने इस बंगले को अपना घर नहीं बनाया.

साल 2013 में वरिष्ठ नौकरशाह शक्ति सिन्हा ने इसमें रहने का फ़ैसला किया. सिन्हा के अनुसार उनके लिए ये बंगला ख़ुशनुमा रहा लेकिन अन्य लोग ध्यान दिलाते हैं कि सिन्हा भी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके थे.

इस साल 9 जून को इस बंगले को फिर से नया निवासी मिला. दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे दिल्ली सरकार को नीतिगत सलाह देने वाले दिल्ली डॉयलॉग कमीशन का दफ़्तर बना दिया.

कमीशन के वाइस-चेयरमैन आशीष खेतान इसके मनहूस होने की बात को बकवास बताते हैं. खेतान के अनुसार कमीशन के दफ़्तर के लिए इस बंगले को ख़ुद उन्होंने चुना है.

खेतान ने बीबीसी से कहा, “मुझे पता चला कि इतनी बड़ी सार्वजनिक संपत्ति को कोई नेता या अफ़सर इस्तेमाल नहीं कर रहा है क्योंकि उन्हें लगता है कि ये मनहूस है.”

उन्होंने कहा, “एक ऐसे वक़्त में जब हम डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं, स्पेस में सैटेलाइट भेज रहे हैं, मुझे लगा इस मनहूसियत को तोड़ना ज़रूरी है.”

खेतान के साथी देवेंद्र सिंह बताते हैं कि जब वो लोग यहाँ आए तो ‘सारे कमरे टूटी हुई कुर्सियों और फ़र्नीचरों से भरे हुए थे.’

पिछले कुछ हफ़्तों में इस बंगले की साफ़-सफ़ाई हुई है. ताज़ा पेंट के गंध अभी तक इससे नहीं गई है. खिड़कियों पर नए पर्दे लग रहे हैं.

खेतान कहते हैं, “हर किसी को अंधविश्वास से लड़ने की क़सम खानी चाहिए और वैज्ञानिक चेतना को बढ़ावा देना चाहिए. ये बहुत दुख की बात है कि पढ़े-लिखे लोग काले जादू और अंधविश्वास को बढ़ावा देते हैं.” Read more…

 6 Things you should never bring in the house- 6

जयपुर। भारतीय वास्तु विज्ञान चाइनीज फेंगसुई से काफी मिलता-जुलता है। यह प्राकृतिक शक्तियों को मनुष्य के लिए उपयोगी बनाने का एक कलात्मक परंपरा है। हम अक्सर सुनते आए हैं कि घर में क्या रखना अच्छा होता है और क्या रखना बुरा। आइए आज आपको बताते हैं कि घर में कौनसी 6 चीजें कभी नहीं रखनी चाहिए।

1 महाभारत की तस्वीरें या प्रतीक : महाभारत को भारत के इतिहास का सबसे भीषण युद्ध माना जाता है। कहते हैं कि इस युद्ध के प्रतीकों, मसलन तस्वीर या रथ इत्यादि को घर में रखने से घर में क्लेश बढ़ता है। यही नहीं, महाभारत ग्रंथ भी घर से दूर ही रखने की सलाह दी जाती है।

2 नटराज की मूर्ति : नटराज नृत्य कला के देवता हैं। लगभग हर क्लासिकल डांसर के घर में आपको नटराज की मूर्ति रखी मिल जाती है। लेकिन नटराज की इस मूर्ति में भगवान शिव श्तांडव नृत्य की मुद्रा में हैं जो कि विनाश का परिचायक है। इसलिए इसे घर में रखना भी अशुभ फलकारक होता है।

3. ताजमहल : ताजमहल प्रेम का प्रतीक तो है, लेकि न साथ ही वह मुमताज की कब्रगाह भी है। इसलिए ताजमहल की तस्वीर या उसका प्रतीक घर में रखना नकारात्मकता फैलाता है। माना जाता है कि ऎसी चीजें घर पर रखी होने से हमारे जीवन पर बहुत गलत असर पड़ सकता है। यह सीधे-सीधे मौत से जुड़ा है इसलिए इसे घर पर न रखें।

5 फव्वारा : फव्वारे या फाउन्टन आपके घर की खूबसूरती तो बढ़ाते हैं लेकिन इसके बहते पानी के साथ आपका पैसा और समृद्धि भी बह जाती है। घर में फाउन्टन रखना शुभ नहीं होता। Read more…

इसी बात पर अगर आप भी अपना कोई अनुभव शेयर करेंगें तो अच्छा लगेगा !!!

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6. कुछ प्रेरक बातें

कुछ प्रेरक बातें

कई बार बात करते करते या फिर टीवी के माध्यम से हमें बहुत सीख मिल जाती है  कुछ समय पहले टीवी पर अनुपम खेर का कार्यक्रम आ रहा था. वो बातों बातों में किसी को बता रहे थे कि एयर पोर्ट  पर उन्हें कोई मिला और बहुत गर्म जोशी से मिला. अनुपम खेर उन्हें पहचान नही पाए कि ये है कौन पर  अनुपम खेर ने उनसे पूछा नही बल्कि उससे दुगुने  अपनेपन से गले मिले और हाल चाल पूछा बात करते करते उन्हें याद आ गया कि वो कौन था.. ऐसा अक्सर हमारे साथ भी हो जाता है कोई मिलता है बहुत गर्मजोशी से पर याद ही नही आता इसलिए उस समय ये पूछ्ने   कि भई आप कौन है ?? मैं आपको कैसे जानता हूं …. हमें भी गर्म  जोशी से मिलना चाहिए … देर  सवेर  याद आ ही जाएगा …!! 

ऐसे ही एक बार बहुत साल पहले टीवी पर हेमा मालिनी का साक्षात्कार आ रहा था. उन्होने बताया कि हमें अपने बच्चे में अगर हमे कोई कमी लगती है तो बजाय दूसरों को  बताने के बच्चों को ही बतानी चाहिए. एक बार वो अपनी किसी सहेली से अपनी बच्ची के बारे में बात कर रही थी . ये बात उनकी बेटी ने सुन ली और उनके जाने के बाद टोका कि अगर यही बात आप हमे बताते तो हम उसे सुधारते.इस बात ने भी बहुत असर डाला मन पर. वाकई में हमें कोशिश यही करनी चाहिए कि घर की बात आपस में ही सुलझा लेनी चाहिए. 

एक बार साक्षात्कार लेते हुए उन्होने महिलाओ के बारे में बहुत बाते सांझा की. उन्होने कहा कि महिला कही भी काम करें चाहे  आफिस में या फिल्मों में….  अपनी गरिमा बना कर रखनी चाहिए.

एक और उदाहरण है सचिन तेंदुलकर का..

शाबाश, वाह, बहुत खूब, क्या बात है, लगे रहो, शुभकामनाएं …. !!! बहुत अच्छा लगता है सुनना !!! पर अगर कोई काम अच्छा करे और यह शब्द उसे सुनने को न मिले तो यकीनन मन उदास हो जाता है और काम करने का उत्साह लगभग खत्म हो जाता है. मेरी सोच भी कुछ ऐसी ही है पर 17 नवम्बर को जब सचिन का स्टेडियम से भाषण सुना तब से मन बहुत कुछ सोचने पर मजबूर हो रहा है. सचिन ने भाषण के दौरान अपने कोच श्री रमाकांत आचरेकर के बारे मे बताया कि उन्होनें बहुत मेहनत करवाई. स्कूटर पर एक मैदान से दूसरे मैदान ले जाते पर पिछले 29 साल में उन्होंने एक बार भी कभी “वेल प्लेड” नहीं कहा। शायद उन्हें डर था कि मैं ज्यादा ही खुश न हो जाऊं और मेहनत करना न छोड़ दूं।’… वाकई में, सचिन की यह बात बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर रही है. बेशक आगे बढने के लिए अपनो का साथ तो चाहिए ही होता पर इसके साथ साथ प्रोत्साहन भी बहुत जरुरी होता है पर सचिन ने इस बात को दिल से नही लगाया और मेहनत मे जुटे रहे. मेरी भी विचार धारा बदल रही है और अगर आप लोगों को भी किसी खास की शाबाशी नही मिल रही है. जिससे आपको बहुत उम्मीद है तो भी कोई बात नही. यकीन मानिए वो बेशक लफ्जों ना बोलें पर दिल से आपका बहुत भला चाह्ते हैं

तो है ना … अच्छी है ये बाते … अगर आप भी कोई ऐसी बात हमसे शेयर करना चाहें तो आपका स्वागत है …

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7. अरविंद केजरीवाल -एक साक्षात्कार

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अरविंद केजरीवाल -एक साक्षात्कार

आज, आज तक पर अरविंद जी का Exclusive साक्षात्कार देखा. बहुत दुख हुआ ये देख कर कि मीडिया की बातों में मैं भी आ गई थी. एक एक बात को अरविंद जी ने जब बताया तो लगा … अरे !!! ये तो हमे पता ही नही था. राजदीप सर देसाई को उन्होनें चुप करवा दिया और स्पष्ट बोले कि अगर आपने ही बोलना है तो बोले जाओ मेरी क्या जरुरत है … एक एक बात का इतना सही जवाब दिया कि मैं तो सुनती ही रह गई. वेट, तोमर, स्वाति, विज्ञापन, जंग साहब एक एक बात पर अपनी बात रखी. अगर आपको मौका मिले तो जरुर देखिएगा …!!!

http://aajtak.intoday.in/video/modi-is-creating-obstacles-says-arvind-kejriwal-1-823168.html

 

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8. Social Networking Sites

Social Networking Sites and our lives

 

tweet

क्या वाकई … सोशल नेट वर्किंग साईटस ही हमें अनसोशल बना रही है.. सबसे ज्यादा सवालिया निशान टवीटर पर उठ रहे हैं कम से कम शब्दों मॆं अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए किस तरह से किसका अपमान किया जाए उसका मजाक बनाया जाए ….कही न कही हमारे दिलो दिमाग पर हावी होता जा रहा है … बेशक,कुछ बातों मे टवीटर अच्छा भी होगा पर फिर भी प्रश्न यही खडा होता है कि कैसे बचे इससे और कैसे बचाए …!!

Another case of child abuse goes viral on social networking sites | Dhaka Tribune

Corporal punishment against two girls at an orphanage run by Social Welfare Directorate in Barisal has caused uproar among the public after its footage went viral on social networking sites.

Although the incident took place on July 4, the district administration became aware of it after the footage went viral.

The footage uploaded on Facebook shows Md Dulal, health assistant at the institution, is indiscriminately beating two girls as they try to flee from the shelter home.

Yesterday, Deputy Commissioner Dr Gazi Saifuzzaman went to the orphanage and asked officials concerned to take stern action against the people responsible for the abuse after a proper investigation. See more…

The Evolving Role of News on Twitter and Facebook | Pew Research Center

The share of Americans for whom Twitter and Facebook serve as a source of news is continuing to rise. This rise comes primarily from more current users encountering news there rather than large increases in the user base overall, according to findings from a new survey. The report also finds that users turn to each of these prominent social networks to fulfill different types of information needs.

The new study, conducted by Pew Research Center in association with the John S. and James L. Knight Foundation, finds that clear majorities of Twitter (63%) and Facebook users (63%) now say each platform serves as a source for news about events and issues outside the realm of friends and family. That share has increased substantially from 2013, when about half of users (52% of Twitter users, 47% of Facebook users) said they got news from the social platforms.

Although both social networks have the same portion of users getting news on these sites, there are significant differences in their potential news distribution strengths. The proportion of users who say they follow breaking news on Twitter, for example, is nearly twice as high as those who say they do so on Facebook (59% vs. 31%) – lending support, perhaps, to the view that Twitter’s great strength is providing as-it-happens coverage and commentary on live events. Read more…

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9. One Year Drop

student reading photo

One Year Drop

हमारे एक जानकार मित्र के बेटे ने आईआईटी क्लीयर न कर पाने के कारण आज एलान कर दिया है कि वो एक साल  ड्राप करेगा और कोचिंग ले कर अच्छा नतीजा लाएगा. अभी तक घर मे बहुत तनाव था. दो ग्रुप बन गए थे एक चाहता था कि ड्राप करे और दूसरा बिल्कुल नही चाह्ता था.

पर आज बेटे की इच्छा के आगे अब सब झुक गए हैं और मान गए हैं. अब बस उसे सलाह दी जा रही है कि एक साल बहुत मायने रखता है अब डट कर मेहनत करनी है और बहुत अच्छे कोचिंग मे दाखिला लेना है. इसी बीच मैने भी कुछ छानबीन की और पता लगाया कि ड्राप करने पर भी  अगर गम्भीरता से पढाई की जाए तो आईआईटी में अच्छी रैंक आ सकती है. एक जानकार के बेटॆ ने ड्राप करके पूरे साल कोचिंग ली और वो बहुत अच्छी रैंक से पास हो गया.

अब क्योकि निणर्य ले ही लिया है तो बार बार टोकने का क्या फायदा. अब बस ऐसा करना होगा कि वो बहुत आत्मविश्वास के साथ पढाई करे और अच्छा नतीजा ला कर दिखाए. बार बार यह भी कहने का कोई फायदा नही कि मोबाईल, टीवी सब बंद करके रख दो .. एक साल के लिए सब भूल जाओ.. आज के बच्चे समझदार है एक साक समय की क्या कीमत होती है शायद वो हमसे भी बेहतर समझते हैं …उन्हें बस अपने लक्ष्य पर केंद्रित होने दे.   उन्हें सही या गलता का हम से ज्यादा ज्ञान है.

टेंशन खत्म करने के लिए बच्चे की इच्छा का खुशी खुशी स्वागत करें और उस पर विश्वास बनाए रखें…

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10. कौन बनेगा

कौन बनेगा …. !!!

कुछ समय पहले की बात है ….. जिंदगी में सब कुछ एक दम नार्मल चल रहा था कि अचानक एक दिन आए मैसेज ने मेरी नींद ही उडा दी. मोबाईल पर मैसेज मेरी सहेली की  तरफ से था. उसने लिखा था कि उसका सलेक्शन कौन बनेगा करोडपति में हो गया है और यह 31 सितम्बर को प्रसारित होगा और  इसमे phone a friend  के लिए तीन दोस्तो मे से मुझे भी चुना है. मेरा दिल धक से रह गया. वो बात नही है कि मेरा सामान्य ज्ञान अच्छा नही है. स्कूल टाईम मे तो मै क्विज प्रतियोगिता मे मै प्रथम आई थी. पर पर डर लग रहा है कि अगर उसका नम्बर लग गया और वो हाट सीट पर आ गई और किसी प्रश्न पर अटक गई और मेरा नम्बर मिला लिया तो क्या होगा जब अभिताभ बच्चन मुझे हैलो करेगे. नमस्कार  करेगे. नमस्कार  मोनिका गुप्ता जी .. मै अमिताभ बच्चन बोल रहा हू …. !!!

मैं घर का सारा काम काज छोड कर सामान्य ज्ञान की पुस्तके इकट्ठी करने मे जुट गई. इसी बीच अपनी उसी सहेली को दो चार बार फोन ट्राई किया पर वो व्यस्त आ रहा था. मैने सोचा कि अब तो वो बहुत बिजी हो गई होगी. जब मै ही इतनी व्यस्त हो गई हूं जिसके पास सिर्फ फोन ही आना है सोचो उसने तो अमिताभ जी के साथ बैठना है.उसे कितनी टेंशन होगी. इसी बीच मैने खुद पर इतराते हुए  कम से कम दस बार वो वाला  मैसेज भी पढ डाला.

सच पूछो तो   टेंशन भी बहुत थी और बहुत  खुशी भी थी कि यह बात  बात किस किस को और कैसे बताऊं .  बहुत सोच विचार के  मैने यह बात अपनी  पडोसन अमिता को बता दी कि सितम्बर के आखिरी दिन मै कौन बनेगा करोडपति के  फोन ए फ्रैंड मे आऊगी. मै जानती थी कि दस मिनट मे यह बात पूरी सोसाईटी मे फैल जाएगी और मेरी आशा के अनुरुप हुआ भी यही. दस ही मिनट मे पूरी सोसाईटी मे बात फैल गई. सभी मुझे बधाई देने आने लगे. सभी को गर्व था मुझ पर. उसी शाम सोसाईटी वालो ने मुझे सम्मानित भी कर दिया. घर के सामने एक पत्रकार भी रहते है वो भी पहुंच गए मेरा साक्षात्कार लेने. मै भी अपने बचपन और पढाई की बाते बढ चढ कर बताने लगी. अपनी सहेली के बारे मे भी बताया कि हमारी कितनी दोस्ती थी. कितना प्यार था.वो मुझे बहुत अच्छी तरह समझती थी और मै उसे.

अडोस पडोस वाले अच्छी पुस्तके लाने मे जुट गए. ताकि किसी प्रश्न मे मै अटक ना जाउं. अब एक एक पल काटना मुश्किल हो रहा था. मै सारे काम काज छोड कर तैयारी मे ही जुटी थी. रात को मैने घर पर भी एलान कर दिया कि मै अब ना ही किसी से मिलूगी और ना ही कोई फोन रिसीव करुगी बस जब तक प्रोग्राम नही प्रसारित हो जाता तब तक सिर्फ पढाई ही करुगी.

पर यह हो नही पा रहा था कभी कोई तो कभी कोई मिलने वाले आ ही रहे थे क्योकि उनकी नजरो मे  मै सैलीब्रेटी बन चुकी थी और घरवालो को उन्हे मना करना भी अच्छा नही लग रहा था.घडी की टिकटिक चले जा रही थी  और मै नर्वस होती जा रही थी.

अगले दिन मेरा मोबाईल छोटे बेटे ने  लिया और गेम खेलने लगा. मेरे मना करने पर उसने मुझे सोरी कहा और वो चुपचाप मैसेज पढने लगा. अचानक उसने जोर जोर से हसनां शुरु कर दिया और मैसेज फोर्वर्ड  करने लगा . मेरे गुस्से पर पूछ्ने पर उसने बताया कि एक बहुत मजेदार मैसेज  आया हुआ है आप के मोबाईल पर 31 तारीख का. वही अपने दोस्तो को भेज रहा हूं.  उस समय तो मै कुछ नही बोली पर इसके जाने के बाद जब मैने मैसेज देखा तो कोई नया मैसेज तो था नही वही पुराना मैसेज था मेरी सहेली वाला कौन बनेगा करोडपति वाला तो इसमे इतने हंसने की क्या बात थी .

सोचते सोचते मै मैसेज पढती हुई  केलेंडर के सामने जा खडी हुई और उसे देखते ही मेरे पावं के नीचे से जमीन खिसक गई. लगा मानो भूचाल आ रहा है मानो  सब कुछ हिल रहा है. 31 सितम्बर …. 31 सितम्बर … क्या कहूंगी सब को… मै तो अच्छी खासी …..!!!  सारी समझदारी गई पानी मे ..!!!! .अब तो इस विचार मे हूँ कि किस किस से और कैसे छुपाऊ… तभी पीछे से आवाज आई … जल्दी बाहर निकलो … भूकंप आ रहा  है और मै गिरती पडती बाहर भागी !!!!! उस समय कानों मे अमित जी की बस एक ही आवाज कानो मे गूंज रही थी कि आपका समय समाप्त होता  है अब … हंय…

कैसा लगा आपको ये लेख … जरुर बताईएगा :)

 

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11. आपका बहुत बहुत धन्यवाद

 

आपका बहुत बहुत धन्यवाद

कुछ समय पहले की बात है कि एक महिला को अपनी नन्ही बच्ची के लिए खून की जरुरत थी.वो खून का ग्रुप जल्दी से उपलब्ध नही होता था यानि रेयर ग्रुप था. मेरी सहेली मणि ने उन्हे ना जानते या पहचानते इंसानियत के नाते बहुत दौड धूप की और उस रक्त का इंतजाम करवा दिया. आप्रेशन सफल रहा. कुछ समय बाद वह् लडकी आईसीयू से बाहर भी आ गई और कुछ समय बाद वो ठीक होकर अपने घर भी चली गई.

इसी बीच मणि ने  एक दो बार बच्ची का हाल चाल पूछ्ने के लिए इस महिला को फोन भी किया. पर हैरानी ही बात यह रही कि महिला ने एक बार भी उसका धन्यवाद नही किया. वैसे तो उसे उम्मीद ही नही रखनी चाहिए थी क्योकि मेजर आप्रेशन था और उस महिला को मानसिक परेशानी भी बहुत रही होगी उस समय. पर जब बच्ची भी ठीक होकर घर आ गई तो भी उसने एक बार भी फोन करके मणि का धन्यवाद नही किया. इस बात से मणि का मनोबल बहुत गिरा पर क्योकि उसका ये किसी की मदद करने का यह उसका पहला मौका था.

पर फिर मेरे समझाने पर वो फिर अपने नेकी के काम मे दुबारा से जुट गई पर उसके जाने के बाद मैं जरुर सोचने लगी कि हम अक्सर कहते रहते है कि हमे दूसरो की मदद करनी चाहिए या जब किसी को जरुरत पडे उसकी सेवा निस्वार्थ भाव से करनी चाहिए पर इसके साथ साथ जिन लोगो को मदद मिलती है या जिन लोगो का ऐसे प्रोत्साहन से मनोबल दुगुना होता हो उन्हे भी इस बात का ध्यान रखना चहिए कि जो लोग उनके लिए आगे आए है समय निकाला है या उन्हे कुछ समय दिया है.

उनका दिल से “धन्यवाद” या “आभार” जताना बहुत जरुरी है उसे बिल्कुल नही भूलना चाहिए … तो अगर आप किसी का धन्यवाद करना भूल गए है तो प्लीज और देर मत कीजिए!!! यकीनन जितनी आपको खुशी मिली है उससे भी दुगुनी उन्हे मिलेगी आप एक बार धन्यवाद कर के तो देखिए !!!

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12. कहानी फिल्मी नहीं

 

कहानी फिल्मी नहीं

कुछ देर पहले मेरी एक सहेली का फोन आया. बहुत शोर भी आ रहा था. मैने पूछा कि शोर कैसा ?? इस पर वो बोली कि असल में, हम बाहुबली फिल्म देखने आए हुए है. और फिल्म शुरु हो चुकी है. बस बताने के लिए किया था फोन. मेरे ओह बोलने पर वो अचानक बोली अच्छा एक और फोन भी आ रहा है. जब मैने उसे किया तब बिजी था और बाय बोल कर फोन रख दिया.

मेरे चेहरे पर स्माईल थी क्योकि मैं उसकी इस दिखावे की आदत से बहुत परिचित हूं पर गुस्सा इस बात का भी आ रहा था कि फिल्म में उसके आगे पीछे बैठे लोग भी कितना डिस्टर्ब हो रहे होंगें.. अरे भई फिल्म देखने आए हो चुपचाप देखो और अगर बताना ही है तो इंंटरवल में बता दो ताकि दूसरों को असुविधा तो न हो … वैसे आप तो ऐसे हरगिज नही होंगें अगर हैं तो जरा नही बहुत सोचने की दरकार है…

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13. बेचारी महिलाएं

 

 

उफ!!!  बेचारी महिलाएं ….

बहुत समय से कोई नया आईडिया या विचार मन मे नही आ रहा था क्या लिखूं .. क्या लिखूं ..!!  क्या लिखूं ..!! जब वाकई में कुछ समझ नही आया तो हाथ मे कागज पैन पकडा और निकल गई बाहर कुछ भी, कही भी, कुछ नया खोजने.

सडक पर जा रही थी कि कोई आपस मे बातचीत हो रही थी….कि क्या करुं बाल बहुत झडने लगे. कितनी दवा दारु की पर कोई फायदा नही हुआ. तुम्हे पता चले तो कोई घरेलू नुस्खा बताना.

बस मे चढी तो बात हो रही थी.. खाईए ना.. घर की बनी मिठाई है. मैने ही बनाई है.

शापिंग सैंटर पहुची तो वहां भी कम नजारा नही था. एक दूसरे को कोहनी मार कर बात हो रही थी .. वो देखा  सामने से मिसेज सिन्हा आ रही है इतनी लाल चटक लिप्स्टिक लगाई है मानो किसी का खून पी कर आई हो. और फिर बहुत तेज ठहाके की आवाज आई.

वहां कुछ देर शापिंग करने के बाद  एक दफ्तर मे जाना हुआ तो वहां मिलने वालो की लम्बी कतार लगी हुई थी पर वो बतियाने मे ही व्यस्त कि क्या करु…!! बहु, बहुत धीरे धीरे कार चलाती है इसलिए हमेशा आने मे देरी हो  ही जाती है….हाँ नही तो.!!!

एक घर के आगे से गुजरी तो आवाज आई कि बहू से तुम्ही बात करके देखना … मुझे तो हर हालत मे बडी वाली कार चाहिए और मायके जा रही है तो अपनी जांच भी करवा ले .. कही बेटी हुई तो !!!!!

थोडी देर थक कर बैठी तो कोई सैर करते हुए सामने से बोलते हुए निकले बहुत दिनो से गोलगप्पा नही खाया आज तो हो ही जाए … फ्रूट चाट और रसमलाई भी ..!!!

मै बहुत खुश थी कि आहा आज  का दिन बहुत अच्छा रहा. बहुत बाते सुनने को मिली. क्या??? आपको नया नही लगा???? जी नही .. ये तो बिल्कुल नया है.

असल मे, यह जितनी बाते आपने पढी है वो “पुरुष” आपस मे बाते कर रहे थे महिलाए नही …!!! जी क्या कहा आपने ??? तो फिर मैने टाईटल ऐसा क्यो लिखा है …!!! उफ ये महिलाए!!! अब गलत फहमी तो होगी ही ना !!

उफ !!! आप भी बहुत जल्दबाजी करते हैं .. पूरा तो पढा नही …असल मे, ज्यादा बडा टाईटल तो लिख नही सकते है पर मेरा यही कहना था कि  “उफ बेचारी महिलाएं” तो एवैई ही बदनाम है.

 

कैसा लगा आपको मेरा लिखा ये लेख …. जरुर बताईएगा !!!

 

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14. हमारे मित्र

हमारे मित्र

rain photo

गर्मी के साथ बरसात  आई नही कि हमारे परम मित्रो का आगमन और चहल पहल शुरु हो जाती है.कही मेढक फुदकता मिल जाएगा तो कही कोकरोच अपना ही घर समझ कर इठलाता अकड के चलता मिल जाएगा.छिपकली और चूहो का तो पूछो ही मत.सब अपना ही घर समझ कर डेरा जमाए बैठ जाते हैं वो इसलिए की वाकई मे ये हमारे ना सिर्फ दोस्त है बल्कि हमारी सेहत का भी बहुत ख्याल रखते हैं. हमे चुस्त दुरुस्त बनाए रखते हैं.

कल्पना करे कि अचानक पलंग के नीचे से चूहा भागता हुआ आया और मेज के नीचे जाकर छुप गया. अब उसे देख कर ना सिर्फ हम भी भागते है बल्कि कूदी मार कर कुर्सी पर भी चढ जाते है तो देखा बनाया ना उसने हमे चुस्त दुरुस्त. अब कोकरोच की बात करे. वो हमे देख कर भागे या ना भागे पर हम उसे देख कर चिल्लाते बहुत तेज हैं और हमारी सांस तेज तेज चलने लगती है यानि हमारी आवाज तार सप्तक तक चली जाती है और दबी दबी सी हमारी आवाज अचानक खुल जाती है साथ ही साथ हमारे फेफडे भी मजबूत हो जाते हैं.तो हुआ ना वो भी हमारा परम हितैषी!!

अब लाल काली प्याली प्याली चींटियो की बात करें तो मैडम जी अक्सर रसोई मे चीनी और मिठाई पर कब्जा किए मिल जाती हैं तो वो भी फायदेमंद हैं. अब देखिए ना ऐसे मे क्या होता है कि अक्सर चीनी हम फेक देते हैं यानि शूगर हम नही खाएगे तो भी शरीर सही रहेगा और अगर हम उसे ना फेंके और बजाय फेंकने के साफ करने लगे तो भी हमारी आखो का अच्छा व्यायाम हो जाता है हम जान जाते है कि हमारी आखे कितना बारीक देख सकती हैं और साथ मे अगुलियो की भी कसरत हो जाती है.तो रखती है ना ये हमारा खयाल.

अब बात आती है सर्वप्रिय मक्खी रानी की.जब भी उडाओ तभी आ जाती है. जब भी उडाओ तभी आ जाती है. वो इसलिए आती है कि हमारे हाथो की कसरत हो सके नही तो उसे कोई शौक नही होता हमे तंग करने का. कोई दुश्मनी थोडे ही ना है उसे हमसे. वो तो बस हमारी ही सेहत का ख्याल रख कर ऐसा करती है.वो ज्यादा ना आए इस चक्कर मे हम सफाई भी रखते है तो देखा कितना ख्याल है उसे हमारा और हम भी ना !!!

वही गुनगुन करते मच्छर भी हमारे अच्छे दोस्त साबित होते हैं. अब अंधेरा होते ही बल्ब आदि के आसपास मच्छरो का जमावडा लग जाता है तो क्या हुआ. अच्छा ही है ना अजी इनके डर से मेहमान ही नही आते. रात को मेहमान भी घर आने से पहले दस बार सोचते है कि इनके घर तो बहुत मच्छर हैं क्या करेगे जाकर. तो वो तो फायदेमंद है ही बाकि अक्सर मच्छर जाने अंजाने हमे ताली बजाने पर मजबूर कर देते हैं भले ही ताली बजाने से वो मरे या ना मरे पर ताली बजाने के फायदे तो हम सभी जानते है कि रक्त संचार बढता है.तो देखा !! हुए ना वो अच्छे दोस्त !!

अब बात आती है मधुमक्खियो और ततैयो की जोकि घर मे लगे फूलो पर आकर्षित होकर आ ही जाते हैं और कई बार काट भी जाते हैं तो भी कोई बात नही. ऐसे मे पडोसी हमारी चिल्लाने की आवाज सुन कर आ जाते है और जरा वो सूजन कम करने के लिए अचार भी लगा देतें हैं बस उसकी महक इतनी अच्छी होती है कि हम उस अचार की तारीफ करते हैं और पडोसन भी खुश होकर एक कटोरी अचार उपहार स्वरुप दे जाती है कि कुछ दिन पहले ही डाला था.और बस ऐसे ही दोस्ती पक्की होती जाती है और उनसे लगातार मिलकर अपने परिवार और रिश्तेदारो की भडास और गुस्सा उससे शेयर करने लगते है और आपका ब्लड प्रेशर भी सही रहता है.

अरे वाह !! आप तो मेरी बात सुन कर ताली क्यो बजा रहे हैं. धन्यवाद!! धन्यवाद !! आपको मेरा लेख अच्छा लगा! क्या? आप मच्छर मार रहे है और आपको गुस्सा भी बहुत आ रहा है !!! जी मै समझ गई. मै चलती हू. पर आप माने या ना माने पर ये कीट पंतग़े है हमारे मित्र ही!!!

तो कैसे हैं आपके मित्र :) जरुर बताईएगा !!!

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15. ये कैसा फल

ये कैसा फल !!!

 

नमस्कार !!!  हमारे देश मे तरह तरह के फल पाए जाते हैं. कुछ खट्टे कुछ मीठे तो कुछ कडवा स्वाद देते हैं. वैसे मै जिस फल की बात कर रही हूं  वो फल हर जगह हर समय पाया और देखा जाता है.  

चाहे सर्दी हो या गर्मी वो फल हर भाव मे उपलब्ध है और अपने तरह तरह के रुप धर के हमे अपनी ओर आकर्षित करता है. कई बार तो ये ठंडी हवा का झोंका जैसे बन कर आता है तो कभी …!!! यह फल हम सभी ही  पहुंच मे होता है हां, ये अलग बात है कि उसे चखने के बाद व्यक्ति विशेष का स्वाद अलग अलग हो जाता है.यानि एक ही फल पर अलग अलग स्वाद !!!

अयं, आप सोच रहे होगें कि भई ये कौन सा फल है तो मै आपको ज्यादा उलझन मे नही डालती. वो क्या है ना कि  मै भी जानती हूं कि आप एक तो पैट्रोल और दूसरा गर्मी की मार से त्रस्त है और उपर से ये फल!!! चलिए मै बताती हूं. असल मे, इस फल का नाम है “ राशि”फल” है ना !!! देखा आप चौक भी गए और आपके चेहरे पर मुस्कान भी आ गई. अब क्या करे!! हर कोई इसका स्वाद जरुर लेना चाहता है.

रवीना की आदत है कि सुबह सबसे पहले उठ कर अपना राशि फल देखती है उसके हिसाब से अपना दिन बिताती है. परसो टीवी पर देखा तो बहुत खुश हो गई कि आज का दिन बहुत अच्छा बीतेगा. चेहरे पर  मुस्कान आई ही थी कि अचानक पति की आवाज आई कि आज भी कमीज मे बटन नही लगाया. बस फिर शुरु हुआ टेंशन का दौर कि आप सोच नही सकते . पति बिना नाश्ता किए दफ्तर गए और बच्चो का टिफिन गुस्से मे उसने तैयार नही किया. कुल मिला कर फल का मीठा स्वाद कडवाहट मे बदल गया.

ऐसे ही संगीता हैं. आफिस मे काम करती है पर हमेशा जहां भी मौका मिले इस फल को चखना चाह्ती हैं. आज उसने अखबार मे राशिफल पढा कि  अजनबी से बच कर रहना. उसी समय घर की धंटी बजी. उसकी नई काम वाली बाई आई थी. बस, वो तो उस फल के शिकंजे मे इतनी कसी कि उसने सोचा शायद उपर वाले ने कोई संदेश ही भेजा हो. बिना समय गवाए उसने बाई को तुरंत  नौकरी से निकाल दिया.तब से अभी तक कोई बाई  नही मिली और वो बेचारी सिर पकड के …!!!

वही दिनेश की भी सुन लीजिए. वो अपनी लडकी ले लिए लडका खोज रहे थे. बात लगभग पक्की हो गई थी. आज बस हां ही बोलना था पर महाशय भी इस फल के दीवाने निकले. राशिफल मे लिखा था कि आज कोई भी फैसला ना लें. बस, वो इस फल के मोह माया मे ऐसा जकडे कि फैसला कल पर छोड दिया. उसे पता था कि आज जवाब देना बहुत जरुरी है क्योकि लडके वालो के  हाथ मे भी एक अच्छी लडकी है पर बस !!!  और सच मे, बहुत अच्छा लडका हाथ से निकल गया और अभी तक दिनेश जी लडका ही खोज रहे हैं.

 

इस बारे मे बहुत लोगो से बातचीत हुई. आमतौर पर सभी इसके दीवाने हैं यह जानते हुए भी इसके परिणाम अधिकतर सही नही निकलते हैं. कुल मिला कर बस आकर्षण मात्र है  लोगो मे.

बात करते करते मेरा ध्यान भी अखबार के इस राशिफल पर चला गया और ना चाहते हुए भी मैने अपना राशिफल पढ डाला. उसमे लिखा था कि  आप दूसरो की नुक्ता चीनी  बहुत करते है. कृप्या सावधान रहें. मैने माथे पर बल डाल कर् अखबार एक कोने मे पटका ही था कि सम्पादक महोदय का फोन आ गया कि आपके व्यंग्य और लेख पाठको को बहुत पसंद आ रहे हैं. अब मुझे समझ नही आ रहा था कि इस फल के स्वाद को क्या नाम दूं.:)

वैसे आपने भी चखा होगा इस फल का स्वाद…..  आपको कैसा लगा ???  जरुर बताईएगा !!!

 

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16. We Care for you

We Care for you

पहले समय मे घडी किसी के पास नही होती थी पर समय सभी के पास होता था और आज घडी सभी के पास है पर समय ही नही है. अरे भई…. भला ये क्या बात हुई… इसमे इतना सोचने की क्या बात है…. .अब आप समझदार हैं और जानते ही होंगे कि समय परिवर्तन शील है बदलता रहता है. पहले नई नई खोज नही हुई थी.जागरुकता नही थी समझ नही थी कि क्या, कब और कैसे करना है. आज का समय देखो. कैसे हो सकती है किसी के पास फुर्सत. सभी व्यस्त, अति व्यस्त बल्कि ये कहिए कि महा व्यस्त है तो गलत नही होगा. है ना….

मैने तो बहुत लोगो को ये भी कहते सुना है कि भई इतना काम है कि मरने तक ही भी फुर्सत ही नही है और आप बात करते है समय की.ये क्या बात हुई भला.काम के बारे मे तो मैं क्या बात करु. काम या कमाने के चक्कर मे पति महोदय दूसरे शहर मे उनकी श्रीमति जी अन्य शहर मे और बच्चे होस्टल मे.

महीने मे एक या दो बार मिलना हो जाता. बस बहुत है और क्या. भई,आज के समय मे नौकरी मिलनी आसान है क्या. दूसरे लोग गिद्द की तरह नजरे गडाए बैठे रह्ते है कि कब किसकी काट करे और नौकरी हथियाए और मंहगाई जो सिर पर खडी होकर ता ता थैया और ब्रेक डांस कर रही है उससे भी तो दो चार होना है, नजरे मिलानी है या नही.

 

हाँ, तो मै कह रही रही थी कि परिवार, दोस्त, जोश और हमारा स्वास्थ्य अजी इनकी चिंता छोडिए.

चिंता किसलिए करनी है.ये लोग कही भागे थोडे ही ना जा रहे हैं.आखिर ये क्या बात हुई पर नौकरी चली गई तो सब चला जाएगा रुपया पैसा होगा तो ये सभी लोग हमारे साथ होंग़े.क्यो है ना . है ना..

आखिर हम सभी यही तो कर रहे हैं. काम के चक्कर मे इतने उलझ गए हैं कि सुबह काम पर जल्दी निकल जाना देर रात को लौटना.परिवार का ध्यान  देने का तो समय ही नही है. पत्नी की अलग दुनिया है और पति पत्नी दोनो के चक्कर में बच्चों का किसी को ध्यान ही नही. जबकि आमतौर पर सुनने मे तो यही आता है कि यह सब बच्चो के लिए ही तो कर रहे हैं हमने कौन सा साथ लेकर जाना है. पर इस बारे मे बच्चो की या घर वालो की राय लेने की कभी जरुरत नही समझी.

पता नही, पर सच पूछो तो ऐसा महसूस होता है कि ये क्या बात हुई???? .शायद कही ना कही कुछ गलत हो रहा है. सच पूछो तो यकीनन काम से बढ कर है स्वास्थ्य ,परिवार, दोस्त और हमारा जोश.

काम तो एक रबड की गेंद की तरह है जो उछ्ल कर वापिस आ ही जाएगी पर… पर…. पर…. हमारा परिवार, हमारा शरीर, हमारे दोस्त, हमारा जोश उस कांच की गेंद की तरह है कि उछालते समय अगर एक बार हाथ से छूट गई तो बिखर जाएगी और जिसे सम्भालना या जोडना नामुमकिन हो जाएगा.सच मे,अब यही कहना पडेगा कि वाह ये क्या बात हुई !!

कोई शक नही है कि जिंदगी में काम बहुत जरुरी है और इसे दिल लगा कर करना भी बहुत जरुरी है पर जब हम काम करके बाहर निकले तो बस फिर हम हमारा परिवार, हमारा जोश और हमारे दोस्त ही होने चाहिए. आज के समय मे इन सभी को अहमियत देना बहुत ही ज्यादा जरुरी हो चला है.

वो कहते भी है ना उसे कभी नजर अंदाज मत करो जो आपकी बहुत परवाह करते हैं वरना किसी दिन आपको अहसास होगा कि पत्थर जमा करते करते आपने हीरा गवां दिया…. वाह!!! अब तो यही कहना पडेगा कि यह हुई ना बात !!!! और ये क्या खूब बात हुई !!!!!  We Care for you ….

कैसा लगा आपको ये लेख … जरुर बताईएगा !!!

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17. एक पाती प्यार भरी

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एक पाती प्यार भरी

 

प्यारी सी माँ,

कैसी हो? कल मैने पहली बार 17 साल के बाद घर से बाहर होस्टल मे जाने के लिए कदम निकाला है. मां, मै चोरी चोरी निगाहो से आपकी आँखे देख रहा था जब आप अपने आंसूओ को मुस्कान मे छिपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी. पता है, मै भी बहुत ज्यादा उदास था पर मैने खुद को पक्का किया हुआ था कि कुछ भी हो जाए आपके सामने कमजोर नही दिखूगा. आपका राजा बेटा हू ना और आपने ही तो कहा था कि जो राजा बेटा होता है वो कभी नही रोता.

माँ, आप बैग से सामान निकाल कर मेरे होस्टल की अलमारी मे लगा रही थी और मै सोच रहा था कि आपके जाने के बाद मैं  कैसे रहूगां.कौन मुझे सुबह सुबह बालों में हाथ फेरते हुए उठाएगा. कौन मेरे लिए नाश्ते पर इंतजार करेगा. मेरे तैयार होने के बाद और वापिस लौटने पर कौन गेट पर खडा रहेगा.

मेरे लिए यह मुश्किल होगा पर मुझे विश्वास है कि आपका राजा बेटा सब कर लेगा. बस आप मेरी चिंता मत करना. पिछ्ले दस दिनो से देख रहा था जब से आप मेरे लिए पैंकिग कर रही थी कि बात बात पर आप उदास हो जाती थी. मेरा सामान पैक करते करते दस मिनट बाथरुम मे लगाती और वहाँ से ऐसे बाहर निकलती मानो कुछ हुआ ही ना हो. मै सब देखता रहता था. कई बार आपकी और पापा की बाते भी सुनता जब पापा आपको समझाते हुए कई बार नाराज भी हो जाते थे.

मैने पापा की हिम्मत को देखा है और मै आज आप दोनो के प्यार और विश्वास से जिंदगी मे बडा आदमी बन कर दिखाउगाँ. आपने जो संस्कार मुझे दिए है वो अब बहुत काम आएगें. हो सकता है शुरु शुरु मे मेरा मन ना लगे. ये भी हो सकता है कि मै जल्दी जल्दी घर के चक्कर लगाऊ या ये भी हो सकता है कि कई बार आप मेरा मोबाईल मिलाओ और वो बंद आए. आप किसी भी हालत मे फिक्र नही करना. आपका राजा बेटा खुद को मजबूत बनाएगा ताकि हर हालात का सामना कर सके और पढाई के साथ साथ अन्य गतिविधियो मे भी अव्वल आए जैसे स्कूल मे आया करता था.

बस, चार साल की तो बात है इंजीनियरिंग की पढाई तो पलक झपकते पूरी हो जाएगी और फिर तो हमने हमेशा ही साथ रहना है .. है ना माँ.

आप अब मेरी चिंता छोड कर अपना और पापा का ख्याल रखना. आप अपनी दवाई और कैलशियम हर रोज लेना और दूध पीना तो बिल्कुल मत भूलना और बासी रोटी और सब्जी छोड कर ताजी रोटी ही खाना और खुश रहना. अगर आप खुश रहोगे तो समझ लेना मै भी खुश हू और अगर आप रो रहे होंगे तो समझ लेना कि मै भी …

याद है ना आप मेरे लिए हमेशा कहा करती थी कि सीढियाँ उनके लिए बनी है जिन्हे छ्त पर जाना है ….. आसमान पर जिनकी नजर है उन्हे अपना रास्ता खुद बनाना है … बस माँ, मै रास्ता बनाने ही निकला हूँ आपके आशीर्वाद के साथ.

आज मुझे भी आपके लिए दो लाईने कहनी है मैने पढी थी…. एक अच्छी किताब 100 दोस्तो के बराबर होती है पर एक उत्साहित करने वाला दोस्त तो पूरी की पूरी लाईब्रेरी होता है

और आप मेरे बहुत अच्छे दोस्त हो और मुझे बहुत खुशी है कि भगवान जी ने इतने प्यारे मम्मी पापा दोस्त रुप मे दिए हैं सच मे , मुझे अपने पर बहुत गर्व महसूस हो रहा है. अच्छा, अब पत्र लिखना बंद करता हू शायद डिनर का समय हो गया है.

अच्छा…. अपना ख्याल रखना और रोना रोना नही करना… याद है ना …

आपका राजा बेटा

हर माता पिता की जिंदगी मॆं ये लम्हा जरुर आता है जब बच्चा पढने के लिए या नौकरी के लिए उनकी आखों से ओझल होता है … हम सभी को उसे सकारात्मक लेना है और बच्चॉं के सामने कमजोर नही पडना …. !!!

कैसी लगी आपको ये पाती … जरुर बताईएगा !!!

 

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18. ऐसा प्यार कहां

ऐसा प्यार कहां

 

वाह !!! आज एक महाशय … मेरे हिसाब से महानुभाव बोलना ऊचित रहेगा .. हां, तो आज एक महानुभाव से मिलना हुआ. वो खुदकुशी कर रहे थे. उन्हे और उनके प्यार को देखकर मै उनसे प्रभावित हुए बिना नही रह सकी. अरे!! हैरान होने की जरुरत नही है और ना ही मैने कुछ गलत लिखा है. असल में, उन्हे ब्लड शूगर है और वो बस मीठा और तला चोरी छिपे खाए चले जा रहे है भले ही घर वाले नाराज हो पर खाने से वो अपना प्यार, मोह नही छोड पा रहे है.
वही मेरी प्रिय सहेली मणि के एक मित्र है मुहं पका हुआ है एक छाला महीने से ठीक नही हो रहा पर पान मसाले और गुटखे का प्रेम इतना है कि उसे छोड नही पा रहे.
वही एक अन्य जानकार है दोनो गुर्दे जवाब देने को है पर शराब… अजी, इतना प्यार है उससे कि छूट ही नही रही. जाने अंजाने ये सभी लोग खुदकुशी पर आमादा है.. भले ही घर परिवार वाले नाराज हो लडे मरे या खुद अपने शरीर के साथ कितने भी दुख उठाए पर छोड नही सकते.
देखा है आपने ऐसा प्यार!!! अब प्यार हो तो ऐसा हो वर्ना ना हो !! वैसे आप कही आप भी तो खुदकुशी ….. !!!!

ऐसा प्यार कहां

 

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19. गुस्सा अच्छा है

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गुस्सा अच्छा है

पता नही अकसर लोग कहते मिलते जाते हैं कि गुस्सा नही करना चाहिए. गुस्सा सेहत के लिए अच्छा नही होता वगैरहा वगैरहा. पर गुस्सा तो अच्छा है. सच में, बहुत अच्छा है.

अब घर की ही बात करें तो घर पर कई बार आपको लगता होगा कि आज चपाती बहुत मुलायम बनी है जोकि अकसर नही बनती है या आज कपडे बहुत साफ धुले है जोकि अक्सर साफ नही धुलते.ये सब गुस्से की ही महिमा है कि गुस्सा आटा गूंथते समय या कपडे धोते समय निकाला जाता है और नतीजा हमारे सामने होता है.

गुस्सा करने से सेहत अच्छी रहती है वो इसलिए कि जब हमे बहुत ज्यादा गुस्सा आता है तब खाना खाने का मन नही करता.मुहँ फुला कर चुपचाप लेट जाते है.एक तरह से उपवास ही हो जाता है. हाँ, पानी जरुर ज्यादा पी लेते है. भई, किसी तरह पेट तो भरना ही है ना.

एक बात और कि शांति बहुत हो जाती हैं.सास बहू या पति पत्नी सब चुप हो जाते है. यहाँ तक की टीवी भी बंद कर दिया जाता है नाराजगी दिखाने के लिए गुस्से में.

नाखूनो की कटाई हो जाती है क्योकि गुस्से मे हम अपने नाखूनो को चबाने लगते है.

हाँ, गुस्से मे भगवान का नाम बहुत लिया जाता है कि भगवान के नाम पर अब बस चुप करो . ओम शांति.गुस्सा जाने के बाद खुद पर हंसी बहुत आती है वो भी अच्छी बात है. सबसे बडी बात जब तक आग हमारे सीने मे नही होगी हम जीत नही पाएगे. अगर किसी ने चैंलज कर दिया को तुम डाक्टर या पत्रकार किसी कीमत पर नही बन सकते. बस यही बात एक आग बन जाती है और गुस्से मे ही सही हम वो बन कर दिखाते है.. अब आप को गुस्सा आ रहा है कि लेख अच्छा नही लगा तो आप इस पर कमेंट लिखेग़ें फिर मैं उसका जवाब  दूंगी फिर आप दुबारा लिखेगें इसी बहाने आपका लेखन भी सुधर जाएगा और आप टवीटर या फेसबुक पर लिख कर जाने माने कमेंटेटर बन सकते हैं …तो  सोचना क्या गुस्सा अच्छा है ना…

कैसा लगा आपको ये गुस्सा … मेरा मतलब ये लेख … जरुर बताईगा :)  और अगर इसी को लेकर आपके अपने अनुभव हो जो हमसे सांझा करना चाहे तो भी आपका स्वागत है …

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20. मुद्दे ही मुद्दे

मुद्दे ही मुद्दे

इतने सालों से सोनी चैनल पर CID चला आ रहा है हमें शायद हमें इसलिए अच्छा लगता  है कि आज क्राईम हुआ सीआईडी आई और देखते ही देखते जांच हुई और अगले ही पल रिपोर्ट सामने और फिर कैदी सलाखों के पीछे. पर हकीकत ये नही है हकीकत वो है जो हम आप हर रोज देखते है… आज मर्डर हुआ कम से कम दस दिन जांच मे लगेगें और इस बीच आरोपी पर क्या यातना बीतेगी उसकी कोई चिंता नही.

हमारे देश मे जांच टेस्ट  सैंटर इतने कम है कि रिपोर्ट  आते आते मामला ही ठंडा पड जाता है..

दूसरा नुक्स है हमारी कछुए की चाल चलती न्याय प्रणाली .. बीस बीस साल हो जाते हैं तारीख पर तारीख … बस …

तीसरा हमारी जुगाड संस्कृति … रिश्वत का कितना भी विरोध करें हम जुगाड हमेशा से ही हमे प्रिय रहा है..

चौथी बात है मीडिया … तेज और तेज खबर दिखाने के चक्कर में  भिन्नभिन्नाती मक्खियों की उपाधि मिल जाती है… पता नही वो क्यो भूल जाती है कि जरुरत उनसे ज्यादा जनता को है लेकिन मारी मारी भागी भागी दौडती भागती रहती है …

फिर बात आती है महिला सुरक्षा की … मुद्दे बहुत है जिन पर हमें,  मीडिया को, नेता को, सरकार को, प्रशासन  को उठाना चाहिए क्योंकि इन्हें दूर किए बदला  आना सम्भव नही ….

 

 

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21. कैसे कैसे अविभावक

कैसे कैसे अविभावक

आज दोपहर कुछ बच्चे स्कूल से वापिस आ रहे थे. मौसम खराब था. रेड लाईट होने पर कुछ वाहन रुके. मेरे साथ एक स्कूटी भी रुकी जिसे शायद एक मम्मी चला रही थी और बच्चा पीछे बैठा था. फ्रूटी पीते पीते वो बता रहा था कि आज क्लास मे बहुत नकल चली . मम्मी ने पूछा तूने तो की नही होगी एक ही सत्यवादी हरिशचंद्र पैदा हुआ है हमारे खानदान मे.

बच्चे का क्या जवाब था ये तो पता नही क्योकि हरी लाईट हो गई थी पर चंद मिनट की यह बात बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर गई. मम्मी को बजाय कटाक्ष के उसकी प्रशंसा करनी चाहिए थी ताकि उसका मनोबल और मजबूत होता पर अफसोस जब पेरेंटस ही ऐसी बाते बोलेगें तो …. ????

इसी बात को अगर दूसरे  तरीके से कहा जाता तो अलग ही असर होता … आज जिस तरह से हमारी शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है ये बात  पेरेंटस को बहुत सोचने की है ….

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22. Benefits of Eating with Hands

 

Benefits of Eating with Hands

अक्सर शादी या अन्य समारोह में भीड बहुत होती है और उसका फायदा मिल जाता है. फायदा इस बात का मिलता है कि स्टाल वाली कुछ चीजों को हाथ से खाया जा सकता है मसलन, टिक्की … गरमागरम टिक्की, करारी सीधा तवे से उतरी हुई खाने का अपना ही मजा है इसकी दो वजह है एक तो टिक्की के साथ जो चमच्च मिलता है वो प्लास्टिक का होता है न जाने कब टूट जाए और दूसरा हाथ से खाएगें तो कितना गरम है अंदाजा लग जाएगा और मुंह नही जलेगा… अब इसके लिए जरुरी है भीड … ताकि सब अपने में मस्त हो और हम भी हाथ से खाने में पूरा एंजाय करें..

वैसे दक्षिण में तो ज्यादातर हाथ से ही खाया जाता है पर हमें अपने आस पास का माहौल देख कर हाथ से खाने का मन बनाना चाहिए अन्यथा हंसी के पात्र बनने में भी देर नही लगती.

 

Benefits of Eating with Hands

वैसे हाथों में है प्राण ऊर्जा- आयुर्वेद के अनुसार हमारे हाथों प्राणाधार एनर्जी होती है। इसका कारण है कि हम सब पांच तत्वों से बने हैं, जिन्हे जीवन ऊर्जा भी कहते हैं। ये पांचों तत्व हमारे हाथ में मौजूद हैं। हमारे हाथों का अंगूठा अग्नि का प्रतीक है। तर्जनी उंगली हवा की प्रतीक है। मध्यमा उंगली आकाश की प्रतीक है। अनामिका उंगली पृथ्वी की प्रतीक है और सबसे छोटी उंगली जल की प्रतीक है। इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है।

जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम उंगलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और इससे जो हस्त मुद्रा बनती है। उसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता होती है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जादायक बन जाता है और यह स्वास्थ्यप्रद बनकर हमारे प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है

हाथ से खाने से ना सिर्फ एकाग्रता बढती है बल्कि पाचन भी सुपाच्य होता है.

और इसी के साथ साथ बचपन में जब हम बीमार पड जाते थे तो मम्मी अपने हाथ से खाना खिलाती थी और अगर और बचपन में जाए तो नानी दादी भी बच्चों के पीछे दौड दौड कर दाल चावल खिलाती थी … ये जो स्पर्श का अनुभव है ना … ये बहुत कामगर सिद्द होता है इससे आपसी प्रेम भी बढता है… कुछ दिन पहले मैं अपनी सहेली से बात कर रही थी  तो उसने बताया कि सबसे ज्यादा मजा करवा चौथ पर आता है जब हाथ मे मेहंदी लगा रखे होती है और पति अपने हाथों से खाना खिलाते है…

वैसे जैसे नियम कांटे छुरी से खाने के हैं इसके भी कुछ नियम होते हैं जैसे कि  सब्ज़ी खाते समय उसकी तरी को पूरी उंगलियों में नहीं लिपटने देना चाहिए और केवल उंगलितयों के पोरो का इस्तेमाल होना चाहिए ना कि पूरी की पूरी उउंगली तरी मे डूब जाए फिर यहां वहां लोगों को भी असुविधा हो…   खाते वक्त चपचप की आवाज भी न हो तो बेहतर है. इसके अलावा खाने के बाद भी हाथ धोने के लिए आमतौर पर प्रत्येक व्यक्ति को उंगलियां धोने  के लिए एक कटोरा  जिसमें गुनगुने पानी और कटा हुआ नींबू होता है दिया जाना चाहिए.

 

बेशक हमें हाथ से खाते हुए शर्म आती हो पर बहुत विदेशी हमारे देश में आकर हाथ से खाना खाने मे गर्व महसूस करते हैं…

benefits of eating with hands hindi

हाथ (hands) से खाना खाना असल में भारत (India) में जितना कॉमन है उतना किसी और देश में नहीं है पश्चिम में लोग खाना खाने के लिए छुरी और कांटे का इस्तेमाल करते है कई जगह इसे भोजन सम्बन्धी शिष्टाचार से जोड़कर भी देखा जाता है और कुछ लोग मानते है कि हाथ से भोजन (eating with hands) करना सुरक्षित नहीं है लेकिन फिर भी कुछ भी कुछ जानकार ये मानते है कि हाथ से खाना खाने (eating with hands) का एक अलग ही मजा होता है और यह किसी भी छुरी या कांटे या किसी भी अन्य औजार से खाने में नहीं है साथ ही हाथ से खाना खाना स्वास्थ्यवर्धक (health beneficial) तो होता ही है और इसके कुछ और भावनात्मक पहलु भी है जिनपर हम थोडा गौर करते है | तो चलिए इस बारे में थोड़ी और बात करते है –

हाथ से खाने के स्वस्थ्य लाभ / benefits of eating with hands – पिछले कुछ दिनों में अमरीका के एक राज्य में कुछ लोगो के समूह ने छुरी और कांटे को छोड़कर हाथ से खाने की इच्छा जताई और इसके पीछे कई कारन है जिनमे से एक है कुछ जानकर मानते है कि हाथ से खाना खाते समय जो हाथ की अंगुलियाँ और अंगूठे की मुद्रा बनती है वो विशेष होती है और उसमे हमारे शरीर को स्वस्थ (healthy) रखने की क्षमता होती है वन्ही कुछ लोग यह भी मानते है कि जिस तरह हमारा शरीर पांच तत्वों (five elements) का बना होता है उसी तरह हमारे हाथ की पांच उंगलिया भी इसी तरह उन पांचो तत्वों की प्रतीक है इसलिए हाथ से खाना खाते (eating with hands) समय हम उन पांचो तत्वों को रोटी का कौर बनाते समय एकजुट करते है और इस से भोजन उर्जादायक बन जाता है और खाने में अतिरिक्त स्वाद भी आता है | Read more…

Benefits of Eating with Hands जो भी हो हाथ से खाने का अपना ही मजा है एक अलग  ही तरह की संतुष्टि मिलती है … तो शुरुआत हो जाए दाल चावल से … एक मेरी सहेली बता रही थी कि चाय को भी सुडप करने यानि आवाज करके पीने मे अलग ही मजा है … नही … ये नही … अभी इतना ही काफी है :) :)

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23. Indian House wife

Indian House wife

मेरी एक सहेली हाऊस वाईफ है. आज सुबह उसके घर गई तो बच्चों के शोर से घर गूंज रहा था. बोली आज और कल ओवर टाईम करना है ?? मैने पूछा अरे !! कैसे कही ज्वाईन किया क्या तो हंस कर बोली नही री … आज इनकी और बच्चों की छुट्टी है ये सब मस्त है पूरा दिन धमा चौकडी मचाने वाले हैं जबकि उसका आज पूरा दिन रसोई मे बीतेने वाला है … बारी बारी करके सो कर उठेंगें …अलग अलग नाश्ते की फरमाईश होगी फिर बाजार भी शापिंग पर ले जाना होगा फिर बच्चों के दोस्त भी आएगें और इनके भी दो चार दोस्त तो आ ही जाएगें

मौसम अच्छा है तो पकौडे शकौडे … फिर … मैने कहा … बस बस बस … ओह मैं तो सुनते सुनते ही थक गई इसे तो सारा दिन काम करना है पर वो बोली हां पर खुशी खुशी. एक दो दिन ही हो मिलते हैं बच्चों को मस्ती करने के नही तो सुबह से शाम तक स्कूल पढाई, टयूशन …ना आराम न नींद … !! मैने मुस्कुरा दी.. वाकई छ्ट्टी के दिन तो गृहणी की भूमिका डबल ट्रिपल ही होती है और  ये बात तो एक मां ही सोच सकती है …

मैं अक्सर फेसबुक य अन्य सोश्ल नेट वर्क साईट पर देखती हूं बहुत लोग हैप्पी संडे करके अपना स्टेटस डालते हैं अगर एक हाऊस वाईफ डाले तो … :) 

खैर !! जरुरी ये बात है हर काम खुशी खुशी किया जाए …कई महिलाए “रुस” जाती है मेरा मतलब मोदी जी की यात्रा वाला रुस नही बल्कि नाराज हो जाती है. इतना काम देख कर मुहं बना लेती है अरे भई   छुटी है  आप भी खुश रहो  इसलिए खूब खाओ और खिलाओ …. !!!!

Indian House wife

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24. Sick Leave

Sick Leave

बचपन मे क्लास english  की हो या हिंदी की एक पत्र यानि application  का हमें रट्टा लगा होता था और वो है Sick Leave. सविनय निवेदन है कि आज मुझे बुखार है मैं दो दिन स्कूल नही आ पाऊंगी. कृपया करके दो दिन का अवकाश प्रदान करॆं..

ये application हमारे दिल के इतना करीब है इतना करीब है कि आज भी हम सभी  कही न कही बहाना ही खोजते हैं बीमार होने का …अब देखिए ना बीमार होना यानि मुसीबतों का पहाड टूट पडना. लम्बी लाईन, फिर ढेर सारे टेस्ट और फिर महंगी दवाईयां और दवाई के आफ्टर ईफेक्टस … इतना सब कुछ होते हुए भी बीमार होना हमे प्रिय है … बेहद प्रिय है… अब देखिए ना…  बच्चा अगर बाहर नौकरी कर रहा है तो मां ये कहेगी कि अगर छुट्टी नही मिल रही तो मेरी बीमारी की छुट्टी का बहाना ले कर आजा, मेरे बच्चे… !!!

बाहर बरसात हुई मौसम चाऊ माऊ हुआ कि हमें और किसी की याद आए न आए छुट्टी की याद जरुर आती है और बहाना … अजी बहाना तैयार है कि सर …  कल बरसात मे भीगने के कारण सर्दी लग गई और बुखार भी हो गया. इसलिए आज आफिस  नही आ पाउगां… और फिर बच्चों को लेकर निकल जाते है long drive पर ….  अगर लिख कर दे रहे हैं तो अलग बात है पर अगर फोन करके बताना है तो एक दो फर्जी छीकें तो मारनी पडेगी और एक दो बार नाक से भी बोलना पडेगा अरे भई … आपकी नाक भी तो बंद है ना :) :)

और तो और आप जरा फेसबुक पर स्टेटस डाल कर तो देखिए कि आपकी  तबियत  ठीक नही है  कमेंटस की लाईन न लग जाए तो अपना नाम बदल लेना( अब भई मेरा नाम तो भला चंगा है)

तो हुआ ना  बीमारी का बहाना हमारे दिल के करीब …

वैसे बहुत देर हो गई कामवाली बाई अभी तक नही आई … सारी रसोई फैली पडी है .. अरे ये किसका मैसेज है मोबाईल पर … नहीईईईईईईईईईईई… काम वाली बाई का है लिखा है आज तबीयत ठीक नही लग रही… दो दिन काम पर नही आएगी रे बाबा … !!

हाय ये क्या ??? मुझे भी अचानक सिर दर्द हो गया ऐसा लग रहा है बुखार भी … अरे नही ये वाकई में  सचमुच वाला है .. :(

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25. मैं तीस हजारी से बोल रही हूं

मैं तीस हजारी से बोल रही हूं

आज मणि बहुत घबराई हुई घर आई और बोली कि वो जेल जाएगी. वो जेल जाएगी … !!! मैने उसे आराम से बैठाया और सारी बात पूछी क्योकि जितना मै मणि को जानती हूं वो और जेल !!! असम्भव !! पर हुआ क्या!!! मैंने उसे पानी का गिलास पकडाया. गिलास हाथ मे लिए लिए  उसने घबराई हुई आवाज मे बताया कि उसके पास एक महिला का फोन आया. वो दिल्ली तीस हजारी कोर्ट से बोल रही थी. उसने नाम पूछ कर कहा कि आपके नाम से केस रजिस्टर हुआ है. क्या आपको नोटिस मिला ? मणि की तो वही सासं फूल गई. उसे कुछ समझ नही आ रहा था. उसने फोन काट दिया और मेरे पास दौडी चली आई. मैने उसे संयत करके बैठाया और विश्वास दिलाया कि ऐसा कुछ नही होगा क्योकि जब उसने कुछ किया ही नही तो !!! जब उसी नम्बर पर दुबारा फोन किया तो नही मिला. मैने यही कहा कि किसी ने मजाक किया है.

तभी उसी नम्बर से फोन आ गया. मैने बात करके पूछा तो उस महिला ने बताया कि हाई कोर्ट के सरकारी वकील है वो आपको सारी हिस्ट्री बताएगे और उसने उनका नम्बर तो दिया ही साथ मे मणि की केस फाईल नम्बर भी दे दिया. मै हैरान !! उस नम्बर पर फोन किया तो कोई आदमी बोल रहा था. इसने बताया कि पिछ्ले साल आपका आईडिया का नम्बर था उसका भुगतान नही किया इसलिए उन्होने केस दर्ज करवाया है. या तो पैसे जमा करवा दो या केस तो डल ही चुका है. मैने यह कह कर फोन रख दिया कि बाद मे बात करती हूं. फिर मणि से पूछ कि कभी किसी मोबाईल का बकाया था. इस पर वो याद करती हुई बोली कि एक बार एक नम्बर का प्लान बदलवाया था पर आईडिया वालो ने बदला की नही लगभग दो महीने तक वो लगातार फोन करके कहती रही पर बिल पहले वाले प्लान का लग कर आता रहा.इस चक्कर मे तंग आकर उसने दूसरा नम्बर ले लिया.

उसके बाद आईडिया से तो तीन बार भुगतान के लिए फोन आए पर उसने कहा कि गलती उनकी है कि प्लान बदला क्यो नही और हमे भी इतनी दिक्कत दी है इसलिए आपकी ही गलती है हम पैसे नही देंगे और उसके बाद कोई फोन नही आया. और आज आया तो !!! वो बता ही रही थी कि इतने मे उसी महिला का दुबारा फोन आया कि आपकी बात हो गई क्या उनसे. और मेरी हैरानी की सीमा नही जब वो महिला अपशब्द बोलने लगी. मै हक्की बक्की रह गई. ये क्या तरीका हुआ. बहुत बुरा लगा. दुख इस बात का हुआ कि मणि के पास कोई इमेल या कार्यवाही नही थी जिसका सबूत वो दिखा सकती कि आईडिया वालो ने कितना तंग किया था. खैर, दो तीन वकीलो और न्यायाधीश मित्र से बात की तो उन्होने बताया कि ऐसा बहुत हो रहा है और ये लोग बहुत गंदी भाषा का इस्तेमाल करते हैं. इस बारे मे जब दो चार लोगो ने आईडिया मे बात की तो वो तुरंत माफी मांग ली कि क्या करे जी.!!!

खैर, मणि अपने दो हजार रुपए तो अगले दिन ही जमा करवा दिए पर उस महिला के खिलाफ केस करने का मन भी बना रही है जिसने इतने अपशब्द बोले!
वाह रे आईडिया वालो …. वट एन आईडिया !!! वैसे ये अक्टूबर 2012 की बात है पर याद इतनी ताजा है मानो कल की ही बात हो …

मैं तीस हजारी से बोल रही हूं

jail photo

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