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1. Prayers

Prayers

हमारी जिंदगी में  prayers का बहुत मह्त्वपूर्ण स्थान है. महिलाएं तो ज्यादातर सुबह सवेरे अपने दिन की शुरुआत नहाने के बाद  पूजा और धूप बत्ती से करती हैं. मेरी सहेली मणि के घर अगर सुबह सुबह जाओ तो घर महकता मिलेगा. बहुत अच्छा लगता है  क्योकि खुश्बू होती ही इतनी मनभावन है.

उसकी देखा देखी मैने भी ऐसा करना शुरु कर रखा है दिन में तीन चार बार तो खुश्बूदार अगरबत्ती लगा ही लेती हूं पर पर पर  आज कुछ ऐसा पढा कि टैंशन सी हो गई. असल में, खबर है कि” हैरानी होगी आपको यह जानकर कि सुगंधित अगरबत्तियों और धूप बत्तियों से निकलने वाला धुंआ शरीर की कोशिकाओं के लिए सिगरेट के धुएं से अधिक जहरीला साबित होता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि अगरबत्ती का धुआं सिगरेट के धुएं की तरह है। अगरबत्ती का धुआं कोशिकाओं में जेनेटिक म्‍यूटेशन करता है। इससे कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव होता है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है।

अब ज्यादा तो समझ नही आया बस इतना समझ आया कि अगरबत्ती से निकलता धुंआ बेहद नुकसानदायक है.

वैसे पहले गूगल सर्च में कितनी बार पढा है कि अगरबत्ती बनाए खुश्बू के साथ साथ धन भी कमाए या अगरबत्ती बना कर जीवन महकाए  या सफल बिजनेस है अगरबत्ती का … !!!

पर आज वही अगरबत्ती और धुआं  गूगल  पर जब सर्च किया तो वही हैरान कर देने वाली खबर बहुत जगह पढने को मिली… ये तो कभी सोचा ही नही कि ऐसा भी होता है इसलिए तनाव हो गया है फिलहाल तो मैं मणि को सचेत करने जा रही हूं वैसे आप तो ज्यादा धूप बत्ती नही करते होंगें अगर करते हैं तो जरुर सोचिएगा !!

Prayers

Details

http://epaper.navbharattimes.com/details/4486-61408-1.html Via navbharattimes.com

reasons to say NO to agarbattis or incense sticks

शोध के नतीजों के आधार पर फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए यह अच्‍छा होगा कि वह धूप के धुंए से बचें। अगरबत्ती और धूपबत्ती को फेफड़ों के कैंसर, ब्रेन ट्यूमर और बच्‍चों के ल्‍यूकेमिया के विकास केसाथ जोड़ा जा रहा है। Via patrika.com

Prayers लेख आपको कैसा लगा जरुर बताईगा !!!

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2. Breaking News

Breaking News

लग रहा है शीना मर्डर मिस्ट्री को लेकर न्यूज चैनल वाले बौखला से गए है.. बस कुछ बोलना है कुछ दिखना है वो भी सबसे पहले सबसे पहले और सबसे तेज Breaking News के  चक्कर मॆं गलती पर गलती हुई जा रही है.

कल गलती एबीपी न्यूज ने की और आज न्यूज 24 के सबसे बडा सवाल में शीना की बजाय बोला और लिखा आता रहा कि सौतेला पिता इंद्राणी का शोषण करता था उफ ये भयंकर उलझन… एक तो मिस्ट्री पहले ही समझ नही आ रही उपर से चैनल वाले और कंफ्यूज कर देते हैं ..

news 24 by monica gupta   murder case by monica gupta

Breaking News
वैसे लगता है कि प्याज सस्ता हो गया या फिर वन रैंक वन पैंशन का भी हल निकल गया है क्योकि कोई बहस ही नही हो रही कोई बात नही हो रही बस शीना इंद्राणी मर्डर … फुल्ल टीआरपी मसाला …इसलिए …

Breaking News

 

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3. News Channel Mistakes

News Channel Mistakes

Funny mistakes तो अक्सर हो ही जाती है न्यूज चैनल वालों से, पर जब मामला मर्डर का हो तो ऐसे में, किसी का मर्डर और नाम किसी का दे देना … सही नही है… इस मामले में तो जल्दबाजी सही नही है… अभी न्यूज चैनल देखते देखते अचानक ध्यान गया कि अरे ये क्या… मर्डर तो शायद शीना का हुआ है ….

 

 

murder case by monica gupta

News Channel Mistakes

 

– www.bhaskar.com

एक अंग्रेजी अखबार ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इद्राणी ने अपने दूसरे पति संजीव खन्ना के साथ मिलकर पीटर और मिखाइल को मारने का प्लान बनाया ताकि परिवार की पूरी प्रॉपर्टी उनकी हो जाए। मामले की जांच कर रही मुंबई पुलिस को भी शक है कि शीना वोहरा के बाद अगला नंबर पीटर मुखर्जी या मिखाइल का था। पुलिस को इस मामले में गिरफ्तार किए गए इंद्राणी के पूर्व ड्राइवर श्याम राय के पास एक 7.66 mm पिस्टम मिली है। पुलिस के मुताबिक, उन्हें इस बारे में कुछ जानकारी तो मिली है, लेकिन इसकी पुष्टि के लिए इंद्राणी और संजीव खन्ना से पूछताछ की जाएगी। दूसरे पति से छिपाई पहली शादी?

इंद्राणी मुखर्जी के बारे में पता चला है कि उन्‍होंने 21 साल की उम्र में ही दूसरी शादी कर ली थी। वह भी पहली शादी की बात छिपा कर। इस बारे में उनके दूसरे पति संजीव खन्‍ना से गुरुवार को और पूछताछ की जाएगी। उनसे इंद्राणी के सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस पीटर की पहली पत्नी के बेटे राहुल से भी और पूछताछ कर रही है। राहुल और शीना के अफेयर होने की बात सामने आ चुकी है। दूसरे पति को पहली शादी की बात पता नहीं संजीव खन्ना को कोलकाता से बुधवार को गिरफ्तार किया गया। संजीव खन्ना की बातों से लगता है  Read more…

गम्भीर  मुद्दों पर ऐसी गल्तियां  देख कर यही अहसास होता है कि चैनल वाले जल्दबाजी बहुत करते हैं जोकि सही नही है

News Channel Mistakes

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4. दशरथ मांझी-बाहुबली

दशरथ मांझी-बाहुबली

कल न्यूज चैनल बदलते हुए अचानक एक खबर सुनी और मैने वापिस वही न्यूज चैनल लगा लिया. फिल्मी खबर थी कि फिल्म “मांझी, द मांऊटेन मैन” की रफ्तार सुस्त पडी. मात्र 8 करोड 5 लाख की कमाई ही कर पाई. इससे बेहतर रही “आल इज वैल” उसने कमाए …. बस इससे आगे मैं सुन नही सकी और सोचने लगी कि रील नही बल्कि रियल लाईफ हीरो हैं दशरथ मांझी.

इन आठ दस करोड की कमाई से क्या फर्क पडता है.. बिहार के मुख्यमंत्री भी 2007 में दशरथ मांझी को अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठाकर पांच मिनट के लिए उन्हे राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में उसका सम्मान दे चुके हैं. मांझी के नाम से उसी क्षेत्र में कहीं सडक़ है तो कहीं अस्पताल है और तो और बाहुबली मांझी की तुलना बादशाह शाहजहां से की जा रही है कि जिस शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में धन-बल की सहायता से ताजमहल जैसा अजूबा बना दिया वहीं दशरथ मांझी भी किसी शहाजहां से कम नहीं. मिसाल जो उन्होनें कायम की है वो समस्त सवा सौ करोड देशवासियों के लिए प्रेरणा है और हमेशा रहेगी… 

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कोई पहाड पर चढ कर अपना और अपने देश का नाम रोशन करता है तो कोई बिरला पहाड काट कर ही रास्ता बना देता है…

किसी भी काम के लिए भगवान के भरोसे मत बैठिए, क्या पता भगवान ही आपके भरोसे बैठा हो  :)

दशरथ मांझी-बाहुबली

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5. गूगल डूडल

गूगल डूडल

 

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गूगल डूडल

कोई खास दिन आता नही कि मेरा ध्यान सबसे पहले गूगल  डूडल पर जाता है कि उन्होनें आज क्या बनाया होगा. सच पूछिए तो आज के दिन के बारे मे जरा भी पता नही था हां, पर फिल्म में देखा था इसलिए ये जरुर पता था कि स्पेन में ऐसा टमाटर मारने का उत्सव  कुछ मनाया जाता है पर डूडल देख कर वाकई मजा आ गया.

तरह तरह के रंग बिरगें डूडल सदा हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं. जिस दिन के बारे मे पता होता है उस दिन अच्छा लगता है और जिस दिन की जानकारी न हो वो जानने का मन करता है कि आखिर ये गूगल डूडल स्पेशल है तो कोई खास बात जरुर होगी… :) है ना :) और फिर शुरु हो जाती है गूगल सर्च :)

 

La Tomatina’s 70th anniversary and its big, messy secret – Vox

The history of La Tomatina is a lot like any food fight — it’s a little bit of fun that got way out of hand.

The history of La Tomatina is a lot like any food fight — it’s a little bit of fun that got way out of hand.

Like many Spanish festivals, the celebration was originally a religious one, to honor Bunol’s patron saint, San Luis Bertran. One year — either 1944 or 1945 — there was a tussle during a procession and some boys tossed tomatoes. A few say it was prompted by village rivalries. Some say it was a joke. But others claim it stemmed from unhappiness with Francisco Franco’s reign following Spain’s civil war. See more…

और इससे भी अच्छी बात ये है कि सभी के  जन्मदिन पर भी  गूगल खास तोहफा गूगल डूडल  होता है और शुभकामनाएं भी होती है इससे ज्यादा स्पेशल फील करवाना …. !!! 

La Tomatina 70th Anniversary

For its 70th anniversary, Doodler Nate Swinehart captures the energy of today’s festivities with an animation awash in splattered tomatoes and brimming with the youthful delight of its characters.

Concept Thumbnails

Concept Animation

Animation Layout Plan Read more…

थैक्स गूगल … शुभकामनाए !!!

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6. Online बनाम Off line

 

Online  photo

Online बनाम Off line करीब एक धंटा बाद बंद कमरे से बाहर निकली मेरी एक जानकार को मैने हिम्मत दी बुद्दू, पगली ऐसे रोते थोडे ही न है. हिम्मत रख, सब्र कर, हर  हर किसी के पास सब कुछ तो नही होता ना… और तुम तो वैसे ही इतनी समझदार हो. यही जिंदगी है बजाय उदास होने के, रोने के, हर हाल में खुश रह. मुझे देखो मैं भी तो सह रही हूं न ये सब पर कभी महसूस होने नही दिया.

वो सहमति की गर्दन तो झटक रही थी पर बोल रही थी कि क्या करुं नही समझा पा रही खुद को.. हर रोज सोचती हूं आज मेरी जिंदगी में भी खुशी आएगी जब मैं भी खुद पर नाज कर पाऊंगी पर ना जाने किस की नजर लग गई.

आप रोज देख ही रही हो तिल तिल करके जी रही हूं. रोते रोते हिचकियां भी लग गई..जी क्या ??? आप जानना चाह रहे हैं कि क्या हुआ? ओह क्षमा करें जानकार से बात करने के चक्कर में, इसकी इस हालात की वजह तो मैं बताना ही भूल गई. ये बेचारी इस लिए रो रही है कि हर रोज फेसबुक पर कुछ न कुछ लिखती है पर इसकी पोस्ट पर एक कमेंट तो दूर की बात लाईक तक भी नही होते.

कल ही उसने कम से कम 50 सैल्फी ली और एक को बेहतरीन मान कर इस आशा और विश्वास के साथ फेसबुक पर डाला कि लाईक और कमेंट की बाढ क्या सुनामी आ जाएगी पर अन्य पोस्ट की तरह ये भी सूखी रह गई और वो डिप्रेशन में चली गई …. अब, कभी अपना उदाहरण देकर तो कभी किसी का उदाहरण देकर उसे समझा रही हूं वैसे आप भी किसी को ऐसी स्थिति में जाने से बचा सकते हैं.

आपका एक कमेंट और एक लाईक किसी की जिंदगी मे बहार ला सकता है. वैसे मैं इस विषय पर शोध करके किताब लिखने की भी सोच रही हूं क्योकि ये आज की सबसे बडी जरुरत जो है.

Online बनाम Off line कैसा लगा जरुर बताईगा  :)

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7. क्या आप जानते हैं

tulsi by monica gupta

 

 

क्या आप जानते है कि पहले समय में लोग चुटिया क्यों रखते थे या कान छिदवाने से क्या लाभ होता है या  जमीन पर बैठ कर खाना खाने से क्या फायदा होता है   या  घर पर तुलसी लगाने का कोई फायदा है या नही… आईए जाने इसी से जुडी कुछ बातें और उसके पीछे  छिपे वैज्ञानिक तर्क ….
क्या आप जानते हैं कि कान छिदवाने की परम्परा के पीछे क्या वैज्ञानिक तर्क है. वो ये हैं कि कान छिदवाने से सोचने की शक्तित बढ़ती है। डॉक्टरों का भी मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है।

माथे पर कुमकुम या तिलक लगाने का भी वैज्ञानिक तर्क है और वो ये कि आंखों के बीच में माथे तक एक नस जाती है और कुमकुम या तिलक लगाने से उस जगह की ऊर्जा बनी रहती है। माथे पर तिलक लगाते वक्त जब अंगूठे या उंगली से प्रेशर पड़ता है, तब चेहरे की त्वचा को रक्त सप्लाई करने वाली मांसपेशी सक्रिय हो जाती है। इससे चेहरे की कोशिकाओं तक अच्छी तरह रक्त पहुंचता है.

भारतीय संस्कृति के अनुसार जमीन पर बैठकर भोजन करना अच्छी बात मानी जाती है।
वैज्ञानिक तर्क के अनुसार जमीन पर बैठ कर भोजन करने से, आलथी पलती मारकर बैठने से जोकि एक प्रकार का आसन है. इस पोजीशन या आसन में बैठने से मस्तिाष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त अगर दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है। इस पोजीशन में बैठते ही खुद-ब-खुद दिमाग से एक सिगनल पेट तक जाता है, कि वह भोजन के लिये तैयार हो जाये।

हाथ जोड़कर नमस्ते करने के पीछे भी वैज्ञानिक तर्क है वो ये कि जब सभी उंगलियों के शीर्ष एक दूसरे के संपर्क में आती हैं और उन पर दबाव पड़ता है। एक्यूप्रेशर के कारण उसका सीधा असर हमारी आंखों, कानों और दिमाग पर होता है, ताकि सामने वाले व्यक्तिर को हम लंबे समय तक याद रख सकें। वैसे दूसरा तर्क यह भी कह सकते हैं कि शैक हैंड के बजाये अगर हम नमस्ते करते हैं तो सामने वाले के शरीर के कीटाणु आप तक नहीं पहुंच सकते। अगर सामने वाले को स्वाइन फ्लू भी है तो भी वह वायरस आप तक नहीं पहुंचेगा। जोकि फायदेमंद ही रहेगा.

अक्सर भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से किया जाता है और इसके पीछे वैज्ञानिक तर्क यह है कि तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं। इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है और खाने के अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है। इससे पेट में जलन नहीं होती है।

सुबह उठकर सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परम्परा के पीछे भी वैज्ञानिक तर्क ये है कि
पानी के बीच से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों में पहुंचती हैं, तब हमारी आंखों की रौशनी अच्छी होती है।

पुराने समय में ऋषि मुनि सिर पर चुटिया रखते थे। कई बार आपको पंडित लोग आज भी चुटिया लिए मिल जाएगें. इसका वैज्ञानिक तर्क ये है कि जिस जगह पर चुटिया रखी जाती है उस जगह पर दिमाग की सारी नसें आकर मिलती हैं। इससे दिमाग स्थििर रहता है और इंसान को क्रोध नहीं आता, सोचने की क्षमता बढ़ती है।
व्रत रखने का बहुत क्रेज है लेकिन इसके पीछे भी वैज्ञानिक तर्क ये भी है

व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है, यानि उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों, मधुमेह, आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते। तुलसी के पूजन को अहमियत देने के पीछे भी वैज्ञानिक तर्क ये है कि

तुलसी इम्यून सिस्टम को मजबूत करती है। अगर घर में पेड़ होगा, तो इसकी पत्तिकयों का इस्तेमाल भी होगा और उससे बीमारियां दूर होती हैं।

क्या आप जानते है … आपको कैसा लगा अगर आपके पास भी कुछ बताने को तो जरुर शेयर करें …

http://hindutavadarshan.blogspot.in/2015/05/blog-post_44.html

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8. छेडछाड मामले

छेडछाड मामले

कल सभी न्यूज चैनल पर सुर्खियों मे थी ये खबर की दिल्ली में जसलीन के साथ हुई छेडछाड … जसलीन ने फेसबुक पर सारी बात विस्तार से बताई और पुलिस ने भी उसके हौंसले को सलाम करते हुए ईनाम की धोषणा कर डाली..

जसलीन ने लिखा – इस शख्स ने मुझ पर तिलकनगर पर करीब 8 बजे फब्तियां कसीं. वो सिल्वर रंग की रॉयल एनफील्ड पर था जिसका नंबर है DL 4S CE 3623. जब मैंने उससे कहा कि मैं उसकी फोटो खींच रही हूं और मैं उसके खिलाफ शिकायत करूंगी तो उसने बाकायदा फोटो के लिए पोज बनाया और कहा कि जो कर सकती है कर ले. कंप्लेंट करके दिखा फिर देखियो क्या करता हूं मैं.

मैंने अपने लिए लड़ाई लड़ना तय किया है और मैं तिलक नगर थाने में उसकी फोटो और गाड़ी नंबर के साथ शिकायत कर चुकी हूं. कृपया इसे खूब शेयर करें. आज उसने मेरे साथ ये किया है कल वो किसी और के साथ इससे कहीं ज्यादा बुरी हरकत कर सकता है. मैं यहां वो सब लिख सकती थी जो उसने मुझसे कहा था लेकिन मैं नहीं चाहती थी कि ऐसे शब्दों की वजह से फेसबुक मेरी पोस्ट को हटा दे.जसलीन ने हिम्मत नहीं हारी और लड़ाई छेड़ दी. तिलकनगर पुलिस मौके पर पहुंची और शिकायत दर्ज करने के बाद मनचले की गाड़ी के नंबर के आधार पर तलाश शुरू कर दी.

दूसरी तरफ जसलीन की मदद में आए हजारों फेसबुक यूजर्स. सिलसिला शुरू हुआ तो सामने आ गई मनचले की पूरी पहचान.

बात को अभी 24 घंटे भी नही हुए थे कि खबरों में आने लगा कि लडकी का ये पब्लिस्टी स्टंट ही है अचानक एक प्रत्यक्षदर्शी सामने आया और उसने बताया कि लडकी सही नही है और उसने खुद ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया कि वो अपने मुंह से नही बोल सकते. वही खुद लडके ने यानि सरबजीत ने कहा कि सब गलत है . मेरी नौकरी चली गई परिवार में, रिश्तेदारों में बदनामी हुई वो अलग…

 

वही प्रत्यक्षदर्शी ने  भी कहा कि वो महिलाओ का सम्मान करता है पर जो इस लडकी ने किया उस को ऐसा नही करना चाहिए…

मुझे याद आया कि कुछ समय पहले भी रोहतक की दो बहनों आरती और पूजा से छॆडछाड का मामला सामने आया था. सरकार ने उनके हौंसले को सलाम किया और ईनाम दिलवाने की मांग भी की जबकि अगले ही दिन दोनों बहनों को गलत साबित करने के लिए बहुत आवाजे उठी और मामला गहराया और फिर  दब गया.

दुख इस बात का भी है कि कुछ लोग ऐसी खबरों मॆं भी राजनीति तलाशते हैं…

कुल मिला कर यही बात सामने आती है जब भी ऐसी खबरें जब दिखाई जाए तो जल्दबाजी नही करनी चाहिए दोनों पक्षों को सामने रख कर ही खबर दिखानी चाहिए ना मैं लडके की तरफदारी कर रही हूं और ना ही लडकी की… पर सच्चाई जानने का हम सभी का अधिकार है  और अगर सच्ची खबर सामने आएगी तो हम यकीनन हम कुछ फैसला ले सकते हैं.

हद तो तब हो गई जब ये खबर खत्म होते ही एक अन्य खबर लखनऊ से आ रही थी और एक लडकी एक मनचले की पिटाई कर रही थी और लदका हाथ जोड कर कह रहा था माफ कर दो बहन !! ौसके आगे पीछे की क्या कहनी है क्या बात हुई शायद ये बताना चैनल ने जरुरी नही समझा !!!

 

BBC

हरियाणा के रोहतक में कथित रूप से छेड़खानी करने वाले तीन पुरुषों की पिटाई करतीं दो बहनों का एक मोबाइल फ़ोन से बना हुआ वीडियो भारत में काफ़ी चर्चित हुआ है.

हालांकि पुरुषों को गिरफ़्तार कर लिया गया है, लेकिन एक अन्य वीडियो आने के बाद लड़कियों के आरोपों पर सवाल उठने लगे हैं, जिसमें यही दोनों बहनें एक पार्क में एक आदमी पर हमला करती हुई दिख रही हैं.

उल्लेखनीय है कि इन लड़कियों को राज्य सरकार ने साहस के लिए अवॉर्ड देने की घोषणा की थी जिसे फ़िलहाल रोक लिया गया है.

यह घटना रोहतक ज़िले में हुई. दो छात्राएं- आरती (22) और पूजा (19) एक सरकारी बस से अपने घर जा रही थीं.

छोटी बहन पूजा ने बीबीसी हिंदी को बताया कि बस में तीन लोगों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, उन्होंने धमकी दी और छेड़छाड़ की.

उन्होंने कहा कि आत्मरक्षा के लिए उन्होंने बेल्ट निकाल कर उनकी पिटाई कर दी. See more…

छेडछाड मामले में आपके क्या विचार है … जरुर बताईगा !!!

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9. रेडियो रुम

रेडियो रुम

http://radioplaybackindia.blogspot.in/2015/08/musibat-mol-li-maine.html

रेडियों रुम में आपका स्वागत है

अभी तक आप मेरी लिखी दो  कहानियां  मेरी ही आवाज में सुन चुके हैं इस बार सुनिए मेरा लिखा व्यंग्य मेरी ही आवाज में …. मुसीबत मोल ली मैनें …

satire by monica gupta

व्यंग्य का शीर्षक है

मुसीबत मोल ली मैनें..

असल में, पिछ्ले महीने जब मैने अपनी एक सहेली को फर्राटे से कार चलाते देखा तो निश्चय कर लिया कि कुछ भी हो जाए मैं भी ड्राईविंग सीखूंगी. घर पर निर्णय सुनाया तो पहले तो सबने मना किया कि क्या करोगी पर मेरी जिद्द के आगे सभी झुक गए और थम्स अप करके सहमति दे दी. अब सबसे पहले मैंने ब्यूटी पार्लर जाकर स्टाईलिश बाल कटवाए. गोगल्स खरीदे. बस अब ड्राईविंग सीखनी बाकि थी. 15 दिन में मैने इधर उधर कार ठोक ठाक कर कार सीख ही ली. फेसबुक पर जब ये खुश खबरी  दी. तो 100 कमेंटस और 200 लाईक भी आ गए. मैं सांतवे सामान पर थी. पर अब शुरु होती है मेरी दास्ताने मुसीबत.पहले राशन वाला घर पर सामान भिजवा देता था अब कहता है कि छोटू नही है आप खुद ही ले जाओ कार में. बाजार से आधा किलो आलू लाना हो या मोची से चप्पल ही ठुकवानी है तो सब मुझे ही कहते कि कार है ना. ले जाओ. रिश्तेदार जो सालों से घर नही आए थे उन्होने इसलिए आना शुरु कर दिया कि बहू ने कार सीख ली है अब उन्हें स्टेशन से लेकर आना , शापिंग कराना, धुमाना और फिर घर पर लजीज खाना भी बना कर खिलाना. नही तो वो नाराज हो जाएगें कि बहू ने सेवा भी नही की. हाउस वाईफ होने के नाते पहले मेरी भूमिका बस घर सम्भालने तक की थी अब दोहरी तिहरी या चौगुनी हो गई है.घर पर सब खुश है पर मैं सिर पकड कर बैठी हूं .सहमति से किया गया थम्स अप किया था मुझे अब ठेगा लग रहा है मानो चिडा रहा हो कि जाओ और सीखो कार चलाना.. मना किया था ना… हाय राम पर अब क्या करु … मुसीबत मोल ली है मैने अपने पावं पर खुद ही कुल्हाडी मारी है…ओह, आपसे बातों के चककर में तो मैं अलार्म लगाना ही भूल गई सुबह चार बजे की ट्रेन से रिश्तेदारों को लेने जाना है फिर पकवानों की तैयारी करनी है काम वाली बाई भी दो दिन छुट्टी पर है. आज स्कूल बस भी नही आएगी बच्चो को भी ड्राप करना है ….हे भगवान !!

मुसीबत मोल ली मैने    कैसा लगा जरुर बताईएगा !!!

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10. पान मसाला

पान मसाला

ह हा हा !!! क्षमा कीजिएगा पर क्या करुं अपनी हंसी जिसमें दर्द भी है रोक नही पा रही. हुआ क्या कि कल दिल्ली से लौटते हुए FM पर विज्ञापन चल रहे थे और सबसे ज्यादा विज्ञापन पान मसाले के थे और बार बार आ रहे थे. अलग अलग तरह के पान मसाले और जाने माने लोग कभी 25 साल पूरा करने पर बधाई दे रहे थे तो कोई कहता है कि इसके बिना जीवन अधूरा है. हैं दाने दाने में दम है वगैरहा वगैरहा.

दस से तीस सैंकिंड के विज्ञापन में मात्र 2 सैंकिंड ( वो भी फास्ट फारवर्ड करके ) ये बताया गया कि पान मसाला स्वास्थय के लिए हानिकारक है. मात्र खाना पूर्ति कर ली कि भई बोलना जरुरी है इसलिए बोलती को भागना पडेगा. हंसी सोच पर आई और दुख इस बात का भी हुआ कि  FM जैसे सशक्त माध्यम के द्वारा भी श्रोताओं में इसके प्रति क्रेज पैदा किया जा रहा है. सब पैसे की माया है पैसे के लिए कुछ भी करेंगें मीडिया वाले. वैसे बात एफएम की नही टीवी पर भी विज्ञापनों की हैं और कितनी खबरें तो प्रायोजित ही पान मसाले द्वारा होती है.फिल्म में तो जहां किसी ने सिग्रेट या शराब पी वही चंद सैंकिड के लिए लिखा आ जाएगा कि स्वास्थय के लिए हानिकारक है विमल पान मसाला हो या रजनी गंधा पान मसाला या पान पराग या  अन्य  कोई भी हो …

 

cartoon cancer by monica gupta

 

~ Hariom Care

पान मसाला से निजाद पाने का सरल उपाय धूम्रपान से भी खतरनाक है पान मसाला या गुटखा। सुपारियों में प्रति सुपारी 10 से 12 घुन (एक प्रकार के कीड़े) लग जाते हैं, तभी वे पान मसालों या गुटखा बनाने में हेतु काम में ली जाती हैं। इन घुनयुक्त सुपारियों को पीसने से घुन भी इनमें पिस जाते हैं। छिपकलियाँ सुखाकर व पीसकर उनका पाउडर व सुअर के मांस का पाउडर भी उसमें मिलाया जाता है। धातु क्षीण करने वाली सुपारी से युक्त इस कैंसरकारक मिश्रण का नाम रख दिया – ‘पान मसाला’ या ‘गुटखा’। एक बार आदत पड़ जाने पर यह छूटता नहीं। घुन का पाउडर ज्ञानतंतुओं में एक प्रकार की उत्तेजना पैदा करता है। पान मसाला या गुटखा खाने से व्यक्ति न चाहते हुए भी बीमारियों का शिकार हो जाता है और तबाही के कगार पर पहुँच जाता है। पान मसाले खाने वाले लोग धातु-दौर्बल्य के शिकार हो जाते हैं, जिससे उन्हें बल तेजहीन संतानें होतीं हैं। वे लोग अपने स्वास्थ्य तथा आनेवाली संतान की कितनी हानि करते हैं यह उन बेचारों को पता ही नहीं है। > पान मसाला या गुटखा खाने की आदत को छोड़ने के लिए 100 ग्राम सौंफ, 10 ग्राम अजवाइन और थोड़ा सेंधा नमक लेकर उसमें दो नींबुओं का रस निचोड़ के तवे पर सेंक लें।यह मिश्रण जेब में रखें। जब भी उस घातक पान मसाले की याद सताये, जेब से थोड़ा सा मिश्रण निकालकर मुँह में डालें। इससे सुअर का माँस, छिपकलियों का पाउडर व सुपारियों के साथ पिसे घुन मिश्रित पान मसाला मुँह में डालकर अपना सत्यानाश करने की आदत से आप बच सकते हैं। इससे आपका पाचनतंत्र भी ठीक रहेगा और रक्त की शुद्धि भी होगी। Read more…

http://www.bhaskar.com/news/MP-OTH-cancer-from-pan-masala-3690244.html

सामान्य गुटखा पाउच गाल में तो प्रभाव डालता ही है, साथ ही श्वास नली में सिकुड़न पैदा करता है। इसके लगातार खाने से गला चिपकने लगता है। रसायन अपना प्रभाव छोड़ते हैं और अनेक बार इन लक्षणों के बाद कैंसर तक सामने आता है।

मुझे लगता है पान मसाला या अन्य हानिकारक हो न हो पर ऐसे विज्ञापन जरुर हानिकारक हैं तभी हंसी में उभरा दर्द.. कैसे सुधरेंगें हम !!

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11. हाईकोर्ट इलाहाबाद

 

हाईकोर्ट इलाहाबाद

सरकारी स्कूलों में पढाया जाए नेता और अफसरों के बच्चों को …

यूपी की कोई भी खबर हो तनाव सा हो जाता है पर आज जो खबर सुनी उसे सुनकर अच्छा लगा… खबर से पहले मैं आपको बताना चाहूगी कि कुछ दिन पहले ही सफाई कर्मचारी ने मुझसे पूछा कि कोई प्राईवेट स्कूल में जान पहचान है क्या ? मेरे पूछ्ने पर उसने बताया कि बच्चों को दाखिल कराना है. सरकारी स्कूलों का हाल बहुत बुरा है क्या पढेगा बच्चा.. तब से मन में इसी बारे मे बहुत विचार चल रहे थे कि अचानक एक खबर ने चेहरे पर स्माईल ला दी. खबर है कि यूपी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों की बदहाली देख कर फैसला सुनाया है कि अफसरों और नेताओं के बच्चे अनिवार्य रुप से यूपी बोर्ड द्वारा संचालित सरकारी स्कूल मे पढेंगें और जो नही पढाएगा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही होगी.बहुत सही कदम है और इसी की देखा देखी अन्य राज्यों में भी लागू हो जाना चाहिए कम से कम इन बच्चों के बहाने शिक्षा का स्तर और अन्य मामलों मे तो सुधर होगा. अच्छी बातों का सदा स्वागत है.

वैसे भी हाल ही मे हरियाणा में बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान में 15 अगस्त को अपने अपने गांव की सबसे पढी लिखी लडकी नें देश का झंडा फहराया था. जोकि बेहद खुशी और गर्व की बात है … ऐसे अभियान भी देश भर में सतत चलते रहने चाहिए ताकि जागरुकता आती रहे…

 

 

खबर विस्तार से साभार एनडीटीवी इंडिया

http://khabar.ndtv.com/news/india/allahabad-high-court-gives-historic-verdict-directs-bureaucrats-to-enrol-wards-in-govt-schools-1208631

इलाहाबाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक बड़ा फ़ैसला सुनाते राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सभी नौकरशाहों और सरकारी कर्मचारियों के लिए उनके बच्चों को सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पढ़वाना अनिवार्य किया जाए।

हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसी व्यवस्था की जाए कि अगले शिक्षा-सत्र से इसका अनुपालन सुनिश्चित हो सके।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि सरकारी कर्मचारी, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, न्यायपालिका के सदस्य एवं वे सभी अन्य लोग सरकारी खजाने से वेतन एवं लाभ मिलता है, अपने बच्चों को पढ़ने के लिए राज्य के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित प्राथमिक विद्यालयों में भेजें।

न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने यह फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के लिए दंडात्मक प्रावधान किए जाएं।

अदालत ने कहा, ‘‘उदाहरण के लिए यदि किसी बच्चे को किसी ऐसे निजी विद्यालय में भेजा जाता है जो कि यूपी बोर्ड की ओर से संचालित नहीं है तो ऐसे अधिकारियों या निर्वाचित प्रतिनिधियों की ओर से फीस के रूप में भुगतान किए जाने वाली राशि के बराबर धनराशि प्रत्येक महीने सरकारी खजाने में तब तक जमा की जाए जब तक कि अन्य तरह के प्राथमिक स्कूल में ऐसी शिक्षा जारी रहती है।’’

अदालत ने कहा, ‘‘इसके अलावा ऐसे व्यक्तियों को, यदि वे सेवा में हैं तो उन्हें कुछ समय (जैसा मामला हो) के लिए अन्य लाभों से वंचित रखा जाए जैसे वेतन वृद्धि, पदोन्नति या जैसा भी मामला हो।’’ अदालत ने इसके साथ ही कहा कि यह एक उदाहरण है।

यह आदेश उमेश कुमार सिंह एवं अन्य की ओर से दायर उस याचिका पर आया जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश में 2013 और 2015 के लिए सरकारी प्राथमिक विद्यालयों एवं जूनियर हाईस्कूल के वास्ते सहायक शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया को चुनौती दी थी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का ये वाला फैसला आपको कैसा लगा … !!! जरुर बताईएगा !!!

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12. राखी

 lady photo

राखी

मुझे राखी बिल्कुल अच्छी नही लगती अचानक जब मेरी सहेली ने ये बोला तो मैं सकते में आ गई. अरे !!! क्या हुआ !! अच्छी तो है राखी.. किसलिए अच्छी नही लगती. वो बोली पता नही पर राखी का नाम सुनते ही एक अजीब सी टेंशन हो जाती है.मैने पूछ ही लिया कि क्या इसकी वजह पैसे तो नही वो बोली पैसे कितने दें न दें मुझे उससे क्या मेरा क्या मतलब..मैने बात को सामान्य करते हुए पूछा अच्छा तुम कितने भाई बहन हो. वो मुस्कुराते हुए बोली एक भईया है मेरा… पर अब इसमे भईया कहा से आ गए… अरे !!! मैने कहा कि राखी यानि रक्षा बंधन की बात होगी तो भईया की बात तो…. वो बीच में ही बोली क्य्य्य्य्य्य्य्य्या ???? तुम राखी का त्योहार की बात कर रही हो …

मैने कहा … हां … तो ??? तुम क्या समझी … वो बोली मैं तो राखी”सावंत””आईटम गर्ल  की बात कर रही थी ..हे भगवान !!! वो तो वो और मैं  भी क्या समझ बैठी. फिर उसने मुझसे पूछा कि तुमको राखी कैसी लगती है … मैने कहा कौन सी वाली पहले ही बता दो नही कंफ्यूजन हो जाएगा … ह हा हा हा !! वैसे आपको राखी कैसी लगती है ?????

अब आप ये मत सोचने लग जाना कि कही ये वो वाली राखी गुलजार  तो नही…  जो कहती हैं … मेरे कर्ण अर्जुन आएगें … !!! 

राखी … मुबारक हो !!!

 

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13. बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान

बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान

और तिरंगा फहरा दिया ….!!!!

लहराते तिरंगें को देख कर मन गर्व से भर उठता है और हाथ खुद ब खुद सेल्यूट की मुद्रा में आ जाते हैं. कल्पना कीजिए अगर आपको मौका मिले देश का तिरंगा फहराने का तो कैसा लगे ?? जी क्या कहा आपने की … आप सपने में भी नही सोच सकते ? जी बिल्कुल सही कहा… मेरी भी यही सोच थी पर मेरी इस सोच को बदल दिया हरियाणा के “”बेटी बचाओ बेटी पढाओ” अभियान ने. अभियान ये था कि गांव की जो लडकी सबसे ज्यादा पढी लिखी होगी वो अपने अपने गांव में तिरंगा लहराएगी.

suman - monica gupta

ध्वजारोहण करती सुमन रानी, फतेहाबाद (गांव जांडली कलां)

मुझे ये अभियान बेहद प्रोत्साहित करने वाला लगा और इस अभियान को लेकर बेहद उत्सुक थी और उत्सुकता से इंतजार था 15 अगस्त का जब ये मौका  गांव की पढी लिखी बेटियों को मिलेगा.

इस सिलसिले में मेरी बात हुई जिला फतेहाबाद के गांव जांडली कलां की सुमन रानी से जिन्हें अपने गांव में तिरंगा फहराने का  सुअवसर मिला. उसके पिता किसान हैं और वो तीन भाई बहन हैं .सुमन से मैने सारी बात विस्तार से जाननी चाही कि आखिर उन्हें ये मौका कैसे मिला. सीधी सादी सी सुमन ने बताया कि कुछ समय पहले उनके गांव में सर्वे हुआ था और दूसरों की तरह, सुमन ने अपनी पढाई की सारी जानकारी सर्वे मे दी. वो B.Com , M.Com, B.Ed और MBA हैं और आजकल फतेहाबाद के भूना कालिज में कोमर्स पढा रही हैं. जानकारी के बाद उन्हें 12 तारीख को फिर बुला कर बताया गया कि स्कूल के प्रांग़ण में वो ही तिरंगा लहराएगी. अचानक सुनकर उन्हें विश्वास ही नही हुआ. खुद को संयत करने के बाद वो भावुक हो गई. और मैं बताना चांहूगी कि आज भी वो ये सारी बात बताते बताते भावुक हो गई. जब उन्होनें अपने पिता जी श्री रमेश कुमार को बताया तो एक बार तो उन्हें विश्वास ही नही हुआ पर जब विश्वास दिलाया तो उनका सीना गर्व से चौडा हो गया कि उनकी बेटी तिरंगा फहराएगी.

मेरे पूछ्ने पर कि जब  आज सुबह स्कूल आए तो कैसा लगा? मन में क्या क्या  चल रहा था. वो बोली कि जो उस समय महसूस हो रहा था वो तो शब्दों मे बताया ही नही जा सकता. उनके साथ सुबह उनके पापा, भाई और उनकी छोटी बहन आए थे. ऐसा महसूस हो रहा था मानो ये सब सपना हो. बहुत गर्व महसूस हो रहा था और मन ही मन ढेरो धन्यवाद इस बात के लिए भी थे कि सरकार ने  बेटी की शिक्षा के लिए इतना सार्थक कदम उठाया. इस कदम के बाद तो ज्यादा से ज्यादा लोग अपनी बेटियों को पढाएगें ताकि उनकी बेटियों को भी तिरंगा फहराने का मौका मिले. सुमन बता रही थी कि उन्हें गर्व इस बात का भी है कि प्रदेश में पहली बार ये अभियान चला और वो पहली ही बारी में ही  इसका हिस्सा बनी. तिरंगा फहराने के बाद सुमन ने भाषण भी दिया जिसमें सरकार के इस अभियान की प्रशंसा के साथ साथ बेटी की शिक्षा पर बल दिया. सभी गांव वासियों से अपील की कि वो अपनी बेटियों को ज्यादा से ज्यादा पढाए ताकि वो ना सिर्फ गांव में बल्कि समाज में भी अपनी अलग पहचान बना सके. कार्यक्रम में पाचं लडकियों को भी सम्मानित किया गया.

पढाई इस तरह भी पहचान करवा सकती है ये वो अभी तक भी सोच सोच कर रोमांचित हैं. सुमन ने बताया कि उनकी छोटी बहन जोकि अभी M.A कर रही हैं वो भी जिंदगी में कुछ बनना चाह्ती है और इस अभियान ने एक रास्ता दिखाया  है.

वही  जांडली कलां, गर्ल्ज स्कूल के मुख्य अध्यापक श्री कृष्ण कुमार जी ने बताया कि  सुमन इसी स्कूल की पढी हुई है और उन्हें  सुमन पर गर्व है.  अभियान के बारे में उन्होनें  बताया कि  बहुत अच्छा अभियान है और ये अभियान जारी रहना चाहिए क्योंकि जो गांव वाले बेटी को पढाने से कतराते थे आज वो ही बेटी को पढाने के लिए आगे आ रहे हैं.

girl- monica gupta

(अन्य गांव में ध्वजारोहण करती हरियाणा की बेटी)

ये अभियान प्रदेश भर में ही नही बल्कि देश भर में चले और  निरंतर चले और  बेटिया पढती रहें … !!!

सुमन रानी और हरियाणा की उन सभी लडकियों को जिन्होनें तिरंगा लहराया उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं !!!

मोनिका गुप्ता

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14. संसद की मानसून सत्र

monica gupta

संसद की मानसून सत्र

21 जुलाई से आरम्भ हुए सत्र में कोई हलचल नही हुई कोई काम नही हुआ पर आखिरी दिन आखिर मीडिया को टीआरपी बढाने वाला मुद्दा मिला. और मुद्दा था राहुल गांधी के काथ में वो कागज जिसे पढ कर वो संसद में बोले थे.

कल मीडिया को राहुल बाबा के हाथ में एक कागज क्या मिल गया … हल्ला मच गया और तो और हंसी इस बात पर भी आई कि मीडिया कहता कि वो अंग्रेजी में सोचते हैं !!! अरे !! भला ये क्या बात हुई … सभी अपने अपने अंदाज में सोचते हैं … इसमें क्या बडी बात है अब क्या सोच भी अंग्रेजी, या हिंदी या इटली मे होगी … क्षमा करें वैसे मैं आपको बता दू  कि कार्टूनिस्ट भी अपने ही अंदाज में सोचते हैं समझ लीजिए हम बैठे हैं और कुछ सोच रहे हैं … हम भी रेखाओं में सोचते हैं कभी बादल कभी पहाड … समय मिला नही कि रेखाओ से कल्पना के घोडे दौडाने लगते हैं तो बात का बतगंड काहे बनाना … इस सत्र को इस प्रकार से सोचा … क्या समझ आया … !!!

वैसे क्या आप बता सकते हैं कि ये क्या बना है ???  :)

संसद की मानसून सत्र , लडाई झगडा , भैंस , पानी … लो गई भैंस पानी में …

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15. क्षमा याचना

15 august monkey by monica gupta

क्षमा याचना

आज भारत देश आजादी की 68वीं सालगिरह धूमधाम से मना रहा है पर , किंतु , परंतु  यह भी सत्य है कि आज  हालातों और राजनेताओं को मद्देनजर रखते हुए 15 अगस्त यानि स्वतंत्रता दिवस की feel नही आ रही … कारण बिल्कुल साफ है जिस तरह से नेता आपस में झगड रहे हैं… देश के हित की बजाय अपना हित सोच रहे हैं अपशब्द बोल रहे हैं ऐसे में कैसे मना पाएगें स्वतंत्रता दिवस … ये खुशी भीतर से आती है और यकीनन यह खुशी पिछ्ले साल बहुत थी… मोदी जी का भाषण जब लाल किले की प्राचीर से सुना था तब लगा था कि देश के , आम आदमी के अच्छे दिन आ गए हैं पर जैसे जैसे समय बीतता रहा …. बस बीतता रहा … बस बीतता रहा … और वो बीते समय की बात हो गई…

लाल किले की प्राचीर से मोदी जी के भाषण देने के बाद जनता से, उनके भाषण पर राय पूछ्ने पर लगभग सभी के ये विचार थे कि भाषण फीका रहा जो बात पिछ्ले साल की थी वो इस साल नही थी.पिछ्ले साल तो रोंगटे खडे हो गए थे पर आज कुछ  महसूस नही हुआ. एनडीटीवी पर रवीश जी ने तो  कहा कि रोंगटे तो मोदी जी के खडे हो गए  होंगें कि क्या हो गया.. !!

सोशल नेट वर्क पर जैसे फेसबुक, टवीटर या गूगल आदि पर नेट या टीवी चैनल पर झंडे  फहरा  रहे है…  तिरंगें के साथ फोटो पर ले रहे हैं पर भीतरी खुशी नजर नही आ रही … जनता बेहद परेशान है इसलिए तो मेरी पात्रा को कहना पड रहा है कि बेशक, आज का दिन हर भारतवासी के लिए गर्व की बात है पर आज जिस दौर से हम गुजर रहे है(जिससे आप सब भी परिचित हैं) उससे मन विचलित है इसलिए बस आज तो बापू गांधी से क्षमा ही मांगनी है कि हम आपकी उम्मीदों पर खरे नही उतर रहे … अगले साल यानि 2016 तक सुधार हो इसी आशा के साथ शुभकामनाएं !!!

एक उदारण और जरुर देना चाहूगी कि एक वक्त था जब बापू का अर्थ महात्मा गांधी होता था पर आज के समय में अगर हम नेट पर बापू सर्च करेंगें तो बापू आसाराम ही दिखाई देंगें, उनकी वीडियों,  उनसे ही जुडी ताजा खबरे … सच, 68 साल में बहुत कुछ बदल गया है …

नेता बाल की खाल निकाल रहे हैं … अंट शंट बोल रहे हैं. ना कुछ सार्थक हो रहा है  और न ही इसके प्रयास किए जा रहे हैं.जनता आज बहुत बातो से आजादी चाह्ती है जैसे बड बोले नेताओं से, भ्रष्टाचार से, महंगाई से, उस कानून से जो कछुआ चाल चल रहा है , गरीबी से, आतंक वाद से,  अत्याचार से, बिके और आखं पर कपडा बांधे कानून से…  नेताओ के गंदे विचारों से और भी ना जाने कितनी बातों से हमें आजादी चाहिए.

फिलहाल से गांधी जी के तीन बंदर जो हमें बुरा न देखने, बुरा न सुनने और बुरा न बोलने का संदेश देते हैं हाथ जोड कर उन्ही से माफी मांगते हैं क्षमा याचना करते हैं कि हम आपकी उम्मीदों पर खरे नही उतरे…

 

Navbharat Times

इस स्वतंत्रता दिवस आप किससे आजादी चाहते हैं? कहें अपने ‘दिल की बात….’ See more…

 क्षमा याचना  इस विश्वास के साथ भी  कि शायद 2016 में हमें ये न करना पडे और हमारा देश खुशहाल हो … स्माईल लानी न पडे खुद ब खुद आ जाए !!!

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16. सत्यम शिवम सुंदरम

सत्यम शिवम सुंदरम

lord shiv by monica gupta

 

सत्यम शिवम सुंदरम …वातावरण शिवमय हो रहा है. कही कावडियों की रौनक तो कही मंदिर मे लम्बी भक्तों की कतारे शिवलिंग पर दूध चढाने के लिए आतुर… बाबा भोले नाथ की बहुत बातें ऐसी हैं जो जाने अंजाने हमें शिक्षा दे जाती हैं….  हम सभी जानते हैं कि शिव जी ने विष का पान किया था. ना तो उसे निगला था और ना ही उगला था. बस गले में ही रखा था, ठीक वैसे ही, हमें भी, घर की विष रुपी परेशानी को ना तो बाहर किसी को बताए और ना ही उसे दिल से लगा कर बैठे. कलह हर घर में होती है, लेकिन अगर वो उसे बाहर के लोगो को बताएगे तो बात बढ़ जाएगी और अगर गले से नीचे उतार लेगे तो खुद तबियत खराब करके बैठ जाएगे.

शिव जी के माथे पर जैसे चादँ शांति का प्रतीक है, हमें भी वैसे ही अपना दिमाग शांत रखना चाहिए. उनके मस्तक से निकली गंगा भी इसी बात की प्रतीक है कि गुस्से के पल को भी शांत होकर बिताएं. घर परिवार मे छोटे-मोटे फैसले लेते हुए मन को शांत रखें अगर खुद ही बात-बात पर चिल्लाकर बोलेगें तो घर मे झगडा ज्यादा बढ़ जाएगी. बात यह भी नही है गुस्सा करना ही नही चाहिए. करे पर वो भी एक मर्यादा मे रह कर ही करें अन्याय, अनुशासन हीनता आदि के लिए अगर गुस्सा किया जाए तो मगंलकारी ही होता है और इसके साथ साथ परिवार के सदस्यो के इस बात का भय होना भी जरुरी होना चाहिए कि अगर वो उचित आचरण नही करेगे तो बडे बुजुर्ग नाराज हो सकते हैं.वैसे भी तुलसी दास जी ने कहा है कि “भय बिन होहि ना प्रीति”… इसलिए परिवार का मुखिया अगर कठोरता और कोमलता दोनो दिखाता है तो कोई गलत बात नही हैं. कठोरता और कोमलता का सही मात्रा मे होना बहुत जरुरी है.

एक अन्य उदाहरण है कि जैसे शिव जी का वाहन बैल, उमा का वाहन सिहं, शिव का कंठ हार सर्प, गणेश जी का मूषक और कार्तिक का वाहन मोर है पर शिव की महिमा देखिए आपस मे पुश्तैनी दुश्मनी होते हुए भी  सर्प, बैल, सिंह, मूषक, मोर सभी एकता और प्रेम मे बंधे हुए है .हमे भी इसी दिशा मे प्रयास करते रहना चाहिए कि किस प्रकार सभी को प्यार से और ज्यादा खुशहाल रह सकता है.

दहेज ना लेकर उन्होने जो कुरीतियो का दमन किया. ये सबक हमे  हमेशा ध्यान मे रखना चाहिए. गणेश और कार्तिक दो बच्चों का शिव पार्वती का छोटा सा परिवार था. उसी का अनुकरण हम लोगो को भी करना चाहिए.

ओम नम: शिवाय !!!

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17. मेरी कहानी मेरी आवाज

story of monica gupta

मेरी कहानी  मेरी आवाज

http://radioplaybackindia.blogspot.in/2015/08/sahyog-by-monica-gupta.html इस लिंक को क्लिक करके सुनिए मेरी लिखी कहानी मेरी ही आवाज में और जरुर बताईगा कि कैसी लगी

मेरी कहानी मेरी आवाज

 

 कहानी – सहयोग 

 सुबह से ही दिनेश बहुत परेशान सा घूम रहा था.  असल मे, कुछ देर पहले ,उसके बचपन के दोस्त रवि की पत्नी का फोन आया था वो धबराई हुई आवाज मे बोल रही थी  कि भाई साहब, हमे आपकी मदद चाहिए. वैसे तो दिनेश और रवि बहुत ही अच्छे दोस्त  थे पर  बच्चो की पढाई और अन्य परिवारिक  कारणों  दिनेश की आर्थिक दशा ठीक नही चल रही थी. दिनेश ने उस समय ये कह कर फोन रख दिया कि आप चिंता मत करो मै हूं ना. पर फोन पर बात करने के बाद  वो  ये सोच कर परेशान हो गया  कि  आर्थिक तंगी के चलते वो उनकी मदद कैसे कर पाएगा.

 बात को लगभग एक महीना बीत गया.इस बीच, दोनो की कोई बात नही हुई. दिनेश ने भी कोई बात करने की कोशिश नही की.पर जब भी कोई  फोन आता तो दिनेश का दिल धडकने लगता कि कही ये उसके मित्र का फोन ना हो. लगभग  दो महीने बाद रवि की पत्नी का फोन आया. वो बहुत खुश थी और बार बार उसका धन्यवाद दे रही थी इस पर दिनेश हैरान होकर बोला धन्यवाद किस बात का …  उसने तो कुछ …. इस पर वो बीच में ही बात काट कर बोली …. भाईसाहब,  आपका यह कहना कि चिंता मत करो, मै हू ना, बहुत सहारा दे गया और इन्होने जो नशा छोडने का प्रयास किया था वो  भी सफल रहा. आपकी शुभकामनाओ से यह बिल्कुल ठीक हो गए हैं. ऐसे  मुश्किल समय मे आपकी तरफ से मानसिक सहयोग मिलना ही हमारे लिए बहुत बडी बात थी. हम बहुत जल्द आपसे मिलने आएगे कह कर उसने फोन रख दिया. और दिनेश… एक बार फिर…. कुछ सोचने पर मजबूर हो गया…. !!!

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18. ऐसे ही हैं हम

cartoon run

ऐसे ही हैं हम ….भ्रष्टाचार, महंगाई, खराब सडके, लच्चर नियम और इन सब मे ऊंचे चिल्लाते लाऊडस्पीकर कि… आ गया, आ गया आपका भाई… बेटा.. हमे वोट दीजिए और आपके शहर की काया पलट जाएगी. मैने निश्चय कर लिया था  कि आने दो घर पर वोट मांगने… मैं भी देखती हूं…. !!! तभी बाहर शोर की आवाज तेज हो गई. बाहर मीठी मुस्कान लिए हाथ जोडे उम्मीदवार खडे हुए थे. मैने नमस्कार का जवाब दिया और तुनक कर बोली   कि क्या सोच कर वोट मांगने आए हो. क्यू और किसलिए वोट दें आपको. हालात देखें हैं क्या आपने? मेरा वोट नोटा को जाएगा. कोई किसी लायक नही है. बस अपना मतलब निकालने मे लगे हुए आम जनता को बुदू बना रहे हैं और वो बन रही है.

वहां एकदम सन्नाटा छा गया. मैने धाड से दरवाजा बंद किया और भीतर आ गई. तभी बहुत जोर से डोर बेल हुई. मैं अचानक चौक कर उठी. अरे ये सब सपना था. झांक कर  बाहर देखा तो पार्टी के उम्मीदवार हाथ जोडे मोहक मुस्कान लिए खडे थे. मैं तुरंत उठी और बाहर आई. उनका अभिवादन स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए कहा आप चिंता न करें . अजी… हमारा वोट आपके लिए ही है. आईए चाय पीकर जाईए. उनके मना करने पर मैं बोली हमारे लायक कोई काम हो तो जरुर बताईगा और उनकी पार्टी का स्टीकर बहुत खुशी से अपने घर के आगे चिपकवा दिया और दो तीन लेकर भी रख लिए ताकि मैं भी पार्टी मे योगदान दे सकूं स्टीकरों को बांट सकूं… जागो मतदाता जागो !!!

( ऐसे ही है हम तभी देश भी ऐसे ही चल रहा है)

 

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19. एक बच्ची का पत्र

 

 

एक बच्ची का पत्र

नमस्ते सरकार अंकल,

आप कैसे हैं? आशा है ठीक ही होंगें. सरकार अंकल वैसे मुझे चिट्ठी लिखने का जरा भी अनुभव नही हैं क्योकि आजकल ईमेल का जमाना है पर मेरे मम्मी-पापा कहते हैं कि अगर सरकार तक कोई बात पहुंचानी हो तो पत्र ही लिखा जाता है… इसीलिए मै अपनी बात पत्र के माध्यम से ही कह रही हूं.

सरकार अंकल, वैसे मैं अभी छ्ठी स्कूल में ही पढ़ रही हूं पर खुद को लगता नहीं कि मै छोटी हूं क्योंकि घर पर और बाहर इतनी टेंशन है कि मुझे लगता है कि मै समय से पहले ही बहुत बडी हो गई हूं. मेरा बचपन कहीं खो सा गया है. खैर,यह बात बताने के लिए मैने आपको पत्र नही लिखा है. बल्कि मै आपसे कुछ निवेदन करना चाह्ती हूं.

सरकार जी, सच पूछो तो मुझे काला धन, स्विस बैंक या लोकपाल के बारे मे जरा-सी भी जानकारी नही है और न ही मेरे दिमाग में ये सारी बातें आ पाएंगी. मै तो बस आपसे जरा सी विनती करना चाहती हूं कि हर रोज होने वाले बंद और हडतालों को रुकवा दीजिए. मेरे पापा की छोटी-सी दुकान है जिससे हम तीन भाई-बहनो का खर्चा चलता है. कभी किसी तो कभी किसी वजह से दुकान बंद हो जाती है तो उस दिन हमें फाका करना पडता है और सभी को खाली पेट ही सोना पडता है.

दूसरी बात यह है कि  बिजली ही नही होती. बहुत कट लगते हैं  और कभी गलती से आ भी जाए तो वोल्टेज इतना कम होता है कि लगता ही नही कि बिजली है. फोन करो तो कोई फोन नही उठाता या फिर नम्बर व्यस्त आता रहता है. बरसात हो तो सुनने को मिलता है कि पीछे से गई है, पता नही कब आएगी.

अगली बात मेरे स्कूल से है. हैरानी है कि हमारे टीचरो को अपने विषय का ज्ञान ही नही है. अगर कोई बच्चा खडा होकर कोई प्रश्न पूछ ले तो वो  नाराज हो जाते हैं और कक्षा से बाहर खडे होने की सजा दे देते हैं. वैसे तो टीचर हैं ही कम, ऊपर से सरकार के काम से अक्सर डयूटी लग जाती है तो पढाई की वैसे ही छुट्टी हो जाती है. आप इस बात  पर भी  जरुर ध्यान देना कि स्कूल मे कृपा करके मिडडे मील बंद हो जाए. हर रोज गंदा खाने से पेट खराब तथा दर्द अब सहन नही होता. इसके  इलाज के लिए रुपया अलग से खर्च करना पडता है, इस करके हम घर से खाना लाकर खुश है.

सरकार अंकल, अगली बात यह कि कचहरी के फैसले जल्दी करवा दिया करो. मेरे दादा जी की जमीन का केस पिछ्ले 24 साल से चल रहा है. दादा जी भी अब नही रहे और पिताजी को बार-बार तारीख पर जाना पडता है जिस करके बहुत तनाव हो जाता है हमारे घर पर. शायद एक लाख मिलना है पर अभी तक जैसाकि  मैने मम्मी पापा को बाते करते सुना है लाख से ज्यादा तो खर्चा अभी तक हो ही गया है.

सरकार अंकल, मुझे अपना भारत देश बहुत अच्छा लगता है. कल ही मैने निबंध प्रतियोगिता ने ‘मेरा भारत महान’ विषय पर लेख लिखा था जिसके लिए मुझे सम्मानित भी किया गया था. मै भी देश के लिए बहुत कुछ करना चाह्ती हू पर इतनी परेशानियां और दुख मेरी हिम्मत को तोड रहे हैं.

अंकल, कोई गलती हो तो क्षमा करना. मैने पहले भी लिखा था कि मुझे ज्यादा समझ नही है, ज्ञान भी नही है पर, असल मे, अपने परिवार और दोस्तो का दुख देखा नही जा रहा था इसलिए आपको पत्र लिखना पड़ा. नही तो मै आपको तकलीफ नही देती. मै जानती हू कि आपके कंधों पर कितना बोझ है.

पता नही कि  मेरा ये पत्र आपको कब तक  मिलेगा. पर जब भी मिलेगा मुझे आशा ही नही पूरा विश्वास है कि आप मुझ  छोटी-सी बच्ची की बात का जवाब जरूर देग़ें.

आपके घर पर सब कैसे हैं? सबको हमारी तरफ से नमस्कार बोलना.

पत्र के जवाब इंतजार मे

आपकी नन्ही  देशवासी

 

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20. वो तीस दिन -बाल उपन्यास

monica gupta woh tees din

वो तीस दिन -बाल उपन्यास  ( मोनिका गुप्ता)

क्या ??? आपने अभी तक नही पढी … पढ लीजिए बहुत ही अच्छा बाल उपन्यास है वो तीस दिन … फिर न कहना कि हमें तो पता ही नही था नही तो जरुर पढते … अब तो online भी ले सकते हैं नेशनल बुक ट्रस्ट की साईट पर जाकर ..

 

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21. मैंगो फैस्टिवल

mango

मैंगो फैस्टिवल यानि आम का त्योहार.

कुछ दिन पहले अखबार मे  पढा कि मैंगो फेस्टिवल चल रहा है. पढते-पढते अचानक हंसी आ गई. बुरा ना मानिएगा पर सच  मे, आजकल , आम आदमी का ही त्योहार चल रहा है और उस त्योहार का नाम है ‘महंगाई’. कोई हाल है क्या. अमीर और अमीर होता जा रहा है और गरीब और ज्यादा गरीब पर असली बैंड बज रहा है आम आदमी का. जिसकी हालत किसी भी तरह आम की विभिन्न किस्मो से अछूती नही है.

पैरी, मलिका और सुंदरी बनने के दिन तो अब हवा हुए … महंगाई ने  तो जनाब  उसका अचार,चटनी और मुरब्बा बना कर रखा हुआ है. किसी मिक्सी मे गोल गोल घूमते शेक की तरह उसकी हालत हो गई है जिसे हर नेता या पैसे वाला बहुत तबियत से स्वाद ले लेकर  निचोड रहा है. बेचारे का रंग  सफेदा की तरह् सफेद पड गया है मानो किसी ने सारा का सारा खून निचोड लिया हो. और अब तो ये हालत हो गई है कि वो सीधा चलना ही भूल गया है और लंगडा आम की तरह लगड़ा कर चल रहा है. अम्बी जैसी खटास जीवन मे भर गई है और शरीर पीला इस कदर हो गया है मानो जन्म से ही पीलिया का मरीज हो …

उफ ये आम आदमी !! ना जाने कितने सब्जबाग तोता परी सपने देखे होगे इसने भी. पर जिस तरह दशहरे मे रावण धू-धू करके चल जाता है ठीक वैसे ही उसके सपने भी दशहरी हो चले है और सब …!!! बेचारे ही हालत आम पापड जैसी हो चली है … जिसे काला नमक डाल कर बडा स्वाद लेकर खाया  जाता है

इससे भी बढ कर  विडम्बना क्या होगी कि अब आम ही नही खा पा रहा आम आदमी. तो हुआ ना ये  आम आदमी का  त्योहार.  इस त्योहार के  लिए ना तो आपको कही टिकट लेना पडेगा और ना कही जाना पडेगा. नजर घुमा कर तो देखिए जनाब,  मैंगो मैन फेस्टिवल ही फेस्टिवल दिखाई दे जाएगा जिसमे आम आदमी फुस होता ओह क्षमा करें हाफुस होता दिखाई देगा …

कैसा लगा ये लेख … जरुर बताईगा :)

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22. लाल खून काला कारोबार

लाल खून काला कारोबार

रक्तदान महादान है और हम सभी को रक्तदान करना चाहिए.. रक्तदान करना और रक्तदान के लिए प्रेरित करना अच्छा लगता है . ये एक सामाजिक कार्य है जिसमे युवा वर्ग की भागीदारी आवश्यक है…

क्योकि मैं खुद भी रक्तदान से जुडी हुई हूं इसलिए रक्तदान से जुडी हर खबर हमेशा मुझे आकर्षित करती है पर आज  जब इसी संदर्भ में खबर पढी और यकीन मानिए  खबर जरा भी अच्छी नही लगी … आप भी सोच रहे होंगें कि ऐसा क्या हुआ … खबर अच्छी ना लगने का सबसे बडा कारण था कि रक्तदाता  नाबालिग थे यानि 18 साल से कम उम्र के थे… जी सही पढा … नाबालिग …  और रक्तदान करते  थे या करवाया जाता था जिसके उन्हे पैसे मिलते … यानि रक्त बेचते थे … 500 रुपये उन्हें मिलते और 500 दलाल को … खबर ने सन्न कर करके रख दिया ना  आपको भी … मैं भी ऐसे ही सन्न हो गई जब टीवी पर खबर देखी और फिर नेट पर  पढी .

खबर लखनऊ की है … चौक का कोहली ब्लड बैंक, नाबालिग बच्चों को पैसे का लालच देकर उनसे खून लेने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में शुक्रवार को सील कर दिया गया.  बच्चों की गरीबी का फायदा दलालों ने उठाया.  43 नाबालिग बच्चों को प्रोफेशनल डोनर बना दिया गया. इतना ही नही इनमें महिलाए यानि लडकियां  भी शामिल है …  पकडे जाने पर  इन लड़कों ने पुलिस को बताया कि चार दलाल उनसे खून देने का काम कराते थे.  इतना ही नही  ये दलाल  गरीब परिवारों के 43 युवकों का हर माह कई बार खून निकलवाते थे.

सुनकर दिल धक से रह गया मानो खून ही जम गया हो … मैं बहुत लोगों को जानती हूं जो रक्तदान के क्षेत्र मे अभूतपूर्व काम कर रहे हैं और जनता को रक्तदान के प्रति प्रेरित भी कर रहे हैं .. ऐसी खबरों से अभियान को कितना बडा धक्का लगता है क्योकि  लोगों को प्रेरित करना वैसे भी बहुत मुश्किल होता है और तो और रक्तदान के प्रति लोगों में भ्रांतिया भी बहुत तरह की होती है ऐसे में ऐसी खबर का आना बेहद सन्न करने वाला है …

 

43 boys in the business of blood removed – Navbharat Times

लखनऊ पुराने शहर में 43 लड़कों को चंद रुपये का लालच देकर खून के कारोबार में उतार दिया गया। बड़ी बात यह है कि इनमें ज्यादातर नाबालिग हैं। कोहली ब्लड बैंक में खून देने वाले तीन नाबालिगों ने पुलिस पूछताछ में यह बात कबूली है। इन लड़कों ने पुलिस को बताया कि चार दलाल उनसे खून देने का काम कराते थे। ये दलाल गरीब परिवारों के 43 युवकों का हर माह कई बार खून निकलवाते थे। चौक इंस्पेक्टर आईपी सिंह ने बताया कि कोहली ब्लड बैंक में खून देने वाले किशोरों ने कबूला है कि उनको गजनी, राहुल, अमर और एक अन्य शख्स पैसों का लालच देकर ब्लड बैंक ले जाता था। इन चारों आरोपितों ने 43 लड़कों को प्रोफेशनल डोनर बना दिया। पुलिस को तीनों किशोरों ने सभी 43 लड़को के नाम भी बताए हैं। इनमें ज्यादातर किशोर हैं, जिनको खून के धंधे में शामिल किया गया है। पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर उनकी तलाश शुरू कर दी है। महिलाएं भी प्रफेशनल डोनर कोहली में खून बेचने वाले किशोरों ने कई महिलाओं के नाम भी बताए हैं, जो प्रफेशनल डोनर हैं। इनको 700 रुपये प्रति यूनिट पर दिया जाता था। ये महिलाएं वजीरगंज की बताई जा रही हैं। पुलिस इन महिलाओं से भी पूछताछ कर पूरे रैकेट तक पहुंचने की तैयारी में है। आप यहां दें सूचना Read more…

Taking blood from children, Kohli Blood Bank seal – Navbharat Times

लखनऊ चौक का कोहली ब्लड बैंक, नाबालिग बच्चों को पैसे का लालच देकर उनसे खून लेने और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ के आरोप में शुक्रवार को सील कर दिया गया। कुछ स्थानीय युवकों से मिली जानकारी के आधार पर सीएमओ की टीम ने छापेमारी के बाद यह कार्रवाई की। ब्लड बैंक की कारस्तानी का खुलासा होते ही स्थानीय लोग भड़क गए और ब्लड बैंक में तोड़-फोड़ शुरू कर दी। तनाव बढ़ने पर पुलिस के अलावा पैरा मिलिट्री फोर्स को भी मौके पर बुलाना पड़ा। दलाल दिलवाते थे पैसा चौक में मोबाइल शॉप में काम करने वाले अनंत अग्रवाल और शिवा साहू ने बताया कि उनकी दुकान पर उनके मोहल्ले के कुछ नाबालिग बच्चे शुक्रवार को ब्लड देने के बदले रुपये लेने की बात कर रहे थे। उन्होंने बच्चों से पूछताछ की तो पता चला कि कोहली ब्लड बैंक में खून देने के एवज में 500 रुपये दिए जाते हैं। शिवा के अनुसार, बच्चों ने दर्जी पार्क में रहने वाले पांच लोगों के नाम बताए जो उन्हें ब्लड बैंक ले जाते हैं।

 नियमत: 18 साल से कम उम्र का शख्स रक्तदान नहीं कर सकता। तीन अरेस्ट पुलिस ने मौके से कोहली ब्लड बैंक के कार्यप्रभारी वीके भटनागर, लैब टेक्नीशियन विजय प्रकाश और कर्मचारी संतराम यादव को अरेस्ट किया है। इन पर धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज रखने, कागजों से छेड़छाड़ करने और ड्रग एंड कास्मेटिक एक्ट की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।  Read more…

ऐसे दलाल और ऐसे ब्लड बैंक समाज मे काल धब्बा है जिन्हे कडी से कडी सजा दी जानी चाहिए…

लाल खून काला कारोबार

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23. Show your support for Some Girls Are by Courtney Summers

Anyone who regularly reads my blog knows that I enjoy the books of Courtney Summers. You'll also know that I do not like it when books get banned. I get very upset. So when I learned that Courtney's novel Some Girls Are was pulled from West Ashley High School's recommended reading list - and note that it was a recommendation, not a requirement, for their summer reading program - I was very upset, on behalf of the author who wrote it, the teachers who recommended it, and the students who deserve the chance/choice to read it and discuss it. Some Girls Are is a powerful book about telling the truth, not being shamed into silence.

In an effort to get the book to the students who want to read it, Kelly Jensen from the book blog Stacked is collecting copies of Some Girls Are to send to the town's library, where people may check it out for free. In Kelly's own words:

Let's do something together with our collective reader, intellectual freedom loving power, shall we?
Can we get this book into the hands of kids of West Ashley who want it?

If you'd like to donate a copy of the book, please visit Stacked to learn more. Kelly will be collecting the books until August 17th, then she'll ship them out.
Here's more information from Kelly:

Some Girls Are is currently $1.99 on Book Outlet, and What Goes Around, which is a bind-up of Summers's Cracked Up To Be and Some Girls Are is $1. Right now, there are over 200 copies between the two of these books on Book Outlet. Let's make them all disappear.

Can you spring $1 or $2 or $10 to get this book to these kids? It seems like a cheap way to tell these teenagers that their voices -- their lives -- really do matter.

Go Kelly.
Go Andria.
Go Courtney.
Go readers.
Let freedom read.

Related posts at Bildungsroman:
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The Bermudez Triangle by Maureen Johnson: Too Cool for School?
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24. हिल स्टेशन यात्रा -एक अनुभव

 

हिल स्टेशन यात्रा -एक अनुभव

एक हिला देने वाला अनुभव … जी हां मैने भी की हिल स्टेशन यात्रा… क्या ??? आपको विश्वास नही हो रहा ??? क्या मैं पूछ सकती हूं कि विश्वास न करने की क्या वजह है ??? फोटो ??? ओह … हां !!! ये तो सच है कि  कोई फोटो नही डाली पर इसका मतलब यह भी नही की हम गए ही नही… !!! असल में, कैमरा तो था पर तस्वीरे ली ही नही.. कैमरा बैग में ही पडा रहा.

बात ये हुई कि वैसे तो हम हिल स्टेशन पर जाते ही रहते हैं… अरे हां सच में … जाते रहते हैं … अब आपने बात सुननी है या मैं न बताऊं … ठीक है … तो मैं कह रहे थी कि वैसे तो हम हिल स्टेशन पर जाते ही रहते हैं  पर अब की बार जो अनुभव हुआ वो कभी नही भूलेगा. हुआ ये कि हर बार की तरह इस बार हम अपनी कार में नही गए उसके बजाय बडी गाडी यानि कैब  कर ली ताकि सपरिवार जाए और खूब मस्ती करें.कार बुक करवा दी और वो समय पर पहुच भी गई. हमने सारा सामान कार मे भरा और चल पडे मस्ती भरे सफर में पर अब ये बनने वाला था अंग्रेंजी वाला सफर … Suffer…

कार का ड्राईवर बहुत अच्छा था . सुबह सवेरे उसने चलने से पहले कार मे लगी भगवान की फोटो को प्रणाम किया और धूप बत्ती की. फिर भक्ति वाले गाने भी चला दिए … सुबह सवेरे एक दम खाली सडक थी और वो 30 की स्पीड से कार चला रहा था. रिक्शा भी आराम से हमे ओवरटेक कर सकती थी. खैर, जब उससे थोडी तेज चलाने को कहा गया तो वो बोला कि वो अभी रास्तों के लिए नया है इसलिए हमने भी कुछ नही कहा … कार आराम आराम से चलती रही … पर जो लोग ड्राईव करते हैं यकीनन वो इतनी धीमी गति शायद सहन नही कर सकते.. खैर जैसे तैसे आगे बढते रहे और जब बातो बातों में उसने ये बताया कि उसका ये पहला अनुभव है पहली बार कार लेकर निकला है तो हमने सोचा  बस … अब तो गए काम से !!!  क्योकि उसकी सबसे बडी वजह ये थी कि कई बार लगता था उसमें आत्मविश्वास ही नही है तो कई बार लगता उसमे भरपूर आत्मविश्वास है इतना आत्मविश्वास है कि हमारा ही डममगा रहा था क्योकिं खाली सडक पर बिल्कुल  धीमी गति  से चलाता और जब किसी वाहन को ओवरटेक करता तो इतनी तेज की लगता अब ठुकी कार…. तब ठुकी !!!

सांस रोक कर और  हम आखे फाड फाड कर उसकी ड्राईविंग  देखते रहे और बोलते रहे अब धीरे करो अब तेज करो …  एक बार तो उसे झपकी भी आने को हुई तो हमने कहा कि कार रोक कर आराम कर लो तो भी उसने मना कर दिया. जब हमने उससे ये कहा कि कार हम चला लेंगें तो भी उसने इंकार कर दिया कि अगर कुछ हो गया तो … कौन भरेगा…!!! मेरे मन में आया कि कह दूं कि और हमे कुछ हो गया तो उसकी भरपाई कौन करेगा !!! पर चुप रही… !!!

आगे जाकर सामने से धुमावदार रास्ता शुरु हो रहा था.. वो हैरान रह गया कि ये कैसी सडक है … हमने कहा कि कैसी क्या ??? पहाडी रास्ता है … इस पर वो बोला अरे ऐसा कैसा होता है … यानि की वो कभी पहाड पर गया ही नही था उसने तो पहाड ही पहली बार देखा था…  हे भगवान !!! ..हमारी सिट्टी पिट्टी गुम की होगा क्या … एक बार दुबारा ट्राई किया कि हम को कार दे दो हम चलाते है इस पर फिर उसने मना कर दिया कि फिर वो सीखेगा कैसे….. मानो सारा सीखना यही से ट्राई करना है … सांस रोकर कार मे बैठे रहे… वही एक साईड का शीशा बंद ही नही हो रहा था … मौसम की ठंड और भीतर की गरमी जबरदस्त तूफान पैदा कर रही थी… जिस तरह से उसकी ड्राईविंग थी….  मैं…  मैं तो यहां तक सोचने लगी थी कि कल अखबार की हैड लाईन क्या होगी … कार  50 फुट  गहरे खड्डे में गिरी. परिवार के सभी लोग …. !!! रास्ते के साईन बोर्ड मुंह चिढा रहे थे कि आपकी यात्रा सुखद हो और घर पर आपका कोई इंतजार कर रहा है…

जैसे तैसे करके हिल स्टेशन पहुंचे और कार से उतर कर जान में जान आई … और तुरंत  होटल के कमरे मे ही धुस गए. हिम्मत ही नही थी कि सैर करने जाए .. वही वापसी की भी चिंता थी क्योकि पहाडों से उतरते वक्त और  ज्यादा सावधान रहने की जरुरत होती है … उसे बहुत मनाया कि कार हम लोग चला लेंगें पर उसने मना कर दिया. एक बार मन किया हम दूसरी टैक्सी कर लेते हैं पर बुकिंग इतनी ज्यादा थी कि अगले हफ्ते ही  टैक्सी मिल पाती.

खैर,  दिन बीता और  हम कही धूमने नही निकले… मन ही नही कर रहा था. और हमारा वापिस जाने का समय आ गया.  बस भगवान से यही प्रार्थना थी कि सकुशल पंहुचा दे…  धडकते दिल से हम कार मे बैठे और एक दूसरे के हाथ कस कर पकड रखे थे. कोई देवी या देवता का स्मरण करना नही छोडा … अम्मा ने तो व्रत भी बोल दिए और जीजी ने प्रसाद … !!!रास्ते में बारिश भी थी और धुंध भी … बस उतरते  ही जा रहे थे उतरते ही जा रहे थे…  सांस में सांस तब आई जब हम घर के आगे खडे थे. फटाफट कार से सामान निकाला . जान बची सो लाखो पाए …

फिर उसका हिसाब किताब करने बाहर आए तो फिर धूप बत्ती कर रहा था बोला भगवान बहुत ग्रेट है उसने बहुत रक्षा की … मैने वाकई मे , कार मे लगी भगवान जी की फोटो को प्रणाम किया कि रक्षा इन्होने ही की वरना अपना प्रोग्राम तो पक्का ही था उपर जाने का …

पर जाते जाते मैं उसे इतना जरुर बोली कि थोडी प्रैक्टिस और करो … खासकर किसी कार को ओवर टेक करते समय स्पीड का ध्यान रखना जरुरी होता है वो बोला कि जिसने उसे सिखाई वो भी यही बोलता था इसलिए उसने उससे सीखना ही छोड दिया था … मेरे पास अब कहने को कुछ नही बचा और तुरंत घर दौड गई…

अब तो कसम ही खा ली कभी टैक्सी नही करेगें अपनी कार से ही जाएगें कम से कम एंजाय तो कर सकेंगें …इस हिल स्टेशन की यात्रा ने तो पूरा ही हिला कर रख दिया …  वैसे आपको एक बात बताऊ कि तस्वीर एक दो तो ली थी पर शक्ल इतनी धबराई हुई और चेहरे से मुस्कान नदारद थी इसलिए डाली ही नही कि कही आप लोग डर ही न जाए !!!

ऐसा अनुभव आप केसाथ कभी न हो … शुभकामनाएं

 

 

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25. कार्टून प्लेकार्ड

cartoon on sansad by monica gupta

प्लेकार्ड

21 जुलाई यानि जब से मानसून सत्र आरम्भ हुआ है तब से कोई कार्यवाही ही नही हुई … जिस कारण अनेकों बिल अटके पडे  हैं पर सांसदों को कोई चिंता नही बस अपना कभी काला कपडा बांध कर विरोध करते है तो कभी प्लेकार्ड दिखा कर …

| Zee News Hindi

नई दिल्ली : मानसून सत्र के अंतिम दिनों में भी संसद में गतिरोध खत्म होने के आसार नहीं हैं क्योंकि कांग्रेस ने रविवार को ललित मोदी और व्यापम मुद्दों पर अपने रुख में किसी ढिलाई के कोई संकेत नहीं दिए और ‘अपशब्दों की राजनीति’ के लिए भाजपा की आलोचना की।

सत्तारूढ़ पार्टी ने भी कांग्रेस पर यह कहते हुए अपने हमले की धार तेज कर दी कि इसने सत्र के दौरान ‘बाधाकारी और विध्वंसक’ भूमिका निभाई है क्योंकि यह ‘राजनीतिक रूप से दिवालिया’ हो गई है। See more…

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